गुरुवार, 7 अक्तूबर 2010

शिक्षक और कवि : डॉ. राजीव ‘राज’

नामः डॉ. राजीव ‘राज’
पिता का नामः श्री प्रेम बाबू यादव
माता का नामः श्रीमती शकुन्तला यादव
शैक्षिक योग्यताः बी.एस-सी., एम.एस-सी.,पी-एच.डी. (रसायन) एम.ए. (हिन्दी साहित्य एवं संस्कृत), साहित्य रत्न प्रयाग विश्वविद्यालय, बी.एड.
सम्प्रतिः शिक्षक, शिव नारायण इण्टर कॉलेज, इटावा
पत्र व्यवहार का पताः 239, प्रेम बिहार,
विजय नगर, इटावा पिन- 206001
ई-मेलः dr_rajeevraj@yahoo.com
ब्लागः vednakephool.blogspot.com

रो रहा बचपन मैं कैसे मुस्कराऊँ


अर्घ गंगाजल का चाहे देवता,
आँख के आंसू न कोई देखता,
अर्थपूरित हो गयी हैं अर्चनाएं
अथ प्रदूषित हो गयीं हैं सर्जनाएं,
घंटियों में भी नहीं संगीत है
मंदिरों ने भी बदल दी नीत है,
पीर अंतर में लिए जाऊं कहाँ?
किसको सुनाऊँ?
वेदना के फूल मैं किस पर चढाऊँ?

दर्द अब केवल नहीं कश्मीर है,
भारती के अंग अंग में पीर है
मुम्बई, गुजरात देखो रक्तरंजित,
जम्मू,काशी घाट भी लगता प्रकम्पित
बम से थर्राई है जब-जब राजधानी,
अंजुरी भर ढूढता जल स्वाभिमानी
आह माँ की भूल कैसे
मैं खुशी के गीत गाऊँ?
राष्ट्र ऋण का बोध मैं कैसे भुलाऊँ?
वेदना के फूल मैं किस पर चढाऊँ?

भोर पर छाई निशा की कालिमा,
भूख ने बचपन की छीनी लालिमा
काश जो करते कलम की नोंक पैनी,
उन कारों में है हथौड़ा और छैनी
शीश पर अपने गरीबी ढो रहे हैं,
भोजनालय में पतीली धो रहे हैं
जो खिलौना चाँद का मांगे
कहाँ वो कृष्ण पाऊँ?
रो रहा बचपन मैं कैसे मुस्कराऊँ?
वेदना के फूल मैं किस पर चढाऊँ?

10 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा रचना!

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

राजीव जी के बारे में जानकर अच्छा लगा...रचना भी शानदार..बधाई.

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

रो रहा बचपन मैं कैसे मुस्कराऊँ?
वेदना के फूल मैं किस पर चढाऊँ?

...बहुत खूबसूरत रचना...बधाई.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

राज भाई से मिलकर प्रसन्नता हुई।

शरद कुमार ने कहा…

दर्द अब केवल नहीं कश्मीर है,
भारती के अंग अंग में पीर है
मुम्बई, गुजरात देखो रक्तरंजित,
जम्मू,काशी घाट भी लगता प्रकम्पित

...Bahut khub kaha...

शरद कुमार ने कहा…

नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

KK Yadava ने कहा…

अर्थपूरित हो गयी हैं अर्चनाएं
अथ प्रदूषित हो गयीं हैं सर्जनाएं,
घंटियों में भी नहीं संगीत है
मंदिरों ने भी बदल दी नीत है,

...Marmik , par sach.

सुरेश यादव ने कहा…

राजीव जी को इस सुन्दर और सार्थक सोच की कविता के लिए बधाई .

SKY-NO LIMIT ने कहा…

apki kavita per hum subhi yadukul ka naaz hai isko isi tarah badhte rahe

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

आप सभी ने यदुकुल की पोस्टों को सराहा...आभार. यूँ ही हौसला आफजाई करते रहें. यदुवंश से जुडी आपकी रचनाओं का भी स्वागत है !!