गुरुवार, 29 अगस्त 2013

ब्लागर दम्पति कृष्ण कुमार यादव-आकांक्षा यादव को मिलेगा ”परिकल्पना साहित्य व ब्लॉग विभूषण” सम्मान

 
हिंदी ब्लॉगिंग के माध्यम से समाज और साहित्य के बीच सेतु निर्माण के निमित्त चर्चित  ब्लागर एवं इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को क्रमशः ”परिकल्पना साहित्य सम्मान” व  ”परिकल्पना ब्लॉग विभूषण सम्मान” के लिए चुना गया है। यह सम्मान 13-14 सितंबर 2013 को नेपाल की राजधानी काठमाण्डू के राजभवन में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘ में प्रदान किया जायेगा। इन सम्मान के अंतर्गत स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, श्री फल, पुस्तकें अंगवस्त्र और एक निश्चित धनराशि प्रदान किए जाएंगे। 

     गौरतलब है कि यादव दंपति एक लम्बे समय से साहित्य और ब्लागिंग से अनवरत जुडे़ हुए हैं। अभी पिछले वर्ष ही इन दम्पति को उ.प्र. के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा न्यू मीडिया ब्लागिंग हेतु ”अवध सम्मान” और हिन्दी ब्लागिंग के दस साल पूरे होने पर ”दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लागर दम्पति” सम्मान से भी नवाजा गया था। कृष्ण कुमार यादव जहाँ “शब्द-सृजन की ओर“ (www.kkyadav.blogspot.com/) और “डाकिया डाक लाया“ (www.dakbabu.blogspot.com/) ब्लॉग के माध्यम से सक्रिय हैं, वहीं आकांक्षा यादव “शब्द-शिखर“ (www.shabdshikhar.blogspot.com/) ब्लॉग के माध्यम से। इसके अलावा इस दंपत्ति द्वारा सप्तरंगी प्रेम, बाल-दुनिया और उत्सव के रंग ब्लॉगों का भी युगल संचालन किया जाता है। कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव ने वर्ष 2008 में ब्लॉग जगत में कदम रखा और 5 साल के भीतर ही विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लॉग  का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लागिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लागिंग को भी नये आयाम दिये। कृष्ण कुमार यादव के ब्लॉग सामयिक विषयों, मर्मस्पर्शी कविताओं व जानकारीपरक, शोधपूर्ण आलेखों से परिपूर्ण है; वहीं नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं और इनकी रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है। गौरतलब है कि इस ब्लागर दम्पति की सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को ब्लागिंग हेतु 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) ब्लॉग के लिए सबसे कम उम्र में 'राष्ट्रीय बाल  पुरस्कार' प्राप्त हो चुका है। अक्षिता को परिकल्पना समूह द्वारा श्रेष्ठ नन्ही ब्लागर के ख़िताब से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

    लगभग समान अभिरुचियों से युक्त इस दंपति की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर प्रकाशित होती रहती है। कृष्ण कुमार यादव की 6 कृतियाँ ”अभिलाषा” (काव्य संग्रह), ”अभिव्यक्तियों के बहाने” व ”अनुभूतियाँ और विमर्श” (निबंध संग्रह), इण्डिया पोस्ट: 150 ग्लोरियस ईयर्ज (2006) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” (2007), ”जंगल में क्रिकेट” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित हैं, वहीं आकांक्षा यादव की एक मौलिक कृति ”चाँद पर पानी” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित है।

बुधवार, 28 अगस्त 2013

हिंदू धर्म के सबसे बड़े पथ-प्रदर्शक हैं श्री कृष्ण

आज जन्माष्टमी है जिसे पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. श्रीकृष्ण द्वारिकाधीश, केशव, गोपाल, नंदलाल, बांके बिहारी, कन्हैया, गिरधारी, मुरारी जैसे हजारों नामों से पहचाने जाने वाले भगवान श्रीकृष्ण को हिन्दू धर्म में विष्णु का अवतार माना गया है. वह एक साधारण व्यक्ति न होकर युग पुरुष थे. उनके द्वारा बताई गई गीता को हिंदू धर्म के सबसे बड़े ग्रंथ और पथ प्रदर्शक के रूप में माना जाता है.

मान्यता है कि द्वापर युग के अंतिम चरण में भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में  श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. इसी कारण शास्त्रों में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के दिन अर्द्धरात्रि में श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी मनाने का उल्लेख मिलता है. पुराणों में इस दिन व्रत रखने को बेहद अहम बताया गया है. 

उपवास की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें.

भगवान श्रीकृष्ण के व्रत-पूजन: उपवास के दिन प्रातःकाल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं. पश्चात सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें. इसके बाद जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें-

ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥

अब मध्याह्न के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए ‘सूतिकागृह’ नियत करें. तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अथवा ऐसे भाव हों अथवा ऐसे भाव हों तो अति उत्तम है. इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें. पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः निर्दिष्ट करना चाहिए.

फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें:

‘प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः।
वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः।
सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।’

अंत में रतजगा रखकर भजन-कीर्तन करें. जन्माष्टमी के दिन रात्रि जाग कर भगवान का स्मरण व स्तुति करें अगर नहीं तो कम से कम बारह बजे रात्रि तक कृष्ण जन्म के समय तक अवश्य जागरण करें. साथ ही प्रसाद वितरण करके कृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाएं.

कृष्ण की स्तुति लगभग सारे भारत में किसी न किसी रूप में की जाती है. फिर भी कुछ ऐसे प्रमुख स्थल हैं जिनकी चर्चा केवल भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में ही की जाती है.

मथुरा: उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के पश्चिम किनारे पर बसा मथुरा शहर एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगर के रूप में जाना जाता है. यह भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और भारत की परम प्राचीन तथा जगद्-विख्यात नगरी है जिसकी व्याख्या शास्त्रों में युगों-युगों से की जा रही है.

वृंदावन: तीर्थस्थल वृंदावन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के अंतर्गत आता है. वृंदावन श्रीकृष्ण की रासलीला का स्थल है. श्रीकृष्ण गोपियों के साथ यहां रास रचाने के लिए आते थे. यहां के कण-कण में कृष्ण और राधा का प्रेम बसा है.

गोकुल: गोकुल गांव भगवान कृष्ण से संबंधित प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यमुना किनारे बसा यह गांव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का साक्षी है. भगवान श्रीकृष्ण ने बालपन में ज्यादातर लीलाएं यहीं पर रचाई थीं.

द्वारका: हिंदुओं का पवित्र स्थल द्वारका दक्षिण-पश्चिम गुजरात राज्य, पश्चिम-मध्य भारत का प्रसिद्ध नगर है. यह जगह भगवान कृष्ण की पौराणिक राजधानी थी, जिन्होंने मथुरा से पलायन के बाद इसकी स्थापना की थी.

गोकुल में जो करे निवास
गोपियों संग जो रचाए रास
देवकी-यशोदा है जिनकी मैया
ऐसे ही हमारे कृष्ण कन्हैया!

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आओ मिलकर सजाये नन्दलाल को
आओ मिलकर करें उनका गुणगान!
जो सबको राह दिखाते हैं
और सबकी बिगड़ी बनाते हैं!

...आप सभी को 'कृष्ण-जन्माष्टमीपर्व की ढेरों बधाइयाँ !!

बुधवार, 14 अगस्त 2013

समाज व परिवेश को प्रतिबिंबित करती है फोटोग्राफी - कृष्ण कुमार यादव


श्री गंगा कल्याण समिति की ओर से दो दिवसीय नौवीं अखिल भारतीय लक्ष्मी छायाचित्र प्रदर्शनी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निराला आर्ट गैलरी में शुरू हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें, कृष्ण कुमार यादव ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद कहा कि इस तरह की छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन नियमित रूप से होना चाहिए। इससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि फोटोग्राफी एक विधा के साथ-साथ हमारे समाज और परिवेश का प्रतिबिंब भी है। मात्र आड़ी तिरछी लाइनें खींचनी ही फोटोग्राफी नहीं हैं बल्कि उसका यथार्थ भी निकलना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी राजशेखर ने फोटो प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन होना चाहिए जिससे कि कुछ नयापन लोगों को देखने को मिले। उन्होंने कहा कि छायाचित्र अपनी संस्कृति की पहचान को बढ़ावा देते हैं।  इससे अधिक से अधिक लोगों को जुड़ना चाहिए।

अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 अजय जेतली ने कहा कि इलाहाबाद शुरू से ही साहित्यकारों, कलाकारो का कर्मक्षेत्र रहा है। इस शहर से सभी क्षेत्रों में लोगांे में पहचान भी बनायी है।

छायाचित्र प्रदर्शनी के सचिव जितेन्द्र प्रकाश ने प्रदर्शनी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अगले वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय स्तर के छायाकारों के भी छायाचित्र प्रदर्शनी में देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस बार छायाचित्र प्रदर्शनी में 119 फोटोग्राफरों की 1160 तस्वीरें आयी थीं। श्रीमती लक्ष्मी अवस्थी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में वीरेन्द्र पाठक, एस के यादव, राजेश सिंह, पवन द्विवेदी, संजोग मिश्रा, विरेन्द्र प्रकाश, केनिथ जान, अनुराग अस्थाना, अमरदीप, रजत शर्मा, संजीव बनर्जी, संजय सक्सेना सहित बड़ी संख्या में छायाकार और अन्य लोग मौजूद रहे। संचालन वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष नारायण ने किया।


किताबों की दुनिया से जोड़ते बीरेंद्र कुमार यादव





पटना शहर के एक पत्रकार बीरेंद्र कुमार यादव ने संपूर्ण क्रांति, सर्वोदय और समाजवाद से जुड़े साहित्य को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए एक खास और दिलचस्प पहल की है। वे एक अभियान चला रहे हैं। यह लोगों में खासा लोकप्रिय भी होता जा रहा है और उनके चलते-फिरते या कहें खुले स्टाल पर रोजाना लोगों की न सिर्फ दिलचस्पी बढ़ रही है, बल्कि यहां से किताब खरीदने या उसके प्रति दिलचस्पी रखने वालों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है।

बीरेंद्र कुमार रोजाना सुबह सुबह की सैर के लिए पटना के इको पार्क आते हैं और फिर गेट के सामने अपने अभियान 'आमने-सामने : एक वैचारिक पहल' का बैनर रेलिंग की ग्रिल पर टांग कर अपने साथ लाए पुस्तकों को वहीं जमीन पर सजा देते हैं। बस शुरू हो जाता है यहीं से उनका अभियान-लोगों को किताबों से जोड़ने का।

यहां वे किताबों की बिक्री से कहीं अधिक उनकी प्रदर्शनी और इनके प्रति लोगों में एक नया उत्साह, नई दिलचस्पी जगाने में लग जाते हैं। वे यहां सुबह छह से आठ बजे तक पुस्तकों के साथ लोगों के समक्ष होते हैं।

वे गांधी, विनोबा, जयप्रकाश व लोहिया साहित्य को रखते हैं। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही परिवर्तनवादी व समतावादी पुस्तकों को भी वे रख रहे हैं ताकि सर्वोदय व समाजवाद के विविधि आयामों पर बहस हो। उनकी कोशिश है कि बिहारवासी लेखकों की उन पुस्तकों को भी प्रदर्शित करें, जो समतावादी, परिवर्तनवादी और सम्मानवादी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं।


साभार जानकारी : फेसबुक पर जयप्रकाश मानस 

सोमवार, 12 अगस्त 2013

पूर्व केंद्रीय मंत्री डीपी यादव का जाना

पूर्व केंद्रीय मंत्री डीपी यादव के नाम से भला कौन अपरिचित होगा। वह उन राजनेताओं में से थे, जिन्होंने अंत तक शुचिता का दमन नहीं छोड़ा।11 अगस्त को उनके  निधन के साथ ही इस परंपरा का एक वाहक भी ख़त्म हो गया। उन्होंने दिल्ली के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 76 वर्ष के थे। 

 गौरतलब है कि डीपी यादव 1972 में पहली बार सांसद बने थे। उस वक्त उनकी उम्र महज 34 वर्ष थी। कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने महान समाजवादी नेता मधुलिमये को पराजित किया था। 1977 के चुनावों में वे कृष्ण सिंह से पराजित हो गए थे। मगर, 1980 के चुनावों में उन्होंने कृष्ण सिंह को पराजित कर बदला चुकता कर लिया था।

डीपी यादव इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में केंद्रीय उप शिक्षा मंत्री बने।  नई दिल्ली स्थित राजेंद्र भवन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष रहे डीपी यादव महान शिक्षाविद भी थे। ‘मेरे सपनों का मुंगेर’, ‘बिहार आज और कल’, ‘ बिहार भविष्य के पांच साल ‘, ‘जागृत बिहार की तस्वीर’ जैसी दर्जनों पुस्तकें भी उन्होंने लिखीं।तीन बार मुंगेर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके यादव अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति जागरुक रहे।

शनिवार, 10 अगस्त 2013

बनारस के डॉ. चौथी राम यादव को लोहिया साहित्य सम्मान


उप्र हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को लगभग छह घंटे चली बैठक के बाद पुरस्कारों की घोषणा की गई। उप्र हिंदी संस्थान का प्रतिष्ठित भारत भारती पुरस्कार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज को दिया जाएगा। जाने-माने गीतकार और उप्र भाषा संस्थान के अध्यक्ष नीरज को पुरस्कार के तहत पांच लाख दो हजार रुपये नगद दिए जाएंगे। बनारस के डॉ. चौथी राम यादव को लोहिया साहित्य सम्मान से नवाजा जाएगा। वरिष्ठ साहित्यकार सोम ठाकुर को हिंदी गौरव सम्मान, मन्नू भंडारी को महात्मा गांधी साहित्य सम्मान, डॉ. बलदेव बंशी को पं. दीनदयाल उपाध्याय सम्मान और चित्रा मुद्गल को अवंती बाई सम्मान प्रदान किया जाएगा।

इन सभी को 4-4 लाख रुपये नगद दिए जाएंगे। उप्र हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को लगभग छह घंटे चली बैठक के बाद पुरस्कारों की घोषणा की गई।

बैठक में 112 पुरस्कारों के लिए नामों पर सहमति बनी। उम्मीद जताई जा रही है कि हिंदी संस्थान के अध्यक्ष मुख्यमंत्री से अनुमोदन मिलने के बाद 14 सितंबर को होने वाले भव्य आयोजन में सभी को पुरस्कृत किया जाएगा।

इनका भी होगा सम्मान

उप्र हिंदी संस्थान के निदेशक डॉ. सुधाकर अदीब ने बताया कि पुरस्कार समिति ने लोकभूषण सम्मान के लिए डॉ. अवध किशोर जड़िया, कला भूषण सम्मान के लिए वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, विद्याभूषण सम्मान के लिए डॉ. अशोक चक्रधर, विज्ञान भूषण सम्मान के लिए प्रो. कृष्णा मुखर्जी, पत्रकारिता भूषण सम्मान के लिए त्रिलोकदीप, प्रवासी भारतीय हिंदी भूषण सम्मान के लिए तेजेंद्र शर्मा और बाल साहित्य भारती सम्मान के लिए प्रकाश मनु को चयनित किया। 

सभी को दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। संस्थान की ओर से वर्ष 2012 का हिंदी विदेश प्रसार सम्मान डॉ. विमलेश कांति वर्मा को और विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान प्रो. आरिफ नजीर व डॉ. सोमेश कुमार शुक्ला को दिया जाएगा।

इन सभी को 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। अशोक निगम को मधु लिमये सम्मान और राजर्षि पुरुषोत्तम टंडन सम्मान तिरुवनंतपुरम की केरल हिंदी प्रचार सभा को दिया जाएगा।

दोनों को दो-दो लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। इन पुरस्कारों के अलावा पुरस्कार समिति ने 10 साहित्यकारों को साहित्य भूषण और 11 साहित्यकारों को सौहार्द सम्मान के लिए चुना है।

इनके अलावा अलग-अलग पुस्तकों पर कई श्रेणियों में लेखकों को पुरस्कृत किया जाएगा। 

साहित्य भूषण सम्मान: पुरस्कार राशि दो लाख रुपये
डॉ. पुष्पपाल सिंह, नसीम साकेती, डॉ. जितेंद्रनाथ मिश्र, शैलेंद्र सागर, डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, वीरेंद्र यादव, डॉ. शिवओम अंबर, चंद्रसेन विराट, डॉ. रामशंकर त्रिपाठी और विनोद चंद्र पांडेय विनोद। �

सौहार्द सम्मान: पुरस्कार राशि दो लाख दो हजार रुपये 
डॉ. कीर्ति केसर (पंजाबी), डॉ. विद्या केशव चिटको (मराठी), चिङगांबम निशान निङतम्बा (मणिपुरी), महेंद्र शर्मा (उड़िया), डॉ. हरीश रमणलाल द्विवेदी (गुजराती), डॉ. नागलक्ष्मी (तमिल), विष्णु राजाराम देवगिरि (कन्नड़), रजनी पाथरे ‘राजदान’ (कश्मीरी), डॉ. प्रभात कुमार भट्टचार्य (बंगला), पारनन्दि निर्मला (तेलुगु) और डॉ. वीवी विश्वम (मलयालम)। 

शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

योगिता यादव को भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार

युवा कहानीकार योगिता यादव को भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। योगिता यादव दैनिक जागरण अख़बार के जम्मू केंद्र में फ़िलहाल कार्यरत हैं और सक्रिय लेखन से जुडी हुई हैं। प्रसिद्ध लेखक एवं नाटककार प्रो असगर वजाहत की अध्यक्षता में सात सदस्यीय निर्णायक समिति ने यह फैसला किया है। योगिता यादव के अलावा  कवि अरूणाभ सौरभ को भी इस सम्मान हेतु चुन गया है। 

समिति में भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक रवीन्द्र कालिया लीलाधर मंडलोई, प्रो अजय तिवारी, अखिलेश आदि शामिल हैं। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा सोमवार को यहां जारी सूचना के अनुसार इन दोनों रचनाकारों को पुरस्कार में 50-50 हजार रूपए की राशि तथा प्रशस्ति  पत्र और प्रतीक चिह्न प्रदान किए जाएंगे।

वर्ष 2012 में आयोजित आठवीं नवलेखनप्रतियोगिता में योगिता यादव को उनके कहानी संग्रह (क्लीन चिट तथा अन्य कहानियां) व अरूणाभ सौरभ को उनकी काव्य पुस्तक (दिन बनने के क्रम में) के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा।

बिहार विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष बने नन्द किशोर यादव

बिहार विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष श्री नन्द किशोर यादव बनाये गये. श्री यादव बिहार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के लोकप्रिय और वरिष्ट नेता है. इससे पूर्व श्री नन्द किशोर यादव बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे है.मालुम हो बिहार में जनता दल यु का भारतीय जनता पार्टी से अलग होने पर बिहार विधान सभा में सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी बनी.भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में 18 प्रतिशत यादवो का वोट धयान में रखकर श्री नन्द किशोर यादव को नेता प्रतिपक्ष बिहार विधान सभा बनाया है लेकिन बिहार के लोग 2005 के उस घटना को भूले नहीं है जब बिहार में एन डी ए पूर्ण बहुमत में आया था और भाजपा के तरफ से उपमुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार श्री नन्द किशोर यादव ही थे किन्तु भाजपा के अधिकांश नेता ने श्री यादव के नाम पर विरोध करने लगे जिससे सुशिल मोदी तब उप मुख्यमंत्री बनाये गये थे. 


श्री नन्द किशोर यादव मूल रूप से पटना सिटी के रहने वाले है और वही से लगातार विधायक चुने जाते रहे है. श्री यादव बिहार सरकार में 2005 से पथ मंत्री रहे है और बिहार में तब से सडको की हालत में लगातार सुधार करते रहे. यह श्री नन्द किशोर यादव के सोच का ही नतीजा है की बिहार में लगातार नई सडको को निर्माण होता रहा और पुराने सडको को मरम्मत कर नया रूप दिया गया. बिहार में सडको के बेहतर हालत के लिए श्री नन्द किशोर यादव को बिहार के लोग याद करते है. 2010 के बिधानसभा चुनाव में नितीश को वोट सडको के आधार पर ही मिला था.

शुक्रवार, 28 जून 2013

मध्य प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव का निधन

मध्य प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव का बुधवार को लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया। वे 67 वर्ष थे। राज्य में यादव के निधन पर शोक की लहर है। यादव लंबे अरसे से बीमार थे और उनका दिल्ली में इलाज चल रहा था। बुधवार की सुबह उनकी हालत बिगड़ी और निधन हो गया। यादव कांग्रेस की दिग्विजय सिंह की सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे हैं और उनकी पहचान सहकारिता आंदोलन के जनक की रही है। 

यादव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि स्वर्गीय यादव ने जीवन-भर किसानों और गरीबों के हक में संघर्ष किया और उनकी बेहतरी के लिए प्रतिबद्धता से प्रयास किए। उनके निधन से राज्य ने एक जागरूक और प्रतिबद्ध नेता खो दिया है। चौहान ने कहा कि यादव ने प्रदेश में सहकारिता और कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। प्रदेश के विकास में यादव के योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। 


सुभाष यादव का गुरुवार को नर्मदा नदी के तट पर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया.यादव के छोटे पुत्र सचिन यादव ने उन्हें मुखाग्नि दी. उनका अंतिम संस्कार गायत्री मंत्रोच्चारण के बीच किया गया.


यादव का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कल निधन हो गया था. उनका शव बुधवार शाम विशेष विमान से इंदौर लाने के बाद उनके गृहग्राम बोरांवा लाया गया था.


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष यादव के पुत्र सांसद अरुण यादव के दिल्ली स्थित लोधी एस्टेट निवास जाकर स्वर्गीय यादव की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कांगेस महासचिव दिग्विजय सिंह, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा पूर्व प्रदेश कांगेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी इंदौर से बोरांवा पहुंचे और उन्होंने यादव को श्रद्धासुमन अर्पित किये. तीनों नेता कुछ समय रुकने के बाद वापस इंदौर के लिये रवाना हो गये.

'यदुकुल' की तरफ से  हार्दिक श्रद्धांजलि !!



शनिवार, 1 जून 2013

फन अगर मुकम्मल है तो बोलती हैं तस्वीरें


यदुकुल ब्लॉग : राधा यादव जब आजमगढ़ के संजरपुर गांव में सुभाष चंद्र यादव की धर्मपत्नी बनकर आईं तो वह महज आठवीं पास थीं लेकिन अपने जुनून की बदौलत आज वह न केवल परास्नातक पास हैं, बल्कि बेटे-बेटियों से भरे घर में आदर्श मां भी। उनके कठिन मेहनत का ही नतीजा रहा कि सभी बच्चों ने अपने कैरियर को बेहतरीन बनाया। 

राधा यादव खुद कस्तूरबा गांधी बालिका इण्टर कालेज, बदलापुर में वार्डन के रूप में तैनात हैं। राधा के श्वसुर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 कल्पनाथ यादव उन्हें ‘परफेक्ट  वूमेन‘ कहते हैं। कहें भी क्यों न, खुद को काबिल बनाकर अपनी संतानो को  समुचित मार्ग दर्शन से योग्य बनाने वाली महिला जो ठहरीं। उन्होंने ’फन अगर मुकम्मल है बोलती  हैं तस्वीरें......पंक्ति को अपने जीवन में चरितार्थ किया। उनकी मेहनत व लगन का परिणाम है कि सबसे बड़ी बेटी शुभ्रा एम.बी.ए. करके टाटा कन्सल्टेन्सी सर्विसेज (टीसीएस) हैदराबाद में तैनात है। वहीं दूसरी बेटी श्वेता ने वर्ष 2012 में आई.ए.एस. परीक्षा में 609वीं रैंक पाकर परिवार का नाम रोशन किया। मां  की प्रेरणा और दो बहनों की मेहनत देख, तीसरी बेटी अंकिता लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.बी.ए. की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। सबसे छोटा बेटा अभिनव नेशनल इंस्टीटयूट आफ टेक्नोलाजी, रायपुर से बी.टेक कर रहा है। 


बुधवार, 29 मई 2013

मीरा को फिल्म में लेकर पछ्ता रहे अजय यादव


एक बॉलीवुड निर्देशक को अपनी फिल्म में पाकिस्तानी कलाकार को लेना बड़ा महंगा पड़ गया है। बात हो रही है फिल्म ‘भड़ास’ के निर्देशक अजय यादव की, जिन्होंने अपनी फिल्म में पाकिस्तानी अभिनेत्री मीरा मलिक को लेकर बड़ी गलती कर दी। सुनने में आया है कि मीरा ने उनकी फिल्म के लिए पहले तो कुछ सीन करने से मना कर दिया और अब डबिंग करने से भी इंकार कर रही हैं। कुछ दिनों पहले फिल्म के प्रमोशन से मीरा के मना करने पर अजय ने मीरा को अपनी फिल्म में लेने पर अफसोस जताया था।


यह कैसे संभव है कि किसी फिल्म में पाकिस्तानी अदाकारा मीरा मलिक को लिया जाए और वह बिना किसी परेशानी के पूरी हो जाए? खबरों में है कि निर्देशक अजय यादव की फिल्म ‘भड़ास’ की हीरोइन मीरा ने शूटिंग के चौथे दिन ही फिल्म के किसी सीन को लेकर शिकायत करना शुरू कर दिया था। अजय ने बताया कि मीरा ने यह सब तब किया जब स्क्रीप्ट के एक - एक सीन पर उनसे बात की जा चुकी थी और उन्होंने प्रत्येक सीन के लिए हां किया था।

खैर इस शिकायत पर कुछ समय बाद बात बन गई और शूटिंग शुरू हो गई। परंतु यह परेशानियों का अंत नहीं बल्कि शुरूआत थी। जब फिल्म की शूट खत्म होने के बाद डबिंग की बारी आई तो मीरा ने डबिंग करने से भी मना कर दिया। मीरा के इस इंकार की वजह से अजय को मजबूरन उनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज करवाना पड़ा था। अजय ने बताया कि इस सबके बाद मुझे वर्सोवा पुलिस स्टेशन में असहयोग के मामले पर केस दर्ज करवाना पड़ा। 

यहां भी पाकिस्तानी अदाकारा को अपनी फिल्म में लेने का खामियाजा अभी पूरा नहीं हुआ था। मीरा के इस रवैए को देखकर यह बीमारी फिल्म के हीरो आर्यमान रामसे को भी लग गई। अजय ने कहा कि मैं तब हैरान रह गया जब आर्यमान ने भी मेरी फिल्म की डबिंग करने से इंकार कर दिया। अजय ने उन्हें कई बार फोन किया और मैसेज भी किए, परंतु आर्यमान ने कोई जवाब नहीं दिया। अजय ने कहा कि अभिनेत्रियों के नखरे तो आम बात है परंतु अभिनेता भी?

इतना सब होने के बावजूद अजय ने हार नहीं मानी है। उन्होंने कहा है कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं अपनी फिल्म रिलीज करके रहुंगा, कलाकारों के साथ या उनके बिना। 14 जून को रिलीज होने वाली फिल्म भड़ास को सीरिन फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में आर्यमान रामसे, मीरा, आशुतोष कौशिक, श्री राजपूत, मोहिनी नीलकंठ और मुश्ताक खान जैसे कलाकारों ने काम किया है।

साभार :  वेब दुनिया 

मंगलवार, 28 मई 2013

स्मरणीय रहेगा चंद्रजीत यादव जी का व्यक्तित्च


अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक क्रांति के सेनापति स्व. चंद्रजीत यादव की छठवीं पुण्यतिथि पर स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इसमें उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किया गया।
पूर्व उप कुलपति और राष्ट्रीय सामाजिक न्याय आंदोलन के अध्यक्ष प्रो. पीसी पतंजलि ने कहा कि समाज के अंतिम आदमी के जीवन के उत्थान के लिए लड़ाई जारी रखनी चाहिए। कमजोर वर्गो को उनका संवैधानिक एवं मौलिक अधिकार देना चाहिए। समाजवादी लोकतंत्र में प्रत्येक वर्ग के हर क्षेत्र में आनुपातिक हिस्सेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्व. यादव का सिद्धांत व्यवहारिक था इसीलिए उनके सिद्धातों की अनदेखी कर उनकी मांगों को न मानने पर स्व. यादव से विभिन्न मोर्चो पर नेताओं और दलों से टकराव होता रहता था। उन्होंने कहा कि चन्द्रजीत यादव ने पूरी दुनियां से विभिन्न प्रकार की विषमताओं और भेदभाव को समाप्त कर समता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था की स्थापना करना चाहते थे। प्रो. पंतजलि ने कहा कि चन्द्रजीत यादव की स्मृति सभा में दलीय सीमाएं टूट जाती है।
पूर्व उपकुलपति प्रो. एसएस कुशवाहा ने चन्द्रजीत यादव को एक महान सशक्त नेता बताया। उन्होंने पंचमढ़ी में कांग्रेस पार्टी के महाधिवेशन में संबोधित करते हुए खासतौर पर राजीव गांधी से कहा था कि सामाजिक, आर्थिक, समता हर नागरिक का जन्मसिद्ध अधिकार है। उसे आप अवश्य दें दे। उन्होंने कहा कि स्व. यादव पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के असली और सच्चे प्रतिनिधि थे। चन्द्रजीत यादव इतने सशक्त थे कि यदि वे न होते तो शंकर दयाल शर्मा पूर्व राष्ट्रपति न हुए होते।
पंचायती राज मंत्री बलराम यादव ने कहा कि स्व. यादव के साथ राजनीतिक रूप से बहुत कम रहे किन्तु उनके विचारों से प्रभावित रहते थे। उन्होंने चन्द्रजीत यादव की प्रतिमा लगाने संबंधी प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि वे शासन में बात कर उनकी प्रतिमा लगाने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम को राजेश्वर यादव एडवोकेट, पूर्व सांसद बलिहारी बाबू, सांसद रमाकांत यादव, परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, विधायक संग्राम यादव, आलमबदी आजमी, सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, दलसिंगार यादव, डा. ज्ञानप्रकाश दुबे, प्रभाकर सिंह, बनवारी लाल जालान, मंतराज यादव, प्रो. नरेन्द्र यादव, नेसार अहमद, जीत बहादुर यादव, रामकृष्ण यादव, जयप्रकाश नारायण, मुन्नू यादव, रामअचल यादव, सेराज अहमद, सुभाष राय, अरविन्द जायवाल, पंकज गौतम आदि ने संबोधित किया। इस दौरान चन्द्रजीत यादव की पत्नी श्रीमती आशा यादव भी उपस्थित रहीं।

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आजमगढ़: पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सामाजिक न्याय आंदोलन के प्रणेता रहे स्व. चंद्रजीत यादव की जयंती पर रविवार को हरवंशपुर स्थित सामाजिक न्याय एवं बाल भवन केंद्र के सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें स्व. श्री यादव के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर चर्चा की गयी। वक्ताओं ने कहा कि चंद्रजीत का व्यक्तित्व सदैव स्मरणीय रहेगा। वह आजीवन किसान, गरीब, बुनकर के उत्थान की बात करते थे। उनकी आवाज को संसद तक पहुंचाते थे। वक्ताओं ने कहा कि देश ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय मामलों में उनकी भूमिका की सराहना की जाती थी। लोग उन्हें लोहा मानते थे। राजशाही व्यवस्था समाप्त करने एवं आम आदमी के लिए बैंकों का दरवाजा खुलवाने में उनकी अहम भूमिका थी। वक्ताओं ने कहा कि जनपद के सुनियोजित विकास के लिए वर्ष 1973 में जो सम्मेलन आयोजित किया गया था उस सम्मेलन में जिले के विकास की मजबूत बुनियाद रखी गयी थी। बड़े-बड़े कार्य हुए । कालांतर में दूसरों ने उस काम को आगे नहीं बढ़ाया। जो कुछ हुआ उस पर भी ग्रहण लगता जा रहा है। इस दौरान बलिहारी बाबू, करुणाकांत मिश्र, बनवारी लाल जालान, वैभव वर्मा, डॉ. रवि सिंह, रमेश यादव, रामजीत यादव, गौरीशंकर, रवींद्र प्रधान आदि उपस्थित थे।

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आजमगढ़: इंका के वरिष्ठ नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रजीत यादव का सपना साकार हो रहा है। समतामूलक समाज की स्थापना के उद्देश्य से उनके द्वारा हरबंशपुर में स्थापित किये गये सामाजिक न्याय एवं बाल भवन केंद्र में समाज के सभी वर्गो के बच्चे शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर की तकनीकी जानकारी हासिल कर रहे हैं। केंद्र के निदेशक रामजनम यादव ने कहा कि सत्य, अहिंसा, देशभक्ति एवं मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित इस केंद्र में बच्चों को महापुरुषों के बारे में भी बताया जाता है। केंद्र के अंदर एक संग्रहालय स्थापित किया गया है। इसमें मंडल आयोग के संघर्षो की मुख्य विशेषताएं, उनसे संबंधित छाया चित्र, सामाजिक न्याय आंदोलन के प्रमुख नेताओं व महापुरुषों के चित्र भी लगाये गये हैं। उद्देश्य आने वाले पीढ़ी को इनके बारे में बताना है। गरीब, पिछड़े, दलित व अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को कंप्यूटर की तकनीकी जानकारी देने के लिए विशेषज्ञों को विशेष रूप से रखा गया है। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित पुस्तकें, सामान्य ज्ञान, साहित्य एवं भौगोलिक जानकारी के लिए भी बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध करायी गयी हैं।

आत्मविश्वास व परिश्रम ने संतोष यादव को दिलाया सफलता

यदुकुल ब्लॉग : सफलता जिन्दगी में काफी मायने रखती है और विशेषकर तब जब उसके साथ कैरियर भी जुड़ा  हो . आजमगढ़ के निवासी और  बीएड प्रवेश परीक्षा में प्रदेश में अव्वल संतोष यादव इस सफलता से गदगद है। संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा में 301 अंक पाकर उन्होंने  पूरे प्रदेश में सर्वोच्च स्थान पाकर  जिले का मान बढ़ाया है। हालांकि एक बारगी उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास व परिश्रम के बूते उन्हें यह सफलता हासिल हुई है। वह सिविल सर्विस में जाना चाहते हैं। इसके लिए जी जान से तैयारी कर रहे हैं। कामयाबी का श्रेय उन्होंने माता-पिता, मित्रों व गुरुजनों को दिया। आज वह जो भी हैं उन्हीं के मार्गदर्शन व आशीर्वाद का परिणाम है।

आजमगढ़ के फूलपुर क्षेत्र के ससना गांव निवासी संतोष के पिता कोमल प्रसाद यादव गुजरात स्थित एक स्टील कंपनी में कार्यरत हैं जबकि मां श्रेया देवी गृहिणी हैं। वह दो भाइयों में सबसे बड़े हैं। छोटे भाई मनोज ने इंटर फाइनल की परीक्षा दी है। संतोष की प्राथमिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय में हुई। उन्होंने हाईस्कूल में 78 व इंटरमीडिएट में भी 70 फीसद अंक प्राप्त किए थे। वर्ष 2011 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीए किया। इस वर्ष एमए फाइनल की परीक्षा दे चुके हैं। इसके अलावा हिन्दी में यूजीसी नेट भी क्वालीफाई किया है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए टिप्स देते हुए बताया कि लक्ष्य के साथ आत्मविश्वास ही कामयाबी की रीढ़ है। किसी भी विषय की पढ़ाई पूरे मनोयोग से करनी चाहिए।
यदुकुल की तरफ  से संतोष यादव को हार्दिक बधाइयाँ !!

राम शिव मूर्ति यादव : यदुकुल ब्लॉग @ http://yadukul.blogspot.com/ 

महिलाओं के हक के लिए लड़ रही हैं चंदा यादव


यदुकुल ब्लॉग : नारी सशक्तीकरण आज की जरूरत है। यह तभी संभव है, जब नारी खुद इसके लिए आगे आए। ऐसी ही सशक्त महिला है चंदा यादव, जो अन्याय के विरूद्ध लड़ने को सदैव तत्पर रहती हैं । वर्ष 2002-03 में गाजीपुर में लगभग 180 गरीब और पिछड़े वर्ग की महिलाओं से इंदिरा आवास दिलाने के नाम पर तीन-तीन हजार की अवैध वसूली की गई थी। इन गरीब महिलाओं  ने अपने जेवर तथा बकरी और भैंस बेचकर रिश्वत की रकम चुकाई। उसके बाद भी इन महिलाओं की बजाय अपात्रों को अवास दे दिए गये। इसकी जानकारी मिलते ही चंदा यादव ने मोर्चा खोल दिया। लगभग पांच सौ महिलाओं के साथ मुहम्मदाबाद से लेकर गाजीपुर मुख्यालय तक 25 किलोमीटर की पैदल यात्रा भीख मांगते हुए की थी। इस आंदोलन का असर यह हुआ कि कुछ दिनों  में पात्र महिलाओं को इंदिरा आवासों का आवंटन कर दिया गया। 

इसी प्रकार वर्ष 2003-04 में चंदा यादव के जिला पंचायत सदस्य रहने के दौरान ही मुहम्मदाबाद व भांवरकोल ब्लाक की लगभग 673 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों तथा सहायिकाओं को नौकरी से निकल दिया गया था। इसके खिलाफ चंदा ने धरना दिया। असर यह रहा कि जिला कार्यक्रम विभाग ने सभी को बहाल कर दिया । 

चंदा यादव जहां भी महिलाओं के साथ अन्याय देखती हैं, उसके खिलाफ खड़ी हो जाती है। बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत लगभग साढ़े नौ हजार रसोइयों में से साढ़े तीन सौ को विभाग ने बाहर कर रास्ता दिखा दिया तो इन बेरोजगारों का सहारा बनीं । चंदा यादव जोरदार आंदोलन किया और विकास भवन के सामने रसोइया संघ की महिलाओं के साथ दो माह तक समय समय पर घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन चलाया। उनके संघर्ष का असर रहा कि 72 रसोइयों को दोबारा काम पर लिया गया। 250 महिला रसोइयों का मामला लंबित है। इसके बारे में सकारात्मक रिपोर्ट आ गई है, पंरतु विभाग ने आदेश जारी नहीं किया है। 

चंदा यादव बताती है कि पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी व पंचायती राज की मूल कल्पना को साकार करना उनका प्रमुख कार्य है। चंदा वर्ष 2000 से 2005 तक जिला पंचायत सदस्य रहीं और उसके बाद 2005 में मुहम्मदाबाद, गाजीपुर की ब्लाक प्रमुख बनीं। चन्दा जिला रसोइया संघ की संरक्षक तथा महिला संगठन की संयोजक भी है। इनके संगठन में 12 महिला प्रधान तथा 27 महिला क्षेत्र पंचायत सदस्य व 113 महिला ग्राम पंचायत सदस्य है। ये सभी जनप्रतिनिधि महिलाएं, अपने पति की सहायता के बगैर पंचायतों के सारे काम निपटाती है। यह सब चंदा के जागरूकता अभियान का नतीजा है।

शनिवार, 25 मई 2013

पुण्य तिथि पर याद किये गए चंद्रजीत यादव



आजमगढ़: पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. चंद्रजीत यादव की पांचवी पुण्यतिथि पर शुक्रवार, 24 मई 2013 को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। नेहरू हाल के सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विधायक डॉ. संग्राम यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव सच्चे राष्ट्रभक्त थे। सिद्धांत के पक्के थे। उनके विचार सदैव प्रासंगिक रहेंगे। श्री यादव ने कहा कि पिछड़ों व दलितों को उनका अधिकार दिलाने के लिए चंद्रजीत यादव आजीवन संघर्ष किया। आज यह देश किधर जा रहा है इस पर सोचने की जरूरत है। आजादी के बाद देश की जो दशा है उस पर यदि नजर दौड़ाई जाय तो यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए हुए पद चिन्हों पर नहीं चलने के कारण समाज की दुर्गति हो रही है। 

विधायक आलमबदी ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने प्रतिभा के धनी थे। पूर्व सांसद बलिहारी बाबू व रामकृष्ण यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने देश ही नहीं विदेशों में भी इस जनपद की अलग पहचान बनाई। रामअचल यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने सामाजिक न्याय आंदोलन को खड़ा कर यह बता दिया कि उनके दिल में समाज के प्रति कितना लगाव था। 

कार्यक्रम में सर्वप्रथम स्व. श्री यादव की धर्मपत्‍‌नी आशा यादव ने स्व. श्री यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। इस अवसर पर जय प्रकाश नारायण, इम्तेयाज बेग, बनवारी लाल जालान, मोती राम यादव, सच्चिदानंद राय, चुन्नन राय, राजकुमार पांडेय, जवाहर सैनी, नरेंद्र सिंह, कैलाश यादव, वसीउद्दीन, संतोष यादव, अशोक यादव, रामजनम यादव, उमा यादव, विजय बहादुर यादव आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता विजय बहादुर राय व संचालन वैभव वर्मा ने किया।

(चित्र में : स्व . चंद्रजीत यादव जी की फाइल फोटो)

बुधवार, 8 मई 2013

सिविल सेवा परीक्षा 2012 में बीस यदुवंशी चयनित

संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2012 के अंतिम परिणाम 3, मई 2013 दिन शुक्रवार को घोषित कर दिये। इन परिणामों के महत्‍वपूर्ण मुख्‍य बिंदु निम्‍नलिखित हैं: 

• सिविल सेवा परीक्षा (प्राथमिक) 2012, 20 मई 2012 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में आवेदन करने वालों की 5,36,506 की संख्‍या एक कीर्तिमान था, जिसमें से वास्‍तव में 2,71,422 उम्‍मीदवार ही परीक्षा में शामिल हुए थे। 

• अक्‍टूबर 2012 में होने वाली मुख्‍य लिखित परीक्षा के लिए 13,092 उम्‍मीदवारों को सफल घोषित किया गया जिसमें से 2674 उम्‍मीदवारों का चयन मार्च-अप्रैल 2013 में होने वाले व्‍यक्तित्‍व परीक्षण के लिए किया गया। अंत में 998 उम्‍मीदवारों (753 पुरूष और 245 महिलाएं) की 1091 रिपोर्ट की गई रिक्तियों के समक्ष भारतीय प्रशा‍सनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और अन्‍य केन्‍द्रीय सेवाओं में नियुक्ति के लिए अनुशंसा की गई। वर्तमान में खाली बची 92 रिक्तियां सामान्‍य मानकों से सफल होने वाले आरक्षित उम्‍मीदवारों के लिए हैं। सेवा आंवटन के लिए यह उम्‍मीदवार विकल्‍प के आधार पर निर्भर करेंगे, यह रिक्तियां आयोग द्वारा बनायी जाने वाली आरक्षित सूची से अनुशंसित उम्‍मीदवारों द्वारा भरी जायेंगी। 

• शीर्ष स्‍थान पर एक महिला उम्‍मीदवार सुश्री हर्षिता वी. कुमार (रोल नम्‍बर 075502) हैं। उन्‍होंने केरल विश्‍वविद्यालय से बी.टेक किया है। यह उनका चौथा प्रयास था। 

• दूसरे स्‍थान पर श्री वी. श्रीराम (रोल नम्‍बर 494891) रहे। वह केरल विश्‍वविद्यालय से एमबीबीएस हैं। यह उनका दूसरा प्रयास था। 

• तीसरा स्‍थान भी एक महिला सुश्री स्‍तुति चौहान (रोल नम्‍बर 038970) ने ही हासिल किया। उन्‍होंने जोधपुर विश्‍वविद्यालय से बीएससी किया और दिल्‍ली के आईआईपीएम से कार्मिक और विपणन प्रबंधन में स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा किया है। यह उनका तीसरा प्रयास था। 

• सामान्‍य, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति सभी में शीर्ष स्‍थान महिलाओं ने ही हासिल किया है। शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मीदवारों में 13 पुरूष और 12 महिलाएं हैं। 

• इस परीक्षा में सफल हुए उम्‍मीदवार एक अखिल भारतीय विभाजन की प्रदर्शनी भी है। शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मीदवारों में वह उम्‍मीदवार हैं जो अपने आपकों को बारह राज्‍य/ केन्‍द्र शासित प्रदेशों के निवसी होने के रूप में दावा कर सकते हैं अर्थात आन्‍ध्र प्रदेश, बिहार, चण्‍डीगढ़, दिल्‍ली, हरियाणा, जम्‍मु-कश्‍मीर, कर्नाटक, केरल, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, तमिलनाडु और उत्‍तर प्रदेश। 

• जीवन के सभी क्षेत्रों जैसे किसान, अध्‍यापक, व्‍यवसायी, सरकारी कर्मचारी, डॉक्‍टर, वकील, प्रोफेसर और सिविल सेवा से आने के कारण शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मदवारों की पारिवारिक पृष्‍ठभूमि विविधतापूर्ण प्रतिनिधित्‍व दर्शाती है। 

• शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मीदवारों में से 6 अपने पहले प्रयास में वरीयता सूची में थे, 9 दूसरे प्रयास में वरीयता सूची में थे, 8 तीसरे प्रयास में और चौथे और छठे प्रयासों में एक एक उम्‍मीदवार वरीयता सूची में थे। 

• शीर्षस्‍थ 25 उम्‍मीदवारों में 12 दिल्‍ली से थे; 4 तिरूवंनतपुरम, दो-दो चैन्‍नई और हैदराबाद से और एक-एक जम्‍मु, मुम्‍बई, जयपुर, चण्‍डीगढ और इलाहाबाद केन्‍द्र से थे। 

सिविल सर्विसेज परीक्षा 2012 - में सफल यादव अभ्यर्थी-

Sl no. Rank Name
1 21 Rajkamal Yadav
2 102 Nishant Kr Yadav
3 105 Amit Prakash Yadav
4 314 RENU Yadav
5 328 Bhor Singh Yadav
6 428 Pradeep Kr Yadav
7 430 Pavan Yadav
8 499 Nisheeth Yadav
9 532 Yadav Vishwajeet Shirish Kr
10 575 Shiv Shankar Yadav
11 595 Rahul Kr Yadav
12 639 Sudha Yadav
13 678 Aditi Yadav
14 694 Yogesh Yadav
15 731 Kapil Yadav
16 782 Inderjeet Yadav
17 800 Ankur Yadav
18 812 Chesta Yadav
19 819 Ram Niwas Yadav
20 911 salunke Durgesh Yadav




- Ram Shiv Murti Yadav @ www.yadukul.blogspot.com/ 

रविवार, 28 अप्रैल 2013

कृष्ण कुमार यादव 'विज्ञान परिषद प्रयाग शताब्दी सम्मान' से सम्मानित




राष्ट्रभाषा हिन्दी के माध्यम से विज्ञान लोकप्रियकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिये विज्ञान के प्रति समर्पित संस्था 'विज्ञान परिषद प्रयाग' ने अपने शताब्दी वर्ष में विभिन्न विभूतियों को  'विज्ञान परिषद प्रयाग शताब्दी सम्मान' से विभूषित किया। 

प्रशासन के साथ-साथ लेखन और ब्लागिंग में अनवरत सक्रिय एवं सम्प्रति इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें  कृष्ण कुमार यादव को भी इस अवसर पर  'विज्ञान परिषद प्रयाग शताब्दी सम्मान' से सम्मानित किया गया। 

उक्त सम्मान 27 अप्रैल 2013 को इलाहाबाद में  विज्ञान परिषद प्रयाग के सभागार  में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के राजपाल महामहिम श्री शेखर दत्त द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता  डा0 वीरेन्द्र पाल सिंह, अध्यक्ष विश्व कृषि वानिकी केन्द्र (दक्षिण एशिया), नई दिल्ली ने की। 

इस अवसर पर हिंदी में विज्ञान लेखन करने और इसे प्रोत्साहित करने हेतु देश के बारह विश्वविद्यालयों के कुलपति, विभिन्न प्रमुख संस्थानों/विभागों के आठ निदेशकों, दस डाक्टर्स एवं बीस शिक्षाविद, साहित्यकार व ब्लागर्स को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर विज्ञान परिषद् के सभापति दीनानाथ मिश्र, संस्था के प्रधानमंत्री शिवगोपाल  मिश्र, के . के . भूटानी सहित तमाम विश्वविद्यालयों के कुलपति, विभिन्न प्रमुख संस्थानों/विभागों के निदेशक, अधिकारीगण,  चिकित्सक, शिक्षाविद, साहित्यकार, लेखक, पत्रकार, ब्लागर्स, शोधार्थी इत्यादि उपस्थित थे। 

रविवार, 14 अप्रैल 2013

शरद यादव लगातार तीसरी बार जेडीयू अध्यक्ष बने


नई दिल्ली।। जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारणी की दो दिवसीय बैठक के पहले दिन शनिवार, 13 अप्रैल, 2013   को शरद यादव को लगातार तीसरी बार पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की औपचारिक घोषणा कर दी गई।

जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि शनिवार को बैठक के पहले दिन शरद यादव को लगातार तीसरी बार पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की औपचारिक घोषणा कर दी गई। पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले शरद यादव अकेले उम्मीदवार थे। जेडीयू के संविधान में पांच मार्च को संशोधन किया गया था जिसके जरिए शरद के तीसरी बार अध्यक्ष बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। शरद यादव 2006 में जॉर्ज फर्नांडिस के स्थान पर पार्टी के अध्यक्ष बनाए गए थे।

त्यागी ने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक के दूसरे दिन कल कुछ प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इन प्रस्तावों में राजनैतिक, विदेश नीति, कश्मीर के मुद्दे और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है।

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

नन्ही ब्लागर अक्षिता (पाखी) यादव को शबाना आज़मी व डिम्पल यादव ने किया सम्मानित


हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड- 2013   के लिए सबसे कम उम्र में नन्ही ब्लागर अक्षिता (पाखी) को नामिनेट किया गया था। 6 अप्रैल, 2013 को लखनऊ में ताज होटल में एक भव्य कार्यक्रम में अक्षिता (पाखी) को मशहूर अभिनेत्री शबाना आज़मी, सांसद डिम्पल यादव व संगीत कम्पोजर वाजिद खान ने अप्रिसियेशन सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।


अक्षिता का ब्लॉग है- http://www.pakhi-akshita.blogspot.in/   (पाखी की दुनिया) 


(In Picture : Akshitaa (Pakhi) receiving Certification of Appreciation for Hindustan Times Women Contest-2013, by Mrs. Shabana Azmi, Film Actor and Social Activist, Mrs. Dimple Yadav, MP and wife of Chief Minister UP, Mr. Wajid Khan, Music Composer/singer, in a programme on 6th April, 2013 at Vivanta by Taj, Lucknow)