सोमवार, 6 सितंबर 2010

मृत्युभोज बंद कराने के लिए अलख जगा रही हैं सूरज कुमारी यादव

समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो रुढियों से परे नई नजीरें स्थापित करते हैं. यहाँ तक की इसमें उम्र भी बाधा नहीं आती. इसी कड़ी में इंदौर शहर की एक बुजुर्ग महिला ने मृत्युभोज बंद कराने के लिए सामाजिक जंग छेड़ रखी है। शुरुआत अपने पति रामदयाल यादव से की और उनके दिवंगत होने पर मृत्युभोज नहीं दिया। इसके बाद पिछले माह भाई जगतसिंह यादव के निधन होने पर भी इस कुप्रथा को नहीं होने दिया। शहर के साथ ही प्रदेश के करीब 50 गांवों में उन्होंने इसके खिलाफ अलख जगाया है।

ये जांबाज महिला हैं अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा (महिला) की अध्यक्ष 70 वर्षीय सूरजकुमारी यादव। उनके प्रयास से गुना, शिवपुरी, मुरैना जिलों में अधिकांश परिवारों में मृत्युभोज बंद हो गया है। जबलपुर, ग्वालियर में भी कुछ जगह सफलता मिली है। सागर जिले के ग्राम जलंधर में तो सभी समाज के लोगों ने मृत्युभोज बंद कराने की लिखित रजामंदी दी है।

श्रीमती यादव बताती हैं शहर में यादव समाज के 30 से ज्यादा परिवारों ने मृत्युभोज बंद करने का संकल्प लिया है। वे समाज के कार्यक्रमों में जाकर मृत्युभोज बंद कराने का प्रस्ताव रखकर उसे पारित कराते हैं। उन्होंने कहा परिजन के निधन पर चाहें तो कन्याओं और कर्मकांड कराने वाले पंडित को भोजन कराया जा सकता है। श्रीमती यादव का मानना है कि मृत्युभोज बंद करने वालों का शासन स्तर पर और समाज में सम्मान होना चाहिए।

करीब पांच साल पहले मेडिकल कॉलेज में देहदान की घोषणा कर चुकी श्रीमती यादव जनसहयोग से एक कोष भी बनाना चाहती हैं, जिससे जरूरतमंद महिलाओं की सहायता और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया जा सके।

इस उम्र में सूरजकुमारी यादव का यह जज्बा वाकई लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है !!

5 टिप्‍पणियां:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

प्रभु इन्हें सद्प्रयासों में सफलता दे.

KK Yadava ने कहा…

प्रेरक व्यक्तित्व....!!

Ratnesh Kr. Maurya ने कहा…

इस उम्र में यह जज्बा...वाकई दिलचस्प और प्रेरक.

Ratnesh Kr. Maurya ने कहा…

प्रभु इन्हें सद्प्रयासों में सफलता दे.

Unknown ने कहा…

इस सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म करने का प्रयास निरन्तर जारी रखना होगा। मेरे पिता भी मृत्युभोज के विरुद्ध थे।उनके मार्गदर्शन में मैं इस विषय को लेकर कार्य कर रही हूँ।
धन्यवाद