स्पोर्ट्स-एडवेंचर में नाम कमाते यदुवंशी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
स्पोर्ट्स-एडवेंचर में नाम कमाते यदुवंशी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 7 सितंबर 2016

अखिलेश यादव ने पहलवान नरसिंह यादव को सी0बी0आई0 जांच का दिया भरोसा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने पहलवान श्री नरसिंह यादव को रियो ओलम्पिक-2016 से जुड़ी घटना को भुलाकर आगे बढ़ने की सलाह दी है। उन्होंने श्री नरसिंह के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने भविष्य के लिए कठोर लक्ष्य निर्धारित कर और अधिक मेहनत करें, जिससे वे भविष्य में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक प्राप्त कर सकें।

 मुख्यमंत्री से 6 सितंबर, 2016 को उनके सरकारी आवास पर पहलवान श्री नरसिंह यादव ने मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा कि किसी एक घटना से निराश होने के बजाय उन्हें अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार उनके (श्री नरसिंह यादव के) मामले में समस्त तथ्यों की जांच सी0बी0आई0 से कराने का अनुरोध केन्द्र सरकार से करेगी, ताकि इस प्रकरण की गहराई से छानबीन हो सके और जो दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कार्यवाही हो सके। उन्होंने कहा कि सी0बी0आई0 जांच से भविष्य में अन्य किसी खिलाड़ी के साथ इस प्रकार की घटना होने की सम्भावना क्षीण हो जाएगी।

ज्ञातव्य है कि पहलवान श्री नरसिंह यादव को कोर्ट आॅफ आर्बिट्रेशन फाॅर स्पोर्ट्स (सी0ए0एस0) द्वारा ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए चार साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है.
-राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल ब्लॉग : http://yadukul.blogspot.in/

मंगलवार, 24 मई 2016

नरसिंह यादव का रियो ओलिंपिक में पदक का दावा पुख्ता

नरसिंह यादव। यह नाम आजकल बहुत चर्चा में है। नरसिह ने 2015 में वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ओलिंपिक क्वॉलिफाइंग स्पॉट जीता। लेकिन दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार चाहते हैं कि 74 किलोग्राम भारवर्ग में ट्रायल हो और उसका विजेता रियो जाए। गौरतलब है कि नरसिंह यादव ने फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में चल रहे चौथे और अंतिम ओलिम्पिक क्वालीफाइंग कुश्ती टूर्नामेंट में 74 किग्रा. वर्ग में स्वर्ण पदक के साथ ओलिम्पिक टिकट हासिल कर लिया। 

नरसिंह पंचम यादव एक किसान परिवार से आते हैं। उनका जन्म 6 अगस्त 1989 को हुआ। वह सुशील कुमार से छह साल छोटे हैं। नरसिंह यादव ने 13 साल की उम्र में अपने भाई विनोद, जो खुद एक पहलवान हैं, के साथ रेसलिंग शुरू की थी। नरसिंह ने मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में कुश्ती का ककहरा सीखा। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद पहली बार नरसिंह को कुश्ती में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उस समय भी वह 74 किलोग्राम भारवर्ग में ही हिस्सा लेते थे। 

रियो ओलिंपिक में 74 किलोग्राम भार वर्ग में अलग-अलग देशों के 19 पहलवान शामिल होंगे, इनमें कुछ पदक के प्रबल दावेदार हैं। इनमें से सात पहलवानों को भारत के नरसिंह पंचम यादव हरा चुके हैं। नरसिंह की यह उपलब्धि रियो में पदक के उनके दावे को पुख्ता करती है। भारतीय कुश्ती संघ के प्रधान बृजभूषण शरण सिंह भी नरसिंह को पदक का दावा मजबूत मान रहे हैं। उनका कहना है कि नरसिंह का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है और उम्मीद है कि वह इसे बनाए रखेंगे। 

रियो ओलिंपिक जाने वाले जिन विदेशी पहलवानों को नरसिंह हरा चुके हैं, उनमें उन देशों के पहलवान भी शामिल हैं, जिनका विश्व कुश्ती में रुतबा है। यानी विश्व चैंपियनशिप से लेकर ओलिंपिक तक जिन देशों के पहलवान पदक जीतने में माहिर हैं। इनमें जॉर्जिया के जकोब कमर शबिलि यूरोपियन गेम्स के पदक विजेता हैं। फ्रांस के जेलिमखन खदजिव जूनियर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं और क्यूबा के लिओन लोपेज लंदन 2012 में कांस्य पदक व तीन बार विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं। मंगोलिया के पहलवान उनुर्बत पुरेवजब विश्व चैंपियनशिप में दो बार के पदक विजेता हैं। तुर्की के सोनेर देमिरतस यूरोपियन गेम्स और जूनियर चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं। अजरबैजान के जाब्रायिल हसनोव दो बार विश्व चैंपियनशिप में पदक, पांच बार यूरोप चैंपियनशिप व विश्व कप में पदक जीत चुके हैं। बुल्गारिया के जिओर्गी इवानोव ने विश्व क्वालीफायर राउंड में शानदार प्रदर्शन कर रियो का टिकट पक्का किया है। इन सब को अलग-अलग जगहों पर हुए मुकाबलों में नरसिंह हरा चुके हैं। इन्हीं पहलवानों से रियो ओलिंपिक में नरसिंह का मुकाबला होना है।

74 किलोग्राम वर्ग में रियो ओलंपिक में जाने को लेकर सुशील कुमार ने अब कोर्ट का रुख किया है। 32 साल के सुशील कुमार ने नरसिंह यादव के साथ ट्रायल कराने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जाने का फैसला किया है। इससे पहले खेल मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि 74 किलोग्राम वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, इस बात का फैसला फेडरेशन को लेना है। इससे पहले सिर्फ एक बार ही ट्रायल हुआ है। 1996 अटलांटा ओलंपिक से पहले पप्पू यादव और काका पवार के बीच ट्रायल हुआ था। जिसमें काका पवार ने बाजी मारी थी औऱ उन्होंने अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
Ram Shiv Murti Yadav @ http://yadukul.blogspot.in/

गुरुवार, 20 नवंबर 2014

इंदिरा मैराथन प्राइजमनी दौड़ में लालजी यादव बने विजेता


इलाहाबाद। इंदिरा गांधी जयंती पर प्रतिवर्ष इलाहाबाद में आयोजित होने वाली इंदिरा मैराथन को जीतना हर धावक का सपना होता है।  इस बार 19 नवम्बर 2014 को आयोजित 30वीं इंदिरा मैराथन प्राइजमनी दौड़ में  गाजीपुर निवासी सेना के  धावक लालजी यादव (चेस्ट नंबर 1352) ने अपने ही साथियों को पीछे छोड़ते हुए पुरुष वर्ग का खिताब अपने नाम कर लिया।  सेना के ही इंद्रजीत यादव (महाराज में बासपार नकहा के निवासी (चेस्ट नंबर 1343)) और सुनील कुमार ने क्रमश: दूसरा एवं तीसरा स्थान हासिल किया।

देश की प्रतिष्ठित मैराथन दौड़ों में शामिल इंदिरा मैराथन का आगाज बुधवार प्रात: 6.30 बजे आनंद भवन से हुआ। गौरतलब है कि  19 नवंबर को भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी जी का जन्मदिन है। इंदिरा जी के नाम पर इलाहाबाद में हर वर्ष  मैराथन आयोजित किया जाता है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और कमला नेहरू की बेटी इंदिरा गाधी के बचपन का नाम इंदिरा प्रियदर्शनी था। 19 नवंबर 1917 को यूपी के इलाहाबाद में उनका जन्म हुआ था। उनके घर का नाम 'इंदू' था वे अपने माता पिता की इकलौती संतान थीं। इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था जो आर्थिक और बौद्धिक दोनों रूप से काफी संपन्न था। इंदिरा का नाम उनके दादा मोतीलाल नेहरु ने रखा था। इंदिरा को पंडित नेहरु उन्हें प्रियदर्शिनी के नाम से पुकारते थे।

मंगलवार, 29 जुलाई 2014

अभावों के बीच पूनम यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता कांस्य


मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है।
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।।

ये पंक्तियां एकदम सही बैठती हैं वाराणसी की 19 वर्षीया पूनम यादव पर। अभावों के बीच पली-बढ़ी पूनम यादव ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का झंडा ऊंचा किया हैं। उन्होंने भारोत्तोलन में महिलाओं के 63 किग्रा वर्ग में कुल 202 किग्रा का भार उठाकर कांस्य पदक जीता है। भारत का 20वें राष्ट्रमंडल खेलों की इस प्रतियोगिता में सातवां पदक है। उन्हें नाईजीरियाई खिलाड़ी ओबियोमा ओकोली और ओलेयुवाटोयिन अदेसनमी सेे कड़ी टक्कर मिली। दोनों एथलीटों ने  पांच किलो अधिक का वजन उठाया और क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक अपने नाम किया।

 पूनम के सपनों को पूरा करने के लिए गरीब परिवार ने भी अपना  सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। गरीब पिता ने अपनी आमदनी का साधन दोनों भैंसें तक बेच दी और पूनम की दोनों बहनों ने पूनम की जिंदगी में ये दिन देखने के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं को त्याग दिया। पूनम के पिता कैलाश यादव  बेटी की इस जीत से काफी उत्साहित हैं। वह बताते हैं कि 2011 में जब पूनम ने खेलना शुरू किया था तो  धीरे-धीरे वह जिला, मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने लगी। उन्होंने बताया कि कॉमनवेल्थ की तैयारी में आर्थिक परेशानियां भी सामने आने लगीं। पूनम के खेल और उसके डाइट के लिए दो भैसों को बेच दिया गया। परिवार ने भूखे रहकर पूनम को मौका दिया। छोटा सा खेत है, उसी से किसी तरह परिवार का गुजारा होता है। साथ ही, पूनम को सारी सुविधाएं देने की कोशिश जाती हैं। 

कहते हैं आगे बढ़िए तो रास्ते  स्वमेव खुलते जाते हैं। गरीबी और लाचारी से जूझ रहे परिवार की मदद एक साल पहले एक स्थानीय नेता सतीश फौजी ने की थी। उन्होंने बताया कि पूनम के पिता से उनकी मुलाकात एक संत के यहां हुई थी। उनके घर की परेशानी सुनकर उन्हें काफी तकलीफ हुई। ऐसे में उनकी बेटी की सारी जिम्मेदारियां उन्होंने खुद पर ले ली। उन्होंने बताया कि थाईलैंड एशियाड में सिलेक्शन के पहले उसकी डाइट पर हर महीने 25,000 रुपए खर्च होते थे। ऐसे में उन्होंने उसे अपनी बेटी मानकर उसकी सारी जरूरतें पूरी की। वह चाहते हैं कि वह देश के लिए मेडल जीते। साथ ही, अपने परिवार का नाम रोशन करे।

बड़ी बहन किरण यादव ने बताया कि पहले जब घर में भैंसे थी, तो पूनम ही उनकी देखभाल किया करती थी। हालांकि, गरीबी के चलते भैंस भी बिक गए। उम्मीद है कि घरवालों की मेहनत और कुर्बानी रंग लाएगी। उनकी बहन देश के लिए मेडल जरूर जीतेगी। वहीं, चाचा गुलाब यादव बताते हैं कि उसके पिता ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बेटी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। दोनों भाई भी भगवान से बहन की जीत की कामना करते रहते थे।  

पूनम का प्रोफाइल

1. नाम: पूनम यादव
2. गांव: क्राइस्ट नगर
3. पिता: कैलाश यादव (किसान)
4. पढ़ाई: बीए, थर्ड ईयर (परीक्षा छूट गई)
5. भाई-बहन: चार बहनें दो भाई
बड़ी बहन किरण यादव, शशिलता यादव, शशि, पूनम, पूजा। छोटे भाई आशुतोष यादव और अभिषेक यादव (नेशनल  हॉकी प्लेयर)
6. कैटगरी: वजन 63 Kg महिला वर्ग
7. मेडल: एशियाड 2014 में सिल्वर मेडल, सीनियर नेशनल 2014 में सिल्वर मेडल

वाकई सोना तप कर ही खरा होता है।  पूनम की इस होनहार उपलब्धि पर हम सभी को गर्व है !!

- राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल : www.yadukul.blogspot.com/
https://www.facebook.com/ramshivmurti.yadav





वाकई सोना तप कर ही खरा होता है।  पूनम की इस होनहार उपलब्धि पर हम सभी को गर्व है !!



बुधवार, 25 सितंबर 2013

संदीप तुलसी यादव ने सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य जीतकर रचा इतिहास

भारत के संदीप तुलसी यादव ने विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में 22 सितम्बर 13 को ग्रीको रोमन के 66 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीत कर इतिहास रच दिया। संदीप ने कांस्य पदक के लिए मुकाबले में सर्बिया के एलेक्सांद्र मकसीमोविच को 4-0 से पराजित किया।भारत ने इस तरह फ्रीस्टाइल में दो पदक जीतने के बाद अब ग्रीको रोमन वर्ग में भी पदक जीतने की ऐतिहासिक कामयाबी हासिल कर ली। विश्व कुश्ती में ग्रीको रोमन में भारत को पहली बार पदक मिला है। इससे पहले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2001 विश्व चैंपियनशिप में रहा था, जब मुकेश खत्री 54 किग्रा वर्ग में पांचवें स्थान पर रहे थे।संदीप ने भारत को इस विश्व चैंपियनशिप में तीसरा और इस प्रतियोगिता के इतिहास में कुल 10वां पदक दिला दिया। संदीप से पहले फ्रीस्टाइल वर्ग में अमित कुमार ने 55 किग्रा में रजत और बजरंग ने 60 किग्रा में कांस्य पदक जीता था। भारत का इस प्रतियोगिता में यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। फ्रीस्टाइल पहलवान ओवरऑल टीम रैंकिंग में छठे स्थान पर रहे, जिससे भारत को अगले साल मार्च में होने वाले विश्व कप में पहली बार भाग लेने का मौका मिल गया।विश्व चैंपियनशिप के आखिरी दिन ग्रीको रोमन मुकाबलों में भारत के तीन पहलवान संदीप (66 किग्रा), राजवीर चिकारा (74 किग्रा) और नवीन (120 किग्रा) उतरे, लेकिन इनमें से सिर्फ संदीप ही पदक होड़ में पहुंचने में कामयाब रहे और उन्होंने कांस्य पदक जीतकर दम लिया। संदीप क्वार्टर फाइनल में कोरिया के पहलवान से पराजित हुए। लेकिन कोरियाई पहलवान के फाइनल में पहुंच जाने के कारण संदीप को कांस्य पदक के लिए रेपेचेज में उतरने का मौका मिला और इस मौके को उन्होंने हाथ से जाने नहीं दिया।संदीप को पहले राउंड में बाई मिली थी और उन्होंने दूसरे राउंड में स्पेन के इस्माइल नवारो सांचेज को पराजित किया। भारतीय पहलवान ने प्रीक्वार्टर फाइनल में मालदोवा के मिहेल कोस्निसियानू को पराजित किया। क्वार्टर फाइनल में संदीप को कोरिया के हान सू रयू से 0-10 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन कांस्य पदक की उम्मीदों के लिए संदीप को कोरियाई पहलवान के शेष मुकाबलों का इंतजार करना पड़ा।संदीप ने रेपेचेज के पहले मुकाबले में स्वीडन के श्रूर वरदान्यान को 6-4 से पराजित किया। कांस्य पदक के लिए अब संदीप की भिड़ंत सर्बिया के मकसीमोविच से थी, जिसमें उन्होंने जीत हासिल करते हुए भारतीय खेमे को एक बार फिर जश्न मनाने का मौका दिया।-राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल www.yadukul.blogspot.com/ 

सोमवार, 11 जून 2012

अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रशिक्षक संदेश यादव सम्मानित

गुड़गांव के कराटे खिलाड़ी व अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रशिक्षक सेंसई संदेश यादव मध्यप्रदेश के देवास जिले में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक के सम्मान से सम्मानित हुए हैं। यह अवार्ड उनकी कराटे में उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार में पाठय पुस्तक निगम के चेयरमैन राय सिंह सैंधव द्वारा एक समारोह के दौरान दिया गया। देश के कराटे प्रशिक्षक के रुप में संदेश यादव राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। इसके पूर्व संदेश यादव को वर्ष 2009 में भारत में सबसे कम उम्र का युवा प्रतिनिधि का गौरव अंतर्राष्ट्रीय कराटे विश्वविद्यालय कनाडा द्वारा सदस्यता देने के साथ प्राप्त हुआ।
-

रविवार, 27 नवंबर 2011

बॉक्सिंग के रिंग का नया नायक : विकास कृष्ण यादव

प्रतिभा कभी उम्र की मोहताज नहीं होती। इस कहावत को मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव ने जहां एशियाई खेलों में मात्र 18 वर्ष की आयु में स्वर्ण पदक जीत कर सही साबित किया था वहीं अब उन्होंने उन्नीस वर्ष की आयु में ही विश्व चैम्पियनशिप में भी कांस्य पदक जीत कर खुद को बॉक्सिंग के रिंग का नया नायक साबित कर दिया है। विकास एशियाड में बॉक्सिंग का गोल्ड मैडल जीतने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के मुक्केबाज हैं।

विकास अभी हाल ही में अजरबैजान के बाकू में हुई विश्व मुक्केबाजी प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक लाने वाले इकलौते भारतीय मुक्केबाज हैं। उन्होंने लंदन में होने वाले ओलम्पिक खेलों के लिए भी क्वालिफाई कर लिया और ओलम्पिक में अपने मुक्के का दम दिखाने के लिए अभी से तैयारियों में जुट गए हैं।

इस युवा प्रतिभावान मुक्केबाज की अब तक की उपलब्धियां भी कम नहीं हैं। विकास यादव यूथ एशियन मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा कर सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज का खिताब जीत चुके हैं। यूथ ओलम्पिक में रजत पदक जीत वे 2010 के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय मुक्केबाज अन्डर 17 और अन्डर 19 में अपने भार वर्ग में विश्व चैम्पियन भी रह चुके हैं। गौरतलब है कि इस युवा मुक्केबाज ने 12 साल बाद एशियाई खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था। भारत ने 1998 में डिंको सिंह के स्वर्ण पदक के बाद से एशियाई खेलों में कोई सोने का तगमा नहीं जीता था। 12 साल बाद पदक का ये अकाल विकास यादव ने खत्म किया। जैसे ही हरियाणा का लाडला विकास यादव पंचों के जौहर दिखाने के लिए रिंग में उतरता है तो लाखों खेल प्रेमियों की निगाहें टेलीविजन पर लग जाती हैं।

साधारण किसान परिवार मेें 10 फरवरी, 1992 को हिसार जिले के गांव सिंघवा में कृष्ण यादव व श्रीमती दर्शना के घर पैदा हुए विकास भिवानी के वैश्य कॉलेज के विद्यार्थी हैं और आजकल उनका परिवार भिवानी के सेक्टर 13 में रहता है। विकास के पिता कृष्ण यादव बिजली निगम में स्टैनोग्राफर के पद पर कार्यरत हैं और मां श्रीमती दर्शना गृहणी हैं। मुक्केबाजी को कैरियर बनाने के सवाल पर विकास का कहना है कि वह एक दिन भिवानी स्टेडियम में घूमने गए तो वहां बच्चों और युवाओं को बॉक्सिंग का अभ्यास करते देखा और उसके मन में भी बॉक्सिंग सीखने की ललक पैदा हुई। इस बारे में जब उसने घर आकर मां-पिताजी से बात की तो उन्होंने भी सहमति दे दी। शौकिया शुरू किये बॉक्सिंग के अभ्यास में जब विकास अपने मुक्के का जौहर दिखाने लगा तो उसे कोच और परिवार ने प्रोत्साहित किया। अपनी कड़ी मेहनत, परिवार के समर्थन और कोच के कुशल निर्देशन के परिणाम स्वरूप बहुत छोटी उम्र में ही उसने 17 वर्ष से भी कम आयु में यूथ विश्व चैम्पियन बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था।

इसके बाद तो उन्होंने मुड़ कर ही नहीं देखा। विकास भारत के एकमात्र ऐसे मुक्केबाज हैं जिन्होंने एशियाड में गोल्ड और विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत कर अपने देश को गौरवान्वित किया है।

विकास कृष्ण का लक्ष्य अपने देश के लिए ओलम्पिक में सोना जीतने का है और इसके लिए अभी से तैयारी में जुट चुके हंै। उनके दादा सरजीत सिंह का कहना है कि उन्हें लेश मात्र भी शक नहीं है कि उनका पोता देश के लिए ओलम्पिक में स्वर्ण जीतेगा। विकास के माता-पिता का कहना है कि उनका बेटा इरादे का पक्का है। खाने में उसे चूरमा और गोंद के लड्डू बहुत पसंद हैं। अभी उनकी उम्र महज 19 साल है और वे कड़ी मेहनत से ओलम्पिक की तैयारी में जुटे हुए हैं। आशा है वे देश के लिए ओलम्पिक में भी पहला स्वर्ण लाने में सफल रहेंगे।

बॉक्सिंग-के-रिंग-का-नया-ना/">साभार : रघुविन्द्र यादव : दैनिक ट्रिब्यून

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

प्रेम प्रकाश यादव बने हरियाणा की विकलांग क्रिकेट टीम के कप्तान

प्रेम प्रकाश यादव को हरियाणा की विकलांग क्रिकेट टीम का कप्तान चुना गया है। प्रेम प्रकाश की अगुवाई में टीम अगले महीने में बनारस और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की विकलांग क्रिकेट टीम के साथ प्रतियोगिता में भाग लेगी। प्रेम प्रकाश के कप्तान बनने पर उसके साथियों में खुशी का माहौल है।

प्रेम प्रकाश का जन्म चरखी दादरी में 19 मार्च 1974 को हुआ था। जब वह चार वर्ष का था, तब उसके पैर में पोलियो की शिकायत का पता चला। उसी दौरान हरियाणा बिजली बोर्ड में कार्यरत उनके पिता का तबादला पलवल हो गया। इसके बाद यादव परिवार पलवल का ही बन कर रह गया। प्रेम प्रकाश को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। वह स्कूल में अपने दोस्तों के साथ काफी क्रिकेट खेलता था। क्रिकेट के जुनून ने उसे इस मुकाम पर ला दिया कि उसे क्रिकेट खेलने के अलावा कुछ नहीं सूझता। इतना ही नहीं उसमें गेंदबाजी के गुर भी कूट-कूट कर भरे हुए हैं। वर्ष 1997 में उसे पहली बार पता चला कि हरियाणा में शारीरिक रूप से विकलांग क्रिकेट भी खेला जाता है। इसके चलते उसने विकलांग खेलों के जन्मदाता प्रवीण बहल से संपर्क बनाया। प्रेम के बेहतरीन खेल के चलते उसे फरीदाबाद जिले की टीम में जगह दी। प्रेम का खेल लोगों का पसंद आया, जिस कारण उसे जिले की कमान सौंप दी गई। दिनोंदिन खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर प्रेम को अब हरियाणा की विकलांग क्रिकेट टीम का कप्तान चुना गया है। प्रेम का कहना है कि उसने पहले ही टूर्नामेंट में लगातार दो बार हैट्रिक ली थी, जो कि मुंबई व मध्यप्रदेश के खिलाफ दी। उसने अब तक 16 राष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लिया है, जिनमें उसे आठ बार मैन आफ दो मैच चुना गया है, जबकि दो बार बार बेस्ट प्लेयर आफ टूर्नामेंट से नवाजा गया है।

साभार : जागरण








सोमवार, 21 नवंबर 2011

उमेश यादव के रुप में भारत को मिली रफ्तार एक्सप्रेस


उमेश यादव का नाम क्रिकेट-जगत में अब अपना डंका बजाने लगा है. भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज को कोलकाता टेस्ट मैच में शिकस्त दे दी और इसी मैच ने भारतीय टीम को दिया नया सितारा, उमेश यादव. उमेश ने 144 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकीं. उमेश यादव को विदर्भ एक्सप्रेस का नाम दिया जा रहा है.

कोलकाता टेस्ट में वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया को जीत दिलाने में उमेश यादव का अहम रोल है. अपने दूसरे ही टेस्ट में 24 साल के उमेश यादव ने अपनी रफ्तार से वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को बेहाल कर दिया.ईडन गार्डन्स की फिरकी की मददगार विकेट पर भी उमेश यादव ने अपनी रफ्तार और सटीक लाइन से सात बल्लबाजों को पवेलियन भेजा.उमेश यादव ने कोलकाता टेस्ट में 24.3 ओवर की गेंदबाजी की जिसमें उन्होंने 103 रन देकर सात विकेट लिए. पहली पारी में उमेश ने सिर्फ सात ओवर की गेंदबाजी में 23 रन देकर तीन विकेट लिए. जबकि दूसरी पारी में उमेश ने 17.3 ओवर की गेंदबाजी में 80 रन देकर चार बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा.

इस मैच में उमेश ने टीम इंडिया को तब सफलता दिलाई जब उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी. दोनों पारियों में उमेश ने भारत को पहली सफलता दिलाई. वहीं जब मैच के चौथे दिन ब्रावो और चंद्रपॉल की जोड़ी भारतीय जीत की राह में रोड़ा बन रही थी तब उमेश ने चंद्रपॉल को बोल्ड कर इस साझेदारी को तोड़ा.

इसके बाद एक बार फिर से जब वेस्टइंडीज के कप्तान डैरेन सैमी खतरनाक दिखने लगे तो उमेश ने सैमी को चलता कर दिया. सैमी को आउट करने के कुछ देर ही बाद ही देवेंद्र बिशू की गिल्लियां बिखेड़ कर उमेश ने कोलकाता में शानदार जीत दिला दी.

उमेश की ये कामयाबी इसलिए भी अहम है क्योंकि ये उनका सिर्फ दूसरा टेस्ट मैच है. इससे पहले कोटला में खेले गए अपने पहले टेस्ट मैच में उमेश ने दो विकेट लिए थे.

वेस्टइंडीज सीरीज के बाद भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाना है और वहां पर उमेश की रफ्तार और स्विंग गेंदबाजी टीम इंडिया के लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है.

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

स्पोर्ट्स-एडवेंचर में नाम कमाते यदुवंशी

खेल एवं एडवेंचर की दुनिया में भी यदुवंश के तमाम खिलाड़ी अपना डंका बजा रहे हैं। क्रिकेट के क्षेत्र में एन० शिवलाल यादव, हेमू लाल यादव, विजय यादव, ज्योति यादव, जे0पी0 यादव और उमेश यादव ने देश को गौरवान्वित किया तो आज हरियाणा की अण्डर-19 किक्रेट टीम के कोच विजय यादव, उ0प्र0 की अण्डर-16 किक्रेट टीम के कोच विकास यादव जैसे तमाम नए नाम उभर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष एन० शिव लाल यादव, दक्षिण ज़ोन का प्रतिनिधित्व करते हैं और सीनियर टूर्नामेंट कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। दक्षिण ज़ोन की महिला समिति में विद्या यादव भी शामिल हंै ज़ो कि आई०सी०सी० महिला टी-20 विश्व कप क्रिकेट की टीम मैनेजर भी रहीं। भारत की टेस्ट और वन डे टीम में खेल चुके विजय यादव 1996 से क्रिकेट कोचिंग दे रहे हैं। उन्हें बीसीसीआई की तरफ से विकेट कीपिंग एकेडमी का कोच भी नियुक्त किया गया है। आई0पी0एल0 के विभिन्न सत्रों में भी विभिन्न यादव क्रिकेट हेतु चयनित हुए। लालू यादव के सुपुत्र तेजस्वी यादव का चयन अण्डर-19 किक्रेट टीम हेतु किया गया एवं आई0पी0एल0-20 कप के प्रथम सत्र में डेयर डेविल्स (दिल्ली) टीम में चयनित किया गया, दुर्भाग्यवश उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। इसी प्रकार पूर्व टेस्ट खिलाड़ी एन० शिव लाल यादव के पुत्र एवं हैदराबाद रणजी कप्तान अर्जुन यादव का चयन डेक्कन चार्जस (हैदराबाद) में किया गया। आई0पी0एल0 के तीसरे सत्र में केदार जाधव व उमेश यादव (दिल्ली डेयरडेविल्स) एवं अर्जुन यादव (हैदराबाद डेक्कन चार्जर्स) का चयन किया गया। आई0पी0एल0 मैचों के दौरान ही नागपुर (महाराष्ट्र) के नजदीक खापरखेड़ा की कोयला खदान के मजदूर के बेटे उमेश यादव (दिल्ली डेयरडेविल्स) एक शानदार गेंदबाज के रूप में उभरे एवं उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में भी खेलने का मौका मिला। उत्तर प्रदेश रणजी क्रिकेट टीम में आशीष यादव नया चेहरा है। बॉलीवुड के जाने माने-हास्य कलाकार राजपाल यादव टी-10 गली क्रिकेट सीजन-2 के लिए कानपुर गली क्रिकेट टीम के मालिक बन गए हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश क्रिकेट की अण्डर-19 महिला टीम में आगरा की पूनम यादव को कप्तानी सौंपी गई है। नेशनल क्रिकेट अकादमी बंगलौर में इंडिया क्रिकेट टीम के फिजिकल ट्रेनर के रूप में किशन सिंह यादव बखूबी दायित्वों का निर्वाह करते रहे हैं।

भारत के प्रथम व्यक्तिगत ओलंपिक मेडलिस्ट खाशबा दादा साहब जाधव एवं बीजिंग ओलंपिक (2008) में कुश्ती में कांस्य पदक विजेता सुशील कुमार यदुकुल की ही परम्परा के वारिस हैं। वर्ष 2010 में कुश्ती का विश्व चैंपियन खिताब अपने नाम करके सुशील कुमार ऐसा करने वाले प्रथम भारतीय पहलवान बन गए। वर्ष 2009 मंे सुशील कुमार को देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांँधी खेल रत्न से नवाजा गया तो गिरधारी लाल यादव (पाल नौकायन) को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी परंपरा में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में जहाँ सुशील कुमार ने कुश्ती में स्वर्ण पदक जीता, वहीं 74 किलोग्राम फ्री स्टाइल कुश्ती स्पर्धा में नरसिंह यादव पंचम (मूलतः चोलापुर, बनारस के, अब मुंबई में) ने भी स्वर्ण पदक जीता। गौरतलब है कि इससे पूर्व सीनियर एशियाई कुश्ती प्रतियोगिता में नरसिंह यादव ने देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर पूरे देश का नाम रोशन किया था। राष्ट्रमंडल खेलों की निशानेबाजी स्पर्धा में कविता यादव ने सुमा शिरूर के साथ कांस्य पदक जीतकर नाम गौरवान्वित किया। विश्व मुक्केबाजी (1994) में कांस्य पदक विजेता, ब्रिटेन में पाकेट डायनामो के नाम से मशहूर भारतीय फ्लाईवेट मुक्केबाज धर्मेन्द्र सिंह यादव ने देश में सबसे कम उम्र में ‘अर्जुन पुरस्कार’ प्राप्त कर कीर्तिमान बनाया। विकास यादव, मुक्केबाजी का चर्चित चेहरा है। आन्ध्र प्रदेश के बिलियर्डस व स्नूकर खिलाड़ी सिंहाचलम जो कि बिलियर्ड्स के अन्तर्राष्ट्रीय रेफरी भी हैं, बीजिंग ओलंपिक में निशानेबाजी के राष्ट्रीय प्रशिक्षक रहे श्याम सिंह यादव, कुश्ती में पन्ने लाल यादव, श्यामलाल यादव, गंगू यादव जैसे तमाम खिलाड़ी यादवों का नाम रोशन कर रहे हैं। बनारसी मुक्केबाज छोटेलाल यादव ने सैफ खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। जानी-मानी पर्वतारोही संतोष यादव जिन्दगी में मुश्किलों के अनगिनत थपेड़ों की मार से भी विचलित नहीं हुईं और अपनी इस हिम्मत की बदौलत वह माउंट एवरेस्ट की दो बार चढाई करने वाली विश्व की पहली महिला बनीं। इसके अलावा वे कांगसुंग ;ज्ञंदहेीनदहद्ध की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ने वाली विश्व की पहली महिला भी हैं। उन्हांेने पहले मई 1992 में और तत्पश्चात मई सन् 1993 में एवरेस्ट पर चढ़ाई करने में सफलता प्राप्त कीे। इण्डियन ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश कालमाड़ी यदुवंश से ही हैं। अर्जुन पुरस्कार विजेता व महिला हाॅकी टीम की पूर्व कप्तान मधु यादव राष्ट्रीय महिला हाकी टीम की मैनेजर हैं। भारतीय भारोत्तोलन संघ के सचिव सहदेव यादव हंै।
महिला मुक्केबाजी में सोनम यादव (75 कि०ग्रा०) का नाम अपरिचित नहीं रहा। बैंकाक में एशियाई ग्रा0प्रि0 में युवा धावक नरेश यादव ने 1500 मीटर की दौड़ 3।51 सेकण्ड में पूरा कर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। 27वीं राष्ट्रीय ताइक्वाण्डो प्रतियोगिता में हरियाणा की सरिता यादव ने रजत व पूनम यादव ने कांस्य पदक प्राप्त किया। बैंकाक में एशियाई गंापी तीरंदाजी चैम्पियनशिप में महिला रिवर्स स्पर्धा में नमिता यादव (झारखण्ड) ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत कर देश का गौरव बढ़ाया। स्वप्नावली यादव (मुंबई) ने महज 8 साल की उम्र में यूनान स्थित 30 किमी0 लम्बी मेसिनिकोस की खाड़ी मात्र 11 घण्टे 10 मिनट में पार करने का विश्व रिकार्ड कायम कर लोगों को दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर कर दिया। अगस्त 2009 में सम्पन्न उ0प्र0 की सीनियर तैराकी चैम्पियनशिप में कुशीनगर की प्रियंका यादव ने 5 स्वर्ण जीतकर नया कीर्तिमान बनाया। यहीं पर गोताखोरी प्रतियोगिता में डी0एल0डब्ल्यू0 के गोताखोर नवीन यादव व्यक्तिगत चैंपियन बने। रानी यादव (बनारस) एथलेटिक्स में उभरता हुआ नाम है। कहना गलत नहीं होगा कि यदुवंशियों को यदि उचित परिवेश और प्रोत्साहन मिले तो स्पोर्ट्स-गेम और एडवेन्चर के क्षेत्र में वे भारत का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन कर सकते हैं।
***********************************************************************************
It is a matter of pride for all Yadavs that in recently concluded Asian games (2010) in Guangzhou (China), the players from Supreme & Matchless clan of Yaduvansh made their presence count on global level and won the accolades across the globe for their winning, undying & down to earth attitude and performance.
We wholeheartedly appreciate their sincere efforts & endeavor for bringing glory to our great Country and family. Given is the list of players who won the individual Medals and was the part of winning team and who participated in the games.
1. Vikas Krishan Yadav - Gold Medal (Boxing) - 60 kg. Originally belongs to a village of Hissar district in Haryana and put up in Bhiwani. He is also the winner of Junior Olympics and a national champion. The teen sensation of Indian boxing, who has bagged several medals at this age, loves his gond ke ladoo. "He likes his food simple — roti and sabzi. But gond ke ladoo are his weakness, or call it his strength. These are prepared by mixing roasted gond and wheat flour in ghee along with dry fruits," said Darshna Devi, Vikas's mother. "I've already prepared around 10 kg ladoos for him," she added…J
2. Balraj Yadav- Silver Medal (Yachting/Sailing Match Racing) - He belongs to village Parkhotampur, District Rewari, Haryana, currently working as an officer in Indian Navy. There were two Yadavs out of this 5 members winning team.
3. Shekhar Yadav- Silver Medal (Yachting/Sailing Match Racing)- A native of village- Sanoda, District – Alwar, Rajasthan, proudly working as an officer in prestigious Indian Navy, comes from a middle class family.
4. Anup Yadav- Gold Medal- Kabbadi- A proud member of gold winning Kabbadi team, hails from same historical village (of Victoria Cross winner Rao Umrao Singh), Palra, District- Jhajjhar- Haryana. He has been an integral part of unbeatable Indian Kabbadi team.
5. Rajesh Yadav- Silver Medal (Rowing) – A key member of silver medal winning team, comes from a modest background of Village, Kanchanpur, District- Santkabir Nagar of UP.
Apart from these champions, other Yadavs were also part of playing Indian contingent. The list is as follows.
1. Kavita Yadav- The bronze medalist of shooting in CWG 2010 missed this time to win the medal. However her efforts are well appreciated.
2. Nar Singh Pancham Yadav- the Gold Medalist of wresting 75 kg. in CWG 2010, unfortunately couldn’t make it to a medal this time. His sincerity to bring glory to country is worth applauded.
3. Rao Aarti Singh- The proud daughter of former Minister (MOS) - Govt. of India and sitting MP of Gurgaon Sh. Rao Inderjeet Singh, missed to win the medal in Shooting. She has won several Medals in past for India and her eagerness to play and win for our country can be felt in her efforts.
4. Ram Singh Yadav- This man with never to say die attitude stood on 15th position in Men’s marathon. Hope he would carry on his attempts to win medals for us.
We can not neglect the contribution of those krishanvansaj’s who has helped these guys to win Medals. Here we can take out few such names.
Mr. Naresh Yadav- The coach of Silver Medal winning team has been an instrumental inspiration for the team and Mr. Balraj Yadav & Shekhar Yadav. He is also the Coach of Yachting Association of India.
Mr. Jagdish Yadav- The coach of boxing mine of India (Sports Authority of India, Bhiwani), He came into limelight when Bijender singh won the bronze in Olympics in 2008। He is the coach of Mr. Vikash Krishan Yadav,Bijender Singh, Akhil Kumar, Paramjeet Samota, Manoj Kumar etc. who have won several gold medals in CWG and various competition across the planet.