मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

न्यायिक और साहित्यिक क्षेत्र में सक्रिय : डा0 रामलखन सिंह यादव


यदुवंश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. यत्र-तत्र बिखरे यदुवंशियों की प्रतिभा को एक जगह पर लाने के लिए ही 'यदुकुल' ब्लॉग आरंभ किया गया था. ऐसे ही एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं- डा0 रामलखन सिंह यादव, जो न सिर्फ न्यायिक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं, बल्कि एक संवेदनशील साहित्यकार के रूप में भी समाज को राह दिखा रहे हैं. स्व. रामबिलास यादव और स्व. लाची देवी के सुपुत्र रूप में 2 मार्च 1956 को अपने ननिहाल पड़री बजार, भटनी, देवरिया (उ.प्र.) में जन्मे रामलखन यादव छात्र जीवन में अव्वल दर्जा के विद्यार्थी रहे और उन्होंने एम.ए.(मनोविज्ञान), पी.एच.डी., एल.एल.बी., पी.जी.डी.एच.आर. की उपाधियाँ ग्रहण कीं. जीवन के एक मोड़ पर डा. कुसुम लखन से मई 21, 1985 को बछउर देवरिया में उनका विवाह संपन्न हुआ. आपकी पत्नी सात्विक विचारों की हैं और आपको सदैव प्रोत्साहित भी करती रहती हैं. आपकी तीन संतान हैं- प्राची, मेधा एवं स्वर्ण सिंह।

डा0 रामलखन सिंह यादव की कई कृतियाँ अब तक प्रकाशित हो चुकीं हैं, जिन्हें काफी सराहना भी मिली है. इनमें दो शोध-प्रबंध (अंग्रेजी में, 2000 एवं 2005), लाजवन्ती के फूल (2005) काव्य-संग्रह,कटघरे में श्रीराम (2006) काव्य-संग्रह,टू स्वामी रामदेव (2006) काव्य-संग्रह (अंग्रेजी), उठो सिद्धार्थ (2007) काव्य-संग्रह, बिका हुआ फैसला (2008) कहानी-संग्रह,आ रही सुनामी (2009) काव्य-संग्रह,पूरी धरती अधूरे लोग (2010) संस्मरण-रिपोर्ताज का नाम प्रमुख है. इसके अलावा आपकी शीघ्र प्रकाश्य कृतियों में हमें चाहिए लाल किला (उपन्यास) और हनुमान आ गये हैं (महाकाव्य) शामिल हैं. आप कविताएं, कहानियाँ, लेख, समीक्षाएँ इत्यादि लगभग सभी विधाओं में बखूबी लिख रहे हैं. आपकी रचनाएँ देश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं और संकलनों में समय-समय पर प्रकाशित होती रहती हैं-आज (पटना), हिंदुस्तान (पटना), आर्यावर्त (पटना), चंपारण-विचार (मोतीहारी), अक्षरगंधा (समस्तीपुर), कंचनलता (खेंतड़ीनगर, झुंझुनू), संसार (2007), अंतर्राष्ट्रीय काव्य-संग्रह, मथुरा, मंथन, स्मृतियों के सुमन, कवर्धा (छ.ग.) इत्यादि.

डा0 रामलखन सिंह यादव की साहित्यिक प्रतिभा के मद्देनजर तमाम प्रतिष्ठित संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित और अलंकृत भी किया है. इन्में लाला जगत ज्योति प्रसाद स्मृति-सम्मान, मुंगेर, 2006, स्व. हरि ठाकुर स्मृति-सम्मान, कवर्धा, छत्तीसगढ़, 2006, विद्यासागर (डी. लिट्.) की मानद उपाधि, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, ईशीपुर, भागलपुर (बिहार), 2007, राष्ट्रीय शिखर साहित्य-सम्मान, 2008,भारतीय साहित्यकार संसद, समस्तीपुर, बिहार, राष्ट्रभाषा आचार्य, 2007 ई. राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयनित, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनंदन समिति, बिहारीपुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश,काव्य-भूषण, 2008, पुष्पगंधा प्रकाशन, कवर्धा, छत्तीसगढ़, हिंदी का होमर, 2008, अ. भा. सा. अभिनंदन समिति, मथुरा, उत्तर प्रदेश जैसे तमाम सम्मान और मानद उपाधियाँ शामिल हैं।

स्थायी पता -डा0 रामलखन सिंह यादव, ग्रा. चकउर फकीर, पो. पिपरा दीक्षित, वाया-भटनी, जिला-देवरिया (उ.प्र.) पिन-274701

संपर्क/ संप्रतिः अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-9,सिविल कोर्ट, पटना-800004 (बिहार)

6 टिप्‍पणियां:

KK Yadava ने कहा…

एक संवेदनशील साहित्यकार...वैसे भी न्याय के क्षेत्र में संवेदनशील लोग कम ही मिलते हैं...साधुवाद.

Ratnesh Kr. Maurya ने कहा…

रामलखन यादव जी, अपनी इस अनुपम प्रतिभा के लिए ...बधाई स्वीकारें.

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

राम लखन जी जैसे व्यक्तित्व से मिलवाने के लिये आभार.............. प्रेरणाप्रद व्यक्तित्व

डॉ. दलसिंगार यादव ने कहा…

यदुकुल का प्रयास सराहनीय है। न्यायिक क्षेत्र में भी यादवों की सहभागिता बढ़ रही। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अलावा कलकत्ता उच्च न्यायालय तथा उत्तराखंड न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश क्रमशः माननीय जस्टिस श्री जयनंदन पटेल और माननीया जस्टिस श्रीमती निर्मला यादव हैं।

Shyama ने कहा…

जब न्यायपालिका में राम लखन यादव जी जैसे साहित्य के साथी बैठे हैं तो संवेदनाएं तो होंगी ही...इस जानकारी के लिए साधुवाद.

Shyama ने कहा…

जब न्यायपालिका में राम लखन यादव जी जैसे साहित्य के साथी बैठे हैं तो संवेदनाएं तो होंगी ही...इस जानकारी के लिए साधुवाद.