शनिवार, 22 अगस्त 2009

विदेशी राजनीति में भी छाये यदुवंशी

भारत वर्ष में यादवों के राजनैतिक उत्कर्ष के तमाम उदाहरण मिलते हैं, पर अब विदेशों में भी तमाम उदाहरण मिलने लगे हैं। नेपाल की जनता ने अपने 240 वर्ष पुराने राजतंत्र को उखाड़कर लोकतांत्रिक पद्धति अपनाई और डा0 रामबरन यादव को अपना पहला राष्ट्रपति चुना. डा0 रामबरन यादव ने 1981 में मेडिकल कालेज कलकत्ता से एम0बी0बी0एस0 की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद 1985 में एम0डी0 (फिजीशियन) की डिग्री चंडीगढ़ से प्राप्त की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लगभग आठ साल तक चण्डीगढ़ में रहकर ही अपनी मैडिकल प्रैक्टिस की। यह भारत और विशेषकर यहां के यादवों के लिए गौरव का विषय है। इससे पूर्व विदेशों में त्रिनिडाड व टोबैगो के पूर्व प्रधानमंत्री श्री वासुदेव पांडे (उनके पूर्वज पानी पिलाते थे, अतः पानी पांडे कहलाने से पांडे सरनेम आया) और मारीशस के पूर्व प्रधानमंत्री अनिरूद्ध जगन्नाथ को भी यादव मूल का माना जाता है। नेपाल के उपप्रधानमंत्री रहे उपेन्द्र यादव और वहाँ संसद की डिप्टी स्पीकर चन्द्र लेखा यादव भी यादवों की ही वंशज हैं।

6 टिप्‍पणियां:

Bhanwar Singh ने कहा…

भारत वर्ष में यादवों के राजनैतिक उत्कर्ष के तमाम उदाहरण मिलते हैं, पर अब विदेशों में भी तमाम उदाहरण मिलने लगे हैं....यादव साम्राज्य का चहुँ-ओर विस्तार...जय हो !!

भंवर सिंह यादव
संपादक-यादव साम्राज्य
कानपुर.

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

नई व दिलचस्प जानकारी.

Ratnesh ने कहा…

Nice one.

आकांक्षा~Akanksha ने कहा…

Wakai apne achhe udaharan diye hain, kisi bhi jati-kaum ka vistar jab desh ki seemaon ko par kar jata hai to uska vishva vyapi vistar hone lagta hai.

आकांक्षा~Akanksha ने कहा…
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KK Yadav ने कहा…

यदुवंशी प्राचीन काल से ही बड़े उन्नत रहे हैं.आज देश-विदेश में यदुवंशी परचम फहरा रहे हैं, यह गर्व की बात है.