बुधवार, 12 नवंबर 2008

यदुवंशियों द्वारा प्रकाशित पत्र-पत्रिकाएं

किसी भी वर्ग के निरंतर उन्नयन और प्रगतिशीलता के लिए जरुरी है कि विचारों का प्रवाह हो। विचारों का प्रवाह निर्वात में नहीं होता बल्कि उसके लिए एक मंच चाहिए। राजनीति-प्रशासन-मीडिया-साहित्य-कला से जुड़े तमाम ऐसे मंच हैं, जहाँ व्यक्ति अपनी अभिव्यक्तियों को विस्तार देता है। आधुनिक दौर में किसी भी समाज-राष्ट्र के विकास में साहित्य और मीडिया की प्रमुख भूमिका है, क्योंकि ये ही समाज को चीजों के अच्छे-बुरे पक्षों से परिचित करने के साथ-साथ उनका व्यापक प्रचार-प्रसार भी करती हैं। व्यवहारिक तौर पर भी देखा जाता है कि जिस वर्ग की मीडिया-साहित्य पर जितनी मजबूत पकड़ होती है, वह वर्ग भी अपनी बुद्धिजीविता के बाल पर उतना ही सशक्त और प्रभावी होता है और लोगों के विचारों को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता .है यादव समाज से जुड़े तमाम बुद्धिजीवी देश के कोने-कोने से पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन/संपादन कर रहे हैं. जरुरत है की इनका व्यापक प्रचार-प्रसार हो और इनके पाठकों की संख्या में भी अभिवृद्धि हो. यदुकुल की कोशिश होगी कि इन पत्र-पत्रिकाओं को सामने लाया जाय। कुछ प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं-

हंस (मा0)ः सं0-राजेन्द्र यादव, अक्षर प्रकाशन प्रा0 लि0, 2/36 अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली/

सामयिक वार्ता()ःसं0- योगेन्द्र यादव, एक्स बी-4, सह विकास सोसायटी, 68, इंद्रप्रस्थ विस्तार, पटपड़गंज, दिल्ली/

प्रगतिशील आकल्प(त्रै0)ः सं0- डा0 शोभनाथ यादव, पंकज क्लासेज, पोस्ट आफिस बिल्डिंग, जोगेश्वरी (पूर्व), मुम्बई/

मड़ई (वार्षिक)ः सं0-डा0 कालीचरण यादव, बनियापारा, जूना विलासपुर, छत्तीसगढ़-495001/

राष्ट्रसेतु(मा0)ःसं0-जगदीश यादव, मिश्रा भवन, आमानाका, रायपुर (छत्तीसगढ़)/

मुक्तिबोध (अनि0)ःसं0-मांघीलाल यादव, साहित्य कुटीर, टिकरापारा, गंडई-पंडरिया, राजनादगाँव(छ0ग0)/

बहुजन दर्पण(सा0)ःसं0- नन्द किशोर यादव, विजय वार्ड नं0 2, जगदलपुर, छत्तीसगढ़/

नाजनीन()ःसं0-रामचरण यादव ‘याददाश्त‘, सदर बाजार, बैतूल (म0प्र0)/

डगमगाती कलम के दर्शन(मा0)ःसं0-रमेश यादव, 127-गोकुलगंज, कन्डीलपुरा, इंदौर - 452006/

प्रियंत टाइम्स(मा0)ः सं0- प्रेरित प्रियन्त, 22- भालेकरीपुरी, इमली बाजार, इन्दौर-4/

वस्तुतः (अनि0)ः सं0- अरुण कुमार, तरुण-निवास, त्रिवेणीगंज, बिहार-852139/

मण्डल विचार (मा0)ः सं0- श्यामल किशोर यादव, श्यामप्रिया सदन, गुलजारबाग, मधेपुरा, बिहार-852113/

आपका आईना(त्रै0)ःसं0-डा0 राम अशीष सिंह, समीक्षा प्रकाशन, मानिक चंद तालाब, अनीसाबाद, पटना-800002/

अनंता(मा0)ःसं0- पूनम यादव, २०३-२०४, सरन चैंबर-IIदितीय तल, ५ पार्क रोड, लखनऊ (यू. पी.)/

शब्द (मा0)ः सं0- आर0सी0यादव, सी-1104, इन्दिरा नगर, लखनऊ-226016/

अमृतायन()ःसं0- डा0 अशोक ‘अज्ञानी‘, हिन्दी अनुभाग, राजकीय हुसैनाबाद इंटर कालेज, चौक,लखनऊ-226003/

प्रगतिशील उद्भव(त्रै0)ःसं0-अजय शेखर, गिरसन्त कुमार यादव, 1/553, विनयखण्ड, गोमती नगर, लखनऊ- 226010/

कृतिका(छ0)ःसं0- डा0 वीरेन्द्र सिंह यादव, 1760, नया रामनगर, उरई, जालौन (उ0प्र0)-285001/

हिन्द क्रान्ति(पा0)ःसं0- सतेन्द्र सिंह यादव, आर-4/17, राजनगर, गाजियाबाद (उ0प्र0)/

स्वतन्त्रता की आवाज(सा0)ःसं0-आनन्द सिंह यादव, ग्राम-ईशापुर पो0-मलिहाबाद, लखनऊ/

दहलीज(पा0)ःसं0-ओमप्रकाश यादव 13,पटेल परमानंद की चाली(पठान की चाली), अमृता मील के सामने, सरसपुर, अहमदाबाद/

यादव ज्योति(मा0)ःसं0-श्रीमती लालसा देवी, ‘यादव-ज्योति‘ कार्यालय, के0 54/157-ए, दारानगर, वाराणसी-221001/

यादव कुल दीपिका()ःसं0- चिरंजी लाल यादव, बी-73, शिवाजी रोड, उत्तरी घोण्डा, दिल्ली-53/

यादव डायरेक्ट्री (वार्षिक) सं0-सत्येन्द्र सिंह यादव, 27, सुरेश नगर, न्यू आगरा, आगरा-5/

यादवों की आवाज (त्रै0) सं0-डा0 के0सी0 यादव, अखिल भारत वर्षीय यादव महासभा, श्री कृष्ण भवन, सेक्टर-IVवैशाली, टी0एच0ए0, गाजियाबाद -201011/

यादव साम्राज्य(त्रै0)ःसं0-भंवर सिंह यादव, 130/61, बगाही, बाबा कुटी चौराहा, किदवई नगर, कानपुर-208011/

यादव शक्ति (त्रै0) सं0- राजबीर सिंह यादव, 161, बाजार दक्षिणी सिधौली, सीतापुर (उ0प्र0)-261303/

यादव दर्पण()ःसं0-डाॅ0 जगदीश व्योम, 1206, सेक्टर-37, नोएडा, गौतमबुद्ध नगर

6 टिप्‍पणियां:

Rashmi Singh ने कहा…

यादव बंधुओं द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं को आप सामने ला रहे हैं, वाकई सराहनीय पहल है.

kkyadav ने कहा…

पहली बार यादवों से जुडी पत्र-पत्रिकाओं को अंतर्जाल पर लाने की इस अनूठी पहल को नमन करता हूँ.

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

........Great. So many magazines are being published by Yadavs..Thanks for information !!

Akanksha ने कहा…

यादव समाज में इन पत्रिकाओं की पहुँच अभी बहुत सीमित है, इस क्षेत्र में भी कार्य करने की जरुरत है.प्रयास अच्छा है.

kkyadav_ssp ने कहा…

आधुनिक दौर में किसी भी समाज-राष्ट्र के विकास में साहित्य और मीडिया की प्रमुख भूमिका है, क्योंकि ये ही समाज को चीजों के अच्छे-बुरे पक्षों से परिचित करने के साथ-साथ उनका व्यापक प्रचार-प्रसार भी करती हैं। व्यवहारिक तौर पर भी देखा जाता है कि जिस वर्ग की मीडिया-साहित्य पर जितनी मजबूत पकड़ होती है, वह वर्ग भी अपनी बुद्धिजीविता के बाल पर उतना ही सशक्त और प्रभावी होता है और लोगों के विचारों को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है....
आज के दौर में बड़ी सटीक बात कही है आपने. यादवों द्वारा संपादित/प्रकाशित एक साथ इतनी पत्र-पत्रिकाओं की सूची पहली बार देखी. यादव समाज में आपके इस अद्भुत प्रयास की सराहना होनी चाहिए.

Amit Kumar ने कहा…

Kamal ka blog hai..badhai.