सोमवार, 24 नवंबर 2008

नेपाल में यदुवंशी राष्ट्रपति: डाॅ0 रामबरन यादव

भारत वर्ष में यादवों के राजनैतिक उत्कर्ष के तमाम उदाहरण मिलते हैं, पर अब विदेशों में भी तमाम उदाहरण मिलने लगे हैं। नेपाल की जनता ने अपने 240 वर्ष पुराने राजतंत्र को उखाड़कर लोकतांत्रिक पद्धति अपनाई है और डाॅ0 रामबरन यादव को अपना पहला राष्ट्रपति चुना है। यह भारत और विशेषकर यहांँ के यादवों के लिए गौरव का विषय है। इससे पूर्व विदेशों में त्रिनिडाड व टुबैगो के पूर्व प्रधानमंत्री श्री वासुदेव पांडे (उनके पूर्वज पानी पिलाते थे, अतः पानी पांडे कहलाने से पांडे सरनेम आया) और मारीशस के पूर्व प्रधानमंत्री अनिरूद्ध जगन्नाथ को भी यादव मूल का माना जाता है।

भारत में यादवों का राजनीति में पदार्पण आजादी के बाद ही आरम्भ हो चुका था, जब शेर-ए-दिल्ली एवं मुगले-आजम के रूप में मशहूर चै0 ब्रह्माप्रकाश दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री बने थे। तब से अब तक भारत के विभिन्न राज्यों में नौ यादव मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो चुके हैं। इनमें चै0 ब्रह्माप्रकाश, बी0पी0 मंडल, दारोगा प्रसाद राय, राव वीरेन्द्र सिंह, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, रामनरेश यादव, बाबू लाल गौर (यादव) और श्रीमती राबड़ी देवी शामिल हैं। सुभाष यादव म0प्र0 के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं।

डाॅ0 रामबरन यादव का जन्म 4 फरवरी 1948 को भारत की सीमा से सटे नेपाल के धनुषा जिले के ग्राम सफाली, जनकपुर धाम में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ था। पिता घनश्याम यादव और माता श्रीमती रामरती की चैथी संतान डाॅ0 रामबरन यादव अब स्वयं दो बेटे और एक बेटी के पिता हैं। उनकी धर्मपत्नी का देहान्त हो चुका है। डाॅ0 रामबरन यादव और उनके परिवार के लोग मधेशी (भारत के साथ लगा तराई का क्षेत्र) के निवासी होने के कारण भारत के साथ अपने भविष्य और विकास के लिए घनिष्ठता और लगाव रखते हैं तथा अधिकतर इसी क्षेत्र में अपने सामाजिक रिश्ते भी बनाये रखते हैं। यही कारण है कि डाॅ0 रामबरन ने अपनी प्राथमिक शिक्षा धनुषा और काठमांडू में प्राप्त की और उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए भारत आ गये। उन्होंने 1981 में मेडिकल कालेज कलकत्ता से एम0बी0बी0एस0 की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद 1985 में एम0डी0 (फिजीशियन) की डिग्री(PGIMER) चंडीगढ़ से प्राप्त की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लगभग आठ साल तक चण्डीगढ़ में रहकर ही अपनी मैडिकल प्रैक्टिस की। धीरे-धीरे उनके विचारों में बदलाव आने लगा और उनका रूझान राजनीति की ओर बने लगा तब से दोबारा अपने देश में जाकर नेपाली कांग्रेस से जुड़ गये। ‘‘यदुकुल‘‘ की यही हार्दिक अभिलाषा है कि डाॅ0 रामबरन यादव नेपाल के राष्ट्रपति के रूप में अपने राष्ट्र को उच्चतम शिखर तक पहुँचायें और यदुवंशियों का नाम रोशन करें।
(ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ जायें- http://en.wikipedia.org/wiki/Ram_Baran_Yadav)

15 टिप्‍पणियां:

Akanksha Yadav ने कहा…

यदुवंशी प्राचीन काल से ही बड़े उन्नत रहे हैं.आज देश-विदेश में यदुवंशी परचम फहरा रहे हैं, यह गर्व की बात है.

Akanksha Yadav ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Bhanwar Singh ने कहा…

रामबरन यादव जी के बारे में जानकर अच्छा लगा. आपका ब्लॉग बेहतरीन रूप में यादवों की भूमिका को सामने ला रहे है....बधाई.

शरद कुमार ने कहा…

Nice Information.

अनाम ने कहा…

ऐसी विभूतियों से परिचय के लिए साधुवाद.

KK Yadav ने कहा…

..यहाँ तो चारों तरफ जय-जयकार हो रही है.

Amit Kumar Yadav ने कहा…

Mr. Yadav is an inspiring character for youth.

Unknown ने कहा…

उन्नत यदुवंशी आज भी उन्नत है इसलिए आज भी वो सामान्य वर्ग में आते है। अहीर यदुवंशी नही होते अहीर गोप ग्वाल वंशी होते है इसलिए आज भी obc में आते है।

Ajay yadav ने कहा…

Rajput videshi hain ye apna gyan yadavo pr mat de

Unknown ने कहा…

Jai yadav jai madav

Unknown ने कहा…

Jay yadav jay Madhav
Jay Shree Krishna jay Shree ram

Unknown ने कहा…

ये बात कहा है से पता चला कि वे यादव नहीं है ।यादव हर राज्य में अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार विभिन्न कटेगरी में आता है

Unknown ने कहा…

Desh yaduvanshi

Unknown ने कहा…

Jai Yaduvanshi

Unknown ने कहा…

Jay Shree कृष्ण