रविवार, 14 मार्च 2010

कृष्ण कुमार यादव को अक्षर शिल्पी सम्मान-2010

म0प्र0 के प्रतिष्ठित राजेश्वरी प्रकाशन, गुना ने युवा साहित्यकार एवं भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव को उनके विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु ’’अक्षर शिल्पी सम्मान-2010’’ से विभूषित किया है। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ श्री यादव की रचनायें देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं और इसके साथ ही आपकी अब तक कुल 5 पुस्तकें- अभिलाषा (काव्य संग्रह), अभिव्यक्तियों के बहाने (निबन्ध संग्रह), अनुभूतियां और विमर्श (निबन्ध संग्रह) और इण्डिया पोस्टः 150 ग्लोरियस ईयर्स, क्रान्ति यज्ञः 1857 से 1947 की गाथा प्रकाशित हो चुकी हैं। शोधार्थियों हेतु हाल ही में आपके जीवन पर एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर : कृष्ण कुमार यादव‘‘ भी प्रकाशित हुई है।

हाल ही में श्री कृष्ण कुमार यादव को भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’महात्मा ज्योतिबा फुले फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2009‘‘, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा काव्य शिरोमणि-2009 एवं महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान, साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी, प्रतापगढ द्वारा विवेकानंद सम्मान, महिमा प्रकाशन, दुर्ग-छत्तीसगढ द्वारा महिमा साहित्य भूषण सम्मान व आल इण्डिया नवोदय परिवार द्वारा भी अखिल भारतीय स्तर पर साहित्यिक योगदान हेतु सम्मानित किया गया है।

8 टिप्‍पणियां:

Ghanshyam ने कहा…

KK Ji ko badhai..yun hi yaduvansh ka nam roshan karte rahen.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई!

Rashmi Singh ने कहा…

प्रशासन व साहित्य का अद्भुत संगम. के.के. जी को हार्दिक बधाई.

raghav ने कहा…

बधाई ही बधाई.

Ratnesh ने कहा…

बेहतरीन उपलब्धियां. के.के. यादव जी को कोटिश : बधाई.

KK Yadava ने कहा…

धन्यवाद. आप सभी का स्नेह यूँ ही बना रहे.

ersymops ने कहा…

कृष्ण कुमार जी को इस शानदार सफ़र की बधाई. प्रशासन के साथ-साथ साहित्य का नाम भी रोशन करें.

raghav ने कहा…

"युग मानस" पर डॉ० डंडा लखनवी said...
"कलम की इबादत कलमकार की जय !
जो दिल में बसा है उसी प्यार की जय!!
जहाँ पर अदब का बसेरा रहेगा !
वहाँ पर न हरगिज अंधेरा रहेगा ॥
महकती रहे आपकी कीर्ति - नेकी।
रहें आप निर्भय, सुहृदय, विवेकी।
तरक्की करें और उत्थान होवे।
सदा आपका मान- सम्मान होवे ।"
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी