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गुरुवार, 8 सितंबर 2016

सृष्टि को विनाश से बचने के लिए वृक्षारोपण जरुरी - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

 वृक्षारोपण मानव समाज का वैयक्तिक और सामाजिक दायित्व है। प्राचीन काल से ही मानव और वृक्षों का घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है। मानवीय सभ्यता-संस्कृति के आरम्भिक विकास का पहला चरण भी वन-वृक्षों  की सघन छाया में ही उठाया गया। ऐसे में उनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है। अपने और आने वाली पीढ़ी के जीवन को बचाने के लिए हमें वृक्षारोपण करना ही होगा। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने डाक विभाग द्वारा आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में कहीं। इस अवसर पर श्री यादव ने पौधरोपण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वृक्ष कभी भी हमसे कुछ नहीं लेते, सिर्फ देते हैं।  ऐसे में यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में एक पेड़ लगाने और उसे भरपूर समृद्ध करने का भी संकल्प ले ले तो पर्यावरण को सतत सुरक्षित किया जा सकता है। विद्यार्थियों और युवाओं को नैतिक शिक्षा के तहत वृक्षारोपण के बारे में बताने और उन्हें इस ओर प्रेरित करने पर भी श्री यादव ने जोर दिया। 

श्री यादव ने कहा कि हमारी परंपरा में एक वृक्ष को दस पुत्रों के सामान मन गया है, क्योंकि वृक्ष पीढ़ियों तक हमारी सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि  वृक्षारोपण और उनके रक्षण के  दायित्व का निर्वाह कर सृष्टि को भावी विनाश से बचाया जा सकता है । 

इस अवसर पर डाक विभाग  के तमाम अधिकारी  और कर्मचारी  उपस्थित रहे।

शनिवार, 25 अक्टूबर 2014

‘आत्मदीपो भव’ बन आगे बढ़ती रहीं कविता

जज्बा हो तो कुछ भी असंभव नहीं। यह बात सच लागू होती है कविता यादव पर।  बारहवीं पास करने के बाद ही इलाहाबाद शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार में शादी हो गई। तकरीबन सात बरस का खुशहाल पारिवारिक जीवन बीता लेकिन एक दिन अचानक पति विजय सिंह यादव को ‘साइलेंस हार्ट हटैक’ हुआ और कविता अकेली हो गई। यह हादसा उसकी कल्पना से परे था लेकिन उसने बड़ी मुश्किल से खुद और पति की ओर से छोड़े गए गैस एंजेसी के कारोबार को संभाला। छह बरस के मितुल और ढाई बरस के तेजस की देखभाल भी बड़ी जिम्मेदारी थी लेकिन ससुर रिटायर्ड जस्टिस सखाराम सिंह यादव सहित पूरे परिवार ने भरपूर सहयोग दिया।

शुरुआत में तो कविता कभी कभार ही किसी जरूरी काम से एजेंसी पर जाती थीं लेकिन उन्हें अपने पर पूरा भरोसा था सो साल भर छह बरस के मितुल को पढ़ने के लिए देहरादून भेजने के बाद उन्होंने पूरी तरह काम संभाल लिया। डिलेवरी मैन और उपभोक्ताओं से लेकर इंडियन ऑयल के अधिकारियों तक से आए दिन जूझना उनकी दिनचर्या बन गई। धैर्य से लोगों की शिकायतें दूर करने सहित काम को बेहतर बनाने का क्रम जारी रहा।

एक बार एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामूली सी बात पर तीन वर्ष के लिए उनकी एजेंसी के लिए गैस के नए कनेक्शन पर रोक लगा दी। कागजी औपचारिकताओं के बाद भी आदेश बहाल नहीं हुआ तो कविता ने दफ्तर पहुंचकर सबके सामने कारण पूछा, तब जाकर मामला सुलझा। कई बार शिकायतें दूर करने के लिए वह उपभोक्ताओं के घर तक भी गईं। शुरुआत में संकोची कविता दफ्तर की मीटिंग में पीछे बैठतीं लेकिन बेहतर काम से उन्होंने अगली पंक्ति में जगह बना ली।

‘आत्मदीपो भव’ यानी खुद अपना प्रकाश बनती कविता आगे बढ़ते हुए दूसरों की मुश्किलों में भी खड़ी रहीं। बिना जान पहचान किसी मरीज की जिंदगी बचाने के लिए खून देने से लेकर किसी जरूरतमंद की बेटी की शादी सहित अनाथालय, विकलांग केंद्र के किसी बच्चे को हर तरह से मदद जैसे कामों में वह हमेशा आगे रहीं। कुल मिलाकर अपने आंगन की लक्ष्मी बनने सहित कविता, कई परिवारों के लिए भी किसी ‘लक्ष्मी’ से कम नहीं।

शनिवार, 23 मार्च 2013

साहित्यकार राजेन्द्र यादव एवं पहलवान द्वय मेवालाल यादव व नरसिंह यादव को भी मिला यश-भारती सम्मान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कला, साहित्य, रंगमंच, फिल्म व खेल जगत से जुड़े 15 विशिष्ट लोगों को राज्य सरकार के सर्वोच्च सम्मान यश भारती पुरस्कार प्रदान किए. यह पुरस्कार सामाजिक चिन्तक डॉ. राम मनोहर लोहिया की 103वीं जयंती पर उत्तर प्रदेश  की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक समारोह में 23 मार्च 2013 को प्रदान किए गए. प्रत्येक पुरस्कार प्राप्तकर्ता को पुरस्कार स्वरूप 11 लाख रुपए का चेक, स्मृति चिह्न और अंग वस्त्र दिया गया.
  
पुरस्कार से सम्मानित व्यक्तियों की सूची निम्नलिखित है: 
• पदमभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र (गायक) 
• राजेन्द्र यादव (साहित्यकार) 
• प्रो. सत्यमित्र दुबे (साहित्यकार) 
• डा. रामकृष्ण राजपूत (साहित्यकार) 
• मस्तराम कपूर (साहित्यकार) 
• डा. सरिता शर्मा (कवियत्री) 
• वसीम बरेलवी (उर्दू शायर) 
• आमिर रजा हुसैन (रंगकर्मी) 
• अभिजीत भट्टाचार्य (पाश्र्व गायक) 
• जावेद अली (पाश्र्व गायक) 
• विवेक गुप्त (हाकी) 
मेवालाल यादव (कुश्ती) 
• नरसिंह यादव (कुश्ती) 

• सुशी अंशु तोमर (कुश्ती) 
• सुरेश कुमार रैना (क्रिकेटर) 

क्रिकेटर सुरेश रैना का पुरस्कार उनके भाई दिनेश रैना तथा पाश्र्व गायक जावेद अली का पुरस्कार उनके पिता हामिद अली, साहित्यकार राजेन्द्र यादव का पुरस्कार उनकी पुत्री रचना यादव, पाश्र्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य का पुरस्कार उनके पुत्र ध्रुव, साहित्यकार डा. मस्तराम का पुस्कार संस्कृति सचिव संजीव शरण ने प्राप्त किया.

विदित हो कि यश भारती पुरस्कार उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार द्वारा वर्ष 1994 में शुरू किया गया था. यह पुरस्कार उन लोगों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने कला और साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिया हो. परन्तु पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व में बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार द्वारा यह पुरस्कार वर्ष 2007 में बंद कर दिया गया था.

रविवार, 22 जनवरी 2012

आज़मगढ़ के ओम प्रकाश यादव को मिलेगा वीरता का संजय चोपड़ा अवार्ड

चार सितंबर 2010 का वह भयावह दिन.. आजमगढ़ जनपद में रास्ते में वैन में लगी गैस किट में शॉर्ट सर्किट की वजह से शोला बनी स्कूली वैन में बच्चे चीख रहे थे। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या करें। चालक बच्चों को बचाने की बजाय गेट खोलकर भाग गया। इसी बीच आग ने पूरी वैन को चपेट में ले लिया। इन्हीं बच्चों के बीच वाहन में फंसे कक्षा 7 के छात्र ओमप्रकाश यादव ने जान बचाकर भागने की बजाय साहस का परिचय दिया और आठ बच्चों को सकुशल बाहर निकाला और ऐसा करने के दौरान वह 70 प्रतिशत तक जल गए थे। तीन माह तक वह अस्पताल में जीवन और मौत से संघर्ष कर रहा था। इस दौरान उसकी पढ़ाई भी बाधित हो गयी। खास बात यह हैं कि उसके एक हाथ की प्लास्टिक सर्जरी की भी जरुरत है। वहीं उसके शरीर के घाव अभी तक नहीं भरे हैं. अब उसे इस वीरता के लिए गणतंत्र दिवस प्रधानमंत्री द्वारा संजय चोपड़ा अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। ओमप्रकाश यादव को जब बताया गया कि उसे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलने का मौका मिलेगा, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दूसरों की जान बचाने के लिए दाहिना हाथ और चेहरा झुलसा लेने वाले ओम प्रकाश का कहना है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान इलाज के लिए कहेगा। हादसे के डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह जख्मी अंगों की प्लास्टिक सर्जरी करा पाए। ओम प्रकाश यादव ने कहा, "मैं काफी गर्व का अनुभव करता हूं क्योंकि मैंने अपने स्कूल के साथियों का जीवन बचाया। मैं प्रधानमंत्री के हाथों राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने को लेकर काफी खुश हूं। मेरा संदेश है कि लोगों को एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए।"

ओमप्रकाश यादव मूलत: आजमगढ़ के बिलरियागंज क्षेत्र के बगवार गांव के निवासी हैं. उनके पिता लालबहादुर एक साधारण किसान हैं। परिवार में तीन बहनें हैं। उनका कहना है कि जिस समय यह घटना हुई उस वक्त तो उनको कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि हे भगवान अब क्या होगा। आज जब उनका बेटा सकुशल उनके साथ है तो काफी खुशी है। अब खुशी इस बात की और है कि उनके पुत्र के साहस को सरकार ने समझा और वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया। ओमप्रकाश की मां संध्या देवी ने कहा कि साहस का सम्मान तो होना ही चाहिए। गाँव के प्रधान अली अख्तर उर्फ मोती जिन्होंने घटना के समय अपने सहयोगियों के साथ गंभीर रुप से झुलसे बच्चों का अपने वाहन से जिला अस्पताल में भर्ती कराया उनका कहना है कि सच्चे मायने में ओमप्रकाश बहादुर है। इसकी जितनी भी तारीफ की जाय कम है।
प्रस्तुति- राम शिव मूर्ति यादव : यदुकुल

गुरुवार, 9 जून 2011

साइकिल यात्री हीरालाल यादव के जूनून को सलाम

हीरालाल यादव का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. इन पर हमने 'यदुकुल' पर पूर्व में भी जानकारी दी थी.बगैर सीट वाली साइकिल से 54 वर्षीय हीरालाल यादव पिछले एक दशक में देश और दुनिया में 65,000 किमी की दूरी नाम चुके हैं, कभी वे किसी युद्धबंदी के परिजनों के पास बैठकर खत लिख रहे होते हैं तो कभी शहीद के परिजन से दुःख बांटते हैं, अन्य दिनों में वे युद्धबंदियों की रिहाई पर केंद्रित अपनी प्रदर्शनी में व्यस्त होते हैं या फिर सभागार में अभागे फौजियों और उनके परिजनों पर लिखी कविताएं सुना रहे होते हैं। गोरखपुर जिले के, पेशे से बीमा एजेण्ट हीरालाल यादव का यह जुनून 1997 में आजादी की स्वर्ण जयंती से शुरू हुआ. वे साइकिल से सद्भावना यात्रा पर निकल पड़े. 1999 में उन्होने कारगिल सलाम सैनिक यात्रा की. इसके बाद तो यह सिलसिला उनके जीवन का हिस्सा ही बन गया। हाल ही में 26-11 की आतंकी घटना में शहीद एन.एस. जी. कमांडो संदीप उन्नीकृष्णन के पिताजी के साथ इण्डिया गेट से गेट-वे-इण्डिया तक की सायकिल यात्रा करके हीरालाल यादव पुन: चर्चा में रहे !!





सफलता का गुरः कोई काम नामुमकिन नही है.
सबसे बड़ी बाधाः जब लोग इस अभियान के ’फायदे’ पर बहस करते हैं.
सबसे बड़ी ताकतः फल की दुकान चलाने वाली उनकी पत्नी शकुन्तला, जो अक्सर दौरे पर रहती है.
जिंदगी का सबसे अहम क्षणः 30 जुलाई 99 का दिन जब कारगिल में सैनिकों ने उनकी अगवानी की और उन्हें सगे भाई से ज्यादा सगा कहा.









हीरालाल यादव पर लखनऊ से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'दस्तक टाइम्स' (मई, 2011) की एक रिपोर्ताज की कापी यहाँ सुधि-पाठकों हेतु संलग्न है. इस पर चटका लगाकर इसे बड़ा करके पढ़ा जा सकता है

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

भ्रष्टाचारियों को सबक सिखा रहा है एक नौकरशाह : संतोष यादव


उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर जिले के जिलाधिकारी संतोष यादव की गिनती ईमानदार अधिकारियों में होती है. आजकल वह भ्रष्टाचारियों को सबक सिखा रहे हैं. इस पर 'जनसत्ता' अख़बार में प्रस्तुत रिपोर्ट यहाँ साभार प्रस्तुत है. संतोष यादव जैसे युवा जज्बे वाले अधिकारियों की बदौलत ही समाज प्रगति कर पता है. संतोष यादव को इस जज्बे के लिए बधाइयाँ !!

गुरुवार, 27 जनवरी 2011

ओमवीर यादव ने बनाया विमान

कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। इस कहावत को राजस्थान के सोरवा गांव के ओमवीर यादव ने एक वायुयान बना कर सही साबित कर दिया है। छोटे से गांव व साधारण किसान परिवार में जन्में 21 वर्षीय ओमवीर यादव ने कबाड़ से जुगाड़ वाली तकनीक अपनाकर यह विमान तैयार किया है। विमान को तैयार करने में उसे एक साल का समय लगा है। ओमवीर यादव ने उक्त विमान का प्रदर्शन गांव नसीबपुर स्थित राव तुलाराम शहीदी स्मारक पर किया। विमान को देखने के लिए भारी संख्या में लोग आए हुए थे। विमान में फिलहाल चालक व एक अन्य व्यक्ति बैठ सकता है।

ओमवीर यादव के नाना व साहित्यकार जसवंत प्रभाकर ने बताया कि ओमवीर का चयन 2008 में आईआईटी में हो गया था। उसकी रूचि कुछ नया करने की थी, जिसके कारण उसने गहन अध्यन व प्रयोग कर कम लागत से विमान तैयार किया है। ओमवीर ने बताया कि इस विमान में चालक के अलावा एक अन्य व्यक्ति बैठ सकता हैं। इसका वजन कुल 280 किलोग्राम है। उन्होंने यह जेट एक साल में तैयार किया है और उनको दसवीं बार में यह विमान तैयार करने में सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि उसके प्रयोग में अभी तक करीब 20 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। वहीं इस विमान के निर्माण में 50 हजार रुपये का खर्चा आया है। ओमवीर यादव के अनुसार जेट में मारुति जिप्सी का एक हजार सीसी का इंजन लगा हुआ है। जिसकी क्षमता 46 होर्स पावर है। ओमवीर ने दावा किया कि उसका जेट दो हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है। वहीं उसकी गति 150 किलोमीटर प्रति घंटा है। उसने बताया कि इसका प्रयोग विशाल भू-भाग के कृषि क्षेत्रों में कीटनाशक दवाओं के छिड़काव को अल्प समय में तथा प्राकृतिक आपदाओं में संकट के समय जीव रक्षा व राहत सामग्री पहुंचाने में कर सकते हैं। उसने बताया कि उनका लक्ष्य अब छह व आठ सीट वाला विमान बनाने का है। वहीं उसे बोइंग विमान कंपनी से जॉब का भी आफर मिल चुका है।

इस अद्भुत कार्य के लिए ओमवीर यादव को 'यदुकुल' की तरफ से हार्दिक बधाइयाँ !!

(फेसबुक पर हितेंद्र सिंह यादव द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी..)

सोमवार, 27 सितंबर 2010

मानवता को नई राह दिखाती कैंसर सर्जन डॉ. सुनीता यादव

भोपाल शहर की कैंसर सर्जन डॉ. सुनीता यादव को चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष ढंग से काम करने और गरीब कैंसर मरीजों को स्वयं चिकित्सा खर्च वहन करते हुए इलाज और सेवा देने के लिए जाना जाता है. वे शायद इस मुहावरे को चरितार्थ करती नजर आती हैं की डाक्टर भगवन का ही दूसरा रूप है. वस्तुत: बचपन में ही सुनीता यादव ने अपने दादाजी को कैंसर का इलाज नहीं मिल पाने के कारण खोया था। इसी बीमारी के चलते अपनी नानी को भी खोया और तभी से तय कर लिया कि बड़े होकर कैंसर सर्जन ही बनना है। 1985 में ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद 1994 में प्रैक्टिस शुरू की और 1995 से भोपाल में प्रैक्टिस शुरू कर दी। कैंसर सर्जन बनने के बाद कई गरीब कैंसर मरीजों को कम से कम खर्च पर इलाज दिया। सुनीता यादव 80 हजार रुपए में होने वाली सर्जरी को फिलहाल पांच से छह हजार रुपए में कर रही हैं। डॉ. यादव के पास अक्सर महीने में ऐसे दो-तीन केस आते हैं जिनके इलाज का खर्च माफ करना पड़ता है। डा0 सुनीता यादव इंडियन रेडक्रास सोसायटी में भी वे बतौर कंसल्टेंट अपनी सेवाएं दे रही हैं। वे कहती हैं, कैंसर पीड़ित महिलाओं को देखकर दुख होता है क्योंकि वे पारिवारिक जिम्मेदारियों ने इतनी उलझी रहती हैं कि चौथी स्टेज में इलाज के लिए आती हैं। महिलाओं को सलाह है कि वे अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें और प्रारंभिक लक्षण दिखने पर ही इलाज के लिए आएं।

डा0 सुनीता यादव को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए तमाम संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है. 21 मई, 2009 को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए उपराष्ट्रपति मोहम्मद हमीद अंसारी द्वारा नई दिल्ली स्थित आंध्र प्रदेश भवन में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें यह सम्मान राष्ट्रीय समता स्वतंत्र मंच के 82 वें शिखर सम्मेलन में दिया गया , जिसमें चिकित्सा, उद्योग, शिक्षा, समाज सेवा और न्याय के लिए अनुकरणीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है।

गौरतलब है कि इस सम्मान के लिए नामांकित होने पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलिराम भगत ने स्वयं उनका इंटरव्यू लिया था। डा0 सुनीता यादव ने न सिर्फ चिकित्सा जगत वरन पूरी मानवता को नई राह दिखाई है और ऐसे लोग ही समाज में प्रेरणा-स्रोत बनते हैं !!

बुधवार, 22 सितंबर 2010

भारी उद्योग एवं लोक उपक्रम राज्यमंत्री अरूण यादव का जज्बा...

आजकल जब स्वतंत्रता दिवस समारोहों को मात्र औपचारिकता निभाने के तौर पर ही देखा जाने लगा है, उस दौर में भारतीय राजनीति के कुछ युवा नेता इस बीत गए जमाने को लौटाने की कवायद में जुटे नजर आ रहे हैं। इसी में एक नाम है भारी उद्योग एवं लोक उपक्रम राज्यमंत्री अरूण यादव का जो पिछले छह साल से 14, 15 और 16 अगस्त को अपने गृह नगर खरगौन से 12 ज्योतिर्लिंगों में एक ओंकारेश्वर तक पदयात्रा करते हैं। हर साल 90 किमी0 की इस यात्रा में बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी उनके साथ होते हैं। 2005 में ही अपने कॅरियर की शुरुवात करने वाले यादव कहते हैं, “मैंने नीमाड़ इलाके में बारिश होने के लिए मन्नत मांगी थी और कहा था कि हर साल पैदल यात्रा करूँगा।” वाकई यह विचार राष्ट्रीय एकजुटता और क्षेत्रीय समृद्धि के संदेश से जुड़ा है

साभार : इंडिया टुडे- 1 सितम्बर 2010

बुधवार, 15 सितंबर 2010

जाति-गणना के फैसले का स्वागत...

सरकार अंतत: जाति-गणना के लिए राजी हो गई. लम्बे विरोध और तमाम झंझावातों के बाद ही सरकार को अंतत: यह सुधि आई कि इसके कितने फायदे हैं. जाति-गणना के पक्ष में 'यदुकुल' पर हमने पूरी एक सीरिज ही प्रकाशित की थी. खैर, देर से ही सही सरकार का यह फैसला स्वागत-योग्य है. आशा की जानी चाहिए कि इस गणना के बाद तमाम आमूल-चूल परिवर्तन देखे जा सकेंगें. !!

सोमवार, 6 सितंबर 2010

मृत्युभोज बंद कराने के लिए अलख जगा रही हैं सूरज कुमारी यादव

समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो रुढियों से परे नई नजीरें स्थापित करते हैं. यहाँ तक की इसमें उम्र भी बाधा नहीं आती. इसी कड़ी में इंदौर शहर की एक बुजुर्ग महिला ने मृत्युभोज बंद कराने के लिए सामाजिक जंग छेड़ रखी है। शुरुआत अपने पति रामदयाल यादव से की और उनके दिवंगत होने पर मृत्युभोज नहीं दिया। इसके बाद पिछले माह भाई जगतसिंह यादव के निधन होने पर भी इस कुप्रथा को नहीं होने दिया। शहर के साथ ही प्रदेश के करीब 50 गांवों में उन्होंने इसके खिलाफ अलख जगाया है।

ये जांबाज महिला हैं अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा (महिला) की अध्यक्ष 70 वर्षीय सूरजकुमारी यादव। उनके प्रयास से गुना, शिवपुरी, मुरैना जिलों में अधिकांश परिवारों में मृत्युभोज बंद हो गया है। जबलपुर, ग्वालियर में भी कुछ जगह सफलता मिली है। सागर जिले के ग्राम जलंधर में तो सभी समाज के लोगों ने मृत्युभोज बंद कराने की लिखित रजामंदी दी है।

श्रीमती यादव बताती हैं शहर में यादव समाज के 30 से ज्यादा परिवारों ने मृत्युभोज बंद करने का संकल्प लिया है। वे समाज के कार्यक्रमों में जाकर मृत्युभोज बंद कराने का प्रस्ताव रखकर उसे पारित कराते हैं। उन्होंने कहा परिजन के निधन पर चाहें तो कन्याओं और कर्मकांड कराने वाले पंडित को भोजन कराया जा सकता है। श्रीमती यादव का मानना है कि मृत्युभोज बंद करने वालों का शासन स्तर पर और समाज में सम्मान होना चाहिए।

करीब पांच साल पहले मेडिकल कॉलेज में देहदान की घोषणा कर चुकी श्रीमती यादव जनसहयोग से एक कोष भी बनाना चाहती हैं, जिससे जरूरतमंद महिलाओं की सहायता और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया जा सके।

इस उम्र में सूरजकुमारी यादव का यह जज्बा वाकई लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है !!

शनिवार, 28 अगस्त 2010

नारी सशक्तिकरण की पर्याय : फूलबासन यादव

महिलाएं आज न सिर्फ सशक्त हो रही हैं, बल्कि लोगों को भी सशक्त बना रही हैं. ऐसी ही एक महिला है-श्रीमती फूलबासन यादव.श्रीमती फूलबासन यादव राजनांदगांव जिले के ग्राम सुकलदैहान की निवासी हैं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के बीच सामाजिक चेतना जाग्रत कर उनके आर्थिक विकास के लिए जिला प्रशासन का सहयोग लेकर जिले में ग्यारह हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने इन महिला समूहों के माध्यम से लगभग साढ़े छह सौ गांवों में बाल विवाह, दहेज और शराब जैसी सामाजिक बुराईयों पर अंकुश लगाने के लिए जन-जागरण का ऐतिहासिक कार्य किया। छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए श्रीमती फूलबासन यादव के रचनात्मक कार्यों को देखते हुए उन्हें वर्ष 2004 में राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मिनी माता अलंकरण से सम्मानित किया था। राजधानी रायपुर में आयोजित 'राज्योत्सव' में मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों उन्हें राज्य स्तरीय इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया था। इसी कड़ी में श्रीमती यादव को वर्ष 2008 में उप राष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी के हाथों जमनालाल बजाज अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

श्रीमती यादव को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 9 मार्च, 2010 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने भी विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय योगदान के लिए 'राष्ट्रीय स्त्री शक्ति' के अंतर्गत कन्नगी एवार्ड से भी सम्मानित किया . गौरतलब है कि केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा स्त्री शक्ति पुरस्कार योजना के तहत देश की प्रसिध्द महिलाओं के नाम पर अलग-अलग एवार्ड दिए जाते हैं। राष्ट्रपति ने श्रीमती यादव को वर्ष 2009 के इस एवार्ड के अंतर्गत तीन लाख रूपए की सम्मान राशि और प्रशस्ति पत्र भेंटकर बधाई और शुभकामनाएं दी।

मंगलवार, 24 अगस्त 2010

वृक्षों को रक्षा-सूत्र बंधकर रक्षाबंधन मनाती : सुनीति यादव

रक्षाबंधन का पर्व करीब है। (24 अगस्त). यह सिर्फ भाई -बहन से जुड़ा नहीं बल्कि मानवता की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है. हममें से तमाम लोग अपने स्तर पर मानवता को बचने हेतु पर्यावरण संरक्षण में जुटे हुए हैं। इन्हीं में से एक हैं- जीवन के समानांतर ही जल, जमीन और जंगल को देखने वाली ग्रीन गार्जियन सोसाइटी की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुनीति यादव। पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही एवं छत्तीसगढ़ में एक वन अधिकारी के0एस0 यादव की पत्नी सुनीति यादव सार्थक पहल करते हुए वृक्षों को राखी बाँधकर वृक्ष रक्षा-सूत्र कार्यक्रम का सफल संचालन कर नाम रोशन कर रही हैं। इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें ‘महाराणा उदय सिंह पर्यावरण पुरस्कार, स्त्री शक्ति पुरस्कार 2002, जी अस्तित्व अवार्ड इत्यादि पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। सुनीति यादव द्वारा वृक्ष रक्षा-सूत्र कार्यक्रम चलाये जाने के पीछे एक रोचक वाकया है। वर्ष 1992 में उनके पति जशपुर में डी0एफ0ओ0 थे। वहां प्राइवेट जमीन में पांच बहुत ही सुन्दर वृक्ष थे, जिन्हें भूस्वामी काटकर वहां दुकान बनाना चाहता था। उसने इन पेड़ों को काटने के लिए जिलाधिकारी को आवेदन कर रखा था। अपने पति द्वारा जब यह बात सुनीति यादव को पता चली तो उनके दिमाग में एक विचार कौंध गया। राखी पर्व पर कुछ महिलाओं के साथ जाकर उन्होंने उन पांच वृक्षों की विधिवत पूजा की और रक्षा सूत्र बांध दिया। देखा-देखी शाम तक आस-पास के लोगों द्वारा उन वृक्षों पर ढेर सारी राखियां बंध गई। फिर भूस्वामी को इन वृक्षों का काटने का इरादा ही छोड़ना पड़ा और गांव वाले इन पेड़ों को पांच भाई के रूप में मानने लगे। इससे उत्साहित होकर सुनीति यादव ने हर गांव में एक या दो विशिष्ट वृक्षों का चयन कराया तथा वर्ष 1993 में राखी के पर्व पर 17000 से अधिक लोगों ने 1340 वृक्षों को राखी बांधकर वनों की सुरक्षा का संकल्प लिया और इस प्रकार वृक्ष रक्षा सूत्र कार्यक्रम चल निकला। बस्तर के कोंडागांव इलाके में वृक्ष रक्षा सूत्र अभियान के तहत एक वृक्ष को नौ मीटर की राखी बांधी गई।


याद कीजिए 70 के दशक का चिपको आन्दोलन। सुनीति का मानना है कि चिपको आन्दोलन वन विभाग की नीतियों के विरूद्ध चलाया गया था जबकि वृक्ष रक्षा सूत्र वन विभाग एवं जनता का सामूहिक अभियान है, जिसे समाज के हर वर्ग का समर्थन प्राप्त है। यह सुनीति यादव की प्रतिबद्वता ही है कि वृक्ष रक्षा सूत्र कार्यक्रम अब देश के नौ राज्यों तक फैल चुका है। सुनीति इसे और भी व्यापक आयाम देते हुए ‘‘पौध प्रसाद कार्यक्रम‘‘ से जोड़ रही हैं। इसके लिए वे देश के सभी छोटे-बड़े धार्मिक प्रतिष्ठानों से सम्पर्क कर रही हैं कि वे भक्तों को प्रसाद के रूप में पौधे बांटे, ताकि वे उन पौधों को श्रद्धा के साथ लगायें, पालें-पोसें और बड़ा करें। यही नहीं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों, वनौषधियों के बीज पैकेट भी प्रसाद के रूप में बांटे जा रहे हैं। सुनीति यादव का मानना है कि वृक्ष भगवान के ही दूसरे रूप हैं। जब वह कहती हैं कि भगवान शिव की तरह वृक्ष सारा विषमयी कार्बन डाई आक्साइड पी जाते हैं और बदले में जीवन के लिए जरूरी आक्सीजन देते हैं, तो लोग दंग रह जाते हैं। सुनीति यादव का स्पष्ट मानना है कि-‘‘ईश्वर ने हम सभी को पृथ्वी पर किसी न किसी उद्देश्य के लिए भेजा है। आइए, उसके सपनों को साकार करें। धरती पर हरियाली को सुरक्षित रखकर हम जिन्दगी को और भी खूबसूरत बनाएंगे, कच्चे धागों से हरितिमा को बचाएंगे। ताज और मीनार हमारे किस काम के, जब पृथ्वी की धड़कन ही न बच सके। कल आने वाली पीढ़ी को हम क्या सौगात दे सकेंगे? आइए, रक्षाबंधन के इस पर्व पर हम भी ढेर सारे पौधे लगाएं और लगे हुए वृक्षों को रक्षा-सूत्र बंधकर उन्हें बचाएं।‘‘


आप सभी को रक्षा-बंधन पर्व पर ढेरों शुभकामनायें !!

साभार : आकांक्षा यादव : शब्द-शिखर

मंगलवार, 20 जुलाई 2010

यादव जाति का अनोखा संग्रह

जातीय अस्मिता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। कोई इसे छुपाकर प्रर्दशित करता है तो कोई इसी में रचनात्मकता तलाश लेता है। उत्तर प्रदेश में झांसी के रिटायर्ड शिक्षक रघुवीर सिंह यादव ने ऐसा ही कुछ रोचक कार्य किया है। उन्होंने यादव जाति के लोगों की 26 पीढ़ियों तक का इतिहास संजोकर रखा हुआ है। उनके पास क्षेत्र के करीब 70,000 यादवों का विवरण मौजूद है। यही नहीं, उन लोगों की 26 पीढ़ियों तक के गोत्र और वंशावली का विवरण भी हैै। सबसे मजेदार बात तो यह है कि रघुवीर यादव को जब भी कोई यादव मिलता है, तुरंत उसकी फोटो मांग लेते हैं या अपने कैमरे से खींच लेते हैं और फिर वंशावली की फाइल में संजो लेते हैं। वंशावली के लिए उन्होंने १०x10 फुट का जो सफेद कपड़ा बनाया है, वह अब पूरा भर गया है यानी उनका संग्रह निरंतर बढ़ रहा है। अपने इस शौक पर करीब पांच लाख रू0 खर्च कर चुके रघुबीर सिंह यादव का मानना है-‘‘मेरी सारी मेहनत अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि है। मैं चाहता हूँ कि उनके बारे में जानकारी जुटाकर मैं उनका ऋण चुका सकूँ।‘‘ इस अनूठे संग्रह एवं रघुवीर यादव की जिजीवषा पर ‘‘यदुकुल‘‘ उन्हें साधुवाद देता है।

शनिवार, 27 मार्च 2010

यादव राजनेताओं का बहिष्कार ??

जाति या समुदाय किसी भी व्यक्ति की बड़ी ताकत होती है। जाति के पक्ष-विपक्ष में कहने वाले बहुत लोग मिलेंगे, पर इसकी सत्ता को कोई नक्कार नहीं सकता। यह एक आदर्श नहीं व्यवहारिकता है। यही कारन है कि जातीय-संगठन भी तेजी से उभरते हैं. सबसे ज्यादा संगठन आपको ब्राह्मणों और कायस्थों के दिखेंगें. ये संगठन जहाँ सामाजिक आधार प्रदान करते हैं, वहीँ कई बार राजनीति में भी अद्भुत गुल खिलाते हैं.

कभी लालू प्रसाद यादव का दायाँ हाथ माने जाने वाले रंजन प्रसाद यादव का जब लालू यादव से मनमुटाव हुआ तो उन्होंने सारा ध्यान "यादव जागरण मंच" को स्थापित करने में लगा दिया। इस मंच ने रंजन यादव को सामाजिक और राजनैतिक ताकत दी, जिसकी बदौलत अंतत: पिछले लोकसभा चुनाव में रंजन यादव जद (यू) के प्रत्याशी रूप में लालू यादव को पाटलिपुत्र से पराजित कर पहली बार लोकसभा पहुँचे. पर यहीं से रंजन यादव के लिए "यादव जागरण मंच" गौड़ हो गया। इस मंच के माध्यम से जब वे लोकसभा पहुँच गए तो इसकी उपेक्षा करने लगे. अंतत: हारकर मंच के लोगों ने रंजन प्रसाद यादव को मंच के संरक्षक पद से मुक्त करने, निलंबित करने और सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला किया. मंच के बिहार प्रदेश संयोजक और पूर्व विधायक धर्मेन्द्र प्रसाद जैसे तमाम लोग अब रंजन यादव से खफा हैं.

..दुर्भाग्यवश यादव समाज में यही हो रहा है. यदुवंशी नेता सत्ता में आते ही यादवों कि उपेक्षा करने लगते हैं. मुलायम सिंह ने अमर सिंह को तरजीह दी तो शरद यादव भाजपा के साथ खड़े हो गए. लालू यादव जमीनी हकीकत को भूलकर हवा-हवाई नेता बनने लगे. कभी परिवारवाद तो कभी यादवों की उपेक्षा...वाकई इन सबसे उबरने की जरुरत है. यादव महासभा स्वयं राजनीति का शिकार हो चुकी है. यदुवंशी बुद्धिजीवी और अधिकारियों का इससे कोई नाता नहीं है. सवाल पुन: वही है आखिरकार यदुवंश की उपेक्षा कर ये नेता कहाँ तक जा पाएंगे. जो यादव उन्हें ताकत देते हैं, उन्हें ही सत्ता के मद में चूर बड़े नेता पटकनी देने का प्रयास करते हैं. यदि यादव नेताओं को दीर्घकालीन राजनीति करनी है तो यादवों की गरिमा, अस्मिता को लेकर चलना होगा. यादव किसी की गठरी नहीं हैं कि जहाँ चाहा उपयोग कर लिया. आज कांग्रेस से लेकर बसपा तक अपने परंपरागत वोटबैंक को वापस लेन कि कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में यादव नेताओं को भी इस पर मंथन करने की जरुरत है...!!

मंगलवार, 9 मार्च 2010

व्यवस्था परिवर्तन के बहाने राजनीति की राह में बाबा रामदेव

योग गुरु बाबा रामदेव का मानना है कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए मौजूदा लचर व्यवस्था को राजनैतिक मौत देनी होगी। पूरे सिस्टम में आमूल-चूल बदलाव करना होगा। शायद इसीलिए बाबा रामदेव व्यवस्था परिवर्तन के नारे के साथ भारत स्वाभिमान समिति के बैनर तले लोकसभा और देश की विधान सभाओं की सभी सीटों पर प्रत्याशी खड़ा करने का मन बना रहे हैं। बाबा रामदेव देश के मौजूदा नेतृत्व पर करारा प्रहार करते हुए कहते हैं कि भारत का नेतृत्व जितना कमजोर है, उतना किसी दूसरे राष्ट्र का नहीं है। इसीलिए व्यवस्था में परिवर्तन का बीड़ा भारत स्वाभिमान समिति ने उठाया है। बाबा के अनुसार, देश की राजनीति थानों से चल रही है। गरीब का दम निकल रहा है और अमीरों की तिजोरियां भर रही हैं। संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का समर्थन भी आप कर रहे हैं।

मेरठ में भारत स्वाभिमान न्यास एवं पतंजलि योग समिति के कार्यक्रम में भाग ले रहे बाबा ने कहा कि जब देश की युवा पीढ़ी में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का जज्बा है तो फिर सत्ता की कमान उनके हाथ में देने से गुरेज क्यों? सत्ता के शीर्ष पर ऐसे लोगों को बैठने का हक हो जो भ्रष्टाचार से छुटकारा दिला सकें, पर मुझे नहीं लगता कि आज किसी नेता में यह क्षमता रह गई है। बाबा रामदेव का कहना है कि देश दलाली और कमीशनखोरी की वजह से खोखला हो रहा है। रामदेव बोले, वह न राजनीति नहीं करेंगे और न किसी पद को हासिल करने की चाहत रखते हैं। बाबा के मुताबिक, वह पद के भूखे इसलिए नहीं है कि राजनीति के शीर्ष पर बैठे लोग खुद उनका चरण स्पर्श करते हैं। उनका मकसद देश की व्यवस्था सुधारना है।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009

इंसानियत को खून से सींचते राम किशोर यादव

अपना खून किसे नहीं प्यारा होता है, पर यदि कोई अपना खून देकर दूसरों की जिंदगी बचाने का प्रयास करे तो इसे एक सकारात्मक कदम ही कहेंगे। ऐसे ही एक शख्स हैं- राम किशोर यादव। नेहरू युवा केन्द्र फैजाबाद के जिला युवा समन्वयक राम किशोर यादव ने वर्ष 2000 में किसी अखबार में खबर पढ़ी कि स्थानीय ब्लडबैंक में कतई रक्त नहीं है। इस घटना ने उनकी संवेदना को इस तरह झकझोरा कि स्वैच्छिक रक्तदान की अलख जगाना उनकी जिन्दगी का मकसद बन गया। इससे प्रेरणा लेकर उन्होंने हर ब्लाक में दस-दस युवाओं की टीमें तैयार कर दीं, जो नियमित रूप से रक्तदान करते हैं। सबसे खास बात यह है कि इस अभियान के लिए उन्हें किसी फंड की जरूरत नही पड़ी।

राम किशोर यादव के इस अथक प्रयास से फैजाबाद जिला अस्पताल का ब्लडबैंक अब प्रदेश के उन ब्लडबैंकों में शुमार किया जाता है, जहां कभी रक्त की कमी नहीं पड़ती। राम किशोर यादव अब तक करीब 1500 यूनिट रक्तदान करवा चुके हैं। उनसे प्रेरित रक्तदाताओं में फैजाबाद में मंडलायुक्त रहे आईएएस अधिकारी अरूण कुमार सिन्हा, डीएम रहे आलोक कुमार, दीपक कुमार, आमोद कुमार, एसएसपी रहे प्रशान्त कुमार तथा कई अन्य प्रशासनिक अधिकरी शामिल हैं। राम किशोर यादव ने फैजाबाद व आसपास के जिलों में करीब दस हजार युवाओं को प्रेरित कर रखा है जो किसी भी वक्त रक्तदान करने को तैयार रहते हैं। उनके रजिस्टर में करीब एक हजार स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम, पते व ब्लडग्रुप दर्ज है, जिन्हें जरूरत के मुताबिक याद किया जाता है।

राम किशोर यादव की दिलीख्वाहिश है कि उनके अभियान को गति देने के लिए कोई मुख्यमंत्री फैजाबाद तशरीफ लाए, जिन्हें वह उनके वजन बराबर रक्त से तौलना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने चार मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखे, पर जवाब नहीं आया। खैर, उनका हौसला बरकरार है। वह ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जिससे फैजाबाद जिला अन्य जिलों के ब्लडबैंकों को रक्त की आपूर्ति कर सके। फिलहाल वह लखनऊ के एसजीपीजीआई, चिकित्सा विश्वविद्यालय तथा राम मनोहर लोहिया अस्पताल के साथ समन्वय स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उनकी अलख दूर-दूर तक रोशनी बिखेर सके।

यदुकुल की तरफ से राम किशोर यादव को शुभकामनायें कि वे अपने नेक कार्य में सफल हों।

शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

सुरेखा यादव के जज्बे को सलाम !!

23 सितम्बर, 2009 को राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जी ने उत्तर प्रदेश की सुरेखा यादव को अपने हाथों से पुरस्कृत किया. सुरेखा यादव के दोनों पैर काम नहीं करते।, फिर भी वो हाथों के बल चल कर लोगों को साक्षर बना रही हैं। 'यदुकुल' उनकी इस जीवटता को प्रणाम करता है और उनकी हिम्मत की दाद देता है !!

शुक्रवार, 7 अगस्त 2009

एक अनूठी पहल ऐसी भी

पिछले दिनों एक प्रतिष्ठित अखबार के कोने में छपी एक खबर ने ध्यान आकर्षित किया। समाज में कुछेक कार्य ऐसे होते हैं, जो भले ही अनायास होते हैं पर ऐसी पहल समाज के लिए प्रेरणास्पद होती है। यह वाकया है गाजीपुर जिले के दो मित्रों का, जिसके चलते एक मित्र न सिर्फ पढ़ाई कर पा रहा है बल्कि उसकी फीस भी माफ कर दी गई है। सर, यह मेरा दोस्त है। पढ़ना चाहता है लेकिन इसके पापा के पास पैसा नहीं है। छोटा सा है यह वाक्य, इसे बोलने वाला भी छोटा सा ही बालक है,लेकिन काम उसने बड़ा कर दिखाया। इस बच्चे ने अपने साधनहीन दोस्त को न सिर्फ विद्यालय में प्रवेश दिलाया बल्कि प्रधानाचार्य से उसकी फीस माफ करा दी।

यह प्रशंसनीय काम करने वाला करीब छह वर्र्षीय बालक है विशाल चौहान। ‘सब पढ़ें और सब बढ़ें‘ के जुमले को सच कर दिखाया एक ऐसे मासूम ने, जिसे सरकारी नारों से कुछ लेना देना नहीं। बरही निवासी विशाल अलगू यादव इण्टर कालेज, बरेंदा, गाजीपुर में कक्षा एक का छात्र है। पड़ोसी हम उम्र रामविलास उसका दोस्त है। विशाल रोज स्कूल जाता और रामविलास से भी चलने को कहता,लेकिन परिवार की गरीबी के कारण रामविलास स्कूल नहीं जा पा रहा था। विशाल ने रामविलास के घरवालों से बात की। घरवालों ने अपनी जर्जर माली हालत का हवाला दिया। तब विशाल ने पहल कर प्रधानाचार्य वासुदेव यादव से चर्चा की। प्रधानाचार्य उसकी बात सुन कर चकित हुए। उन्होंने कोशिश करके रामविलास का विद्यालय में न केवल निःशुल्क नाम लिखा बल्कि पूरी फीस भी माफ कर दी। विशाल ने रामविलास को अपनी यूनीफार्म व कुछ पाठ्य पुस्तकें भी दी। अब दोनों दोस्त साथ स्कूल जाते हैं। विशाल के अनुकरणीय कार्य से प्रधानाचार्य इतने अभिभूत हुए कि स्कूल की दैनिक प्रार्थना सभा समाप्त होने के बाद सभी बच्चों के सामने उसका उदाहरण रखा। उन्होंने विशाल को विद्यालय की ओर से पुरस्कृत भी किया।

गुरुवार, 18 जून 2009

दहेजासुर समाज में मात्र एक-एक चाय पिलाकर हुआ विवाह

आज का दौर दहेज का है, दिखावे का है पर ऐसे में यदि कोई विवाह सिर्फ एक-एक प्याली चाय में सम्पन्न हो जाये तो अचरज ही होगा। पर इसे सच कर दिखाया है यादव समाज के दो परिवारों ने। इस विवाह में न बैंड-बाजा और न दहेज था। वर पक्ष के लिए अगर कुछ था तो सिर्फ एक-एक प्याली चाय। दो सगी बहनों के विवाह की रस्में बहुत सादगी से हुई और मंगल गीतों के बीच दोनों अपने-अपने दूल्हों के साथ विदा हो गई।

उ0प्र0 के अलीगढ़ जनपद के महमूदपुरा निवासी विशेष कुमार यादव दिल्ली के रेडीसन फाइव स्टार होटल में ट्रांसपोर्ट इंचार्ज हैं। उनकी दो पुत्रियां संगीता व सुष्मिता हैं। 15 जून 2009 की शाम वह एक टैªक्टर एजेंसी पर बैठे थे, अचानक वहां रामवीर सिंह यादव आ गये। वह साहसपुर थाना मिरहची-एटा के रहने वाले हैं और अलीगढ़ स्थित सिकंदराराऊ में पुलिस विभाग में तैनात हैं। उसी समय गाँव रामनगर जिरौली कलां में हाल निवासी हरियाणा के सत्यपाल सिंह भी आ गये और आरम्भ हो गयी रिश्ते की बातें। लड़की के पिता से ज्यादा लड़के वाले दहेज विरोधी दिखे। बातों ही बातों में बात बन गयी और लड़के वालों ने कहा कि हमें तो खाना भी नहीं चाहिये, सिर्फ चाय पिला दीजिएगा। एक व्यक्ति ने विवाह के लिए अपना मकान दिया और चाय पिलाने का वादा भी कर दिया। फिर क्या था, उसके अगले ही दिन सत्यपाल सिंह ने अपने पुत्र संदीप उर्फ नरेश एवं रामवीर सिंह ने अपने पुत्र प्रवेन्द्र को परिवारों के साथ यहां आने को कह दिया। दोनों परिवारों के जो परिचित चट-पट आ सकते थे वो भी पहुँच गये। सादगी से रस्में शुरू हो गयीं। संगीता की शादी प्रवेन्द्र से और सुष्मिता की शादी संदीप से हुई। बिना दहेज और सादगी से हुए इस आदर्श विवाह की बात जिसने भी सुनी, वाह-वाह कर उठा!!