शनिवार, 15 अगस्त 2009

पराक्रमी एवं स्वतंत्रता प्रिय जाति यादव

किसी भी राष्ट्र के उत्थान में विभिन्न जाति समुदायों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। जाति समाज की एक महत्वपूर्ण इकाई है। समाज में वही जाति प्रमुख स्थान बना पाती है जिसका न सिर्फ अपना गौरवशाली इतिहास हो बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने का सत्साहस भी हो। यही कारण है कि तमाम जातियाँ कभी न कभी संक्रमण काल से गुजरती हैं। जातीय सर्वोच्चता एवं जातिवाद जैसे तत्व कहीं न कहीं समाज को प्रभावित करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के वंशज कहे जाने वाले यादवों के बारे में पौराणिक व ऐतिहासिक ग्रन्थों में विस्तार से जानकारी मिलती है। श्रीमद्भागवत (9/23/19) में कहा गया है कि-

यदोर्वंशः नरः श्रुत्वा सर्व पापैः प्रमुच्यते।
यत्रावतीर्ण कृष्णाख्यं परं ब्रह्म निराकृति।।
यादव आरम्भ से ही पराक्रमी एवं स्वतंत्रता प्रिय जाति रही है। यूरोपीय वंश में जो स्थान ग्रीक व रोमन लोगों का रहा है, वही भारतीय इतिहास में यादवों का है। आजादी के आन्दोलन से लेकर आजादी पश्चात तक के सैन्य व असैन्य युद्धों में यादवों ने अपने शौर्य की गाथा रची और उनमें से कई तो मातृभूमि की बलिवेदी पर शहीद हो गये। ईस्ट इण्डिया कम्पनी के विरूद्ध सर्वप्रथम 1739 में कट्टलापुरम् (तमिलनाडु) के यादव अजगमुत्थु कोणें ने विद्रोह का झण्डा उठाया और प्रथम स्वतंत्रता सेनानी के गौरव के साथ वीरगति को प्राप्त हुए। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में यादवों ने प्रमुख भूमिका निभाई। बिहार में कुँवर सिंह की सेना का नेतृत्व रणजीत सिंह यादव ने किया। रेवाड़ी (हरियाणा) के राव रामलाल ने 10 मई 1857 को दिल्ली पर धावा बोलने वाले क्रान्तिकारियों का नेतृत्व किया एवं लाल किले के किलेदार मिस्टर डगलस को गोली मारकर क्रान्तिकारियों व बहादुर शाह जफर के मध्य सम्पर्क सूत्र की भूमिका निभाई। 1857 की क्रांति की चिंगारी प्रस्फुटित होने के साथ ही रेवाड़ी के राजा राव तुलाराम भी बिना कोई समय गंवाए तुरन्त हरकत में आ गये। उन्होंने रेवाड़ी में अंग्रेजों के प्रति निष्ठावान कर्मचारियों को बेदखल कर स्थानीय प्रशासन अपने नियन्त्रण में ले लिया तथा दिल्ली के शहंशाह बहादुर शाह ज़फर के आदेश से अपने शासन की उद्घोषणा कर दी। 18 नवम्बर 1857 को राव तुलाराम ने नारनौर (हरियाणा) में जनरल गेरार्ड और उसकी सेना को जमकर टक्कर दी। इसी युद्ध के दौरान राव कृष्ण गोपाल ने गेरार्ड के हाथी पर अपने घोड़े से आक्रमण कर गेरार्ड का सिर तलवार से काटकर अलग कर दिया। अंग्रेजों ने जब स्वतंत्रता आन्दोलन को कुचलने का प्रयास किया तो राव तुलाराम ने रूस आदि देशों की मदद लेकर आन्दोलन को गति प्रदान की। अंततः 2 सितम्बर 1863 को इस अप्रतिम वीर का काबुल में देहंात हो गया। वीर-शिरोमणि यदुवंशी राव तुलाराम के काबुल में देहान्त के बाद वहीं उनकी समाधि बनी जिस पर आज भी काबुल जाने वाले भारतीय यात्री बडी श्रद्वा से सिर झुकाते हैं और उनके प्रति आदर व्यक्त करते हैं। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में राव तुलाराम के अप्रतिम योगदान के मद्देनजर 23 सितम्बर 2001 को उन पर एक डाक टिकट जारी किया गया।

चौरी-चौरा काण्ड से भला कौन अनजान होगा। इस काण्ड के बाद ही महात्मा गाँंधी ने असहयोग आन्दोलन वापस लेने की घोषणा की थी। कम ही लोग जानते होंगे कि अंग्रेजी जुल्म से आजिज आकर गोरखपुर में चैरी-चैरा थाने में आग लगाने वालों का नेतृत्व भगवान यादव ने किया था। इसी प्रकार भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान गाजीपुर के थाना सादात के पास स्थित मालगोदाम से अनाज छीनकर गरीबों में बांँटने वाले दल का नेतृत्व करने वाले अलगू यादव अंग्रेज दरोगा की गोलियों के शिकार हुये और बाद में उस दरोगा को घोड़े से गिराकर बद्री यादव, बदन सिंह इत्यादि यादवों ने मार गिराया। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने जब ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा‘ का नारा दिया तो तमाम पराक्रमी यादव उनकी आई0एन0एस0 सेना में शामिल होने के लिए तत्पर हो उठे। रेवाड़ी के राव तेज सिंह तो नेताजी के दाहिने हाथ रहे और 28 अंग्रेजों को मात्र अपनी कुल्हाड़ी से मारकर यादवी पराक्रम का परिचय दिया। आई0एन0ए0 का सर्वोच्च सैनिक सम्मान ‘शहीद-ए-भारत‘ नायक मौलड़ सिंह यादव को हरि सिंह यादव को ‘शेर-ए-हिन्द‘ सम्मान और कर्नल राम स्वरूप यादव को ‘सरदार-ए-जंग‘ सम्मान से सम्मानित किया गया। नेता जी के व्यक्तिगत सहयोगी रहे कैप्टन उदय सिंह आजादी पश्चात दिल्ली में असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर बने एवं कई बार गणतंत्र परेड में पुलिस बल का नेतृत्व किया।

आजादी के बाद का इतिहास भी यादव सैन्य अधिकारियों तथा सैनिकों की वीरता एवं शहादत से भरा पड़ा है। फिर चाहे वह सन् 1947-48 का कबाइली युद्ध, 1955 का गोवा मुक्ति युद्ध, 1962 का भारत-चीन युद्ध हो अथवा 1965 व 1971 का भारत-पाक युद्ध। भारत-चीन युद्ध के दौरान 18,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित चिशूल की रक्षा में तैनात कुमायँू रेजीमेन्ट के मेजर शैतान सिंह यादव ने चीनियों के छक्के छुडा़ दिये। गौरतलब है कि चिशूल के युद्व में 114 यादव जवान शहीद हुए थे। चिशूल की हवाई पट्टी के पास एक द्वार पर लिखा शब्द ‘वीर अहीर‘ यादवों के गौरव में वृद्धि करता है। 1971 के युद्ध में प्रथम शहीद बी0एस0एफ0 कमाण्डर सुखबीर सिंह यादव की वीरता को कौन भुला पायेगा। मातादीन यादव (जार्ज क्रास मेडल), नामदेव यादव (विक्टोरिया क्रास विजेता), राव उमराव सिंह(द्वितीय विश्व युद्ध में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु विक्टोरिया क्रास), हवलदार सिंह यादव (विक्टोरिया क्रास विजेता), प्राणसुख यादव (आंग्ल सिख युद्ध में सैन्य कमाण्डर), मेजर शैतान सिंह यादव (मरणोपरान्त परमवीर चक्र), कैप्टन राजकुमार यादव (वीर चक्र, 1962 का युद्ध), बभ्रुबाहन यादव (महावीर चक्र, 1971 का युद्ध), ब्रिगेडियर राय सिंह यादव (महावीर चक्र), चमन सिंह यादव (महावीर चक्र विजेता), ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव (1999 में कारगिल युद्ध में उत्कृष्टम प्रदर्शन के चलते सबसे कम उम्र में 19 वर्ष की आयु में सर्वोच्च सैन्य पदक परमवीर चक्र विजेता) जैसे न जाने कितने यादव जंाबांजों की सूची शौर्य-पराक्रम से भरी पड़ी है। कारगिल युद्ध के दौरान अकेले 91 यादव जवान शहादत को प्राप्त हुए। गाजियाबाद के कोतवाल रहे ध्रुवलाल यादव ने कुख्यात आतंकी मसूद अजगर को नवम्बर 1994 में सहारनपुर से गिरतार कर कई अमेरिकी व ब्रिटिश बंधकों को मुक्त कराया था। उन्हें तीन बार राष्ट्रपति पुरस्कार (एक बार मरणोपरान्त) मिला। ब्रिगेडियर वीरेन्द्र सिंह यादव ने नामीबिया में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्व सांसद चैधरी हरमोहन सिंह यादव को 1984 के दंगों में सिखों की हिफाजत हेतु असैनिक क्षेत्र के सम्मान ‘शौर्य चक्र‘ (1991) से सम्मानित किया जा चुका है। संसद हमले में मरणोपरान्त अशोक चक्र से नवाजे गये जगदीश प्रसाद यादव, विजय बहादुर सिंह यादव अक्षरधाम मंदिर पर हमले के दौरान आपरेशन लश आउट के कार्यकारी प्रधान कमाण्डो सुरेश यादव तो मुंबई हमले के दौरान आर0पी0एफ0 के जिल्लू यादव तथा होटल ताज आपरेशन के जाँबाज गौरी शंकर यादव की वीरता यदुवंशियों का सीना गर्व से चौडा कर देती है। वाकई यादव इतिहास तमाम जांबाजों की वीरताओं से भरा पड़ा है !!

14 टिप्‍पणियां:

Rashmi Singh ने कहा…

यदुवंशियों की वीरता सीना गर्व से चौडा कर देती है। वाकई यादव इतिहास तमाम जांबाजों की वीरताओं से भरा पड़ा है........Salute !!

Bhanwar Singh ने कहा…

यादव जांबाजों की शूर वीरता के किस्से तो जग-प्रसिद्ध हैं. आपने यहाँ इसे प्रस्तुत कर बड़ा नेक कार्य किया है...साधुवाद.

भंवर सिंह यादव
संपादक-यादव साम्राज्य
कानपुर.

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

बेहद प्रेरणास्पद जानकारी...यदुवंशियों के बीच इनके व्यापक प्रचार-प्रसार की जरुरत है.

KK Yadav ने कहा…

..यहाँ तो चारों तरफ जय-जयकार हो रही है.

Hitendra ने कहा…

Born on 3rd March 1976 at village Bakain, Distt. Bilaspur to Shri Durga Ram Yadav. His schooling took place in the Govt. Sr. Secondary School Kalol. During the period of 1993-94 in Delhi, he worked as driver in private company. He was selected in Indian Army in 4th June 1996. He got posting in the 13th Jammu and Kashmir Rifles. His village had sent many brave men in the Army. His uncle is in the Army while his second brother is also a sepoy with the Indo-Tibet Border Police (ITBP).

Rifleman Sanjay Kumar of the 13th battalion of the Jammu and Kashmir Rifles, who braved the enemy guns and the sub-zero conditions while leading a column of army jawans for the recapture of flat top in Mushkoh valley, at the height of over 17,000 ft, the pain of gunshot wounds has been well worth it.

Rifleman Sanjay Kumar is one such lucky jawan who got Param Vir Chakra, thePresident decorated Rifleman Sanjay Kumar with Param Vir Chakra highest gallantry award of Indian Army, alive for showing exceptional grit and bravery..

gyadav ने कहा…

yadubansiyo ka gaurav kahi badh kar hai

gyadav ने कहा…

yadubansiyo ka gaurav kahi badh kar hai

Bhanu Pratap Singh Yadav ने कहा…

Namai krishnam yaduvansh natham

Unknown ने कहा…

Yadav ki jay

Thakur Sumit Bais ने कहा…

Bhai Ji yaha Pr ek correction he blog me India China war 1962 me paramveer chakra mila tha Wo Rajput Major Shaitan Singh Bhati he na ki major shaitan singh Yadav aap WO bhi jodhpur Rajput Bhati gharane se unke pitaji bhi Lt.col. Hem singh army me the or ye aap kisi bhi Rajasthan ya jodhpur side k vyakti ya kisi bhi web site ya biopic me chk kr sakte he to aapse nivedan he itne bade veer ka naam badalkar apmanit naa kre haa prantu unki battalion 13 kumouni regiment me unke saat 120 sainik the jisme ki mostly rewaari k aheer the or unhone bhi adamya veerta k saat Chinese army ka saamna kiya tha or unke approx 1300 jawano ko Major shaitan singh bhati k saat milkar maut k ghaat utar diya tha
Dhanyawad. Jai Rajputana

राजेश "शिवभक्त" ने कहा…

आप ठिक से चेक कर लो बैस भाई .मेजर शैतान सिंह यादव कुल से .हैं.

राजेश "शिवभक्त" ने कहा…

रेजन्गला की लडाई यादव .ही लडे थे जिसके कमान्डर .मेजर शैतान सिंह थे

Virender Shekhawat ने कहा…

शैतान सिहं यदुवंशी भाटी राजपुत थे राजस्थान के मारवाड मे भाटी बहुतायात में है जैसलमेर भाटीयो की रियासत थी और के समस्त यदुवंशीयो के छत्रपति कहे जाते है जैसलमेर के किले में महाभारतकालीन सिंहासन है जिस पर "छत्राला यादवपति" अंकित है

Virender Shekhawat ने कहा…

यहा देखे त्रुटी सुधारे
https://yadavwarrior.wordpress.com/