शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

डाक विभाग के निदेशक व साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव का साहित्य समिति ने किया अभिनंदन

प्रशासन के साथ साहित्य का अद्भुत संगम विरले ही देखने को मिलता है। इसके बावजूद तमाम प्रशासनिक अधिकारी अपनी व्यस्तताओं के मध्य हिन्दी साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उक्त उद्गार साहित्य समिति, सादुलपुर, चूरू द्वारा निराला अस्पताल में राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ एवं साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव के सम्मान एवं अभिनंदन के दौरान वक्ताओं ने व्यक्त किये। 

साहित्य समिति के मंत्री  अनिल शास्त्री ने कहा कि डाक विभाग में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होने के साथ ही श्री कृष्ण कुमार यादव राष्ट्रीय स्तर के खयातनाम साहित्यकार भी हैं, ऐसे में उनका सम्मान हमारे लिए गौरव की बात है। 
इस अवसर पर श्री यादव की पत्नी एवं अग्रणी महिला ब्लॉगर व लेखिका आकांक्षा यादव का भी लाजवंती घोटड व गायत्री बैरासर ने प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामकुमार घोटड ने समिति की गतिविधियों पर चर्चा करते हुए इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की कि श्री कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव युगल रूप में हिन्दी साहित्य को समृद्ध करते हुए विभिन्न विधाओं में निरंतर लेखन कर रहे हैं। 

इस अवसर पर साहित्यकार संतोष कुमार जांगिड़, सत्यभान पूनियाँ, अनिता सोनी ने अपनी साहित्य कृतियां श्री कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव को भेंट की। इसके अलावा लघुकथा त्रैमासिक पत्रिका ‘सारा’ की हाल ही में प्रकाशित लघुकथा विशेषांक की प्रति भेंट की गई। कार्यक्रम में स्थानीय डाकपाल बलवीर सिंह, रामवतर बैरासरिया, पुरुषोत्तम  देव पाण्डिया, सुनील अग्रवाल, सांवरमल भार्गव, विजय कुमार सोनी आदि ने भी श्री यादव का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन अनिल शास्त्री ने किया। 





बुधवार, 23 नवंबर 2016

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव का निधन

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व गवर्नर रामनरेश यादव का 22 नवम्बर, 2016 को लखनऊ में निधन हो गया। 89 साल के राम नरेश यादव का  लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके फेफड़े में इन्‍फेक्‍शन था। 

किसानों की बने थे आवाज, 1977 में मिली थी सीएम की कुर्सी
- जुलाई 1928 में यूपी के आजमगढ़ में रामनरेश का जन्म हुआ था।
- राम नरेश पहली बार चौधरी चरण सिंह की मदद से 1977 में जनता पार्टी के सीएम बने थे। रामनरेश यादव 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे। वे किसानों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे।
- उनको राजनीतिक माहौल घर से ही मिला था, क्योंकि उनके पिता गया प्रसाद महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राममनोहर लोहिया के अनुयायी थे। 
- उन्‍होंने बीएचयू से बीए, एमए और एलएलबी की पढ़ाई की और यहीं छात्र संघ की राजनीति से भी जुड़े रहे। 
- इसके बाद कुछ वक्त के लिए वे जौनपुर के पट्टी स्थित नरेंंद्रपुर इंटर कॉलेज में प्रवक्ता भी रहे। 1953 में उन्‍होंने आजमगढ़ में वकालत की शुरुआत की।
- रामनरेश ने समाजवादी विचारधारा के तहत विशेष रूप से जाति तोड़ो, विशेष अवसर के सिद्धांत, बढ़े नहर रेट, किसानों की लगान माफी, समान शिक्षा, आमदनी और खर्च की सीमा बांधने, वास्तविक रूप से जमीन जोतने वालों को उनका अधिकार दिलाने, अंग्रेजी हटाओ आदि आंदोलनों को लेकर कई बार गिरफ्तारियां दीं। 
- इमरजेंसी के दौरान वे मीसा और डीआईआर के अधीन जून 1975 से फरवरी 1977 तक आजमगढ़ जेल और केंद्रीय कारागार नैनी, इलाहाबाद में बंद रहे।
- रामनरेश 1988 में राज्यसभा सदस्य बने और 12 अप्रैल 1989 को राज्यसभा के अंदर डिप्टी लीडरशिप, पार्टी के महामंत्री और अन्य पदों से त्यागपत्र देकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता ली।
- लखनऊ स्थित अंबेडकर यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनि‍वर्सिटी का दर्जा दिलाने में भी उनका अहम योगदान था।

इसी साल रामनरेश की आई थी किताब
- इसी साल अगस्‍त महीने में रामनरेश यादव की पहली किताब 'मेरी कहानी' सामने आई थी।
- इस किताब में उन्‍होंने कांग्रेस में आने, सीएम बनने और यूपी में उनके सीएम रहते समय हुए सांप्रदायिक दंगों को सुलझाने के घटनाक्रम के बारे में बताया था। 
- हालांकि, किताब में मप्र के गवर्नर रहते हुए उन्होंने अपने दामन पर आए व्यापमं के छींटों का कोई जिक्र नहीं किया था।
ऐसा था रामनरेश का कार्यकाल
- 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे।
- जून 2014 से 19 जुलाई 2014 तक छतीसगढ़ के गवर्नर रहे।
- 26 अगस्‍त 2011 से 7 सितंबर 2016 तक मध्‍य प्रदेश के गवर्नर रहे।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव जी के निधन के साथ ही समाज और देश ने एक कद्दावर जननेता खो दिया है।  उनके निधन पर हार्दिक श्रद्धांजलि !!

सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

हिन्दी ब्लॉगिंग में नए आयाम रचता एक परिवार

हिंदी में ब्लागिंग का तेजी से विस्तार हो रहा है. आज ब्लागिंग प्रिंट-मिडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया में चर्चा में है, तो ब्लागिंग को लेकर तमाम विश्लेषण भी हो रहे हैं. ब्लागिंग को लेकर तमाम सम्मान-पुरस्कार भी दिए जा रहे हैं. इनमें से कुछेक प्रतिष्ठित पुरस्कार ब्लागिंग से जुड़े लोगों द्वारा हैं तो कुछेक राजकीय तौर पर या न्यूज चैनलों द्वारा. हिंदी-ब्लागिंग में एक ऐसा भी परिवार सक्रिय है, जिसकी तीन पीढियां ब्लागिंग में सक्रिय हैं. यह सक्रियता मात्र ब्लॉग चलाने तक ही नहीं है, बल्कि ब्लागिंग को लेकर चल रहे विमर्श में शामिल होने, ब्लागिंग को साहित्य के साथ-साथ सरोकारों से जोड़ने, ब्लॉग पर विविध विषयों पर पोस्ट लिखने से लेकर ब्लागिंग से तमाम लोगों को जोड़ने तक शामिल है. पर सबसे बड़ी बात यह है कि इस परिवार को ही अब तक हिंदी ब्लागिंग से जुड़े सबसे ज्यादा सम्मान भी प्राप्त हुए हैं. ये सम्मान ब्लागिंग से जुडी संस्थाओं से लेकर न्यूज-चैनल और भारत सरकार तक प्रदान किये गए हैं. 

इस परिवार में शामिल हैं- कृष्ण कुमार यादव, उनकी पत्नी आकांक्षा यादव और सुपुत्री अक्षिता (पाखी). वे अपने व्यक्तिगत ब्लॉग के साथ-साथ कई ब्लॉगों से भी जुड़े हुए हैं. एक तरफ वे स्थापित साहित्यकार हैं, जिनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, वहीँ देश-विदेश की प्राय: अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विधाओं में उनकी रचनाएँ प्रकशित हो चुकी हैं. उनके ब्लॉगों पर रवीश कुमार से लेकर डा. जाकिर अली रजनीश तक ने कलम चलाई है, वहीँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं ने उनके ब्लॉग की पोस्ट को कई बार अपने स्तंभों में प्रकाशित किया है.... फ़िलहाल ये ब्लॉगर दम्पति इसलिए पुनः चर्चा में हैं क्योंकि इनके ब्लॉगों को टॉप हिंदी ब्लॉग्स में शामिल किया गया है। 

 देश-विदेश में इंटरनेट पर हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और ब्लागिंग के माध्यम से अपनी रचनाधर्मिता को विस्तृत आयाम देने वाले ब्लॉगर दम्पति राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर  के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा  यादव के ब्लॉग क्रमश: "डाकिया डाक लाया" (http://dakbabu.blogspot.in/) और "शब्द-शिखर" (http://shabdshikhar.blogspot.in/) को  टॉप हिंदी ब्लॉग्स में शामिल किया गया है। वर्ष 2008 से ब्लॉगिंग में सक्रिय एवम  ''दशक के श्रेष्ठ हिंदी ब्लॉगर दम्पति'' और  सार्क देशों के सर्वोच्च ''परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान'' से सम्मानित  दम्पति के दोनों ब्लॉगों को इंडियन टॉप ब्लॉग्स द्वारा 2015-16 के  लिए हाल ही में जारी हिंदी के सर्वश्रेष्ठ 130 ब्लॉगों की डायरेक्टरी में स्थान दिया गया है। वर्तमान में हिंदी में एक लाख से ज्यादा ब्लॉग संचालित हैं।

 डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव  नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित तमाम देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में सम्मानित हो चुके हैं। जर्मनी के बॉन शहर में होने वाले ग्लोबल मीडिया फोरम (2015) के दौरान 'पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड' श्रेणी में  आकांक्षा यादव के ब्लॉग 'शब्द-शिखर'  को हिंदी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा वर्ष  2012 में इस दम्पति को  ”न्यू मीडिया एवं ब्लाॅगिंग” में उत्कृष्टता के लिए ''अवध सम्मान'' से भी विभूषित किया जा  चुका  है। सौ से ज्यादा देशों में देखे-पढ़े जाने वाले इनके ब्लॉग 'डाकिया डाक लाया' और 'शब्द-शिखर' पर अब तक 738 और 512 पोस्ट प्रकाशित हैं।

ब्लॉगिंग के साथ-साथ कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव साहित्य और लेखन में भी सक्रिय हैं।  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ-साथ,  अब तक श्री यादव की 7 पुस्तकें और नारी सम्बन्धी मुद्दों पर प्रखरता से लिखने वालीं आकांक्षा यादव की 3 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। देश-दुनिया में शताधिक सम्मानों से विभूषित यादव दम्पति एक लंबे समय से ब्लॉग और सोशल  मीडिया के माध्यम से हिंदी साहित्य एवं विविध विधाओं में अपनी रचनाधर्मिता को प्रस्फुटित करते हुये अपनी व्यापक पहचान बना चुके हैं।





गुरुवार, 8 सितंबर 2016

सृष्टि को विनाश से बचने के लिए वृक्षारोपण जरुरी - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

 वृक्षारोपण मानव समाज का वैयक्तिक और सामाजिक दायित्व है। प्राचीन काल से ही मानव और वृक्षों का घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है। मानवीय सभ्यता-संस्कृति के आरम्भिक विकास का पहला चरण भी वन-वृक्षों  की सघन छाया में ही उठाया गया। ऐसे में उनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है। अपने और आने वाली पीढ़ी के जीवन को बचाने के लिए हमें वृक्षारोपण करना ही होगा। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने डाक विभाग द्वारा आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में कहीं। इस अवसर पर श्री यादव ने पौधरोपण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वृक्ष कभी भी हमसे कुछ नहीं लेते, सिर्फ देते हैं।  ऐसे में यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में एक पेड़ लगाने और उसे भरपूर समृद्ध करने का भी संकल्प ले ले तो पर्यावरण को सतत सुरक्षित किया जा सकता है। विद्यार्थियों और युवाओं को नैतिक शिक्षा के तहत वृक्षारोपण के बारे में बताने और उन्हें इस ओर प्रेरित करने पर भी श्री यादव ने जोर दिया। 

श्री यादव ने कहा कि हमारी परंपरा में एक वृक्ष को दस पुत्रों के सामान मन गया है, क्योंकि वृक्ष पीढ़ियों तक हमारी सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि  वृक्षारोपण और उनके रक्षण के  दायित्व का निर्वाह कर सृष्टि को भावी विनाश से बचाया जा सकता है । 

इस अवसर पर डाक विभाग  के तमाम अधिकारी  और कर्मचारी  उपस्थित रहे।

बुधवार, 7 सितंबर 2016

श्रीकृष्ण द्वारा गीता में कही बातों को कॉरपोरेट जगत भी अपना रहा - कृष्ण कुमार यादव

श्रीकृष्ण सिर्फ एक भगवान या अवतार भर नहीं थे।  इन सबसे आगे वह एक ऐसे पथ-प्रदर्शक और मार्गदर्शक थे, जिनकी सार्थकता  हर युग में बनी रहेगी।  उनके व्यक्तित्व में भारत को एक प्रतिभासम्पन्न राजनीतिवेत्ता ही नहीं, एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक प्राप्त हुआ, जिसका गीता-ज्ञान समस्त मानव-जाति एवं सभी देश-काल के लिए पथ-प्रदर्शक है। उक्त विचार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ  एवं चर्चित साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव ने यादव समाज, जोधपुर द्वारा गाँधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, जोधपुर में 25 अगस्त, 2016  को आयोजित जन्माष्टमी  स्नेह मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस बात पर जोर दिया कि आज देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत है। राजनेताओं को उनकी विलक्षण राजनीति समझने की दरकार है और धर्म के प्रणेताओं, उपदेशकों को यह समझने की आवश्यकता है कि श्रीकृष्ण ने जीवन से भागने या पलायन करने या निषेध का संदेश कभी नहीं दिया। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण ने कभी कोई निषेध नहीं किया। उन्होंने पूरे जीवन को समग्रता के साथ स्वीकारा है। यही कारण है कि भगवान श्री कृष्ण की स्तुति लगभग सारी दुनिया में किसी न किसी रूप में की जाती है। यहाँ तक कि वे लोग जिन्हें हम साधारण रूप में नास्तिक या धर्मनिरपेक्ष की श्रेणी में रखते हैं, वे भी निश्चित रूप से भगवदगीता से प्रभावित हैं। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण द्वारा गीता में कहे गए उपदेशों का हर एक वाक्य हमें कर्म करने और जीने की कला सिखाता है। अब तो कॉरपोरेट जगत भी मैनेजमेंट के सिद्धांतों को गीता से जोड़कर प्रतिपादित कर रहा है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे रेलवे वर्कशॉप जोधपुर में उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर श्री सत्यवीर सिंह यादव ने कहा कि भगवान् श्री कृष्ण  के चरित्र में सर्वत्र समदर्शिता प्रकट होती है।  रिटायर्ड अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समिति जोधपुर संभाग श्री योगेन्द्र सिंह यादव ने श्री कृष्ण के विचारों को सदैव प्रासंगिक बताते हुए उनके  जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यादव समाज, जोधपुर के अध्यक्ष डॉ. शैलेष यादव ने कहा कि कृष्ण की सभी लीलाएँ कुछ न कुछ सन्देश देती हैं। उन लीलाओं को उनके आध्यात्मिक स्वरूप में ही समझा जा सकता है। यूथ हॉस्टल, जोधपुर के प्रबंधक ले. कर्नल (सेनि) प्रकाश चन्द्र यादव ने भी विचार व्यक्त किये।



कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने राजस्थान न्यायिक सेवा में चयनित (14 वीं रैंक) पूर्णिमा यादव सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। 

इस अवसर पर  प्रविंद्र यादव, डॉ. राम रतन यादव, मदन सिंह यादव, अरुण यादव, आनंद यादव, राजकुमार यादव सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नंदकिशोर यादव ने किया।
-राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल ब्लॉगhttp://yadukul.blogspot.com/

अखिलेश यादव ने पहलवान नरसिंह यादव को सी0बी0आई0 जांच का दिया भरोसा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने पहलवान श्री नरसिंह यादव को रियो ओलम्पिक-2016 से जुड़ी घटना को भुलाकर आगे बढ़ने की सलाह दी है। उन्होंने श्री नरसिंह के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने भविष्य के लिए कठोर लक्ष्य निर्धारित कर और अधिक मेहनत करें, जिससे वे भविष्य में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक प्राप्त कर सकें।

 मुख्यमंत्री से 6 सितंबर, 2016 को उनके सरकारी आवास पर पहलवान श्री नरसिंह यादव ने मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा कि किसी एक घटना से निराश होने के बजाय उन्हें अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार उनके (श्री नरसिंह यादव के) मामले में समस्त तथ्यों की जांच सी0बी0आई0 से कराने का अनुरोध केन्द्र सरकार से करेगी, ताकि इस प्रकरण की गहराई से छानबीन हो सके और जो दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कार्यवाही हो सके। उन्होंने कहा कि सी0बी0आई0 जांच से भविष्य में अन्य किसी खिलाड़ी के साथ इस प्रकार की घटना होने की सम्भावना क्षीण हो जाएगी।

ज्ञातव्य है कि पहलवान श्री नरसिंह यादव को कोर्ट आॅफ आर्बिट्रेशन फाॅर स्पोर्ट्स (सी0ए0एस0) द्वारा ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए चार साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है.
-राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल ब्लॉगhttp://yadukul.blogspot.in/

बुधवार, 25 मई 2016

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव गिरिराज सम्मान से हुए सम्मानित


प्रशासन के साथ-साथ हिंदी साहित्य और लेखन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ  श्री कृष्ण कुमार यादव को गगन स्वर प्रकाशन द्वारा " गिरिराज सम्मान -2016" से  सम्मानित किया गया। श्री यादव को यह सम्मान उनके रफी अहमद किदवई नेशनल पोस्टल एकेडमी, गाजियाबाद में प्रवास के दौरान गगन स्वर के सम्पादक ए. के मिश्र  ने शाल ओढ़ाकर, नारियल फल देकर  एवं प्रशस्ति पत्र देकर अभिनन्दन के साथ किया।  गौरतलब है कि श्री यादव को यह सम्मान गत माह हिंदी भवन, नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय साहित्यकार समारोह में पद्मभूषण डॉ. गोपाल दास नीरज द्वारा पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुँवर बेचैन की सादर उपस्थिति में प्रदान किया जाना था।  पर अपनी व्यस्तताओं के चलते कार्यक्रम  शामिल न हो पाने पर डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव को यह सम्मान गाजियाबाद में उनके प्रवास के दौरान दिया गया। 

कार्यक्रम के संयोजक ए. के मिश्र  ने कहा कि, श्री कृष्ण कुमार यादव भारतीय डाक सेवा  के अत्यन्त ऊर्जस्वी और गतिमान युवा अधिकारी हैं। उच्च कोटि के चिंतक, लेखक एवं ब्लॉगर होने के साथ-साथ आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व की साम्यता अद्भुत एवं विलक्षण है। आपने विभिन्न विषयों पर कुल 7 पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें   'अभिलाषा' (काव्य-संग्रह) 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह), India Post : 150 glorious years , 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' , ’जंगल में क्रिकेट’ (बाल-गीत संग्रह) एवं ’16 आने 16 लोग’(निबंध-संग्रह) शामिल हैं। श्री यादव के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर" (सं0 डाॅ0 दुर्गाचरण मिश्र) प्रकाशित हो चुकी  है। 

देश-विदेश से प्रकाशित तमाम पत्र पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर भी प्रमुखता से प्रकाशित होने वाले श्री कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्व उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा ’’अवध सम्मान’’, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी द्वारा ’’साहित्य सम्मान’’, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त द्वारा ”विज्ञान परिषद शताब्दी सम्मान”,  साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लाॅगर दम्पति’’ सम्मान, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डाॅ0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, वैदिक क्रांति परिषद, देहरादून द्वारा ‘’श्रीमती सरस्वती सिंहजी सम्मान‘’, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ”महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान‘‘, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा ’’पं0 बाल कृष्ण पाण्डेय पत्रकारिता सम्मान’’, सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु तमाम सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।  

मंगलवार, 24 मई 2016

नरसिंह यादव का रियो ओलिंपिक में पदक का दावा पुख्ता

नरसिंह यादव। यह नाम आजकल बहुत चर्चा में है। नरसिह ने 2015 में वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ओलिंपिक क्वॉलिफाइंग स्पॉट जीता। लेकिन दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार चाहते हैं कि 74 किलोग्राम भारवर्ग में ट्रायल हो और उसका विजेता रियो जाए। गौरतलब है कि नरसिंह यादव ने फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में चल रहे चौथे और अंतिम ओलिम्पिक क्वालीफाइंग कुश्ती टूर्नामेंट में 74 किग्रा. वर्ग में स्वर्ण पदक के साथ ओलिम्पिक टिकट हासिल कर लिया। 

नरसिंह पंचम यादव एक किसान परिवार से आते हैं। उनका जन्म 6 अगस्त 1989 को हुआ। वह सुशील कुमार से छह साल छोटे हैं। नरसिंह यादव ने 13 साल की उम्र में अपने भाई विनोद, जो खुद एक पहलवान हैं, के साथ रेसलिंग शुरू की थी। नरसिंह ने मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में कुश्ती का ककहरा सीखा। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद पहली बार नरसिंह को कुश्ती में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उस समय भी वह 74 किलोग्राम भारवर्ग में ही हिस्सा लेते थे। 

रियो ओलिंपिक में 74 किलोग्राम भार वर्ग में अलग-अलग देशों के 19 पहलवान शामिल होंगे, इनमें कुछ पदक के प्रबल दावेदार हैं। इनमें से सात पहलवानों को भारत के नरसिंह पंचम यादव हरा चुके हैं। नरसिंह की यह उपलब्धि रियो में पदक के उनके दावे को पुख्ता करती है। भारतीय कुश्ती संघ के प्रधान बृजभूषण शरण सिंह भी नरसिंह को पदक का दावा मजबूत मान रहे हैं। उनका कहना है कि नरसिंह का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है और उम्मीद है कि वह इसे बनाए रखेंगे। 

रियो ओलिंपिक जाने वाले जिन विदेशी पहलवानों को नरसिंह हरा चुके हैं, उनमें उन देशों के पहलवान भी शामिल हैं, जिनका विश्व कुश्ती में रुतबा है। यानी विश्व चैंपियनशिप से लेकर ओलिंपिक तक जिन देशों के पहलवान पदक जीतने में माहिर हैं। इनमें जॉर्जिया के जकोब कमर शबिलि यूरोपियन गेम्स के पदक विजेता हैं। फ्रांस के जेलिमखन खदजिव जूनियर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं और क्यूबा के लिओन लोपेज लंदन 2012 में कांस्य पदक व तीन बार विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं। मंगोलिया के पहलवान उनुर्बत पुरेवजब विश्व चैंपियनशिप में दो बार के पदक विजेता हैं। तुर्की के सोनेर देमिरतस यूरोपियन गेम्स और जूनियर चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं। अजरबैजान के जाब्रायिल हसनोव दो बार विश्व चैंपियनशिप में पदक, पांच बार यूरोप चैंपियनशिप व विश्व कप में पदक जीत चुके हैं। बुल्गारिया के जिओर्गी इवानोव ने विश्व क्वालीफायर राउंड में शानदार प्रदर्शन कर रियो का टिकट पक्का किया है। इन सब को अलग-अलग जगहों पर हुए मुकाबलों में नरसिंह हरा चुके हैं। इन्हीं पहलवानों से रियो ओलिंपिक में नरसिंह का मुकाबला होना है।

74 किलोग्राम वर्ग में रियो ओलंपिक में जाने को लेकर सुशील कुमार ने अब कोर्ट का रुख किया है। 32 साल के सुशील कुमार ने नरसिंह यादव के साथ ट्रायल कराने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जाने का फैसला किया है। इससे पहले खेल मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि 74 किलोग्राम वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, इस बात का फैसला फेडरेशन को लेना है। इससे पहले सिर्फ एक बार ही ट्रायल हुआ है। 1996 अटलांटा ओलंपिक से पहले पप्पू यादव और काका पवार के बीच ट्रायल हुआ था। जिसमें काका पवार ने बाजी मारी थी औऱ उन्होंने अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
Ram Shiv Murti Yadav @ http://yadukul.blogspot.in/

मध्य प्रदेश बोर्ड की हाई स्कूल परीक्षा में दिव्या यादव ने किया टॉप

माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश द्वारा 16 मई, 2016 को घोषित कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम में गांव के किसान की बेटी दिव्या यादव ने 589 अंक पाकर प्रदेश की मैरिट सूची में पहला स्थान प्राप्त किया है। दिव्या यादव जबलपुर जिले की पाटन तहसील के तान्या कांवेंट स्कूल की छात्रा है। पाटन से पांच किमी दूर थाने गांव के किसान अरुण यादव की बेटी दिव्या ने संस्कृत विषय में 100 में से 100 अंक, गणित और विज्ञान में 99-99 अंक प्राप्त किए हैं। 
दिव्या यादव ने बताया कि उन्होंने एमपी टॉप रहने का टारगेट बनाकर पढ़ाई की थी। इसके लिए सुबह शाम मेहनत की । वह आगे चलकर कलेक्टर बनना चाहती हैं। दिव्या ने कोई कोचिंग नहीं की बल्कि अपना मुकाम घर में पढ़ाई करके प्राप्त किया है। इसमें उनके स्कूल टीचर और माता-पिता का सहयोग रहता था। दिव्या का कहना है कि सभी छात्र अपना टारगेट तय कर यदि पढ़ाई करें तो निश्चित ही सफलता मिलती है। दिव्या की इस सफलता से उसके माता-पिता और शिक्षक काफी खुश हैं।

Girl student from rural area, Divya Yadav outshined in the state merit list of class X examination, 2016, by securing 589 marks out of 600. Madhya Pradesh Board of Secondary Education (MPBSE), declared the result of High School, 2016, on Monday.

Divya Yadav, student of Tanya Convent Higher Secondary School, Patan, brought laurel to the name of State, district and school by securing first position with 98.16 percent in Madhya Pradesh state merit list in the Class X, Madhya Pradesh Board of Secondary Education, 2016.

On this achievement, Divya Yadav said “This is the biggest moment for me and for my parents and school too. All this possible with the support of my parents and school teachers who were always present for me, always providing their guidance whenever I needed. My father is a farmer and mother is housewife.

I always wanted that my parents should feel proud of me and today, I have fulfilled their dreams. I always gave 6 to 7 hours for the studies, and I had never taken any kind of coaching. My teachers were always there for me, for clearing my doubts. I thank all my teachers and Principal. I have secured 100 marks in Sanskrit, 99 in Mathematics and Science. I want to take Maths Science group and after XII, I want to serve the nation and I will have to work hard for preparation of IAS examination.
Ram Shiv Murti Yadav @ http://yadukul.blogspot.in/
राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल 

बुधवार, 30 मार्च 2016

'उच्च शिक्षा में तकनीकी शब्दावली का प्रयोग'' संबंधित राष्ट्रीय कार्यशाला का निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने किया उद्घाटन

 भूमण्डलीकरण, उदारीकरण, उन्नत प्रौद्योगिकी एवं सूचना-तकनीक के बढ़ते इस युग में यदि सबसे बड़ी चुनौती भाषा के लिए पैदा हुई है तो इसी चुनौती स्वरूप भाषाओं का विकास भी हुआ है। हिन्दी और अन्य भारतीय भाषायें उच्च शिक्षा का माध्यम न होने के कारण भाषा के स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया से लम्बे समय तक दूर रहीं हैं। इसलिए हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं को विज्ञान तथा तकनीकी क्षेत्र में विकसित करने के लिए सुनियोजित प्रयास की जरूरत है। उक्त उद्गार चर्चित हिंदी लेखक  एवं राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली एवं हिंदी विभाग, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा एम. बी. एम. इंजीनियरिंग कॉलेज के इंटरनेशनल सभागार में 27 मार्च, 2016 को आयोजित ''उच्च शिक्षा में तकनीकी शब्दावली का प्रयोग'' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये।

अपने सारगर्भित सम्बोधन में निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि  भूमण्डलीकरण के दौर में तकनीकी शब्दावली की अधिकाधिक आवश्यकता है। दुनिया में जापान, फ्रांस जैसे तमाम विकसित देश अपनी भाषा के माध्यम से तकनीक के सिरमौर बने हुए हैं, ऐसे में  अपनी सभ्यता, विरासत और संस्कृति की अच्छी चीजों को सहेजकर ही विज्ञान को उन्नत बनाया जा सकता है और मौलिक चिन्तन व  आविष्कार की स्वतंत्रता के लिए स्वयं की भाषा को ही वरीयता देना होगा। हमारे देश के पास प्राचीन समय से ही अपार सम्पदा के रूप में शब्दावली मौजूद है उसको सुरक्षित और संरक्षित रखने की आवश्यकता है। विदेशी भाषा का ज्ञान रखना जो लोग शान समझते है उन्हें अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए क्योंकि भाषा हमारे मूल्यों, परम्पराओं और संस्कृति का संरक्षण करती है। निज भाषा में इनका संरक्षण संभव है। अपने महान ग्रंथों से मोती चुनकर, दुनिया की तमाम भाषाओँ में लिखे जा रहे शोधकार्यों को अपनी मातृभाषा में अनुवादित कर, विज्ञानं और प्रौद्योगिकी को सहज रूप में अपनी मातृभाषा के माध्यम से लोगों में विस्तारित करके, उच्च शिक्षा में अपनी भाषा में मौलिक शोधों को बढ़ावा देकर और तकनीक को हौव्वा की बजाय दिनचर्या और नवाचार से जोड़कर इसे और भी समृद्ध बनाया जा सकता है। श्री यादव ने कहा कि आम आदमी की भाषा विज्ञान और तकनीक की भाषा से पृथक हो सकती है पर इसका तात्पर्य यह नहीं कि जनसामान्य की भाषा में विज्ञान और तकनीक की बातें नहीं समझाई जा सकतीं। बस जरूरत हमें अपनी सोच और कार्य प्रणाली बदलने की है। 

     कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. सुधि राजीव, अधिष्ठाता कला, शिक्षा एवं समाज विज्ञान संकाय,जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय , जोधपुर ने कहा कि हर भाषा अपने व्यक्तित्व का स्वरूप होती है यह वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से पल्लवित और पोषित है। भाषा मनुष्य होने का प्रमाणिक दस्तावेज है जो हमारी और हमारे राष्ट्र की पहचान कराती है। 


       सारस्वत वक्ता के रूप में वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली के सहायक निदेशक इंजी. मोहन लाल मीना ने वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की कार्यप्रणाली व उसके उद्देश्यों के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि  विज्ञान व तकनीकी विषयों में हिन्दी शब्दों का प्रयोग प्रारम्भ में कठिन प्रतीत होते है लेकिन सतत् प्रयोग से इन्हें आसानी से समझा व प्रयोग में लाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि विषय के विकास हेतु अनुकूल शब्दावली की आवश्यकता होती है। आयोग के ही जय सिंह रावत ने तकनीकी शब्दावली का प्रयोग के सरलीकरण पर प्रकाश डाला। 

           कार्यक्रम के  प्रारम्भ में कार्यशाला के संयोजक प्रो. श्रवण कुमार मीना ने कार्यशाला की रूपरेखा बताते हुए समस्त अतिथियों का स्वागत किया तथा हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. देवेन्द्र कुमार सिंह गौतम ने धन्यवाद ज्ञापित किया संचालन डाॅ. कामिनी ओझा ने किया।  इस दौरान विभिन्न प्रांतों से आए हुए वैज्ञानिक, शिक्षक गण, विद्व्त जन एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।  उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न वक्ताओं ने  उच्च शिक्षा में तकनीकी शब्दावली के  प्रयोग पर अपने विचार व्यक्त किये।

           प्रथम तकनीकी सत्र् में सारस्वत वक्ता प्रो. रामलखन मीना, राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय, अजमेर ने हिन्दी की तकनीकी शब्दावली के विविध पक्षों सामान्य, साहित्यिक प्रयोजन व तकनीकी पक्षों पर प्रकाश डाला। आपने कहा कि वैज्ञानिक शब्दावली का निर्माण होने के बावजूद इसका प्रयोग नहीं किया जा रहा है क्योंकि लोग मानते हैं कि ये आम बोलचाल की भाषा नहीं है। दूसरे वक्ता डाॅ. मोहर सिंह, प्रधान वैज्ञानिक आई.सी.ए.आर. ने अपने व्याख्यान में कहा कि तकनीकी शब्दावली के माध्यम से कृषि नवाचार को किसानों तक पहुंचाना असान बनाना होगा। डाॅ. रामराज ने अपने वक्तव्य में कहा की तकनीकी शब्दावली के माध्यम से किसानों तक अपनी बात को आसानी से पहुंचाया जा सकता है। जिससे वे कृषि उत्पाद को बढ़ा सके। वनस्पति विज्ञान के सेवानिवृत प्रो. नरपत सिंह शेखावत ने अपने उद्बोधन में कहा की कृषि विज्ञान में तकनीकी शब्दावली के माध्यम से शब्दों को सुगम बनाया जा रहा है जो वर्तमान संदर्भो में उपयोगी सिद्ध हो रहा है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. महेन्द्र सिंह ने किया तथा अंत में डाॅ. प्रवीण चंद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। दूसरे तकनीकी सत्र में अजमेर से पधारे डाॅ. आलोक चतुर्वेदी ने पाॅवर प्रजेंटेशन के माध्यम से विज्ञान विषयों में तकनीकी शब्दावली के सरलीकरण पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। डाॅ. आर. पी. मीना पादप रोग वैज्ञानिक, आनन्द गुजरात ने कृषि विषय में आने वाले शब्दों की कठिनाई को सरलता पूर्वक समझाया और कहा की किसानों के लिए भाषा का सरलीकरण अत्यन्त आवश्यक है। सत्र का संचालन प्रवीण चंद ने किया और डाॅ. कुलदीप मीना ने  धन्यवाद ज्ञापित किया।

मंगलवार, 29 मार्च 2016

राजनीति में सबसे बड़ा परिवार बना ''मुलायम'' परिवार

उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे शक्तिशाली यादव परिवार का एक और सदस्य अब सक्रिय राजनीति में दस्तक देने को तैयार है। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादवको 2017 का यूपीविधानसभा चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी चल रही है। वे लखनऊ कैंट सीट से सपा प्रत्याशी होंगी। इसके चलते राजनीतिक परिवारों से अलग मुलायम का परिवार एक ही पार्टी में है यानि अपर्णा को मिलाकर सभी 16 सदस्य समाजवादी पार्टी का हिस्सा हैं जिसे 77 साल के मुलायम सिंह यादव ने खड़ा कर दिया है। मिलते है मुलायम सिंह की 16 सदस्यों से जो राजनीति में अपना रुतबा जमा रहे है।

मुलायम सिंह यादव
नेताजी के नाम फेमस मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के अगुआ और पार्टी संस्थापक हैं। उन्होंने 4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी का गठन किया था। अपने राजनीतिक करियर में वह तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। फिलहाल उनके बेटे अखिलेश यादव यूपी के सीएम हैं और वह केंद्र की राजनीति पर फोकस किए हुए हैं। मुलायम सिंह यादव ने राजनीति में परिवार के 20 सदस्यों की एंट्री करा दी है, जिसके आधार पर मुलायम परिवार देश का सबसे बड़ा सियासी परिवार बना हुआ है।

शिवपाल सिंह यादव
जीती हुई सीट पर घरवालों को लड़ाने के इस खेल में सबसे पहले शिवपाल सिंह यादव शामिल हुए। हालांकि, सहकारिता आंदोलन के जरिए शिवपाल सिंह यादव ने राजनीति में अपनी पैठ बना ली थी। वे 1988 में पहली बार इटावा के जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए। 1996 में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपनी जसवंतनगर की सीट छोटे भाई शिवपाल के लिए खाली कर दी थी। साथ ही खुद मैनपुरी से लोकसभा का चुनाव लड़ा। इसके बाद से ही शिवपाल सिंह यादव का जसवंतनगर की विधानसभा सीट पर का कब्जा बरकरार है।

रामगोपाल सिंह यादव
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के चचेरे भाई रामगोपाल यादव मौजूदा समय में भले की राज्यसभा से सांसद हो, लेकिन उन्होंने भी राजनीति में एंट्री इसी जुगाड़ से की थी। मुलायम सिंह ने 2004 में संभल सीट रामगोपाल के लिए छोड़ दी थी और खुद मैनपुरी से सांसद का चुनाव लड़ा था। रामगोपाल ने भी इस सीट से जीत हासिल करके संसद पहुंचे थे।

अखिलेश यादव
सपा मुखिया में अपने भाइयों को राजनीति में एंट्री कर दी थी। अब बारी बेटे अखिलेश यादव की थी। इसके लिए उन्होंने 1999 की लोकसभा चुनाव संभल और कन्नौज दोनों सीटों लड़ा और जीता। इसके बाद सीएम अखिलेश के लिए कन्नौज की सीट खाली कर दी। अखिलेश ने कन्नौज की सीट से चुनाव लड़ा और जीता। इसी के साथ उनकी भी राजनीति में एंट्री हो चुकी थी।

धर्मेंद्र यादव
अखिलेश के बाद यादव परिवार के दूसरी पीढ़ी से सबसे पहले धर्मेंद्र यादव का नंबर लगा। 2004 में सीएम रहते हुए मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ा और जीता। बाद में यह सीट अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव के लिए खाली कर दी। 25 साल के भतीजे ने भी अपने चाचा मुलायम को निराश नहीं किया और रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल की। उस वक्त उन्होंने 14वीं लोकसभा में सबसे कम उम्र के सांसद बनने का रिकार्ड बनाया। इसी के साथ धर्मेंद्र का भी राजनीति में कैरियर शुरू हो गया।

डिंपल यादव
पिता द्वारा राजनीति पदार्पण करने के इस नायाब तरीके को बेटे अखिलेश यादव ने भी अाजमाया। 2009 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज और फिरोजाबाद से जीतकर फिरोजाबाद की सीट की अपनी पत्नी डिंपल यादव के लिए छोड़ दी, लेकिन इस बार पासा उलट पड़ गया और डिंपल को कांग्रेस उम्मीदवार राजबब्बर ने हारा दिया।
पहली बार में इस खेल में मात खाने बावजूद अखिलेश का भरोसा इस फार्मूले से नहीं टूटा। 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश ने अपनी कन्नौज लोकसभा सीट एक बार फिर डिंपल के लिए खाली की। इसबार सूबे में सपा की लहर का आलम ये था कि किसी भी पार्टी की डिंपल के खिलाफ प्रत्याशी उतारने की हिम्मत नहीं हुई और वो निर्विरोध जीती।

तेज प्रताप यादव
तेजप्रताप यादव सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के पोते हैं। वे मैनपुरी से सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी और आजमगढ़ दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था। इसके बाद उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट मैनपुरी खाली कर दी थी। इस सीट पर उन्होंने अपने पोते तेज प्रताप यादव को चुनाव लड़ाया। तेजप्रताप ने भी अपने दादा को निराश नहीं किया और बंपर वोटों से चुनाव में जीत हासिल की। साथ ही इस राजनीति में धमाकेदार एंट्री की।

अक्षय यादव
अक्षय यादव मौजूदा समय में फिरोजाबाद से सपा सांसद हैं। अक्षय यादव भी पहली बार चुनाव जीतकर सक्रिया राजनीति में उतरे हैं। यह सीट यादव परिवार की पारंपरिक संसदीय सीट रही है। जब अखिलेश यादव ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद और कन्नौज से चुनाव लड़ा था, उस समय फिरोजाबाद के चुनाव प्रबंधन की कमान अक्षय यादव ने संभाली थी। इसके बाद अखिलेश ने फिरोजाबाद सीट छोड़ दी और उपचुनाव में पत्नी डिंपल यादव को चुनाव लड़ाया। भाभी डिंपल का चुनाव प्रबंधन भी अक्षय ने संभाला था, लेकिन कांग्रेस नेता राज बब्बर ने डिंपल को हरा दिया था।

प्रेमलता यादव
मुलायम सिंह यादव के भाई राजपाल यादव की पत्नी हैं प्रेमलता यादव। 2005 में वह इटावा की जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थीं।

सरला यादव
यूपी के कैबिनेट मिनिस्टर शिवपाल यादव की पत्नी हैं सरला यादव। 2007 में जिला सहकारी बैंक इटावा की राज्य प्रतिनिधि बनाया गया था।

अरविन्द यादव
2012 में वह छिबरामऊ से विधानसभा चुनाव जीते थे। इससे पहले भी वह इसी सीट से विधायक बने थे।

अक्षय यादव
रामगोपाल यादव का बड़े बेटे हैं अक्षय यादव। फिरोजाबाद से लोकसभा सांसद हैं अक्षय यादव। 


आदित्य यादव
शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव को जसवंत नगर लोकसभा सीट से एरिया इंचार्ज थे। मौजूदा समय में वह यूपीपीसीएफ के चेयरमैन हैं।

अंशुल यादव
राजपाल और प्रेमलता यादव के बड़े बेटे हैं अंशुल यादव। 2016 में इटावा से निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए हैं अंशुल यादव।

संध्या यादव
सपा सुप्रीमो की भतीजी और सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष के जरिए राजनीतिक एंट्री की है। उन्हें मैनपुरी से जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए निर्विरोध चुना गया है।