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बुधवार, 9 सितंबर 2015

104 साल की कुंवरबाई यादव ने स्वच्छ भारत के लिए कायम की अनूठी मिसाल

मन में जज्बा हो तो उम्र भी आड़े नहीं आती। छत्तीसगढ़ के धमतरी की रहने वाली 104 साल की कुंवरबाई यादव ने स्वच्छ भारत के लिए एक अनूठी मिसाल कायम की है।  कुंवरबाई ने अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए ना सिर्फ अपना पशुधन यानि 35 भेड़-बकरियों को बेच दिया बल्कि दो महीने में गांव में एक आंदोलन सा खड़ा कर दिया।  

उनके इस अभियान के चलते आज यहां एक भी घर ऐसा नहीं है जिसमें शौचालय ना हो। कुंवरबाई की इस मुहिम की वजह से उनके गांव को खुले में शौच से मुक्त गांव घोषित कर दिया गया है। 

अब 2 अक्टूबर यानि गांधी जयंती के दिन उन्हें सम्मानित करने की तैयारी हो रही है।  गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले गांधी जयंती के दिन ही स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। 

सोमवार, 18 अगस्त 2014

योगी श्रीकृष्ण के चरित्र में विरोधाभास क्यों


कृष्ण को संपूर्ण अवतार माना जाता है, लेकिन फिर भी उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे सवाल हैं, जिन्हें लेकर मन में अक्सर दुविधा रहती है। आइए जानें ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब : 

सवाल : वैसे तो भगवान कृष्ण धर्म की बात करते हैं लेकिन महाभारत के युद्ध में उन्होंने खुद छल और अधर्म का इस्तेमाल क्यों किया? 

जवाब : महाभारत के युद्ध को केवल दो राज्यों या राजाओं का युद्ध न होकर अच्छाई और बुराई का युद्ध कहा जा सकता है। कौरवों ने इस युद्ध से बहुत पहले ही अधर्म और छल-कपट से पांडवों को खत्म करने की साजिश शुरू कर दी थी, चाहे वह भीम को जहर खिलाकर पानी में डुबोने की कोशिश हो या लाक्षागृह को आग लगाकर पांडवों को मारने का षडयंत्र। जब इससे भी बात न बनी तो उन्होंने जुए का ऐसा खेल रचा जो पांडवों को पूरी तरह खत्म कर दे। इस अनीति और अधर्म के खात्मे के लिए कृष्ण से धर्म की अपेक्षा करना बेमायने है। भगवान कहते हैं कि जो वो कर रहे हैं, वह अधर्म है और जो हम कर रहे हैं, वह भी अधर्म है लेकिन हममें और उनमें फर्क यह है कि हम यह सब धर्म की रक्षा के लिए कर रहे हैं। धर्म की रक्षा करने की यह महान इच्छा ही हमें धर्म-अधर्म के बंधनों से मुक्त कर देती है। कृष्ण कभी नहीं कहते कि वह जो कर रहे हैं, वह सही है लेकिन वह यह जरूर कहते हैं कि वह जिस उद्देश्य से यह कर रहे हैं, वह बिल्कुल सही है। 

सवाल : कृष्ण माखन चुराते हैं और गोपियों के कपड़े उठा लेते हैं। ऐसे में उन्हें योगी कैसे कह सकते हैं? 

जवाब : यह आश्चर्य की बात है कि जो कृष्ण माखन चुराता है, गोपियों के कपड़े लेकर छुप जाता है, वह गीता का गंभीर योगी कैसे हो जाता है। यही कृष्ण के व्यक्तित्व की निजता है। यही वह विशेषता है जिससे कृष्ण हमारे इतने नज़दीक लगते हैं। कृष्ण इन विरोधों से मिलकर ही बने हैं। हमारा सारा जीवन ही विरोधों पर खड़ा है लेकिन इन विरोधों में एक लय है, एक प्रवाह है। सुख-दुख, बचपन-बुढ़ापा, रोशनी-अंधेरा, जन्म-मृत्यु ये सब विरोधी बातें हैं लेकिन एक लय में बंधे होते हैं। इसी लय में जीवन संभव होता है और इस संतुलन को साधने का संदेश देता है कृष्ण चरित्र। 

सवाल : कृष्ण ने राधा से प्रेम किया लेकिन विवाह नहीं किया? 

जवाब : कृष्ण जीवन के इस प्रसंग को लेकर तरह-तरह के तर्क और कहानियां सुनने को मिलती हैं। श्रीकृष्ण के गुरु गर्गाचार्य जी द्वारा रचित गर्ग संहिता में वर्णन मिलता है कि राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था। आध्यात्मिक स्तर पर प्रेम की बात करने वालों के अनुसार एक विवाह न करने को लेकर यह सवाल खुद राधा ने भगवान कृष्ण से किया कि आपने मुझसे विवाह क्यों नही किया। इस पर कृष्ण बोले कि विवाह तो दो अलग-अलग मनुष्यों के बीच होता है और मैं और तुम अलग नहीं हैं। ऐसे में हमें विवाह की क्या जरूरत! तार्किकता से बात करने वाले कहते हैं कि कृष्ण से जुड़े प्रामाणिक ग्रंथों जैसे महाभारत या भागवत पुराण में राधा के नाम का उल्लेख ही नहीं मिलता और राधा नाम के चरित्र को भक्तिकाल में ही ज्यादा विस्तार मिला। राधा-कृष्ण की भक्ति की शुरुआत निम्बार्क संप्रदाय, वल्लभ-संप्रदाय, राधावल्लभ संप्रदाय, सखीभाव संप्रदाय आदि ने की। 

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

जनता को राइट टू रिकॉल का अधिकार

'वोट' जरूर दीजिये और राजनैतिक दलों के लिए अपना भी घोषणा पात्र जारी कीजिये कि आखिर आप उनसे क्या चाहते हैं। 'सिविल सोसाइटी' और 'सिटिज़न जर्नलिस्ट' की अवधारणा भारतीय समाज में तेजी से कदम बढ़ा  रही है और यही कारण है  कि जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है।  मात्र वोट देकर पाँच साल का इंतज़ार क्यों ? लोहिया जी अक्सर कहा करते थे कि, 'जिन्दा कौमें पाँच साल तक इंतज़ार नहीं करतीं।' मतदान लोकतंत्र में जीवंतता का प्रतिक है तो अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल करना और उन्हें कटघरे में खड़ा करना भी जनता का हक़ है !

इस चुनाव में तमाम मुद्दों के अलावा निम्न मुद्दे सभी राजनैतिक दलों की प्राथमिकता में होना चाहिए -

-जनता को राइट टू रिकॉल का अधिकार। 
- भ्रष्टाचारमुक्त शासन हेतु पारदर्शिता और आईटी पर जोर। 
-सभी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छ पानी की गारंटी। 
- किसानों, ग्रामीणों व आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने पर रोक। 
-महँगाई पर नियंत्रण। 
-पर्यावरण संरक्षण पर जोर। 
- चुनाव लड़ने हेतु न्यूनतम स्नातक अहर्ता। 
-नारी उत्पीड़न पर रोक और नारी -सशक्तीकरण को बढ़ावा।


(राम शिव मूर्ति यादव) 
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (से.नि.)
सिविल लाइंस, इलाहाबाद -211001 
******************************
(साभार : दैनिक जागरण, 18 अप्रैल 2014)
http://epaper.jagran.com/epaper/18-apr-2014-79-edition-Allahabad-City-Page-5.html

शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

सांप के जहर को बेअसर कर देगी गोरखपुर के प्रोफेसर डा. उमेश यादव की दवा

अभी केवल सांप के जहर के असर को कम करने की दवा मिलती है, लेकिन आने वाले दिनों में रसेल वाइपर, गेहुंअन, करैत जैसे जहरीले साँपों  के जहर को बेअसर किया जा सकेगा। यह दावा है गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रवक्ता डा. उमेश यादव का।

डा. यादव ने ऐसा रासायनिक मिश्रण तैयार किया है, जो ’रसेल वाइपर’ के जहर को बेअसर करने में कारगर साबित हुआ है। इसे परीक्षण के लिए सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरई) लखनऊ भेजा गया है। यदि सीडीआरई की लैब में यह रासायनिक मिश्रण खरा उतरा तो जहर को बेअसर करने की दवा सस्ती हो सकती है। साथ ही सांप के डंसने से होने वाली मौत पर नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

डा. यादव बताते हैं कि सांप के डंसने के बाद मिचली, उल्टी और घबराहट होने लगती है। साथ ही ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, डंसने के स्थान पर सूजन आ जाती है और खून के थक्का बनने की प्रक्रिया थम जाती है। हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लक्षण विष के एंजाइम ’फास्को लिपेस ए-2’ के चलते सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि दो वर्षों के दौरान प्रयोगों से पता चला है कि ’पायराजोलो (3, 4-डी) पिरीमिडीन’ नाम रसायन सर्प दंश से होने वाली जलन को कम करने और खून का थक्का बनाने में कारगर है। डा. यादव ने बताया कि दो पायरोजोलो 3, 4-डी पिरीमिडीन को ट्राई मेथिलीन लिंकर से मिलाया गया तो पता चला कि यह मिश्रण साँप  के जहर को फैलने से रोक देता है। बायोफिजिक्स के वैज्ञानिक ने बताया कि ’रसेल वाइपर’ के बाद अब गेहुंअन और करैत पर भी यह मिश्रण प्रयोग चला रहा है। गौरतलब है कि अब तक सांप के विष को बेअसर करने की दवा नहीं बनी है।

- राम शिव मूर्ति यादव (Ram Shiv Murti Yadav) : यदुकुल 
https://www.facebook.com/ramshivmurti.yadav


मंगलवार, 28 जनवरी 2014

गणतंत्र दिवस पर ''आप'' नेता योगेन्द्र यादव ने गूगल हैंगआउट से जुटाये 18 लाख रुपये

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता योगेन्द्र यादव ने देश के 65वें गणतंत्र दिवस के मौके पर गूगल हैंगआउट के माध्यम से दुनिया भर में पार्टी के समर्थकों से 18 लाख रुपये जुटाए. गूगल हैंगआउट ऑनलाइन मैसेजिंग एवं वीडियो द्वारा बातचीत की सेवा देता है. गूगल कंपनी की इसका विकास किया है.

यादव ने गूगल हैंगआउट के माध्यम से लंदन, एम्सटर्डम, तोक्यो, बोस्टन, वाशिंगटन डीसी, शिकागो और फिलाडेल्फिया समेत दुनिया भर के 17 शहरों में अपने समर्थकों के सवालों का सीधे-सीधे जवाब दिया.

पार्टी ने कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली से कल एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि हैंगआउट सत्र से कुल 18 लाख रुपये की राशि जुटायी गयी. विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल की शुरुआत से एक दिन में जुटायी गयी यह दूसरी सबसे बड़ी राशि है. नए साल के पहले दिन पार्टी ने 40 लाख रुपये जुटाए थे.

यादव ने कहा, अपने वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया देखना शानदार था. स्पष्ट रुप से आप से बहुत उम्मीदे हैं. उन्होंने कहा, भारतीय राजनीति के इतिहास में सत्ता में आने के बाद किसी भी सरकार ने इतना कुछ हासिल नहीं किया. असल में निष्पक्ष पर्यवेक्षक सलाह दे रहे हैं कि हम अपनी गति धीमी कर दें.

हैंगआउट में शामिल हुए न्यूजर्सी निवासी हिमांशु शर्मा ने कहा, योगेन्द्र यादव को सुनना बहुत प्रेरणादायक था. आप को भारत में मिल रहे जोरदार समर्थन को देखते हुए आम आदमी पार्टी को भारत के लोगों की उम्मीदों पर खड़ा उतरना चाहिए और उन्हें 2014 के लोकसभा चुनावों में एक वैकल्पिक राजनीति उपलब्ध करानी चाहिए.

बुधवार, 8 मई 2013

सिविल सेवा परीक्षा 2012 में बीस यदुवंशी चयनित

संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2012 के अंतिम परिणाम 3, मई 2013 दिन शुक्रवार को घोषित कर दिये। इन परिणामों के महत्‍वपूर्ण मुख्‍य बिंदु निम्‍नलिखित हैं: 

• सिविल सेवा परीक्षा (प्राथमिक) 2012, 20 मई 2012 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में आवेदन करने वालों की 5,36,506 की संख्‍या एक कीर्तिमान था, जिसमें से वास्‍तव में 2,71,422 उम्‍मीदवार ही परीक्षा में शामिल हुए थे। 

• अक्‍टूबर 2012 में होने वाली मुख्‍य लिखित परीक्षा के लिए 13,092 उम्‍मीदवारों को सफल घोषित किया गया जिसमें से 2674 उम्‍मीदवारों का चयन मार्च-अप्रैल 2013 में होने वाले व्‍यक्तित्‍व परीक्षण के लिए किया गया। अंत में 998 उम्‍मीदवारों (753 पुरूष और 245 महिलाएं) की 1091 रिपोर्ट की गई रिक्तियों के समक्ष भारतीय प्रशा‍सनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और अन्‍य केन्‍द्रीय सेवाओं में नियुक्ति के लिए अनुशंसा की गई। वर्तमान में खाली बची 92 रिक्तियां सामान्‍य मानकों से सफल होने वाले आरक्षित उम्‍मीदवारों के लिए हैं। सेवा आंवटन के लिए यह उम्‍मीदवार विकल्‍प के आधार पर निर्भर करेंगे, यह रिक्तियां आयोग द्वारा बनायी जाने वाली आरक्षित सूची से अनुशंसित उम्‍मीदवारों द्वारा भरी जायेंगी। 

• शीर्ष स्‍थान पर एक महिला उम्‍मीदवार सुश्री हर्षिता वी. कुमार (रोल नम्‍बर 075502) हैं। उन्‍होंने केरल विश्‍वविद्यालय से बी.टेक किया है। यह उनका चौथा प्रयास था। 

• दूसरे स्‍थान पर श्री वी. श्रीराम (रोल नम्‍बर 494891) रहे। वह केरल विश्‍वविद्यालय से एमबीबीएस हैं। यह उनका दूसरा प्रयास था। 

• तीसरा स्‍थान भी एक महिला सुश्री स्‍तुति चौहान (रोल नम्‍बर 038970) ने ही हासिल किया। उन्‍होंने जोधपुर विश्‍वविद्यालय से बीएससी किया और दिल्‍ली के आईआईपीएम से कार्मिक और विपणन प्रबंधन में स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा किया है। यह उनका तीसरा प्रयास था। 

• सामान्‍य, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति सभी में शीर्ष स्‍थान महिलाओं ने ही हासिल किया है। शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मीदवारों में 13 पुरूष और 12 महिलाएं हैं। 

• इस परीक्षा में सफल हुए उम्‍मीदवार एक अखिल भारतीय विभाजन की प्रदर्शनी भी है। शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मीदवारों में वह उम्‍मीदवार हैं जो अपने आपकों को बारह राज्‍य/ केन्‍द्र शासित प्रदेशों के निवसी होने के रूप में दावा कर सकते हैं अर्थात आन्‍ध्र प्रदेश, बिहार, चण्‍डीगढ़, दिल्‍ली, हरियाणा, जम्‍मु-कश्‍मीर, कर्नाटक, केरल, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, तमिलनाडु और उत्‍तर प्रदेश। 

• जीवन के सभी क्षेत्रों जैसे किसान, अध्‍यापक, व्‍यवसायी, सरकारी कर्मचारी, डॉक्‍टर, वकील, प्रोफेसर और सिविल सेवा से आने के कारण शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मदवारों की पारिवारिक पृष्‍ठभूमि विविधतापूर्ण प्रतिनिधित्‍व दर्शाती है। 

• शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मीदवारों में से 6 अपने पहले प्रयास में वरीयता सूची में थे, 9 दूसरे प्रयास में वरीयता सूची में थे, 8 तीसरे प्रयास में और चौथे और छठे प्रयासों में एक एक उम्‍मीदवार वरीयता सूची में थे। 

• शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मीदवारों में 12 दिल्‍ली से थे; 4 तिरूवंनतपुरम, दो-दो चैन्‍नई और हैदराबाद से और एक-एक जम्‍मु, मुम्‍बई, जयपुर, चण्‍डीगढ और इलाहाबाद केन्‍द्र से थे। 

सिविल सर्विसेज परीक्षा 2012 - में सफल यादव अभ्यर्थी-

Sl no. Rank Name
1 21 Rajkamal Yadav
2 102 Nishant Kr Yadav
3 105 Amit Prakash Yadav
4 314 RENU Yadav
5 328 Bhor Singh Yadav
6 428 Pradeep Kr Yadav
7 430 Pavan Yadav
8 499 Nisheeth Yadav
9 532 Yadav Vishwajeet Shirish Kr
10 575 Shiv Shankar Yadav
11 595 Rahul Kr Yadav
12 639 Sudha Yadav
13 678 Aditi Yadav
14 694 Yogesh Yadav
15 731 Kapil Yadav
16 782 Inderjeet Yadav
17 800 Ankur Yadav
18 812 Chesta Yadav
19 819 Ram Niwas Yadav
20 911 salunke Durgesh Yadav




- Ram Shiv Murti Yadav @ www.yadukul.blogspot.com/ 

मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष बने शिक्षाविद डा. अनिल कुमार यादव


उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की कमान अब एक शिक्षाविद के हाथों में दी गई है. श्री चित्रगुप्त महाविद्यालय, मैनपुरी  के प्राचार्य डाक्टर अनिल कुमार यादव को उप्र लोकसेवा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पूर्व वह वर्ष 2006 से दिसबंर 2012 तक उप्र लोक सेवा आयोग के सदस्य पद पर कार्य कर चुके हैं। एक दिसंबर 2012 को उन्होंने श्री चित्रगुप्त महाविद्यालय में फिर प्राचार्य पद पर फिर से कार्यभार ग्रहण किया था।  राज्यपाल ने उनकी शैक्षिक योगदान को देखते हुए ये बडी जिम्मेदारी सौंपी है। 

आगरा के कमला नगर में रहने वाले डाक्टर अनिल कुमार यादव ने वर्ष 2002 में मैनपुरी के श्री चित्रगुप्त महाविद्यालय में प्राचार्य पद पर कार्यभार ग्रहण किया था। प्राचार्य रहते हुए उन्होंने जहां महाविद्यालय में कई नए कोर्स शुरू कराए वहीं अनुशासन का वातावरण बनाने में अहम भूमिका अदा की। डा. अनिल यादव ने उच्च शिक्षा के विकास में विशेष योगदान दिया है। चित्रगुप्त कालेज में कृषि शिक्षा, पत्रकारिता और कई वोकेशनल कोर्स आरंभ कराने का श्रेय डा. अनिल यादव को ही जाता है। उनके कार्यकाल में महाविद्यालय में वर्षों से बंद चल रहे खेलकूद शुरू कराकर वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ कराया। डा. यादव इससे पूर्व केआर डिग्री कालेज मथुरा में बॉटनी के प्रवक्ता के पद पर भी रह चुके हैं। उन्होंने केआर कालेज मथुरा से बॉटनी से एमएससी (गोल्ड मैडिलिस्ट) की और पीएचडी के अलावा डीएससी एवं एलएलएम की परीक्षा भी उत्तीर्ण की।

गुरुवार, 21 मार्च 2013

साहित्यकार राजेंद्र यादव और कुश्ती पहलवान नरसिंह यादव भी यश भारती सम्मान की दौड़ में

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दिए जाने वाले सर्वोच्च नागरिक सम्मान, यश भारती पुरस्कार 23 मार्च को राम मनोहर लोहिया की जयंती के मौके पर दिया जाएगा। यह सम्मान पाने की दौड़ में सूबे के कई दिग्गज शामिल हैं। प्रदेश सरकार राज्य की खास शख्सियतों को आगामी 23 मार्च को लोहिया पार्क में आयोजित एक समारोह में यश भारती पुरस्कार से सम्मानित करेगी।

यश भारती के लिए फिलहाल 13 लोगों के नाम प्रस्तावित हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यश भारती पुरस्कारों के लिए जिन संभावितत नामों की सूची बनाई गई है, उनमें उत्तर प्रदेश के मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी सुरेश रैना, वाराणसी के सुप्रसिद्घ शास्त्रीय गायक छन्नू लाल मिश्र, पार्श्व गायक जावेद अली, वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद यादव के नाम शामिल हैं।

इनके अलावा कुश्ती पहलवान नरसिंह यादव, नाट्य विधा में अमीर रजा हुसैन, साहित्यकार सत्येंद्र दुबे, हॉकी खिलाड़ी विवेक गुप्ता और महिला पहलवान अंशू तोमर के नाम भी इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा भी कुछ नाम इस सूची में शामिल किए गए हैं। संस्कृति विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मोटे तौर पर नामों की एक सूची तैयार की गई है, लेकिन अभी विचार-विमर्श चल रहा है और अंतिम समय में इन नामों में बदलाव भी किया जा सकता है।

गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

’मड़ई को अन्तर्राष्ट्रीय मानक


रावत नाच महोत्सव समिति द्वारा लोक संस्कृति पर केन्द्रित पत्रिका ’मड़ई’ का प्रकाशन पिछले पच्चीस वर्षों से किया जा रहा है। हिन्दी जगत के लब्धप्रतिष्ठ विद्वानों एवं लोक संस्कृति मर्मज्ञों के महत्वपूर्ण, चिंतनपरक, गंभीर आलेखों का प्रकाशन इसमें नियमित रूप से होता रहा है। भू-मंडलीकरण के इस उत्तर आधुनिक दौर में जब लोक संस्कृति के लिए साहित्य और समाज में बहुत कम स्पेस रह गया है, मड़ई लोक संस्कृति की नई सैद्धांतिकी की निर्मिति में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रही है। उसके इस विनम्र प्रयास को सर्वत्र प्रशंसा एवं व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है।

’मड़ई’ के महत्व को स्वीकार करते हुए केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा एवं संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली द्वारा इसे प्रकाशन-अनुदान दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि पूरे देश में चर्चित लोक संस्कृति की इस अनूठी पत्रिका का वितरण पूर्णतः निःशुल्क किया जाता है।

मड़ई के संपादक डा0 कालीचरण यादव ने सूचित किया है कि इस पत्रिका को ’निस्केयर’ (नेशनल इंस्टीट्यूट आफ साइंस कम्युनिकेशन एण्ड इन्फार्मेशन रिसोर्सेस), नई दिल्ली द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मानक क्र. 2278-8352 प्रदान किया यगा है। उल्लेखनीय है कि आइ.एस.एस.एन. एक अंतर्राष्ट्रीय मानक है। इस प्रकार की अंतर्राष्ट्रीय मानक क्रमांक युक्त पत्रिका में छपे शोध-आलेख की प्रामाणिकता बढ़ जाती है। ’मड़ई’ की यह उपलब्धि निश्चित रूप से लोक संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत शोधार्थियों को उत्साहित करेगी।

सोमवार, 25 जून 2012

श्री कृष्ण की तपोभूमि रही है टिहरी गढ़वाल

देवभूमि उत्तराखण्ड में मंदिरों की कोई कमी नहीं है। उत्तराखण्ड में ही विश्व प्रसिद्ध श्री बदरी नाथ धाम है। जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इसके अलावा गंगोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ और सेम-मुखेम है। गंगोत्री से गंगा और यमनोत्री से यमुना निकलती है। केदारनाथ शिव को समर्पित है। सेम-मुखेम भगवान श्रीकृष्ण के तपोभूमि का गवाह है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने टिहरी गढ़वाल के सेम-मुखेम नामक जगह पर कठोर तपस्या की थी। आज भी लाखों की संख्या में लोग सेम-मुखेम पहुंचते हैं।

ऐसी मान्यता है कि द्वारिका से भगवान श्रीकृष्ण तपस्या करने हेतु हिमालय की ओर चले। वे सबसे पहले उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल पहंुचे जहां उन्होंने कुछ दिन बिताये। फिर उन्होंने स्थानीय लोगों से बताने को कहा कि कोई ऐसी जगह बताओ जो मेरे तपस्या करने योग्य हो। जहां मैं शांति से तपस्या कर सकंु। पौड़ी गढ़वाल के लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण को बताया कि हिमालय की गोद में सेम-मुखेम जो जगह है वह आपके लिए सर्वाधिक उपर्युक्त है। भगवान श्रीकृष्ण पौड़ी गढ़वाल से सेम-मुखेम की ओर प्रस्थान कर गये। सेम-मुखेम पहंुचने पर श्रीकृष्ण ने स्थानीय राजा गंगू रमोला से दो गज जमीन की मांग की। श्रीकृष्ण ने गंगू रमोला से कहा कि उन्हें केवल दो गज जमीन चाहिए जहां वे बैठकर आराम से तपस्या कर सकें। श्रीकृष्ण साधारण वेश में थे इसलिए गंगू रमोला भगवान को पहचान नहीं सका। और जमीन देने से इन्कार कर दिया।

गंगू रमोला के पास कई भैंसे थी। जिनमें से अधिकांश दूध नहीं देती थी। इस कारण गंगू रमोला परेशान रहता था। भगवान श्रीकृष्ण के बार-बार आग्रह किये जाने पर टालने के उद्देश्य से गंगू रमोला ने कहा- मैं तुम्हें जमीन जरूर दुंगा लेकिन मेरी एक शर्त है। शर्त है कि मेरी जितनी भैंसे दूध नहीं देती हैं अगर वे दूध देना प्रारम्भ कर दें तो मैं तुम्हे जमीन उपलब्ध करवा दंूगा। श्रीकृष्ण ने कहा कि यह तो बहुत ही आसान है जाओ गौशाला में पता करो कि तुम्हारी कौन सी भैंस अब दूध नहीं देती हैं। गंगू रमोला बारी-बारी से सभी भैंस के पास जाकर जांच किया। गंगू रमोला ने पाया की अब उसकी सभी भैंसे दूध देने लग गई। गंगू रमोला ने प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण से कहा आप जहां चाहें तपस्या कर लें। आज से आप मेरे परम मित्र हैं और मेरी इस रियासत पर आपका भी अधिकार है।

जिस जगह पर भगवान श्रीकृष्ण ने तपस्या किया था आज वहां पर भव्य मंदिर है। मंदिर के भीतर एक बहुत बड़ी शीला है जिसे लोग भगवान श्रीकृष्ण का प्रतीक मानते हैं। कुछ ही दूरी पर पत्थरों पर गाय, भैंस और भगवान श्रीकृष्ण के घोड़े के पैर के निशान भी हैं। मंदिर के पास ही एक बहुत बड़ा पत्थर है जो केवल एक अंगूली लगाने से हिलता है। लेकिन अगर आप बलपूर्बक उस पत्थर को हिलाने का प्रयास करेंगे वह पत्थर नहीं हिलेगा। उपरोक्त लिखी बातें आज भी प्रत्यक्ष हैं। जिसे कोई भी जाकर देख सकता है।

Way to Sem-Mukhem

1.Haridwar-Rishikesh-New Tehri-Lambgaon-SemMukhem

-- राजाराम राकेश, टिहरी गढ़वाल

शनिवार, 12 मई 2012

यादव वंश के राजा भिल्लम द्वारा स्थापित शहर दौलताबाद

दौलताबाद गाँव और प्राचीन शहर, महाराष्ट्र राज्य, दक्षिण-पश्चिम भारत में स्थित है। दौलताबाद दक्षिण के यादववंशी राजाओं की राजधानी थी। और यह देवगिरी का सुल्तान मुहम्मद तुग़लक़ द्वारा रखा गया नाम था। यह गोदावरी नदी की उत्तरी घाटी में स्थित है और भौगोलिक दृष्टि से भारत का केन्द्रीय स्थल कहा जा सकता है।

इतिहास

12वीं सदी के उत्तरार्द्ध में यादव वंश के राजा भिल्लम द्वारा स्थापित यह शहर मध्य काल में एक महत्त्वपूर्ण दुर्ग और प्रशासनिक केंद्र था। एक विशाल चट्टानी परिदृश्य वाला यह दुर्ग अपराजेय था और इसे कभी ताक़त के बल पर हासिल नहीं किया जा सका, षड्यंत्रों के द्वारा ही इस पर क़ब्ज़ा किया गया।

14वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में दिल्ली की मुस्लिम सल्तनत के अधीन आने तक यह शहर हिन्दू यादव वंश की राजधानी था।

17वीं शताब्दी में मुग़लों द्वारा दक्कन में औरंगाबाद के समीप अपना प्रशासनिक मुख्यालय स्थापित करने के साथ ही इसका पतन हो गया।

इस नगर ने इतिहास में बहुत बार उत्थान और पतन देखा। यह 1318 ई. तक यादवों की राजधानी रहा, 1294 ई. में अलाउद्दीन ख़िलजी ने इसे लूटा। बाद में ख़िलजी की फ़ौजों ने दुबारा 1318 ई. में यादव राजा हरपाल देव को पराजित कर मार डाला। उसकी मृत्यु से यादव वंश का अंत हो गया। बाद में जब सुल्तान मुहम्मद तुग़लक़ गद्दी पर बैठा, उसे देवगिरी की केन्द्रीय स्थिति बहुत पसंद आयी। उस समय मुहम्मद तुग़लक़ का शासन पंजाब से बंगाल तक तथा हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ था।

राजधानी बनाने का प्रयत्न

सुल्तान ने देवगिरि का नाम दौलताबाद रखा। उसने इस नगर में बड़े-बड़े भवन और सड़कें बनवायीं। एक सड़क दौलताबाद से दिल्ली तक बनायी गई। 1327 ई. में सुल्तान दिल्ली से राजधानी हटाकर दौलताबाद ले गया। दिल्ली के नागरिकों ने दौलताबाद जाना पसंद नहीं किया। इस स्थानांतरण से लाभ कुछ नहीं हुआ, उल्टे परेशानियाँ बढ़ गयीं। फलत: राजधानी पुन: दिल्ली ले आयी गई। लेकिन इससे दौलताबाद का महत्त्व नहीं घटा। दक्षिण में जब बहमनी राज्य टूटा, तब अहमदनगर राज्य में दौलताबाद का गढ़ अत्यंत शक्तिशाली माना जाता रहा। 1631 ई. में सम्राट शाहजहाँ इस गढ़ को सर न कर सका, और क़िलेदार फतेह ख़ाँ को घूस देकर ही उस पर क़ब्ज़ा कर सका। मुग़ल शासन के अंतर्गत भी दौलताबाद प्रशासन का मुख्य केन्द्र बना रहा इसी नगर से औरंगज़ेब ने अपने दक्षिणी अभियानों का आयोजन शुरू किया। औरंगज़ेब के आदेश से गोलकुण्डा का अंतिम शासक अब्दुल हसन दौलताबाद के ही गढ़ में कैद किया गया था। 1707 ई. में बुरहान-पुर में औरंगज़ेब की मृत्यु होने पर उसके शव को दौलताबाद में ही दफनाया गया। 1760 ई. में यह नगर मराठों के अधिकार में आ गया, लेकिन इसका पुराना नाम देवगिरि पुन: प्रचलित न हो सका। आज भी यह दौलताबाद के नाम से ही जाना जाता है।

साभार : भारत कोश

गुरुवार, 10 मई 2012

वृष्णि और अन्धक संघ / Vrishni and Andhak

मधु राजा के सौ पुत्रों में से ज्येष्ठ पुत्र, एक यादवराज था। इसी के कुल में श्रीकृष्ण पैदा हुए थे और इसी कारण 'वार्ष्णेय' कहलाए। इनका वंश 'वृष्णि वंशीय यादव' कहलाता था। ये लोग द्वारिका में निवास करते थे। प्रभास क्षेत्र में यादवों के गृह कलह में यह वंश भी समाप्त हो गया।


वृष्णि-गणराज्य शूरसेन-प्रदेश में स्थित था। वृष्णियों का तथा अंधकों का प्राचीन साहित्य में साथ-साथ उल्लेख है। पाणिनि [1] में वृष्णियों तथा अंधको का उल्लेख हैं।

कौटिल्य के अर्थशास्त्र [2] में वृष्णियों के संघ-राज्य का वर्णन है।

महाभारत में अंधक वृष्णियों का कृष्ण के संबंध में वर्णन है। [3]

इसी प्रसंग में कृष्ण को संघ मुख्य भी कहा गया है जिससे सूचित होता है कि वृष्णि तथा अंधक गणजातियों के राज्य थे। [4]

वृष्णि राजज्ञागणस्य भुभरस्य । ' यह सिक्का वृष्णि-गणराज्य द्वारा प्रचलित किया गया था और इसकी तिथि प्रथम या द्वितीय शती ई॰पू॰ है। [5]

अंधक एवं वृष्णि संघ सम्भवतः यदुवंशियों के राजा भीम सात्वत के पुत्रों के नाम पर बने थे । कृष्ण वृष्णि थे एवं उग्रसेन और कंस अंधक थे ।

मथुरा में तीर्थंकर नेमिनाथ भी अंधक कहे गये हैं । कुछ ग्रंथों में कृष्ण को अंधक भी कहा गया है ।

मथुरा अंधक संघ की राजधानी थी और द्वारिका वृष्णियों की ।

श्री राम के पश्चात जब अयोध्या की गद्दी पर कुश थे और लव युवराज थे, तब मथुरा में भीम के पुत्र अंधक राज्य करते थे । उनके बाद अंधक वंशियों का मथुरा पर अधिकार रहा, जो उग्रसेन और उनके पुत्र कंस तक कायम रहा था । भीम के दूसरे पुत्र का नाम वृष्णि था । उनके वंश में उत्पन्न शूर ने शौरपुर (वर्तमान बटेश्वर) बसा कर अपना पृथक् राज्य स्थापित किया था । शूर के पुत्र वसुदेव हुए, जिनके पुत्र बलराम तथा श्री कृष्ण थे ।

वैदिक साहित्य में उत्तरी पांचाल के पौरव-राजा दिवोदास और उनके वंशज सुदास की विजय-गाथाओं का उल्लेख मिलता है । सुदास ने हस्तिनापुर के पौरव राजा संवरण को उनके नौ साथी राजाओं की विशाल सेना सहित पराजित किया था । 10 राजाओं के उस भीषण संघर्ष को प्राचीन वाग्मय में "दशहराज्ञ युद्ध' कहा गया है । वीरवर सुदास से पराजित होने वाले उन नौ राजाओं में एक यादव नरेश भी था ।

महाभारत शांति पर्व अध्याय-82:
कृष्ण:-

हे देवर्षि ! जैसे पुरुष अग्रिकी इच्छा से अरणी काष्ठ मथता है; वैसे ही उन जाति-लोगों के कहे हुए कठोर वचनसे मेरा हृदय सदा मथता तथा जलता हुआ रहता है ॥6॥

हे नारद ! बड़े भाई बलराम सदा बल से, गद सुकुमारता से और प्रद्युम्न रूपसे मतवाले हुए है; इससे इन सहायकों के होते हुए भी मैं असहाय हुआ हूँ। ॥7॥ आगे पढ़ें:-कृष्ण नारद संवाद

श्री कृष्णदत्त वाजपेयी का अनुमान है कि यादव राजा भीम सात्वत का पुत्र अंधक रहा होगा, जो सुदास के समय यादवों की मुख्य शाखा का अधिपती और शूरसेन जनपद के तत्कालीन गणराज्य का अध्यक्ष था । वह संभवत: अपने पिता भीम के समान वीर नहीं था । अंधक के वंश में कुकुर हुआ था । कुकुर की कई पीढ़ी बाद आहुक हुआ, जिसके दो पुत्र उग्रसेन और देवक हुए थे । उग्रसेन का पुत्र कंस था और देवक की पुत्री देवकी थी । उग्रसेन, देवक और कंस अपने पूर्वज अंधक और कुकुर के नाम पर अंधक वंशीय अथवा कुकुर वंशीय कहलाते थे । अंधक के भाई वृष्णि के दो पुत्र हुए, जिनके नाम देवमीढूष और युधाजित थे । देवमीढूष के पुत्र श्र्वफल्क और उनके पुत्र अक्रूर थे । वृष्णि के वंशज वाष्णि वंशीय अथवा वार्ष्णेय कहलाते थे ।




अंधक और वृष्णि वंशिय द्वारा शासित शूरसेन प्रदेशांतर्गत मथुरा और शौरिपुर के दोनों राज्य 'गणराज्य' थे । उनका शासन वंश-परंपरागत न होकर समय-समय पर जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा होता था । वे प्रतिनिधि अपने-अपने गणों के मुखिया होते थे, और राजा कहलाते थे ।




महाभारत युद्ध से पूर्व उन दोनों राज्यों का संघ था, जो 'अंधक-वृष्णि-संघ' कहलाता था । उस संघ में अंधकों के मुखिया आहुक-पुत्र उग्रसेन थे और वृष्णियों के शूर-पुत्र वसुदेव थे । उस संघीय गण राज्य का राष्ट्रपति उग्रसेन था । इस संघ राज्य के केंद्र मन्त्रियों में एक उद्धव भी थे । उग्रसेन की भतीजी देवकी का विवाह वसुदेव के साथ हुआ था, जिनके पुत्र भगवान कृष्ण थे । उग्रसेन के पुत्र कंस का विवाह उस काल के सर्वाधिक शक्तिशाली मगध साम्राज्य के अधिपति जरासंध की दो पुत्रियों के साथ हुआ था । वसुदेव की बहिन कुन्ती का विवाह कुरु प्रदेश के प्रतापी महाराजा पांडु के साथ हुआ था, जिनके पुत्र सुप्रसिद्ध पांडव थे । वसुदेव की दूसरी बहिन श्रुतश्रवा हैहयवंशी चेदिराज दमघोष को व्याही थी, जिसका पुत्र शिशुपाल था । इस प्रकार शूरसेन प्रदेश के यादवों का पारिवारिक संबंध भारतवर्ष के कई विख्यात राज्यों के अधिपतियों के साथ था । उग्रसेन का पुत्र कंस बड़ा शूरवीर और महत्वाकांक्षी युवक था । फिर उन्हें अपने श्वसुर जरासंध के अपार सैन्य बल का भी अभिमान था । वह गणतंत्र की अपेक्षा राजतंत्र में विश्वास रखता था । उन्होंने अपने साथियों के साथ संघ राज्य के विरुद्ध कर उपद्रव करना आरम्भ किया । अपनी वीरता और अपने श्वसुर की सहायता से उन्होंने अपने पिता उग्रसेन और बहनोई वसुदेव को शासनाधिकार से वंचित कर उन्हें कारागृह में बन्द कर दिया और आप अंधक-वृष्णि संघ का स्वेच्छाचारी राजा बन गया था । वह यादवों से घृणा करता था और अपने को यादव मानने में लज्जित होता था । उसने मदांध होकर प्रजा पर नाना प्रकार के अत्याचार किये थे । अंत में श्री कृष्ण द्वारा उनका अंत हुआ था ।

टीका टिप्पणी और संदर्भ
↑ पाणिनि 4,1,114 तथा 6,2,34
2.↑ (पृ0 12)
3.↑ 'यादवा: कुकुरा भोजा: सर्वे चान्धकवृष्णय:, त्वय्यासक्ता: महाबाहो लोकालोकेश्वराश्च ये।'महाभारत शांति0 81,29
4.↑ 'भेदाद् विनाश: संघानां संघमुख्योऽसि केशव' शाति0 81,25 ।
5.↑ दे0 मजुमदार-कार्पोरेअ लाइफ इन ऐंशेंट इंडिया–पृ0 280

साभार :ब्रज डिस्कवरी

बुधवार, 21 सितंबर 2011

अन्ना हजारे के प्रेरणास्रोत : 'यादव बाबा'

अन्ना हजारे के आन्दोलन के साथ ही 'यादव बाबा मंदिर' भी चर्चा में आ गया है. महाराष्ट्र के अहमद नगर स्थित रालेगण सिद्धि गाँव में आने वालों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र यादव बाबा मंदिर है जो अन्ना हजारे का तब से निवास स्थान है जब वह 27 वर्ष पहले सेना में अपनी सेवा समाप्त करके इस गाँव में वापस लौटे थे।

इस मंदिर के पीछे भी एक कहानी है. यादव बाबा एक संत थे जो करीब सौ वर्ष पहले इंद्रयाणी नदी के किनारे स्थित आलंदी से रालेगण सिद्धि गांव आए थे। यादव बाबा ने यहाँ आकर समाधि ले ली थी। उनकी स्मृति में ही 'यादव बाबा मंदिर' बनाया गया था. अन्ना हजारे इसी मंदिर में रहकर प्रेरणा पाते हैं और समाज में अलख जगाने के लिए तत्पर हैं. वे स्वयं को ‘मंदिरात्ला अन्ना’ (वह व्यक्ति जो यादवबाबा मंदिर में रहता है), कहना पसंद करते हैं. फ़िलहाल यादव बाबा की स्मृति में बना यह मंदिर अब अन्ना की पहचान बन गया है. फ़िलहाल अन्ना को भले ही सुरक्षा कारणों से मंदिर की बजाय पद्मावती ट्रस्ट हास्टल में स्थानांतरित कर दिया गया हो, पर उनका मन अभी भी यादव बाबा मंदिर में ही बस्ता है. आखिर वहीँ से तो उन्हें प्रेरणा मिलती है !!

('यादव बाबा मंदिर' में रहने के कारण कुछेक लोगों ने अति-उत्साह में ब्लॉग, फेसबुक इत्यादि पर और यहाँ तक कि ई-मेल व SMS द्वारा यह जानकारी भेजी कि अन्ना हजारे यादव हैं, जो कि सही नहीं है. अन्ना हजारे यादव बाबा मंदिर में जरूर एक लम्बे समय से रह रहे हैं, पर वे यदुवंशी नहीं हैं. बाबा रामदेव जरुर यदुवंशी हैं !!)

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

विमल यादव बने गुडग़ांव के पहले महापौर


गुडगाँव की गिनती आज देश के सर्वाधिक समृद्ध नगरों में होती है. हाल ही में 21 जून को हुए चुनाव में विमल यादव गुड़गांव नगर निगम के पहले महापौर निर्वाचित हुए। कहा जाता है कि राव इंद्रजीत समर्थक विमल यादव को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने 20 मत हासिल कर भाजपा प्रत्याशी सीमा पहेजा को हराया, जिन्हें केवल नौ मत मिले। विमल यादव के नाम का प्रस्ताव वार्ड 9 के पार्षद लखपत ने किया था जिसका अनुमोदन वार्ड नं0 35 के पार्षद सुन्दर ने किया। अपनी विजय के बाद विमल यादव ने कहा कि मिलेनियम सिटी में पेयजल तथा जलनिकासी की सुविधा बढ़ाना उनकी प्राथमिकता होगी। 'यदुकुल'' की तरफ से विमल यादव हो हार्दिक बधाई !!


(चित्र में : नव निर्वाचित मेयर विमल यादव (बीच में)

बुधवार, 25 मई 2011

बाबा रामदेव की मुहिम


दिल्ली चलो ।दिल्ली चलो ।

जागने का वक्त आ गया

परम पूज्य स्वामी रामदेवजी आमरण अनशन पर बैठेंगे :

राष्ट्रनिष्ठ गुरु बंधु / बहिन

भारत स्वाभिमान आंदोलन की क्रमबद्ध मुहिम मे 30 जनवरी, 27 फरवरी, 23 मार्च
के कार्यक्रमों की अभूतपूर्व सफलता के पश्चात आंदोलन निर्णायक मोड पर है ।

सत्य की इस लड़ाई में आपका सहयोग अपेक्षित है

4 जून 2011 को दिल्ली के रामलीला मैदान में स्वामीजी स्वयं अनिश्चित कालीन
उपवास (आमरण अनशन ) पर बैठेंगे । उनका साथ देंगे भारत स्वाभिमान के जांबाज़
कार्यकर्ता शिष्य । इस आंदोलन मे अपना सहयोग दे ।-

राष्ट्रहित में तीन माँगे

लगभग चार सौ लाख करोड़ रुपये का काला धन जो की राष्ट्रीय संपत्ति है यह देश को मिलना चाहिए ।

सक्षम लोकपाल का कठोर कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर पूर्ण अंकुश लगाना ।

स्वतंत्र भारत में चल रहा विदेशी तंत्र (ब्रिटिश रूल ) खत्म होना चाहिए जिससे कि सबको आर्थिक व सामाजिक न्याय मिले ।

सभी के लिए संदेश :

गुरु बंधु
ॐ सादर नमन
योग ऋषि परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज के प्रतिदिन के विचार तथा भारत स्वाभिमान
जय हिंद ...

गुरुवार, 17 मार्च 2011

जगप्रसिद्ध है बरसाने की होली

होली के रंग अभी से फगुनाहट में रंग बिखेरने लगे हैं. होली की रंगत बरसाने की लट्ठमार होली के बिना अधूरी ही कही जायेगी। कृष्ण-लीला भूमि होने के कारण फाल्गुन शुल्क नवमी को ब्रज में बरसाने की लट्ठमार होली का अपना अलग ही महत्व है। ब्रज में तो वसंत पंचमी के दिन ही मंदिरों में डांढ़ा गाड़े जाने के साथ ही होली का शुभारंभ हो जाता है। बरसाना में हर साल फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन होने वाली लट्ठमार होली देखने व राधारानी के दर्शनों की एक झलक पाने के लिए यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक देश-विदेश से खिंचे चले आते हैं। इस दिन नन्दगाँव के कृष्णसखा ‘हुरिहारे’ बरसाने में होली खेलने आते हैं, जहाँ राधा की सखियाँ लाठियों से उनका स्वागत करती हैं। यहाँ होली खेलने वाले नंदगाँव के हुरियारों के हाथों में लाठियों की मार से बचने के लिए मजबूत ढाल होती है।

परंपरागत वेशभूषा में सजे-धजे हुरियारों की कमर में अबीर-गुलाल की पोटलियाँ बंधी होती हैं तो दूसरी ओर बरसाना की हुरियारिनों के पास मोटे-मोटे तेल पिलाए लट्ठ होते हैं। बरसाना की रंगीली गली में पहुँचते ही हुरियारों पर चारों ओर से टेसू के फूलों से बने रंगों की बौछार होने लगती है। परंपरागत शास्त्रीय गान ‘ढप बाजै रे लाल मतवारे को‘ का गायन होने लगता है। हुरियारे ‘फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर‘, का गायन करते हैं तो हुरियारिनें ‘होली खेलने आयै श्याम आज जाकूं रंग में बोरै री‘, का गायन करती हैं। भीड़ के एक छोर से गोस्वामी समाज के लोग परंपरागत वाद्यों के साथ महौल को शास्त्रीय रुप देते हैं। ढप, ढोल, मृदंग की ताल पर नाचते-गाते दोनों दलों में हंसी-ठिठोली होती है। हुरियारिनें अपनी पूरी ताकत से हुरियारों पर लाठियों के वार करती हैं तो हुरियार अपनी ढालों पर लाठियों की चोट सहते हैं। हुरियारे मजबूत ढालों से अपने शरीर की रक्षा करते हैं एवं चोट लगने पर वहाँ ब्रजरज लगा लेते हैं।

बरसाना की होली के दूसरे दिन फाल्गुन शुक्ल दशमी को सायंकाल ऐसी ही लट्ठमार होली नन्दगाँव में भी खेली जाती है। अन्तर मात्र इतना है कि इसमें नन्दगाँव की नारियाँ बरसाने के पुरूषों का लाठियों से सत्कार करती हैं। इसमें बरसाना के हुरियार नंदगाँव की हुरियारिनों से होली खेलने नंदगाँव पहुँचते हैं। फाल्गुन की नवमी व दशमी के दिन बरसाना व नंदगाँव के लट्ठमार आयोजनों के पश्चात होली का आकर्षण वृन्दावन के मंदिरों की ओर हो जाता है, जहाँ रंगभरी एकादशी के दिन पूरे वृंदावन में हाथी पर बिठा राधावल्लभ लाल मंदिर से भगवान के स्वरुपों की सवारी निकाली जाती है। बाद में भी ठाकुर के स्वरूप पर गुलाल और केशर के छींटे डाले जाते हैं। ब्रज की होली की एक और विशेषता यह है कि धुलेंडी मना लेने के साथ ही जहाँ देश भर में होली का खूमार टूट जाता है, वहीं ब्रज में इसके चरम पर पहुँचने की शुरुआत होती है।

कृष्ण कुमार यादव

सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

अश्विनी कुमार यादव को बेस्ट कलेक्टर का अवार्ड

अश्विनी कुमार यादव को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2009-2010 के लिए बेस्ट कलेक्टर का अवार्ड प्राप्त हुआ है। यह अवार्ड उन्हें जूनागढ़ के जिलाधिकारी के कार्यकाल हेतु दिया गया है. इस हेतु अश्विनी कुमार को 51,000 रूपये का नकद इनाम और जूनागढ़ जिले के लिए 20 लाख रूपये का इनाम दिया गया है. गौरतलब है कि अश्विनी कुमार को वर्ष 2007-08 के लिए भी पूर्व में बेस्ट कलेक्टर का अवार्ड दिया जा चूका है और उससे पूर्व वर्ष 2002-03 के लिए बेस्ट जिला विकास अधिकारी का अवार्ड भी प्राप्त हो चुका है.

आई. आई. टी. कानपुर से बी.टेक पश्चात् 1997 बीच के IAS अधिकारी रूप में चयनित अश्विनी कुमार कि गिनती तेज-तर्रार अधिकारीयों में होती है. स्वाभाव से नम्र और संवेदनशील अश्विनी कुमार मूलत: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के सैदपुर क्षेत्र के निवासी हैं. उनके पिताश्री श्री राजेंद्र प्रसाद और माताश्री श्रीमती सावित्री देवी सैदपुर में नगर पंचायत अध्यक्ष का पद सुशोभित कर चुके हैं. अश्विनी कुमार के भाई समीर सौरभ उत्तर प्रदेश पुलिस में उप पुलिस अधीक्षक तो बड़े भाई पीयूष कुमार बहुराष्ट्रीय कंपनी में उप महाप्रबंधक हैं. अश्विनी कुमार चर्चित ब्लागर और लेखिका आकांक्षा यादव के बड़े भ्राता हैं.
अश्विनी कुमार जी को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें...!!

बुधवार, 15 सितंबर 2010

जाति-गणना के फैसले का स्वागत...

सरकार अंतत: जाति-गणना के लिए राजी हो गई. लम्बे विरोध और तमाम झंझावातों के बाद ही सरकार को अंतत: यह सुधि आई कि इसके कितने फायदे हैं. जाति-गणना के पक्ष में 'यदुकुल' पर हमने पूरी एक सीरिज ही प्रकाशित की थी. खैर, देर से ही सही सरकार का यह फैसला स्वागत-योग्य है. आशा की जानी चाहिए कि इस गणना के बाद तमाम आमूल-चूल परिवर्तन देखे जा सकेंगें. !!

मंगलवार, 20 जुलाई 2010

यादव जाति का अनोखा संग्रह

जातीय अस्मिता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। कोई इसे छुपाकर प्रर्दशित करता है तो कोई इसी में रचनात्मकता तलाश लेता है। उत्तर प्रदेश में झांसी के रिटायर्ड शिक्षक रघुवीर सिंह यादव ने ऐसा ही कुछ रोचक कार्य किया है। उन्होंने यादव जाति के लोगों की 26 पीढ़ियों तक का इतिहास संजोकर रखा हुआ है। उनके पास क्षेत्र के करीब 70,000 यादवों का विवरण मौजूद है। यही नहीं, उन लोगों की 26 पीढ़ियों तक के गोत्र और वंशावली का विवरण भी हैै। सबसे मजेदार बात तो यह है कि रघुवीर यादव को जब भी कोई यादव मिलता है, तुरंत उसकी फोटो मांग लेते हैं या अपने कैमरे से खींच लेते हैं और फिर वंशावली की फाइल में संजो लेते हैं। वंशावली के लिए उन्होंने १०x10 फुट का जो सफेद कपड़ा बनाया है, वह अब पूरा भर गया है यानी उनका संग्रह निरंतर बढ़ रहा है। अपने इस शौक पर करीब पांच लाख रू0 खर्च कर चुके रघुबीर सिंह यादव का मानना है-‘‘मेरी सारी मेहनत अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि है। मैं चाहता हूँ कि उनके बारे में जानकारी जुटाकर मैं उनका ऋण चुका सकूँ।‘‘ इस अनूठे संग्रह एवं रघुवीर यादव की जिजीवषा पर ‘‘यदुकुल‘‘ उन्हें साधुवाद देता है।

शुक्रवार, 14 मई 2010

पद चुनने में आरक्षण के हक को सही ठहराया सुप्रीम कोर्ट ने

पद चुनने में आरक्षण के हक को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। इससे अरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को बहुत बड़ा संबल मिला है। गौरतलब है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में जो अभ्यर्थी अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में आ जाते थे, उन्हें सामान्य वर्ग की भांति ट्रीट करने से उन्हें मेरिट के बावजूद अच्छा पद नहीं मिल पाता था. ऐसे में आरक्षण का कोई मतलब भी नहीं रह जाता. यदि यह मन लिया जाय कि जिस वर्ग को जितना आरक्षण मिला है, वह उतने में ही रहेगा तो आरक्षण का क्या मतलब. फिर तो सामान्य वर्ग के लिए अघोषित 50 प्रतिशत आरक्षण हो गया. जो कि मूल भावना के विपरीत है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोकसेवा आयोग के नियम 16 (2) को संवैधानिक रूप से वैध माना है। इसके तहत योग्यता सूची में आए आरक्षित वर्ग के प्रतियोगियों को पद चुनते वक्त आरक्षण का लाभ लेने की सुविधा है। मुख्य न्यायाधीष के जी बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति एस एच कपाड़िया, न्यायमूर्ति आर वी रवींद्रन, न्यायमूर्ति पी सुदर्शन रेडी और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की एक संविधान पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को उलटते हुए यह अहम राय दी है। मर्दास हाईकोर्ट ने आयोग के नियम को असंवैघानिक माना था।
संविधान पीठ ने स्पष्टतया कहा है कि आरक्षित श्रेणी के प्रतियोगियों को योग्यता सूची में आने के बाद भी आरक्षण का लाभ लेने का अधिकार है। और संवैधानिक प्रावधान के हिसाब से यह असंगत नहीं है। मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती केंद्र सरकार ने दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे दी कि आरक्षित श्रेणी में आने के बाद आरक्षण का लाभ लेने के विकल्प की आयोग की अनुमति वैध है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का तहेदिल से स्वागत किया जाना चाहिए !!