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गुरुवार, 21 जनवरी 2016

लालू यादव 9वीं बार बने राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष


लालू प्रसाद यादव को राष्ट्रीय जनता दल का नौवीं बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. 17 जनवरी, 2015 को पार्टी के निर्वाचन अधिकारी जगदानंद सिंह ने लालू के अध्यक्ष चुने जाने का औपचारिक ऐलान किया. इस अवसर पर लालू यादव के साथ राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव और रघुवंश प्रसाद सिंह समेत पार्टी के सभी नेता और पदाधिकारी अधिवेशन में मौजूद हैं. अध्यक्ष चुने जाने पर राजद कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी.

इससे पहले राजद कार्यकर्ता 25 बुलेट से एस्कॉर्ट करके उन्हें राष्ट्रीय परिषद की बैठक स्थल तक ले गए.  10 सर्कुलर रोड स्थित आवास से अधिवेशन स्थल श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल तक लालू यादव का भव्य स्वागत किया गया. बैंड बाजे के साथ सड़क के दोनों किनारे राजद कार्यकर्ता लालू के स्वागत के लिए मौजूद थे .

गौरतलब है कि लालू यादव पहली बार  1997 को नई दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे. तब उन्होंने जनता दल से अलग होकर राजद का गठन किया था. पार्टी के सहायक राष्ट्रीय निर्वाचन पदाधिकारी चितरंजन गगन ने बताया कि पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सभी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए लालू यादव को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया.

रविवार, 22 नवंबर 2015

तेजस्वी यादव बने बिहार के उप-मुख्यमंत्री


बिहार में हुए विधान सभा चुनावों ने जहाँ नई इबारतें लिखीं, वहीँ इसके माध्यम से तेज तर्रार और अपनी हाजिर जवाबी के लिए मशहूर राजनीतिज्ञ लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के  दोनों बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव ने भी बकायदा अपना राजनैतिक कैरियर आरम्भ किया है। तेजस्वी यादव जहाँ राष्ट्रीय जनता दल के विधायक दल के नेता चुने गए, वहीँ 20 नवंबर, 2015 को नीतीश मंत्रिमंडल में उप मुख्यमंत्री का ओहदा भी मिला।  वे भारत में सबसे कम उम्र के विधायक दल के नेता और उपमुख्यमंत्री बने हैं।इसके अलावा वे पथ निर्माण, भवन निर्माण, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय की ज़िम्मेदारी भी संभालेंगे। वहीं लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को स्वास्थ्य, लघु जल-संसाधन और पर्यावरण एवं वन विभाग का मंत्री बनाया गया है। 

क्रिकेटर से डिप्टी चीफ मिनिस्टर तक : 
9 नवम्बर 1989 को जन्मे तेजस्वी यादव का राजनीति में कदम रखने से पहले सपना एक सफल क्रिकेटर बनने का था, जिसकी शुरुआत उन्होंने साल 2009 में झारखंड की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू करके की थी, लेकिन आगे चलकर उन्होंने राजनीति की ओर रुख कर लिया। पटना के मशहूर लालू-राबड़ी परिवार में जन्मे नौ बड़े भाई-बहनों में सबसे छोटे तेजस्वी अपने क्रिकेट करियर के प्रति काफी संजीदा थे। उन्होंने अपना लुक भी कुछ ऐसा ही रखा था। अपने लंबे बालों, थोड़ी बढ़ी हुई दाढ़ी और दिल्ली पब्लिक स्कूल, मथुरा रोड के बैकग्राउंड के कारण वे अपनी उम्र के बच्चों के बीच अलग ही नजर आते थे। उन्होंने कक्षा 9 में स्कूल से नाता तोड़ लिया।  तेजस्वी चार सत्रों तक दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के रोस्टर में रहे। वे स्पिन के साथ-साथ सीम बॉलिंग भी कर सकते थे और निचले क्रम में बैटिंग भी कर सकते थे, इस प्रकार वे एक ऑलराउंडर रहे, लेकिन वे दिल्ली की आईपीएल टीम के प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं बना सके। इस पर हमेशा विनोदपूर्ण अंदाज में रहने वाले उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने कहा था, 'कम से कम उसे खिलाड़ियों को पानी पिलाने का मौका ही मिल जाता।' मात्र एक प्रथम श्रेणी गेम, दो ए-श्रेणी मैच और 4 टी-20 मैचों का अनुभव रखने वाले तेजस्वी का क्रिकेट करियर वास्तव में कभी भी परवान नहीं चढ़ा। बैटिंग में उनका सर्वोच्च स्कोर 19 रन रहा, वहीं बॉलिंग में उनके नाम 10 ओवर में 1 विकेट रहा। ये आंकड़े उनके करियर की कहानी सहज ही बयां कर देते हैं।   तेजस्वी सच्चे टीममैन थे। भले ही वे आईपीएल मैच खेलने का मौका नहीं मिलने पर निराश थे, लेकिन उन्हें टीम कंपोजिशन और टीम के तालमेल का महत्व पता था। अब तेजस्वी का यह क्रिकेटीय अनुभव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गठबंधन वाली कैबिनेट में उन्हें सही भूमिका निभाने में मदद करेगा।


आलोचनाओं का जवाब दिया तेजस्वी ने :

तेजस्वी यादव को डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनाते ही विरोधियों ने उन पर राजनैतिक वार करना आरम्भ कर दिया।  कहा गया कि वे सिर्फ 9वीं पास हैं और  सिर्फ 26 साल के हैं। उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और जीतने के बाद उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उनके पिता लालू प्रसाद जी ने ने पार्टी के सीनियर और अनुभवी नेताओं को इग्नोर किया है। इस पर बिहार के डिप्टी चीफ मिनिस्टर तेजस्वी यादव ने अपने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा है कि वे बिहार का विकास करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि किताब का कवर पेज देखकर उसका फैसला न करें। उन्होंने साफ किया कि बिहार में विकास का नया रिकॉर्ड बनेगा। उन्होंने अपनी आलोचनाओं पर शनिवार को कुछ ट्वीट्स भी किए। 

ट्वीट्स में  तेजस्वी ने कहा कि, 'मैं ब्रांड बिहार की वैल्‍यू बढ़ाने और राज्‍य के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा। किसी को भी कवर देखकर किताब पर फैसला नहीं करना चाहिए। अमृत की मिठास और दवाई की कड़वाहट का असली फायदा वक्‍त के साथ पता लगता है।'

 'बिहार के विकास में अपनी ओर से मैं कोई कसर नहीं छोडूंगा। ब्रांड बिहार को आगे ले जाऊंगा, ताकि नीतीश कुमार को मुझे डिप्टी सीएम बनाने पर गर्व हो।'

 'सनकी, पूर्वाग्रही और हित साधने वाले लोग भले ही उसे खारिज करें, लेकिन बिहार के लोगों ने युवाओं पर जो भरोसा जताया है, उनको इसका फल जरूर मिलेगा।'

 'बिहार का विकास करने में हम कोई कसर नहीं छोडेंगे। बिहार की भलाई के लिए युवा कैबिनेट के जोश को अनुभवी सीएम से बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा।'
 - राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल : Ram Shiv Murti Yadav @ www.yadukul.blogspot.com
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रविवार, 1 मार्च 2015

तेज प्रताप यादव व राजलक्ष्मी के बहाने मुलायम-लालू राजनीति की नई पारी खेलने को तैयार

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के पोते तेज प्रताप यादव ने राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी राजलक्ष्मी संग गुरुवार, 26 फरवरी को ब्याह रचाया। लालू और मुलायम अब एक-दूसरे के समधी हैं। दिल्ली के फाइव स्टार होटेल अशोक में हुई शाही शादी में लालू प्रसाद यादव की सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी और मुलायम सिंह यादव के पौत्र सांसद तेजप्रताप सिंह परिणय सूत्र में बंधे।  शादी में शामिल होने वालों में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, बिहार के सीएम नीतीश कुमार के अलावा पक्ष-विपक्ष के तमाम दिग्गज नेता शामिल थे।  इसमें कई बिजनसमेन, बॉलिवुड ऐक्टर, राज्यपाल के अलावा दूसरे क्षेत्रों के नामी लोग शामिल हुए।



( इस युगल को शानदार वैवाहिक जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा की जानी चाहिए कि रिश्तों का यह गठबंधन राजनीति में भी नए अध्याय आरम्भ करेगा - राम शिव मूर्ति यादव, यदुकुल)
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बुधवार, 2 सितंबर 2009

यादवी राजनीति बनाम मुलायम-लालू

पिछले महीने आगरा में समाजवादी पार्टी का विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन तीन दिनों तक चला। खूब भाषण हुए। कांग्रेस और बसपा दोनों निशाने पर। लेकिन मीडिया का फोकस रहा समाजवादी चोले में रंगे कल्याण सिंह पर और फोटोग्राफरों ने सबसे ज्यादा फ्लैश चमकाया-सिनेस्टार व रामपुर से सांसद जयाप्रदा के चेहरे पर। इन सब के बीच जमीनी कार्यकर्ताओं की नजर उन बंबइया चेहरों केा तलाश रही थी जिन्हें पार्टी ने लोकसभा चुनाव में गाजे-बाजे के साथ टिकट दिया था। मसलन मुन्ना भाई यानी संजय दत्त। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं लेकिन राष्ट्रीय अधिवेशन में नजर नहीं आए। भोजपुरी स्टार एवं गोरखपुर से सांसदी का चुनाव लड़े मनोज तिवारी भी नदारद। पता किया गया तो मालूम चला कि दोनों शूटिंग में व्यस्त हैं। बचीं लखनऊ से प्रत्याशी बनाई गईं नफीसा अली, तो वह भी नहीं आईं। उनके बारे में तो लोग बोल रहे हैं कि कंाग्रेस से फिर रिश्ते जोड़ने में लगी हैं। पार्टी वाले नाहक नहीं पूछ रहे हैं कि इन मौसमी चेहरों को टिकट और पद से नवाजने का क्या फायदा। उधर अमर सिंह सिंगापुर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं, पर भारतीय राजनीति उन्हें करवटें नहीं बदलने दे रही है। हर दिन प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रानिक चैनल पर उनके बयान आ रहे हैं। कई बार तो मीडिया ऐसे पेश आता है मानो अमर सिंह समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा हों और मुलायम सिंह पार्टी के महासचिव। इसे मीडिया की खुराफात कहें या मुलायम सिंह की मजबूरी। फिलहाल जो भी हो यादवों के नाम पर राजनीति करने वाले मुलायम सिंह यादव लोकसभा चुनावों से कोई सबक लेने को तैयार नहीं दिखते। उधर उनके पुत्र अखिलेश यादव भी युवाओं पर कोई जादू करने में असफल रहे। विधान सभा उपचुनावों में करारी हार इसी का परिणाम है। सबसे रोचक तथ्य तो यह है कि उधर सपा का विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन चल रहा था, दूसरी तरफ विधानसभा चुनावों में वे शिकस्त का सामना कर रहे थे। निश्चिततः यह समय है मुलायम सिंह के आत्मविश्लेषण एवं चिंतन का। एक ऐसा चिंतन जो सतही न हो, चाटुकारों के बीच न हों एवं ग्लैमर की चासनी में सजा न हो।

लालू प्रसाद यादव का हाल भी बहुत अच्छा नहीं है। कभी लोकसभा में 22 सीटें लाने वाले लालू यादव इस बार केवल 4 सीटें ही जीत पाये। उन्हें कोई मंत्रालय भी नहीं मिला, जिसकी तड़प अब भी बरकरार है। पर लालू यादव के साथ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे मीडिया-फेस हैं और गाहे-बगाहे चर्चा में बने रहते हैं। फिलहाल उनकी समस्या यह है कि उन्हें लोसभा में फ्रंट रो की सीट छोड़नी पड़ेगी और उनकी पाटी्र के आफिस के लिए फस्र्ट फ्लोर से हटाकर थर्ड फ्लोर पर जगह दिए जाने की संभावना है, क्योंकि लोकसभा का नियम है कि यदि 10 से कम सीटें किसी पार्टी की आती हैं तो उस पार्टी को कार्यालय के लिए जगह थर्ड फ्लोर पर ही मिलती है। फिलहाल लालू प्रसाद इस मुसीबत से बचने का जुगाड़ ढूढ़ने में लगे हुए हैं। काश ऐसी ही मेहनत वे जनता के बीच जाकर करते तो शायद यह दिन उन्हें न देखना पड़ता।

शुक्रवार, 21 अगस्त 2009

लोकप्रिय यदुवंशी राजनेता: लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद यादव ने एक राजनेता के रूप में काफी ख्याति अर्जित की। लालू प्रसाद यादव का अंदाज ही निराला है। कभी-कभी उनके विरोधी उन्हें ‘‘पाॅलिटिक्स का जोकर‘‘ भी कहते हैं पर उनके मैनेजमेंट के हुनर को देखते हुए तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों और यहांँ तक कि विदेशों से उन्हें लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया गया। आलम ये है कि उन पर किताब लिखने से लेकर उनसे मिलते-जुलते खिलौनों तक बाजार में उतारने की होड़ मची रहती है। प्रबंधन पर 40 से भी अधिक पुस्तकें लिख चुके प्रख्यात लेखक प्रमोद बत्रा लालू के नुस्खों पर भी अब एक किताब लिखने जा रहे हैं। बिहार में लम्बे समय तक मुख्यमंत्री (10 मार्च 1990-31 मार्च 1995 एवं 4 अप्रैल 1995-25 जुलाई 1997) के रूप में शासन करने वाले लालू यादव ने केन्द्रीय रेलमंत्री के रूप में रेल सेवा का भी भारत में कायापलट कर डाला।

ग्रामीण जीवन से जुड़े प्रबंधन के सहज तत्वों को मंत्रालय के रोजमर्रा के कार्यों से जोड़ने का लालू यादव का कौशल बेमिसाल है। अपनी देहाती छवि के अनुरूप उन्होंने पाश्चात्य अर्थव्यवस्था के नियमों का अनुसरण करने की बजाय देशी नुस्खा दे डाला कि यदि गाय को पूरी तरफ नहीं दुहोगे तो वह बीमार पड़ जाएगी। भूतल परिवहन क्षेत्र के जिस सबसे बड़े सरकारी उपक्रम को राकेश मोहन समिति की रिपोर्ट में घाटे का सौदा करार दे दिया गया था, वही लालू यादव के कार्यकाल में लगातार अपने कारोबार में उल्लेखनीय सुधार करता रहा। यह लालू प्रसाद यादव की प्रबन्धन क्षमता का ही कमाल था कि रेलवे की व्यवसायिक सफलता की कहानी को समझने के लिए हार्वर्ड के अकादमीशियनों और एचएसबीसी-गोल्डमैन शैच्स व मेरिल लिंच जैसे कई अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के विशेषज्ञ उनके कार्यकाल में रेल मंत्रालय के मुख्यालय का दौरा करने आये। यही नहीं भारतीय प्रबंध संस्थान, बंगलौर और भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रशिक्षण देने वाली लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय अकादमी, मसूरी ने लालू यादव को व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया। भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद ने अपने पाठ्यक्रम में लालू की रेल की कहानी को विशेष विषय के रूप में शामिल किया और स्वयं लालू प्रसाद यादव ने इस संस्थान के विद्यार्थियों की मैनेजमेंट की क्लास ली। भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद के निदेशक बकुल एच0 ढोलकिया के अनुसार- ‘‘हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि श्री लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक छवि कैसी है। हम तो बस इतना जानते हैं कि वह व्यक्ति मैनेजमेंट गुरू होने के काबिल है और हम हमेशा नई चीजें सीखने के लिए तैयार रहते हंै।’’

बुधवार, 13 मई 2009

मशहूर फोटोग्राफर रघु राय भी अब लालू यादव के मुरीद

लालू प्रसाद यादव का अंदाज ही निराला है। कभी-कभी उनके विरोधी उन्हें ‘‘पाॅलिटिक्स का जोकर‘‘ भी कहते हैं तो उनके मैनेजमेंट के हुनर को देखते हुए तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों और यहां तक कि विदेशों से उन्हें लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। आलम ये है कि उन पर किताब लिखने से लेकर उनसे मिलते-जुलते खिलौनों तक बाजार में उतारने की होड़ मची है। इस कड़ी में मशहूर फोटोग्राफर रघु राय भी अब लालू के मुरीद हो गए हैं। बकौल रघु राय लालू बेहद फोटोजेनिक हैं। एक वर्कशाप में रघु राय ने लालू यादव की तस्वीर खींचने की दिली-ख्वाहिश जाहिर की। वैसे रघु राय इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा समेत तमाम मशहूर लोगों को अपने कैमरे में कैद कर चुके हैं और अपनी फोटोग्राफी के लिए वे विश्व स्तर पर मशहूर हैं। आखिरकार जिस लालू प्रसाद यादव को लोग बन्दर से लेकर जोकर तक और भैंस चरवाहे की उपमाओं से नवाजते रहे हैं, ऐसे में रघु राय का कहना कि लालू यादव की पर्सनाॅलिटी डायनेमिक है और उनके चेहरे के भावों को कैमरे में कैद करना एक अनोखा अनुभव होगा, तमाम मिथकों को तोड़ता नजर आता है।

रविवार, 4 जनवरी 2009

लालू प्रसाद यादव पर एनीमेशन फिल्म

राजनीति के अखाड़े में अपने जुमलों से मशहूर लालू प्रसाद यादव एक बार फिर धमाके की तैयारी में हैं। बिहार के कार्टूनिस्ट पवन ने उनकी लाजवाब हाजिरजवाबी और गंवई अंदाज पर एक एनीमेशन फिल्म बनाई है। कार्टूनिस्ट कैरेक्टर के तौर पर लालू प्रसाद यादव की पहली क्लिप ने बाजार में धूम मचाना शुरू कर दिया है। इस एनीमेशन प्रोजेक्ट को मंजूरी देने में लालू प्रसाद यादव ने एक सेकंड की भी देरी नहीं लगाई। लोकसभा चुनाव के पहले यदि लालू प्रसाद यादव का यह कार्टून हिट हो गया तो अन्य लोग भी ऐसे ख्वाब पाल सकते हैं। फिलहाल तो लालू प्रसाद यादव ने बाजी मार ली है। 'यदुकुल' की तरफ से लालू प्रसाद यादव जी को शत्-शत् बधाई !!