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मंगलवार, 25 जनवरी 2011

बलिराम भगत : स्वतंत्रा सेनानी, पत्रकार, लेखक और राजनेता

भारतीय राजनीति ने फिर अपना एक गौरव पुत्र खो दिया है. । देश रत्न श्री बलिराम भगत पर भारत को गर्व था । देश रत्न श्री बलिराम भगत एक मेधावी छात्र , स्वतंत्रा सेनानी, पत्रकार , लेखक, राज्यपाल, विदेश मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, आदि आदि थे ।

बिहार के समस्तीपुर के मूल निवासी देश रत्न श्री बलिराम भगत का जन्म ०७-१०-१९२२ को हुआ । पटना कॉलेज से स्नातक और पटना विश्वविध्यालय से ही अर्थशास्त्र में परास्नातक किया। उस वक्त परास्नातक करना बहुत बड़ी बात थी। १९३९ में मात्र १७ वर्ष के नाबालिग उम्र में स्वतंत्रा संग्राम की लड़ाई लड़ने भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में शामिल हो गए । १९४२ में भारत छोडो आन्दोलन में शामिल होने कॉलेज त्याग दिया। जबकि श्री भगत पटना विश्वविध्यालय के मेधावी छात्र थे। देश रत्न श्री बलिराम भगत १९४६ में कांग्रेस के महासचिव बनाये गए । श्री भगत १९४७ में पटना से राष्ट्र दूत नमक हिंदी पत्रिका शुरू किया। समाचार पत्रों में आर्थिक, राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय मामलो पर नियमित रूप से लिखते रहे। देश रत्न श्री बलिराम भगत ने अंतराष्ट्रीय विषयों पर कई पुस्तक लिखे। उनके लेखन से तत्कालीन कई राजनेता लेखक प्रभावित थे। देश रत्न श्री बलिराम भगत की प्रतिभा का उपयोग कांग्रेस ने जमकर किया। श्री भगत अंतराष्ट्रीय मामलो के कुशल जानकार थे। वे जितने बेहतर लेखक थे उतने ही बेहतर वक्ता भी थे। श्री भगत विभिन्न अंतराष्ट्रीय मंचो पर भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करते रहे । इन्स्ताबुल,लन्दन,कोलोम्बो और जापान में श्री भगत ने अपने कुशल भाषण से सभी को प्रभावित किया था।

देश रत्न श्री बलिराम भगत पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी की सरकार में भारत सरकार में विदेश मंत्री रहे । श्री भगत हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के राज्यपाल के रूप में देश के सेवा करते रहे । पांचवी लोकसभा के अध्यक्ष बन उन्होंने साबित किया योग्यता की परिभाषा क्या होती है। श्री भगत की योग्यता का लोहा पूर्व प्रधानमंत्री नेहरु, इंदिरा भी मानती थी। देश रत्न श्री भगत हम सब को छोड़कर ०२ जनवरी २०११ में चले गए । पर एक ऐसी नजीर गढ़ गए जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा-पुंज बनी रहेगी !!

वंदना यादव

सोमवार, 24 जनवरी 2011

बलिराम भगत का जाना...

राजनीति में तमाम यदुवंशी प्रखरता से काम कर रहे हैं. यही कारण है कि अब तक यदुवंश से 9 मुख्यमंत्री हो चुके हैं. पर अब तक मात्र दो लोगों को राज्यपाल बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है- गुजरात में महिपाल शास्त्री (2 मई 1990- 21 दिसंबर 1990) एवं हिमाचल प्रदेश व राजस्थान में बलिराम भगत (क्रमशः 11 फरवरी 1993-29 जून 1993 व 20 जून 1993-1 मई 1998). यह बताना इसलिए प्रासंगिक हो गया क्योंकि लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और हिमाचल एवं राजस्थान के पूर्व राज्यपाल बलिराम भगत (89) का इस साल के आरंभ में ही 2 जनवरी, 2011 को निधन हो गया। गौरतलब है कि भगत जी का निधन शरीर के कई अंगों के काम बंद कर देने के कारण हुआ। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और अपोलो अस्पताल में उनका देहावसान हुआ.

बलिराम भगत का जन्म सात अक्टूबर 1922 को पटना (बिहार) में हुआ। पटना से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद भगत ने पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। भगत 17 वर्ष की आयु में एक छात्र के रूप में स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए। स्वतंत्रता के बाद वह प्रथम लोकसभा के लिए चुने गए। वह लोकसभा में सात बार चुनकर आए।वह पहली कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री के संसदीय सचिव के रूप में सेवा दी और उन्हें वर्ष 1956 में उप वित्त मंत्री बनाया गया। वर्ष 1969 में केंद्रीय मंत्री बनाए जाने से पहले उन्होंने योजना, रक्षा और विदेश राज्य मंत्री के रूप में काम किया। भगत 5 जनवरी 1976 को आपातकाल में लोकसभा अध्यक्ष चुने गए थे। वे इस पद पर एक साल तक रहे। वह वर्ष 1993 में थोड़े समय के लिए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और वर्ष 1993 से 1998 तक राजस्थान के राज्यपाल रहे। उनके परिवार में पत्नी विद्या भगत, एक बेटा और एक बेटी हैं।

बलिराम भगत के निधन पर अपने शोक संदेश में प्रधानमंत्री ने उन्हें, "एक स्वतंत्रता सेनानी, महान देशभक्त और लोगों के लिए समर्पित एक वरिष्ठ राजनेता बताया।" प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने अपना एक बहुत ही करीबी मित्र और महत्वपूर्ण सहयोगी खो दिया।" लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि भगत के निधन से उन्हें 'अत्यंत दुख' पहुंचा है। उन्होंने कहा, "भगत स्वतंत्र भारत के उन नेताओं में से थे जिन्होंने आजादी के बाद देश का मार्गदर्शन किया और अपनी राजनीतिक भागीदारी से लोकतंत्र को सशक्त बनाया।" लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, "भगत के निधन से हमने भारत के एक योग्य पुत्र को खो दिया।
यदुकुल की तरफ से बलिराम भगत जी को श्रद्धांजलि और नमन !!