शुक्रवार, 22 मई 2009

"यादव साम्राज्य" का भव्य विशेषांक

"यादव साम्राज्य" पत्रिका का विशेषांक एक लम्बे समय बाद बड़ी सज-धज के साथ प्रकाशित हुआ है। कानपुर से भंवर सिंह यादव के संपादन में प्रकाशित इस 232 पृष्ठीय पत्रिका में यादव वंश की उत्पत्ति, गीता के 18 अध्यायों का सार, यादव विभूतियों के नाम डाक-टिकट, राव तुलाराम, 1857 के यादव सेनानी के साथ-साथ यादव समाज के महापुरुषों, मुख्यमंत्रियों और तमाम राजनेताओं के बारे में सारगर्भित जानकारी दी गई है. राजनीति-प्रशासन-समाज सेवा से जुडी यादव विभूतियों पर उनके जीवन प्रवाह और योगदान को समेटे लेख इस पत्रिका को आकर्षक बनाते हैं. यादव सांसदों के नाम-पते भी पत्रिका में शामिल किये गए हैं.विभिन्न युद्धों में यादवों की शूर वीरता की चर्चा के साथ अहीर रेजिमेंट के गठन का प्रस्ताव भी किया गया है. यदुवंशी रजवाड़ों और उनके दुर्गों पर शामिल रिपोर्ट यादवी समाज के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताती है. वर्तमान में चर्चित यादव यथा- बाबा रामदेव, लालू यादव, मुलायम सिंह यादव, शरद यादव, नेपाल के राष्ट्रपति राम बरन यादव इत्यादि पर विस्तृत आलेख पढ़कर किसी भी यादव का सीना गर्व से चौड़ा हो सकता है. तमाम यादव योगियों के बारे में जानकारी अपने आप में अनूठी है. कोई भी समाज युवा शक्ति को नजर अंदाज नहीं कर सकता. युवा प्रशासक-साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव पर पत्रिका में विस्तृत जानकारी समाहित है.गौरतलब है कि कृष्ण कुमार यादव इस पत्रिका के संरक्षक भी हैं. युवा लेखिका आकांक्षा यादव पर प्रकाशित आलेख भी अल्पायु में उनकी योग्यता को ही प्रदर्शित करता है. इसके अलावा तमाम चर्चित-अचर्चित यादवों के बारे में सम्यक जानकारी को जोड़कर संपादक ने यदुवंशियों में भाईचारे का ही प्रवाह किया है. पत्रिका का मुख-पृष्ठ बेहद आकर्षक है एवं इस पर महाभारत के युद्ध में रथ दौड़ते भगवान कृष्ण का सुन्दर चित्र अंकित है. मात्र 150 रुपये की राशि में इतना ज्ञान का भंडार दुर्लभ ही है. पत्रिका में कमी खलती है तो बस विश्लेषणात्मक लेखों की। पत्रिका में यदुवंश के अतीत का गान है पर वर्तमान और भविष्य के बारे में बहुत कुछ नहीं व्यक्त किया गया है। यह वार्षिकांक एक ऐसे समय में आया है जब राजनीति में यादव कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, ऐसे में पत्रिका यदि उन कारणों का भी विश्लेषण करती जिनके चलते यह नाजुक स्थिति उत्पन्न हुई है तो इसे बेहतर रूप में देखा जा सकता। फिलहाल नौजवान संपादक भंवर सिंह यादव का यह प्रयास प्रशंसनीय है एवं यदुवंश से जुड़ी तमाम अनूठी बातों को पत्रिका सामने लाती है।
संपर्क: भंवर सिंह यादव, 130/61, बगाही, बाबा कुटी चौराहा, किदवई नगर, कानपुर-208011

4 टिप्‍पणियां:

KK Yadav ने कहा…

निश्चितत: "यादव साम्राज्य" पत्रिका को यदि यादव समाज का इनसाइक्लोपीडिया कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.
...पत्रिका पहली नजर में ही आकृष्ट करती है.

KK Yadav ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

....दुर्भाग्य से इन पत्रिकाओं में अतीत का ही महिमा गान ज्यादा होता है. आपने समीक्षा में इसे बखूबी उठाया भी है.

डाकिया बाबू ने कहा…

यह वार्षिकांक एक ऐसे समय में आया है जब राजनीति में यादव कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, ऐसे में पत्रिका यदि उन कारणों का भी विश्लेषण करती जिनके चलते यह नाजुक स्थिति उत्पन्न हुई है तो इसे बेहतर रूप में देखा जा सकता।.....सुन रहे हैं लालू और मुलायम जी??