गुरुवार, 3 जून 2010

जाति आधारित जनगणना अनिवार्य : अन्य देशों में भी है नस्लीय गणना

जाति आधारित जनगणना के विपक्ष में उठाए जा रहे सवालों पर सिलसिलेवार चर्चा करें-
दुनिया के अन्य देशों में जाति आधारित जनगणना नहीं होती है।

जाति भारतीय समाज व्यवस्था की देन है। वर्ष 2001 की जनगणनुसार हमारे यहाँ 18,740 अनुसूचित जातियाँ व जनजातियों से जुड़े वर्ग सूचीबद्ध हैं। इसी प्रकार अन्य पिछ़ड़ा वर्ग की केंद्रीय सूची में 1963 जातियाँ और तकरीबन 4000 उपजातियाँ शामिल हैं। इसके अलावा हर राज्य की अन्य पिछड़े वर्गों की अपनी अलग सूचियाँ हैं। इस तरह की जाति व्यवस्था दुनिया के अन्य देशों में नहीं पाई जाती। वहाँ पर धार्मिक-भाषाई-सामाजिक-एथनिक आदि पर आधारित समुदाय अवश्य हैं, जिनकी गिनती उनकी जनगणना में की जाती है। स्वयं अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र में अश्वेत, नेटिव इंडियन, एशियन व डिस्पैनिक जैसे समूहों की बकायदा गणना की जाती है।
(जातिवार गणना के विरोध में उठाये गए हर सवाल का जवाब क्रमश: अगले खंड में)

4 टिप्‍पणियां:

आचार्य जी ने कहा…

आईये जानें .... मैं कौन हूं!

आचार्य जी

Ratnesh Kr. Maurya ने कहा…

..इस सच्चाई के बाद भी सवर्ण लोग समझ नहीं पा रहे हैं.

Ratnesh Kr. Maurya ने कहा…

बहुत सही लिखा आपने. जिन लोगों ने जाति की आड में सदियों तक शोषण किया, आज अपने हितों पर पड़ती चोट को देखकर बौखला गए हैं. जातिवाद के पोषक ही आज जाति आधारित जनगणना के आधार पर जातिवाद के बढ़ने का रोना रो रहे हैं. इस सारगर्भित लेख के लिए आपकी जितनी भी बड़ाई करूँ कम ही होगी. अपने तार्किक आधार पर जाति-गणना के पक्ष में सही तर्क व तथ्य पेश किये हैं..साधुवाद !!

Shyama ने कहा…

स्वयं अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र में अश्वेत, नेटिव इंडियन, एशियन व डिस्पैनिक जैसे समूहों की बकायदा गणना की जाती है...fir India men kya problem hai ??