शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

न्याय के क्षेत्र में विश्व कीर्तिमान : न्यायमूर्ति रवीन्द्र सिंह

न्याय सिर्फ होता नहीं बल्कि दिखना भी चाहिए। इसके लिए जरूरी है न्यायिक प्रक्रिया की समझ, त्वरित निर्णय की क्षमता एवं संवेदनशीलता। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री रवीन्द्र सिंह ऐसी ही प्रतिभा के व्यक्तित्व हैं। आरंभ से ही मेधावी रहे श्री सिंह हमेशा चीजों को मानवीय पहलू से देखते हैं और उनके निर्णय वाकई मील का पत्थर होते हैं। तभी तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रवींद्र सिंह ने अपने निर्णयों के मामले में ख्याति ही नहीं अर्जित की बल्कि विश्व में कीर्तिमान भी स्थापित किया है। यहाँ तक कि उनकी इस उपलब्धि का गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी इसका उल्लेख है। न्यायमूर्ति सिंह ने तो लगभग 1 लाख मुकदमों का निस्तारण किया है पर जुलाई 2009 से जुलाई 2010 तक एक साल की अवधि में उन्होंने 29,395 मुकदमें निस्तारित किये हैं जो कि अपने आप में विश्व रिकार्ड है। इस उपलब्धि के लिए जहां तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जेएस रिबेरो ने उन्हें बधाई दी बल्कि उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज होने के लिए संस्तुति भी किया, जो कि अंतत: फलीभूत भी हुआ.

वर्ष 2005 में न्यायमूर्ति का पद सँभालने वाले रवींद्र सिंह का जन्म 2 जुलाई 1953 को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद में मेदेपुर गाँव में श्री संकट बिहारिया यादव के पुत्र रूप में हुआ. साधारण किसान परिवार में जन्मे न्यायमूर्ति यादव की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम मेदेपुर, जीआईसी मैनपुरी, एनडी कालेज शिकोहाबाद और उच्च शिक्षा इलाहाबाद में हुई।श्री सिंह 1978 में बार काउंसिल आॅफ उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता के तौर पर पंजीकृत हुए और 24 अगस्त 1994 से 1995 तक शासकीय अधिवक्ता रहे. बाद में उन्हें 19 सितंबर 2003 को अपर महाधिवक्ता तथा 24 सितंबर 2004 को एडिशनल जज के रूप में नियुक्ति मिली और 18 अगस्त 2005 को वह परमानेंट हो गये।

यदुवंश परिवार में जन्म लेकर न सिर्फ श्री रवींद्र सिंह ने देश के सबसे बड़े उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति का पद संभाला बल्कि न्यायिक क्षेत्र में ऐसा विशिष्ट कीर्तिमान स्थापित किया की आज भी दुनिया उनका लोहा मानती है. 'यदुकुल' की तरफ से न्यायमूर्ति रवींद्र सिंह को बधाइयाँ और आशा की जानी चाहिए कि वे इसी तरह समाज में प्रेरणा-स्रोत बने रहेंगें !!

4 टिप्‍पणियां:

RAJARAM RAKESH ने कहा…

YADUKUL KE BARE ME SOCHTA RAHTA HUN KI YADUKUL APNE AISE LOGO KO BHI DUND PANE ME SAPHAL HAI JISI AUR KOI DUNDH NAHI PATA HAI.SACHMUCH MAIN YADKUL TEAM KO HARDIK BADHAI DETA HUN

Akshita (Pakhi) ने कहा…

Did great Job...Congts. !!

Hitendra ने कहा…

radba

Hitendra ने कहा…

we feeling proud bye reading this post, and promise to be inspired