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रविवार, 27 नवंबर 2011

बॉक्सिंग के रिंग का नया नायक : विकास कृष्ण यादव

प्रतिभा कभी उम्र की मोहताज नहीं होती। इस कहावत को मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव ने जहां एशियाई खेलों में मात्र 18 वर्ष की आयु में स्वर्ण पदक जीत कर सही साबित किया था वहीं अब उन्होंने उन्नीस वर्ष की आयु में ही विश्व चैम्पियनशिप में भी कांस्य पदक जीत कर खुद को बॉक्सिंग के रिंग का नया नायक साबित कर दिया है। विकास एशियाड में बॉक्सिंग का गोल्ड मैडल जीतने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के मुक्केबाज हैं।

विकास अभी हाल ही में अजरबैजान के बाकू में हुई विश्व मुक्केबाजी प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक लाने वाले इकलौते भारतीय मुक्केबाज हैं। उन्होंने लंदन में होने वाले ओलम्पिक खेलों के लिए भी क्वालिफाई कर लिया और ओलम्पिक में अपने मुक्के का दम दिखाने के लिए अभी से तैयारियों में जुट गए हैं।

इस युवा प्रतिभावान मुक्केबाज की अब तक की उपलब्धियां भी कम नहीं हैं। विकास यादव यूथ एशियन मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा कर सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज का खिताब जीत चुके हैं। यूथ ओलम्पिक में रजत पदक जीत वे 2010 के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय मुक्केबाज अन्डर 17 और अन्डर 19 में अपने भार वर्ग में विश्व चैम्पियन भी रह चुके हैं। गौरतलब है कि इस युवा मुक्केबाज ने 12 साल बाद एशियाई खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था। भारत ने 1998 में डिंको सिंह के स्वर्ण पदक के बाद से एशियाई खेलों में कोई सोने का तगमा नहीं जीता था। 12 साल बाद पदक का ये अकाल विकास यादव ने खत्म किया। जैसे ही हरियाणा का लाडला विकास यादव पंचों के जौहर दिखाने के लिए रिंग में उतरता है तो लाखों खेल प्रेमियों की निगाहें टेलीविजन पर लग जाती हैं।

साधारण किसान परिवार मेें 10 फरवरी, 1992 को हिसार जिले के गांव सिंघवा में कृष्ण यादव व श्रीमती दर्शना के घर पैदा हुए विकास भिवानी के वैश्य कॉलेज के विद्यार्थी हैं और आजकल उनका परिवार भिवानी के सेक्टर 13 में रहता है। विकास के पिता कृष्ण यादव बिजली निगम में स्टैनोग्राफर के पद पर कार्यरत हैं और मां श्रीमती दर्शना गृहणी हैं। मुक्केबाजी को कैरियर बनाने के सवाल पर विकास का कहना है कि वह एक दिन भिवानी स्टेडियम में घूमने गए तो वहां बच्चों और युवाओं को बॉक्सिंग का अभ्यास करते देखा और उसके मन में भी बॉक्सिंग सीखने की ललक पैदा हुई। इस बारे में जब उसने घर आकर मां-पिताजी से बात की तो उन्होंने भी सहमति दे दी। शौकिया शुरू किये बॉक्सिंग के अभ्यास में जब विकास अपने मुक्के का जौहर दिखाने लगा तो उसे कोच और परिवार ने प्रोत्साहित किया। अपनी कड़ी मेहनत, परिवार के समर्थन और कोच के कुशल निर्देशन के परिणाम स्वरूप बहुत छोटी उम्र में ही उसने 17 वर्ष से भी कम आयु में यूथ विश्व चैम्पियन बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था।

इसके बाद तो उन्होंने मुड़ कर ही नहीं देखा। विकास भारत के एकमात्र ऐसे मुक्केबाज हैं जिन्होंने एशियाड में गोल्ड और विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत कर अपने देश को गौरवान्वित किया है।

विकास कृष्ण का लक्ष्य अपने देश के लिए ओलम्पिक में सोना जीतने का है और इसके लिए अभी से तैयारी में जुट चुके हंै। उनके दादा सरजीत सिंह का कहना है कि उन्हें लेश मात्र भी शक नहीं है कि उनका पोता देश के लिए ओलम्पिक में स्वर्ण जीतेगा। विकास के माता-पिता का कहना है कि उनका बेटा इरादे का पक्का है। खाने में उसे चूरमा और गोंद के लड्डू बहुत पसंद हैं। अभी उनकी उम्र महज 19 साल है और वे कड़ी मेहनत से ओलम्पिक की तैयारी में जुटे हुए हैं। आशा है वे देश के लिए ओलम्पिक में भी पहला स्वर्ण लाने में सफल रहेंगे।

बॉक्सिंग-के-रिंग-का-नया-ना/">साभार : रघुविन्द्र यादव : दैनिक ट्रिब्यून

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

विकास यादव ने दिलाया एशियाई खेलों में 12 साल बाद भारत को मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक

चीन के ग्वांग्झू में संपन्न एशियाई खेलों में यदुवंशियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। एशियाई खेलों में दो यदुवंशी मुक्केबाजों ने अपना जौहर दिखाया. छोटलाल यादव (56 किग्रा), विकास कृष्णन यादव (60 किग्रा). छोटेलाल यादव दक्षिण एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और मौजूदा राष्ट्रीय चैंपियन हैं. 25 नवम्बर, 2010 को विकास कृष्ण यादव ने मुक्केबाजी के 60किलोग्राम वर्ग में पहला स्वर्ण हासिल किया।18 वर्षीय विकास यादव इसी वर्ष अगस्त में सिंगापुर में आयोजित विश्व युवा ओलम्पिक में कांस्य पदक जीत चुके हैं। विकास कृष्णन यादव वैश्य कॉलेज भिवानी, हरियाणा के प्रथम वर्ष के छात्र हैं. गौरतलब है कि युवा मुक्केबाज विकास कृष्णन यादव ने एशियाई खेलों में 12 साल बाद भारत को मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक दिलाया। भारत ने 1998 में डिंको सिंह के स्वर्ण पदक के बाद से एशियाई खेलों में सोने का तमगा नहीं जीता था। आखिर यह सिलसिला हरियाणा के कम मशहूर मुक्केबाज विकास ने तोड़ा। अठारह वर्षीय विकास ने पुरुषों के 60 किग्रा (लाइटवेट) भार वर्ग में पिछले चैंपियन चीनी मुक्केबाजी क्विंग हू को 5-4 से हराया। विश्व युवा चैंपियन और युवा ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता भारतीय मुक्केबाज ने रक्षात्मक रवैया अपनाया। तीन मिनट के पहले राउंड के बाद स्कोर 1-1 से बराबरी पर था। हू दूसरे राउंड में तनाव में दिखे और उन्होंने विकास को धक्का दे दिया। जिसके कारण चीनी मुक्केबाज को चेतावनी दी गई और उन्हें दो महत्वपूर्ण अंक गंवाने पड़े।आखिर में यही चेतावनी निर्णायक साबित हुई। दोनों मुक्केबाज तीसरे और अंतिम राउंड में केवल एक-एक अंक बना पाए, जो विकास के लिए डिंको की उपलब्धि की बराबरी करने के लिए पर्याप्त था।

विकास कृष्णन यादव से एशियाई खेलों के फाइनल में करीब से हारने से भड़के चीनी मुक्केबाज क्विंग हू ने भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव को अच्छा अभिनेता ही करार दे दिया। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विकास कृष्णन यादव ने कहा कि इस बाउट के दौरान हू उन्हें बेल्ट के नीचे लगातार पंच मारते रहे। गत चैंपियन हू ने कहा कि मैं पहले राउंड में तीन अंक से आगे था और मुझे फाउल की सजा मिली, जो मैंने किया ही नहीं था। मैंने बेल्ट के नीचे हिट किया था, लेकिन यह इससे नीचे नहीं गया था। रेफरी ने उसे दो अंक दे दिए और इसके बाद मेरा प्रतिद्वंद्वी एक अच्छा अभिनेता बन गया। मुझे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी ने नहीं हराया बल्कि मुझे रेफरी ने शिकस्त दी। हू ने कहा कि अंतिम राउंड में मेरा प्रतिद्वंद्वी बिलकुल फाइट नहीं कर रहा था, रेफरी को उसे चेतावनी देनी चाहिए थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। हू ने कहा, लेकिन मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं और मेरी नजर में मैं चैंपियन हूं। रेफरी के फैसले का विरोध करना बेकार है क्योंकि मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं। विकास कृष्णन यादव से जब हू के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं मुक्केबाज हूं, अभिनेता नहीं। ....फ़िलहाल भारतीयों की जीत चीन को भला कैसे पच सकती है, सो अनर्गल प्रलाप तो वो करेंगे ही। हम तो इतना ही कहेंगे कि भारतीयों कि जीत प्रभावी है और यदुवंशी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

विकास कृष्णन यादव को इस शानदार उपलब्धि पर यदुकुल की तरफ से ढेरों बधाइयाँ !!