मंगलवार, 18 नवंबर 2008

एक युवा पहल : कृतिका

समाज में तमाम बुद्धिजीवी अपने स्तर से रचनात्मक कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं। युवा शक्ति यह बखूबी समझ रही है कि सत्ता और प्रभाव को बरकरार रखने के लिए विचारों की धार अनिवार्य है और इसकी धार को और मजबूत करने की लिए लोगों की एकजुटता जरुरी है. उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जनपद उरई-जालौन में हिंदी के प्रवक्ता वीरेन्द्र सिंह यादव ने अर्धवार्षिक पत्रिका " कृतिका" के संपादन द्वारा यह बीड़ा उठाया है. पत्रिका के अभी दो ही अंक आये हैं, पर ऐसा लगता नहीं. साहित्य, कला, संस्कृति, आयुर्वेद, मानविकी एवं समाज विज्ञान को समर्पित देश-देशांतर मित्रों का यह शोधपरक अनुष्ठान बहुआयामी है.150 से ज्यादा पृष्ठों में विभिन्न विषयों पर सारगर्भित लेख के प्रकाशन के साथ पुस्तकों की समीक्षा इसे पठनीय बनती है. भारत से परे भी तमाम देशों के रचनाकारों के समाहित लेख कृतिका को कम समय में ही उल्लेखनीय बनाने में सफल दिखते हैं.
संपर्क: वीरेन्द्र सिंह यादव, 1760, नया रामनगर, उरई-जालौन- 285001

6 टिप्‍पणियां:

Rashmi Singh ने कहा…

Really nice review of Magazine..keep it up.

mauryark ने कहा…

अच्छी पत्रिका की अच्छी समीक्षा .

kkyadav ने कहा…

वीरेन्द्र सिंह अच्छी पत्रिका निकल रहे हैं. समाज को ऐसी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की जरुरत है.

Akanksha ने कहा…

बेहतरीन प्रयास.

बाजीगर ने कहा…

Virendra ji, magazine ko delhi men bhi book stalls par uplabdh karayen.

डाकिया बाबू ने कहा…

भारत से परे भी तमाम देशों के रचनाकारों के समाहित लेख कृतिका को कम समय में ही उल्लेखनीय बनाने में सफल दिखते हैं...badhai.