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रविवार, 27 अगस्त 2017

नन्ही ब्लॉगर अक्षिता यादव (पाखी) की पेंटिंग

राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित एवं नन्ही ब्लॉगर अक्षिता यादव (पाखी) की प्रतिष्ठित अंग्रेजी अख़बार दि टाइम्स ऑफ़ इण्डिया (जयपुर, राजस्थान) के किड्स जोन में प्रकाशित एक 'रेनबो' पेंटिंग। पाखी को बहुत-बहुत बधाई और स्नेहाशीष !!

मंगलवार, 24 मई 2016

मध्य प्रदेश बोर्ड की हाई स्कूल परीक्षा में दिव्या यादव ने किया टॉप

माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश द्वारा 16 मई, 2016 को घोषित कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम में गांव के किसान की बेटी दिव्या यादव ने 589 अंक पाकर प्रदेश की मैरिट सूची में पहला स्थान प्राप्त किया है। दिव्या यादव जबलपुर जिले की पाटन तहसील के तान्या कांवेंट स्कूल की छात्रा है। पाटन से पांच किमी दूर थाने गांव के किसान अरुण यादव की बेटी दिव्या ने संस्कृत विषय में 100 में से 100 अंक, गणित और विज्ञान में 99-99 अंक प्राप्त किए हैं। 
दिव्या यादव ने बताया कि उन्होंने एमपी टॉप रहने का टारगेट बनाकर पढ़ाई की थी। इसके लिए सुबह शाम मेहनत की । वह आगे चलकर कलेक्टर बनना चाहती हैं। दिव्या ने कोई कोचिंग नहीं की बल्कि अपना मुकाम घर में पढ़ाई करके प्राप्त किया है। इसमें उनके स्कूल टीचर और माता-पिता का सहयोग रहता था। दिव्या का कहना है कि सभी छात्र अपना टारगेट तय कर यदि पढ़ाई करें तो निश्चित ही सफलता मिलती है। दिव्या की इस सफलता से उसके माता-पिता और शिक्षक काफी खुश हैं।

Girl student from rural area, Divya Yadav outshined in the state merit list of class X examination, 2016, by securing 589 marks out of 600. Madhya Pradesh Board of Secondary Education (MPBSE), declared the result of High School, 2016, on Monday.

Divya Yadav, student of Tanya Convent Higher Secondary School, Patan, brought laurel to the name of State, district and school by securing first position with 98.16 percent in Madhya Pradesh state merit list in the Class X, Madhya Pradesh Board of Secondary Education, 2016.

On this achievement, Divya Yadav said “This is the biggest moment for me and for my parents and school too. All this possible with the support of my parents and school teachers who were always present for me, always providing their guidance whenever I needed. My father is a farmer and mother is housewife.

I always wanted that my parents should feel proud of me and today, I have fulfilled their dreams. I always gave 6 to 7 hours for the studies, and I had never taken any kind of coaching. My teachers were always there for me, for clearing my doubts. I thank all my teachers and Principal. I have secured 100 marks in Sanskrit, 99 in Mathematics and Science. I want to take Maths Science group and after XII, I want to serve the nation and I will have to work hard for preparation of IAS examination.
Ram Shiv Murti Yadav @ http://yadukul.blogspot.in/
राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल 

शनिवार, 30 मई 2015

नन्ही ब्लॉगर अक्षिता (पाखी) को "परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान"

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने दिया।  वाकई आज बेटियाँ अपनी मौजूदगी से पूरी दुनिया में अपना नाम रोशन कर रही हैं।  नन्ही ब्लॉगर आठ वर्षीया अक्षिता यादव (पाखी) को  25 मई 2015 को श्री लंका में आयोजित हुए  पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन  में "परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान" से सम्मानित किया गया । इस सम्मान के अंतर्गत अक्षिता को श्रीलंका के वरिष्ठ नाट्यकर्मी डॉन सोमरथ्न विथाना एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री  श्री नकुल दूबे द्वारा अंगवस्त्र, सम्मान पत्र, प्रतीक चिन्ह और 5,000/- की धनराशि सम्मान स्वरुप  प्रदान की गई।  जोधपुर  में कक्षा 3  की छात्रा अक्षिता के पिता श्री कृष्ण कुमार यादव राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर  के निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ हैं और मम्मी श्रीमती आकांक्षा एक काॅलेज में प्रवक्ता रही हैं। दोनों ही जन चर्चित साहित्यकार व सक्रिय ब्लाॅगर भी हैं। उक्त जानकारी सम्मेलन के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने दी। 


अक्षिता भारत की सबसे कम उम्र (4 साल 8 माह ) की राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता भी है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ’कला’ और ’ब्लाॅगिंग’ के लिए तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार, श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा 14 नवम्बर, 2011 को ’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2011’ प्राप्त कर अक्षिता ने इसे सबसे कम उम्र में पाने का कीर्तिमान बनाया, वहीं  ब्लाॅगिंग के लिए भी राजकीय स्तर पर प्रथम सम्मान-पुरस्कार पाने का गौरव प्राप्त किया। यही नहीं, इससे पूर्व अक्षिता को नई दिल्ली में अप्रैल, 2011 में हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल ”निशंक” द्वारा ‘श्रेष्ठ नन्हीे ब्लाॅगर‘ के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न मंचों पर फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी, सांसद डिम्पल यादव, दबंग फेम म्यूजिक-कम्पोजर वाजिद खान, नेपाल सरकार के  मंत्री अर्जुन नरसिंह केसी, साहित्यकार अशोक चक्रधर, डॉ. रामदरश मिश्र, प्रभाकर श्रोत्रिय इत्यादि भी अक्षिता को सम्मानित कर चुके हैं। 


अक्षिता के बनाये चित्रों और गतिविधियों को ब्लाॅग के माध्यम से  लोगों के सामने प्रस्तुत करने हेतु उसके मम्मी-पापा ने  24 जून 2009 को “पाखी की दुनिया” (http://www.pakhi-akshita.blogspot.in/) नाम से अक्षिता का ब्लाॅग बनाया। अक्षिता का यह ब्लॉग उसकी सोच और कल्पना का मूर्त रूप है। अक्षिता की सोच को ब्लॉग के माध्यम से उकेरने की जिम्मेदारी खुद अक्षिता के माता-पिता ने ली है। वह उसके द्वारा कहे गये शब्दों, उसकी कल्पना व सोच को शब्दों का रूप देकर इस ब्लॉग को मेंटेन करते हैं। देखते ही देखते करीब एक लाख से अधिक हिन्दी ब्लाॅगों में इस ब्लाॅग की रेटिंग बढ़ती गई और आज इस ब्लॉग पर 415  से भी ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं और 275 से ज्यादा लोग इसका अनुसरण करते हैं। इस ब्लॉग पर तमाम प्रतिक्रियाएं  प्राप्त हुईं और 100 से ज्यादा देशों में इसे देखा-पढ़ा जाता है। अक्षिता और उसका ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया‘ फेसबुक (https://www.facebook.com/AkshitaaSingh) पर भी उपलब्ध है, जहाँ लगभग 1200 लोग इसे अनुसरण करते हैं।

बुधवार, 20 मई 2015

नन्ही ब्लॉगर अक्षिता (पाखी) को मिलेगा कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान

बेटियाँ अपनी मौजूदगी से पूरी दुनिया में अपना नाम रोशन कर रही हैं। नन्ही ब्लॉगर अक्षिता यादव (पाखी) को श्री लंका में आयोजित होने वाले पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन (23 से 27 मई 2015) में "परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान" के लिए चयनित किया गया है। इस सम्मान के अंतर्गत अक्षिता को अंगवस्त्र, सम्मान पत्र, प्रतीक चिन्ह और 5,000/- की धनराशि प्रदान की जाएगी।  कक्षा 3  की छात्रा अक्षिता के पिता श्री कृष्ण कुमार यादव राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर  के निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ हैं और मम्मी श्रीमती आकांक्षा एक काॅलेज में प्रवक्ता रही हैं। दोनों ही जन चर्चित साहित्यकार व सक्रिय ब्लाॅगर भी हैं। उक्त जानकारी सम्मेलन के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने दी। 

अक्षिता भारत की सबसे कम उम्र (4 साल 8 माह ) की राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता भी है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ’कला’ और ’ब्लाॅगिंग’ के लिए तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार, श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा 14 नवम्बर, 2011 को ’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2011’ प्राप्त कर अक्षिता ने इसे सबसे कम उम्र में पाने का कीर्तिमान बनाया, वहीं  ब्लाॅगिंग के लिए भी राजकीय स्तर पर प्रथम सम्मान-पुरस्कार पाने का गौरव प्राप्त किया। यही नहीं, इससे पूर्व अक्षिता को नई दिल्ली में अप्रैल, 2011 में हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल ”निशंक” द्वारा ‘श्रेष्ठ नन्हीे ब्लाॅगर‘ के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न मंचों पर फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी, सांसद डिम्पल यादव, दबंग फेम म्यूजिक-कम्पोजर वाजिद खान, नेपाल सरकार के  मंत्री अर्जुन नरसिंह केसी, साहित्यकार अशोक चक्रधर, डॉ. रामदरश मिश्र, प्रभाकर श्रोत्रिय इत्यादि भी अक्षिता को सम्मानित कर चुके हैं। 

 अक्षिता के बनाये चित्रों और गतिविधियों को ब्लाॅग के माध्यम से  लोगों के सामने प्रस्तुत करने हेतु उसके मम्मी-पापा ने  24 जून 2009 को “पाखी की दुनिया” (http://www.pakhi-akshita.blogspot.in/) नाम से अक्षिता का ब्लाॅग बनाया। अक्षिता का यह ब्लॉग उसकी सोच और कल्पना का मूर्त रूप है। अक्षिता की सोच को ब्लॉग के माध्यम से उकेरने की जिम्मेदारी खुद अक्षिता के माता-पिता ने ली है। वह उसके द्वारा कहे गये शब्दों, उसकी कल्पना व सोच को शब्दों का रूप देकर इस ब्लॉग को मेंटेन करते हैं। देखते ही देखते करीब एक लाख से अधिक हिन्दी ब्लाॅगों में इस ब्लाॅग की रेटिंग बढ़ती गई और आज इस ब्लॉग पर 415  से भी ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं और 275 से ज्यादा लोग इसका अनुसरण करते हैं। इस ब्लॉग पर तमाम प्रतिक्रियाएं  प्राप्त हुईं और 100 से ज्यादा देशों में इसे देखा-पढ़ा जाता है। अक्षिता और उसका ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया‘ फेसबुक (https://www.facebook.com/AkshitaaSingh) पर भी उपलब्ध है, जहाँ लगभग 1200 लोग इसे अनुसरण करते हैं। 

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

नन्ही ब्लाॅगर अक्षिता (पाखी) की बड़ी कामयाबी


ककहरा सीखने की उम्र में नन्ही अक्षिता (पाखी) ने अपनी सृजनात्मक क्षमता के बल पर मात्र सात साल में बड़े रिकार्ड कायम किए हैं। ‘पाखी की दुनिया’ ब्लाग का संचालन 24 जून 2009 से कर रही अक्षिता (पाखी) को सबसे कम उम्र की ब्लागर के तौर पर भारत सरकार की ओर से 2012 में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ मिल चुका है। उसे मात्र चार वर्ष आठ माह की अवस्था में आर्ट और ब्लागिंग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसको 66 हजार से अधिक लोगों ने पढ़ा।

भारत सरकार की ओर से ब्लागिंंग के क्षेत्र में सम्मानित होने वाली अक्षिता पहली बाल प्रतिभा है। इससे पहले भी अक्षिता को 2011 में अंतरराष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में ‘श्रेष्ठ नन्ही ब्लागर’ के सम्मान से नवाजा जा चुका है। सितंबर 2013 में काठमांडू (नेपाल) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में अक्षिता ने एकमात्र ब्लागर के तौर पर भाग लेकर सम्मान पाया।

ड्राइंग और कविता पहली पसंद

25 मार्च 2007 को कानपुर में जन्मी अक्षिता वर्तमान में गर्ल्स हाई स्कूल इलाहाबाद में दूसरी कक्षा की छात्रा हैं। पिता कृष्ण कुमार यादव इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं पद पर तैनात होने के साथ चर्चित ब्लागर हैं। माता आकांक्षा यादव भी साहित्य लेखन के साथ ब्लागर हैं। अक्षिता ने बताया कि उसे ड्राइंग बनाना, कविता कहना और लिखना पसंद है।

( अक्षिता (पाखी) के बारे में अमर उजाला (इलाहाबाद, 25 सितंबर 2014) में प्रकाशित रिपोर्ताज़।)

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

नन्ही ब्लागर अक्षिता (पाखी) यादव को शबाना आज़मी व डिम्पल यादव ने किया सम्मानित


हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड- 2013   के लिए सबसे कम उम्र में नन्ही ब्लागर अक्षिता (पाखी) को नामिनेट किया गया था। 6 अप्रैल, 2013 को लखनऊ में ताज होटल में एक भव्य कार्यक्रम में अक्षिता (पाखी) को मशहूर अभिनेत्री शबाना आज़मी, सांसद डिम्पल यादव व संगीत कम्पोजर वाजिद खान ने अप्रिसियेशन सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।


अक्षिता का ब्लॉग है- http://www.pakhi-akshita.blogspot.in/   (पाखी की दुनिया) 


(In Picture : Akshitaa (Pakhi) receiving Certification of Appreciation for Hindustan Times Women Contest-2013, by Mrs. Shabana Azmi, Film Actor and Social Activist, Mrs. Dimple Yadav, MP and wife of Chief Minister UP, Mr. Wajid Khan, Music Composer/singer, in a programme on 6th April, 2013 at Vivanta by Taj, Lucknow) 

मंगलवार, 13 नवंबर 2012

अरुण कुमार यादव बने 'डूडल फार गूगल' कांटेस्ट के विजेता



प्रतिभा उम्र की मोहताज़ नहीं होती, बशर्ते उसे उचित परिवेश मिले। गूगल इंडिया ने चंडीगढ़ केंद्रीय विद्यालय के 9वीं क्लास के स्‍टूडेंट अरुण कुमार यादव को डुडल 4 गुगल कंपीटीशन-2012 का विजेता घोषित किया है। कंपीटीशन में विनिंग डुडल टाइटल इंडिया - प्रिज्म ऑफ मल्‍टीपलसिटी को 14 नवंबर चिल्ड्रन डे पर गुगल इंडिया के होम पेज पर लाइव डिस्प्ले किया जाएगा। ये डुडल क्लासमेट कंपनी की ओर से स्पेशल कलर पैक और बच्चें की ड्राइंग बुक्स पर भी चित्रित किया जाएगा। कंपीटीशन में फाइनल में पहुंचने वाले सभी प्रतिभागियों को सैमसंग टैबलेट और गुगल गुड डी बैग्स दिए जाएंगे।

इस साल के कंपीटीशन का थीम एकता में अनेकता था जिसमें दो लाख के करीब एंट्रीज मिली थी। कंपनी ने गुगल लोगो पर 5 से 16 साल के बच्‍चों को डुडलिंग के जरिए अपनी सृजन क्षमता दिखाने के लिए आमंत्रित किया था। प्रतियोगिता को तीन अलग -अलग कैटेगरीज में बांटा गया था। पहली कैटेगरी पहली से तीसरी क्लास , दूसरी में चौथी से छठी क्लास के और तीसरी कैटेगरी में 7वीं से 10वीं कक्षा के बच्‍चों को शामिल किया गया था। यादव के अलावा पहली से तीसरी क्लास की कैटेगरी में श्री अरबिंदो स्‍कूल ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन की सौभाग्‍य कालिया शामिल है। जबकि गुडग़ांव की अदिति तिवारी को चौथी से छठी क्लास वाली कैटेगरी में अंतिम तेरह में शामिल किया गया है। 'यदुकुल' की तरफ से अरुण कुमार यादव को हार्दिक बधाइयाँ !!
 
-राम शिव मूर्ति यादव : यदुकुल ब्लॉग (www.yadukul.blogspot.com)
 
 
Arun Kumar Yadav, a  student of Chandigarh, has been declared the winner of the Doodle4Google contest, which received 2 lakh submissions from 60 Indian cities.
More than 100 million people across India will have a look at his doodle on the search engine's homepage on Children's Day (November 14)
 
      
The doodle, titled 'A Prism of Multiplicity', shows a soccer player, a kathakali dancer, gold jewellery, a peacock, a farmer and flowers.
 
Arun Kumar Yadav is a Class-9 student of Kendriya Vidyalaya, Sector 31. The winning entry was announced at a picnic-cum-felicitation ceremony at the Rail Museum in New Delhi on Monday.
 
The entries were adjudged by a two-member jury comprising cartoonist Ajit Ninan and actor Boman Irani. The theme for this year's competition was 'Unity in Diversity'.
The Doodle4Google competition was instituted four years ago to encourage children to take up creative work, said Rajan Anandan, vice-president and managing director, Google India.
 
"We are also promoting art awareness through Google. The search engine has tied up with 41 countries under the Google Art Project to bring the best global art to more than 2 billion internet users," Anandan said.
 
"You can visit the best museums in London and Paris with your computer without moving out of your home," Anandan said. He added that Google was also working on a history and culture project.
 
 
(Picture : Actor Boman Irani (right), Google India MD Rajan Anandan (L) with national winner of Doodle 4G contest 2012, Arun Kumar Yadav during the announcement of winners of finals of the contest, in New Delhi on Monday.)

-Ram Shiv Murti Yadav @ www.yadukul.blogspot.com

        



 

रविवार, 25 मार्च 2012

नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) यादव को जन्मदिन पर बधाई

आज हिंदी की नन्हीं ब्लागर अक्षिता का जन्म-दिन है. ब्लागिंग जगत में अक्षिता अब किसी परिचय का मोहताज नहीं रही, आखिर ब्लागिंग के लिए उसे भारत सरकार द्वारा सर्वप्रथम सरकारी सम्मान से नवाजा जा चुका है, वहीँ भारत में सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पाने का श्रेय भी अक्षिता के खाते में दर्ज है. चर्चित बाल विज्ञानं पत्रिका चकमक ने फरवरी-२०१२ अंक में अक्षिता का सुन्दर सा शिशु-गीत भी प्रकाशित किया है तो आकाशवाणी पोर्टब्लेयर से उसका साक्षात्कार भी भी प्रसारित हो चुका है. ऐसी ही तमाम उपलब्धियों से सुवासित इस नन्हीं सी परी का आज (25 मार्च) जन्म-दिन है.


अक्षिता को जन्म-दिन पर ढेरों बधाइयाँ, प्यार और आशीर्वाद.
तुम जियो हजारों साल, साल के दिन हों पचास हजार !!

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नाम-अक्षिता (पाखी)
जन्म- 25 मार्च, 2007 (कानपुर)
मूल निवास - तहबरपुर, आजमगढ़ (यू.पी.)
मम्मी-पापा - श्रीमती आकांक्षा श्री कृष्ण कुमार यादव
अध्ययनरत - के. जी.-II,
रुचियाँ- ड्राइंग, डांसिंग, प्लेयिंग.

प्रकाशन- इंटरनेट पर ब्लागोत्सव-2010, बाल-दुनिया, नन्हा-मन, सरस पायस, ताऊजी डाट काम, युवा-मन इत्यादि एवं चकमक, टाबर टोली, अनंता, सांवली इत्यादि पत्र-पत्रिकाओं में ड्राइंग/रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रकाशन.

प्रसारण- आकाशवाणी पोर्टब्लेयर से ‘बाल-जगत’ कार्यक्रम में प्रसारण.

ब्लॉग :‘पाखी की दुनिया’ का 24 जून, 2009 को आरंभ. इसमें अक्षिता (पाखी) की ड्राइंग, क्रिएटिविटी, फोटो, परिवार और स्कूल की बातें, घूमना-फिरना, बाल-गीत सहित बहुत कुछ शामिल है. 82 से ज्यादा देशों में अब तक देखे/पढ़े जाने वाली ‘पाखी की दुनिया’ का 200 से ज्यादा लोग अनुसरण करते हैं. 235 से ज्यादा प्रविष्टियों से सुसज्जित इस ब्लॉग को 36,500 से ज्यादा लोगों ने पढ़ा/देखा है. दिल्ली से प्रकाशित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान‘ के अनुसार-‘अक्षिता की उम्र तो बेहद कम है, लेकिन हिन्दी ब्लागिंग में वो एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी है। अक्षिता का ब्लाग बेहद पापुलर है और फिलहाल हिन्दी के टाॅप 100 ब्लॉगों में से एक है।'

विशेष -राजस्थान के वरिष्ठ बाल-साहित्यकार दीन दयाल शर्मा द्वारा अपनी पुस्तक ‘चूं-चूं’ के कवर-पेज पर अक्षिता (पाखी) की फोटो का अंकन. दीन दयाल शर्मा, रावेन्द्र कुमार ‘रवि’, डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’, एस. आर. भारती, डा. दुर्गाचरण मिश्र, द्वारा अक्षिता (पाखी) पर केन्द्रित बाल-गीतों/कविता की रचना.

सम्मान- ब्लागोत्सव -2010 में प्रकाशित रचनाओं की श्रेष्ठता के आधार पर “वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही ब्लागर ” के रूप में सम्मानित. हिंदी साहित्य निकेतन, परिकल्पना डॉट कॉम और नुक्कड़ डॉट कॉम की त्रिवेणी द्वारा हिंदी भवन, नई दिल्ली में 30 अप्रैल, 2011 को आयोजित अन्तराष्ट्रीय ब्लाॅगर्स सम्मलेन में श्रेष्ठ नन्हीं ब्लाॅगर हेतु उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डा0 रमेश पोखरियाल ”निशंक” द्वारा ”हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान-2010” अवार्ड.

बाल दिवस, 14 नवम्बर, 2011 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में महिला और बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ द्वारा राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2011 से पुरस्कृत किया. अक्षिता इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभा है. यही नहीं यह प्रथम अवसर था, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया गया.

पत्र-पत्रिकाओं में चर्चा-दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, शुक्रवार, टाबर टोली, नेशनल एक्सप्रेस, नवोदित स्वर, बाल साहित्य समीक्षा, बुलंद इण्डिया, शुभ्र ज्योत्स्ना, सांवली, सत्य चक्र, इसमासो, हिंद क्रांति, दि मारल, अयोध्या संवाद, अंडमान-निकोबार द्वीप समाचार, The Indian Express, The Echo of India, The Daily Telegrams, Andaman Sheekha, Andaman Express, Aspect इत्यादि तमाम पत्र-पत्रिकाओं में अक्षिता और ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया’ की चर्चा.

अंतर्जाल पर चर्चा- हिंदी मीडिया.इन, स्वतंत्र आवाज़.काम, परिकल्पना, स्वर्गविभा, क्रिएटिव मंच-Creative Manch, बचपन, सरस पायस, बाल-दुनिया, बचपन, शब्द-साहित्य, रैन बसेरा, यदुकुल, Journalist Today, Akhtar Khan Akela इत्यादि तमाम वेब-पत्रिकाओं और ब्लॉगों पर चर्चा.

संपर्क - पुत्री- श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवा, इलाहाबाद परिक्षेत्र, इलाहाबाद-211001

ई-मेल- akshita_06@rediffmail.com

ब्लॉग- http://www.pakhi-akshita.blogspot.com/ (पाखी की दुनिया)

रविवार, 22 जनवरी 2012

आज़मगढ़ के ओम प्रकाश यादव को मिलेगा वीरता का संजय चोपड़ा अवार्ड

चार सितंबर 2010 का वह भयावह दिन.. आजमगढ़ जनपद में रास्ते में वैन में लगी गैस किट में शॉर्ट सर्किट की वजह से शोला बनी स्कूली वैन में बच्चे चीख रहे थे। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या करें। चालक बच्चों को बचाने की बजाय गेट खोलकर भाग गया। इसी बीच आग ने पूरी वैन को चपेट में ले लिया। इन्हीं बच्चों के बीच वाहन में फंसे कक्षा 7 के छात्र ओमप्रकाश यादव ने जान बचाकर भागने की बजाय साहस का परिचय दिया और आठ बच्चों को सकुशल बाहर निकाला और ऐसा करने के दौरान वह 70 प्रतिशत तक जल गए थे। तीन माह तक वह अस्पताल में जीवन और मौत से संघर्ष कर रहा था। इस दौरान उसकी पढ़ाई भी बाधित हो गयी। खास बात यह हैं कि उसके एक हाथ की प्लास्टिक सर्जरी की भी जरुरत है। वहीं उसके शरीर के घाव अभी तक नहीं भरे हैं. अब उसे इस वीरता के लिए गणतंत्र दिवस प्रधानमंत्री द्वारा संजय चोपड़ा अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। ओमप्रकाश यादव को जब बताया गया कि उसे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलने का मौका मिलेगा, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दूसरों की जान बचाने के लिए दाहिना हाथ और चेहरा झुलसा लेने वाले ओम प्रकाश का कहना है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान इलाज के लिए कहेगा। हादसे के डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह जख्मी अंगों की प्लास्टिक सर्जरी करा पाए। ओम प्रकाश यादव ने कहा, "मैं काफी गर्व का अनुभव करता हूं क्योंकि मैंने अपने स्कूल के साथियों का जीवन बचाया। मैं प्रधानमंत्री के हाथों राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने को लेकर काफी खुश हूं। मेरा संदेश है कि लोगों को एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए।"

ओमप्रकाश यादव मूलत: आजमगढ़ के बिलरियागंज क्षेत्र के बगवार गांव के निवासी हैं. उनके पिता लालबहादुर एक साधारण किसान हैं। परिवार में तीन बहनें हैं। उनका कहना है कि जिस समय यह घटना हुई उस वक्त तो उनको कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि हे भगवान अब क्या होगा। आज जब उनका बेटा सकुशल उनके साथ है तो काफी खुशी है। अब खुशी इस बात की और है कि उनके पुत्र के साहस को सरकार ने समझा और वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया। ओमप्रकाश की मां संध्या देवी ने कहा कि साहस का सम्मान तो होना ही चाहिए। गाँव के प्रधान अली अख्तर उर्फ मोती जिन्होंने घटना के समय अपने सहयोगियों के साथ गंभीर रुप से झुलसे बच्चों का अपने वाहन से जिला अस्पताल में भर्ती कराया उनका कहना है कि सच्चे मायने में ओमप्रकाश बहादुर है। इसकी जितनी भी तारीफ की जाय कम है।
प्रस्तुति- राम शिव मूर्ति यादव : यदुकुल

बुधवार, 9 नवंबर 2011

नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) यादव 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' हेतु चयनित


प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. तभी तो पाँच वर्षीया नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को वर्ष 2011 हेतु राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Child Award) के लिए चयनित किया गया है. सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय डाक सेवा के निदेशक और चर्चित लेखक, साहित्यकार, व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं लेखिका व ब्लागर आकांक्षा यादव की सुपुत्री अक्षिता को यह पुरस्कार 'कला और ब्लागिंग' (Excellence in the Field of Art and Blogging) के क्षेत्र में शानदार उपलब्धि के लिए बाल दिवस, 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीर्थ जी द्वारा प्रदान किया जायेगा. इसके तहत अक्षिता को 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र दिया जायेगा.

यह प्रथम अवसर होगा, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया जायेगा. अक्षिता का ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) हिंदी के चर्चित ब्लॉग में से है. फ़िलहाल अक्षिता पोर्टब्लेयर में कारमेल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में के. जी.- प्रथम की छात्रा हैं और उनके इस ब्लॉग का सञ्चालन उनके माता-पिता द्वारा किया जाता है, पर इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनता है.

नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को इस गौरवमयी उपलब्धि पर अनेकोंनेक शुभकामनायें और बधाइयाँ !!


शुक्रवार, 10 जून 2011

शाबाश ! शालिनी यादव


बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (Bihar School Examination Board) (BSEB) द्वारा 25 जून, 2011 को घोषित 10वीं के परीक्षा परिणाम में पटना जिला के खगौल स्थित घनश्याम बालिका उच्च विद्यालय की छात्रा शालिनी यादव ने 460 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया. खगौल के शिक्षक राम श्रंगार यादव व पुष्पा यादव की इकलौती बेटी शालिनी यादव मूलत:ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखती है. शालिनी ने कहा-मुङो उम्मीद नहीं थी कि मैं टॉपर बनूंगी. उसने अपनी सफलता का श्रेय मां-पिता व शिक्षकों को दिया. कहा-मैं प्रतिदिन सात-आठ घंटे पढ़ाई करती थी. मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं व गरीबों की सेवा करना चाहती हूं.

उसकी सफलता पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि राज्य में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और सरकार प्रतिभाओं को उभरने और निखरने में हर संभव सहयोग देगी।नीतीश कुमार ने शालिनी यादव के पटना के फुलवारी शरीफ स्थित आवास पर जाकर उसे पंद्रह हजार रुपये का चेक देने के साथ ही सम्मान स्वरूप एक लैपटॉप भेंट किया। उन्होंने शालिनी को उसकी शानदार सफलता के लिए बधाई देते हुए आगे की पढ़ाई भी पूरे मन से करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता अंतिम नहीं है और लक्ष्य काफी दूर है और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निरंतर संघर्षशील रहना पड़ता है।

सोमवार, 2 मई 2011

अक्षिता यादव को उत्तरांचल के मुख्यमंत्री द्वारा श्रेष्ठ नन्हीं ब्लागर अवार्ड


हिंदी साहित्‍य निकेतन, परिकल्‍पना डॉट कॉम और नुक्‍कड़ डॉट कॉम की त्रिवेणी द्वारा हिंदी भवन, नई दिल्ली में 30 अप्रैल, 2011 को आयोजित भव्य अन्तराष्ट्रीय ब्लागर्स सम्मलेन में अक्षिता यादव (पाखी) को 'बेस्ट बेबी ब्लागर अवार्ड' का ख़िताब दिया गया. यह पुरस्कार उत्तरांचल के मुख्यमंत्री श्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' जी द्वारा चर्चित व्यंग्यकार अशोक चक्रधर, वरिष्‍ठ साहित्‍यकार डॉ. रामदरश मिश्र, प्रभाकर श्रोत्रिय जैसे गणमान्य साहित्यकारों की गौरवमयी उपस्थिति में दिया गया.
गौरतलब है कि इस अवसर पर हिन्दी ब्लॉगिंग के उत्‍थान में अविस्मरणीय योगदान हेतु 51 हिंदी ब्लॉगरों को ''हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान-2010'' से सम्मानित किया गया, जिसके अंतर्गत स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, पुस्तकें और एक निश्चित धनराशि भी दी गई. इस सूची में सर्वप्रथम नाम अक्षिता का था, जिसे श्रेष्ट नन्हीं ब्लागर का ''हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान-2010'' दिया गया. सम्मान पाने वालों में अक्षिता सबसे कम उम्र की थी. इससे पूर्व अक्षिता (पाखी) को लोकसंघर्ष-परिकल्पना द्वारा आयोजित और लखनऊ ब्लाॅगर्स एसोसिएशन द्वारा सहप्रयोजित ब्लाॅगोत्सव-2010 में प्रकाशित रचनाओं की श्रेष्ठता के आधार पर वर्ष 2010 के लिए श्रेष्ठ नन्हीं ब्लाॅगर का खिताब भी मिल चुका है.

दुर्भाग्यवश पायलटों की हड़ताल के चलते ऐनवक्त पर फ्लाईट कैंसिल हो जाने के चलते अक्षिता पोर्टब्लेयर से सम्मान ग्रहण करने नहीं जा सकीं, अत: उनकी अनुपस्थिति में यह सम्मान उनके चाचा श्री अमित कुमार यादव, जो की 'युवा-मन' ब्लॉग के संयोजक भी हैं ने ग्रहण किया.

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25 मार्च 2007 को कानपुर में जन्मीं अक्षिता वर्तमान में कार्मेल स्कूल, पोर्टब्लेयर में के.जी.-I में पढ़ती है। अक्षिता के पिता कृष्ण कुमार यादव अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ हैं व मम्मी आकांक्षा यादव उ0प्र0 के एक काॅलेज में प्रवक्ता हैं। दोनों ही जन चर्चित साहित्यकार व सक्रिय ब्लाॅगर भी हैं। अक्षिता की रुचियाँ हैं- प्लेयिंग, डांसिंग, ड्राइंग, ट्रेवलिंग, ब्लाॅगिंग। अक्षिता को ड्राइंग बनाना बहुत अच्छा लगता है। पहले तो हर माँ-बाप की तरह उनके मम्मी-पापा ने भी ध्यान नहीं दिया, पर धीरे-धीरे उन्होंने अक्षिता के बनाए चित्रों को सहेजना आरंभ कर दिया। इसी क्रम में इन चित्रों और अक्षिता की गतिविधियों को ब्लाॅग के माध्यम से भी लोगों के सामने प्रस्तुत करने का विचार आया और 24 जून 2009 को “पाखी की दुनिया” नाम से अक्षिता का ब्लाॅग अस्तित्व में आया। एक साल के भीतर ही करीब 30,000 हिन्दी ब्लाॅगों के मध्य यह ब्लॉग काफी लोकप्रिय होता गया. आज इस ब्लॉग पर 150 से भी ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं और 140 से ज्यादा लोग इसका अनुसरण करते हैं। इस ब्लाॅग का संचालन अक्षिता के मम्मी-पापा द्वारा किया जाता है।

‘पाखी की दुनिया‘ ब्लाॅग के माध्यम से अक्षिता (पाखी) की सृजनात्मकता को भी पंख लग गए और लोगों ने उसे हाथों-हाथ लिया। इस ब्लॉग पर अंडमान के बारे में भी काफी जानकारियां और फोटोग्राफ हैं, जिसे पाठक काफी उत्सुकता से पढ़ते और सराहते हैं। गौरतलब है कि ‘पाखी की दुनिया‘ की चर्चा जहाँ तमाम पत्र-पत्रिकाओं में हुई है, वहीँ कुछ बाल साहित्यकार अक्षिता की मासूम प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि अपनी पुस्तक के कवर-पेज पर उसकी फोटो ही लगा दी।दिल्ली से प्रकाशित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान‘ ने लिखा कि- ‘‘अक्षिता की उम्र तो बेहद कम है, लेकिन हिन्दी ब्लाॅगिंग में वो एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी है। अक्षिता का ब्लाॅग बेहद पापुलर है और फिलहाल हिन्दी के टाॅप 100 ब्लाॅगों में से एक है। अक्षिता की तस्वीर बच्चों की एक पुस्तक के कवर पर भी छप चुकी है।“

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

प्यारी पाखी को जन्मदिन की बधाइयाँ

आज हमारी पोती (Grand daughter) अक्षिता (पाखी) का जन्म-दिन है. पाखी के जन्मदिन पर दादा-दादी की तरफ से खूब सारा प्यार और आशीष. पाखी जीवन में खूब उन्नति करे और अपने परिवार, समाज, राष्ट्र का नाम समृद्ध और रोशन करे. पाखी तो हमसे बहुत दूर अंडमान में है, पर भला दादा-दादी के दिल से कैसे दूर हो सकती है. नन्हीं सी पाखी जब भी यहाँ आती है, खूब धमाल मचाती है. फोन पर तो न जाने कितनी सारी बातें बताती है. पाखी का एक ब्लॉग भी है-पाखी की दुनिया. कई बार तो लगता है कि काश पाखी परी बनकर हमारे पास उड़ आती.



पाखी के लिए कानपुर से डा0 दुर्गाचरण मिश्र जी ने एक प्यारी सी कविता भेजी है. इसे उन्होंने पाखी के कानपुर में रहने के दौरान लिखा था, पर अब इसे परिमार्जित करते हुए नए सिरे से भेजा है. आप भी इसका आनंद लें और पाखी को ढेर सारा आशीर्वाद और प्यार दें-

प्यारी-न्यारी पाखी

अक्षिता (पाखी) मेरा नाम है
सब करते मुझको प्यार
मम्मी-पापा की लाडली
मिलता जी भर खूब दुलार।

कानपुर नगर में जन्म लिया
25 मार्च 2006, दिन शनिवार
मम्मी-पापा हुए प्रफुल्लित
पूरा हुआ सपनों का संसार।

दादा-दादी, नाना-नानी
सब देखने को हुए बेकरार
मौसी, बुआ, मामा-मामी,
चाचू लाए खूब उपहार।

नन्हीं सी नटखट गुडि़या
सब रिझायें बार-बार
कितनी प्यारी किलकारी
घर में आये खूब बहार ।

मम्मी-पापा संग आ गई
अब, अण्डमान-निकोबार
यहाँ की दुनिया बड़ी निराली
प्रकृति की छाई है बहार ।

कार्मेल स्कूल में हुआ एडमिशन
प्लेयिंग, डांसिंग, ड्राइंग से प्यार
एल.के.जी. में पढ़ने जाती
मिला नए दोस्तों का संसार ।

समुद्र तट पर खूब घूमती
देखती तट और पहाड़
खूब जमकर मस्ती करती
और जी भरकर धमाल ।

मिल गई इक प्यारी बहना
खुशियों का बढ़ा संसार
तन्वी उसका नाम है
करती उसको मैं खूब प्यार ।

डा0 दुर्गाचरण मिश्र
अर्थ मंत्री- उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मलेन,
अध्यक्ष- साहित्य मन्दाकिनी (साहित्यिक संस्था)
248 सी-1 इंदिरानगर, कानपुर-208026

सोमवार, 26 जुलाई 2010

नन्हीं ब्लॉगर बनी अक्षिता यादव 'पाखी'

धन्य हैं वे माता-पिता जो बच्चों के भविष्य की चुनौतियों को अभी से ही आसान बना रहे हैं। अक्षिता यादव 'पाखी' कल जब दुनिया में अपने पैरों पर खड़ी होगी तो उसके सामने तकनीक से समृद्धशाली संसार होगा और एक क्लिक भर की दूरी पर सफलताएं और उपलब्धियां उसकी मुट्ठी में होंगी। माता-पिता की जागरुकता ने अक्षिता यादव 'पाखी' को नन्हीं ब्लॉगर बना दिया है। इसके लिए उसको वर्ष 2010 की श्रेष्ठ ब्लॉगर का खिताब मिला है। अक्षिता का ब्लॉग है 'पाखी की दुनिया' http://www।pakhi-akshita.blogspot.com ब्लॉगोत्सव-2010 के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने अक्षिता के लिए लिखा है कि-'एक ऐसी नन्हीं ब्लॉगर जिसके तेवर किसी परिपक्व ब्लॉगर से कम नहीं,जिसकी मासूमियत में छिपा है एक समृद्ध रचना संसार। यही नही उन्होंने अक्षिता को ब्लॉगोत्सव का सुपर स्टार बताते हुए लिखा कि-'अक्षिता पाखी हिंदी ब्लॉग जगत की एक ऐसी मासूम चिट्ठाकारा, जिसकी कविताओं और रेखाचित्र से ब्लॉगोत्सव की शुरुआत हुई और सच्चाई यह है कि उसकी रचनाओं की प्रशंसा हिंदी के कई महत्वपूर्ण चिट्ठाकारों से कहीं ज्यादा हुई है। लोकसंघर्ष-परिकल्पना के ब्लॉगोत्सव-2010 में प्रकाशित रचनाओं की श्रेष्ठता के आधार पर ब्लॉगोत्सव की टीम ने अक्षिता को वर्ष की श्रेष्ठ नन्हीं ब्लॉगर के रूप में सम्मानित करने का निर्णय लिया है।'

पच्चीस मार्च 2007 को कानपुर में जन्मीं अक्षिता यादव वर्तमान में कार्मेल स्कूल, पोर्टब्लेयर में नर्सरी में पढ़ती है। अक्षिता के पिता कृष्ण कुमार यादव, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में निदेशक डाक सेवाएं हैं और अक्षिता की मां आकांक्षा यादव उत्तर प्रदेश के एक कॉलेज में प्राध्यापक हैं। ये दोनों भी चर्चित साहित्यकार और सक्रिय ब्लॉगर हैं। अक्षिता की रुचियां हैं- प्लेयिंग, डांसिंग, ड्राइंग, ट्रेवलिंग, ब्लॉगिंग। उसे ड्राइंग बनाना बहुत अच्छा लगता है। पहले तो हर माँ-बाप की तरह उसके मम्मी-पापा ने भी उसकी प्रतिभा पर ध्यान नहीं दिया, पर धीरे-धीरे उन्होंने अक्षिता के बनाए चित्रों को सहेजना आरंभ कर दिया। इस तरह इन चित्रों और अक्षिता की गतिविधियों को ब्लॉग के माध्यम से भी लोगों के सामने प्रस्तुत करने का विचार आया और 24 जून 2009 को 'पाखी की दुनिया' नाम से अक्षिता का ब्लॉग अस्तित्व में आ गया। एक साल के भीतर ही करीब 14,000 हिन्दी ब्लॉगों में इस ब्लॉग की रेटिंग बढ़ती गई और फिलहाल यह टॉप 150 हिन्दी ब्लॉगों में शामिल है।

'पाखी की दुनिया' ब्लॉग का संचालन अक्षिता के मम्मी-पापा करते हैं। इस ब्लॉग के माध्यम से अक्षिता की सृजनात्मकता को भी पंख लग गए और लोगों ने उसे हाथों-हाथ लिया। राजस्थान के चर्चित बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा अक्षिता की मासूम प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि अपनी पुस्तक 'चूं-चूं' के कवर-पेज पर अक्षिता की फोटो ही लगा दी। सरस-पायस के संपादक रावेन्द्र कुमार 'रवि' ने अक्षिता की ड्राइंग को लेकर पूरा बाल-गीत ही रच डाला तो तमाम ब्लॉग्स पर अक्षिता की चर्चा होने लगी। हिन्दी ब्लॉग जगत के सर्वाधिक सक्रिय ब्लॉगर समीर लाल ने कनाडा से 'पाखी की दुनिया' के लिए सुन्दर-सुन्दर कविताएं भी रचीं। कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव एवं अक्षिता को यह भी गौरव प्राप्त है कि एक ही परिवार के सभी सदस्य ब्लॉग-जगत में बखूबी सक्रिय हैं।
बचपन बेहद मासूम, निश्छल, रचनात्मक और अनूठा होता है। जरूरत होती है उसे स्पेस देने की। बच्चों की बातों या बनाये गए चित्रों को यूं ही हवा में नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि बच्चे को दुनिया का सबसे बड़ा आविष्कारक कहा जाता है क्योंकि आविष्कार के लिए उनमें भी कुछ न कुछ छुपा हुआ है। इक्कीसवीं सदी टेक्नोलॉजी की है और उसकी बदौलत ही संचार एवं सूचना क्रांति का व्यापक विस्तार हो रहा है। आज बच्चा कलम बाद में पकड़ता है, कंप्यूटर, मोबाइल और लैपटॉप पर उंगलियां पहले से ही फिराने लगता है। बच्चे कम उम्र में ही अनुभव और अभिरूचियों के विस्तृत संसार से परिचित हुए जा रहे हैं। नई-नई बातों को सीखने की ललक और नये एडवेन्चर उन्हें दिनों-ब-दिन एडवांस बना रहे हैं। उनकी दृष्टि प्रश्नात्मक है तो हृदय उद्गारात्मक।
कभी अज्ञेय ने बच्चों की दुनिया के बारे में कहा था कि-भले ही बच्चा दुनिया का सर्वाधिक संवेदनशील यंत्र नहीं है पर वह चेतनशील प्राणी है और अपने परिवेश का समर्थ सृजनकर्ता भी। वह स्वयं स्वतंत्र चेता है, क्रियाशील है एवं अपनी अंतः प्रेरणा से कार्य करने वाला है, जो कि अधिक स्थायी होता है। अक्षिता को सर्वश्रेष्ठ नन्हीं ब्लॉगर का खिताब मिलना यह दर्शाता है कि बच्चों में आरंभ से ही सृजनात्मक-शक्ति निहित होती है। उसकी उपेक्षा करना या बड़ों से तुलना करने की बजाय यदि उसे बाल-मन के धरातल पर देखा जाए तो उसके शिखर पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। ऋग्वेद की दो पंक्तियां यहां काफी प्रासंगिक हैं-
आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणीः।
पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें।।
अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।
इंटरनेट के पंख लगाकर अक्षिता अभी से ही ब्रह्मांड का चक्कर लगा रही है। वह उस सफर पर अभी से ही निकल चुकी है जिस पर चलने के लिए कुछ बालक अपने युवा होने की प्रतीक्षा ही कर रहे हैं। दुनिया में तेजी से फैलते इंटरनेट को घर-घर तक पहुचाने का भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रास्ता खोला है जिस पर चलने की शुरूआत हो चुकी है। भारत की तकनीकी क्षेत्र में प्रगति का यह एक सुखद सत्य है कि यहां प्रतिभाएं तेजी से उसके उपयोग की ओर बढ़ती हैं। केके यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा की दृष्टि सफलता की अनंत ऊचाईयों पर है जहां हर कोई अपने बच्चों को देखना चाहता है। यदि हर मां-बाप अपने बच्चों को प्रोत्साहित करने की शुरूआत कर ले तो यह किसी भी देश और उसके समाज की प्रगति का इससे अच्छा सुगम रास्ता कोई नहीं हो सकता।
साभार : स्वतंत्र आवाज़

मंगलवार, 18 मई 2010

बहुमुखी प्रतिभा की नन्हीं धनी : पूजा यादव

प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। उसे बस अनुकूल परिवेश चाहिए. यदुवंश में तमाम ऐसी नन्हीं प्रतिभाएं हैं, जिनके जौहर आप विभिन्न ब्लॉग पर देख सकते हैं. ऐसी नन्हीं प्रतिभाओं को हमें यदुकुल पर स्थान देकर प्रसन्नता हो रही है, आखिर यही कल के भविष्य हैं. इस कड़ी में हमने आपको सबसे पहले नन्हीं प्रतिभा अक्षिता (पाखी) से मिलाया था. आज मिलिए पूजा यादव से, जो इतनी कम उम्र में ही ढेर सारी उपलब्धियां सहेजे हुए हैं. बाल उद्यान में हमें इनकी चित्रकारी के अद्भुत रंग देखने को मिले. चलिए हम भी पूजा यादव से परिचित होते हैं-
नाम- पूजा प्रेम यादव
जन्मतिथि- 17 जून 1997
कक्षा- 7, स्कूल- एसबीओए पब्लिक स्कूल, औरंगाबाद, महाराष्ट्र।
कक्षा में हमेशा शुरू के दो स्थानों में होती हैं।
रुचियाँ- चित्रांकन (ड्रॉइंग), चित्रकारी, नृत्य, किताबें पढ़ना और खेलना।
उपलब्धियाँ- राज्यस्तरीय और राष्ट्रस्तरीय एथलीट प्रतियोगिता में भाग लिया। ललित कला अकादमी की ओर से ड्रॉइंग और पेंटिंग के लिए ढेरों पुरस्कार प्राप्त किये। ज़ी, ज़ेप और इनफाइनाइट जैसे समूहों की ओर से डांसिंग के लिए अवार्ड। बूगी-वूगी में भी भाग लिया। राज्यस्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में पुरस्कृत।
पूजा यादव के बनाये गए तमाम चित्र आप बाल-उद्यान पर जाकर देख सकते हैं. पूजा यादव को यदुकुल की तरफ से ढेरों शुभकामनायें !!

रविवार, 16 मई 2010

धूम मचाती नन्हीं प्रतिभा : अक्षिता (पाखी)

प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। उसे बस अनुकूल परिवेश चाहिए. यदुवंश में तमाम ऐसी नन्हीं प्रतिभाएं हैं, जिनके जौहर आप विभिन्न ब्लॉग पर देख सकते हैं. ऐसी नन्हीं प्रतिभाओं को हमें यदुकुल पर स्थान देकर प्रसन्नता हो रही है, आखिर यही कल के भविष्य हैं. इस कड़ी में आज मिलिए नन्हीं प्रतिभा अक्षिता (पाखी) से, जो न सिर्फ आपने ब्लॉग पाखी की दुनिया के माध्यम से सक्रिय हैं, बल्कि परिकल्पना ब्लागोत्सव और वैशाखानंद सम्मान प्रतियोगिता में भी इनकी रचनाएँ और ड्राइंग हमें देखने को मिले. चलिए हम भी अक्षिता (पाखी) से परिचित होते हैं-
नाम- अक्षिता
निक नेम - पाखी
जन्म- 25 मार्च, 2007 (कानपुर)
मम्मी-पापा - श्रीमती आकांक्षा - श्री कृष्ण कुमार यादव
अध्ययनरत - नर्सरी, कार्मेल स्कूल, पोर्टब्लेयर
रुचियाँ- प्लेयिंग, डांसिंग, ड्राइंग, बाल कवितायेँ पढ़ना व लिखना, ब्लागिंग
मूल निवास - तहबरपुर, आजमगढ़ (यू।पी.)
वर्तमान पता - द्वारा- श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवा, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर -744101 ई-मेल- akshita_06@rediffmail।com ब्लॉग- पाखी की दुनिया

अक्षिता की कविता: !! नन्हीं गौरैया !!
उड़कर आई नन्हीं गौरैया
लान में हमारे।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
लगते कितने प्यारे।

गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।

और अब अक्षिता की ड्राईंग -













अक्षिता (पाखी) को यदुकुल की तरफ से ढेरों शुभकामनायें !!
साभार : ब्लागोत्सव 2010