सोमवार, 18 अगस्त 2014

कृष्ण भोग, कृष्ण त्याग, कृष्ण तत्व ज्ञान है


कृष्ण उठत कृष्ण चलत कृष्ण शाम भोर है, 
कृष्ण बुद्धि कृष्ण चित्त कृष्ण मन विभोर है।

कृष्ण रात्रि कृष्ण दिवस कृष्ण स्वप्न शयन है, 
कृष्ण काल कृष्ण कला कृष्ण मास अयन है।

कृष्ण शब्द कृष्ण अर्थ कृष्ण ही परमार्थ है, 
कृष्ण कर्म कृष्ण भाग्य कृष्णहि पुरुषार्थ है।

कृष्ण स्नेह कृष्ण राग कृष्णहि अनुराग है, 
कृष्ण कली कृष्ण कुसुम कृष्ण ही पराग है।

कृष्ण भोग कृष्ण त्याग कृष्ण तत्व ज्ञान है, 
कृष्ण भक्ति कृष्ण प्रेम कृष्णहि विज्ञान है।

कृष्ण स्वर्ग कृष्ण मोक्ष कृष्ण परम साध्य है,
कृष्ण जीव कृष्ण ब्रह्म कृष्णहि आराध्य है।

जय श्री कृष्ण....!!

!! कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ !!

(  सन्देश के रूप में  प्राप्त श्रीकृष्ण-काव्य आप सभी के साथ साभार शेयर कर रहा हूँ. इसके स्रोत या रचयिता का नाम पता हो तो जरूर बताइयेगा )


शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव को सेवा में पदोन्नति

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव को भारत सरकार ने सेलेक्शन ग्रेड में पदोन्नत किया है। भारतीय डाक सेवा के 2001 बैच के अधिकारी कृष्ण कुमार यादव वर्तमान में जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड में थे और अब उन्हें भारत सरकार ने पे बैंड-4 में नान फंक्शनल सेलेक्शन ग्रेड (वेतनमान-रू 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) में पदोन्नत किया है।  कृष्ण कुमार यादव सहित उनके बैच के सभी 9 अधिकारियों को यह पदोन्नति 1 जनवरी 2014 से दी गयी है। 

कृष्ण कुमार यादव भारतीय डाक सेवा के लोकप्रिय अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने भारतीय डाक सेवाओं को आम जन में और ज्यादा उपयोगी बनाने के लिए सतत् प्रयास किए हैं। उनका विभिन्न विषयों पर साहित्य लेखन बहुत सशक्त है, जिसके लिए उनको कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले हैं। उन्होंने अपने मूल कार्य क्षेत्र में भी हिंदी के उपयोग और विकास में बेहतर योगदान दिया है। कृष्ण कुमार यादव के पिताश्री श्रीराम शिवमूर्ति यादव भी हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक नाम हैं।  इनकी पत्नी श्रीमती आकांक्षा यादव जहाँ  हिंदी साहित्य, लेखन और ब्लागिंग में बखूबी सक्रिय हैं, वहीँ  इनकी पुत्री अक्षिता (पाखी) भी एक नवोदित ब्लागर है। कृष्ण कुमार यादव की कार्यप्रणाली में उच्चकोटि की रचनात्मकता और व्यवहार कुशलता देखने को मिलती है।



मंगलवार, 29 जुलाई 2014

अभावों के बीच पूनम यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता कांस्य


मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है।
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।।

ये पंक्तियां एकदम सही बैठती हैं वाराणसी की 19 वर्षीया पूनम यादव पर। अभावों के बीच पली-बढ़ी पूनम यादव ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का झंडा ऊंचा किया हैं। उन्होंने भारोत्तोलन में महिलाओं के 63 किग्रा वर्ग में कुल 202 किग्रा का भार उठाकर कांस्य पदक जीता है। भारत का 20वें राष्ट्रमंडल खेलों की इस प्रतियोगिता में सातवां पदक है। उन्हें नाईजीरियाई खिलाड़ी ओबियोमा ओकोली और ओलेयुवाटोयिन अदेसनमी सेे कड़ी टक्कर मिली। दोनों एथलीटों ने  पांच किलो अधिक का वजन उठाया और क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक अपने नाम किया।

 पूनम के सपनों को पूरा करने के लिए गरीब परिवार ने भी अपना  सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। गरीब पिता ने अपनी आमदनी का साधन दोनों भैंसें तक बेच दी और पूनम की दोनों बहनों ने पूनम की जिंदगी में ये दिन देखने के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं को त्याग दिया। पूनम के पिता कैलाश यादव  बेटी की इस जीत से काफी उत्साहित हैं। वह बताते हैं कि 2011 में जब पूनम ने खेलना शुरू किया था तो  धीरे-धीरे वह जिला, मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने लगी। उन्होंने बताया कि कॉमनवेल्थ की तैयारी में आर्थिक परेशानियां भी सामने आने लगीं। पूनम के खेल और उसके डाइट के लिए दो भैसों को बेच दिया गया। परिवार ने भूखे रहकर पूनम को मौका दिया। छोटा सा खेत है, उसी से किसी तरह परिवार का गुजारा होता है। साथ ही, पूनम को सारी सुविधाएं देने की कोशिश जाती हैं। 

कहते हैं आगे बढ़िए तो रास्ते  स्वमेव खुलते जाते हैं। गरीबी और लाचारी से जूझ रहे परिवार की मदद एक साल पहले एक स्थानीय नेता सतीश फौजी ने की थी। उन्होंने बताया कि पूनम के पिता से उनकी मुलाकात एक संत के यहां हुई थी। उनके घर की परेशानी सुनकर उन्हें काफी तकलीफ हुई। ऐसे में उनकी बेटी की सारी जिम्मेदारियां उन्होंने खुद पर ले ली। उन्होंने बताया कि थाईलैंड एशियाड में सिलेक्शन के पहले उसकी डाइट पर हर महीने 25,000 रुपए खर्च होते थे। ऐसे में उन्होंने उसे अपनी बेटी मानकर उसकी सारी जरूरतें पूरी की। वह चाहते हैं कि वह देश के लिए मेडल जीते। साथ ही, अपने परिवार का नाम रोशन करे।

बड़ी बहन किरण यादव ने बताया कि पहले जब घर में भैंसे थी, तो पूनम ही उनकी देखभाल किया करती थी। हालांकि, गरीबी के चलते भैंस भी बिक गए। उम्मीद है कि घरवालों की मेहनत और कुर्बानी रंग लाएगी। उनकी बहन देश के लिए मेडल जरूर जीतेगी। वहीं, चाचा गुलाब यादव बताते हैं कि उसके पिता ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बेटी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। दोनों भाई भी भगवान से बहन की जीत की कामना करते रहते थे।  

पूनम का प्रोफाइल

1. नाम: पूनम यादव
2. गांव: क्राइस्ट नगर
3. पिता: कैलाश यादव (किसान)
4. पढ़ाई: बीए, थर्ड ईयर (परीक्षा छूट गई)
5. भाई-बहन: चार बहनें दो भाई
बड़ी बहन किरण यादव, शशिलता यादव, शशि, पूनम, पूजा। छोटे भाई आशुतोष यादव और अभिषेक यादव (नेशनल  हॉकी प्लेयर)
6. कैटगरी: वजन 63 Kg महिला वर्ग
7. मेडल: एशियाड 2014 में सिल्वर मेडल, सीनियर नेशनल 2014 में सिल्वर मेडल

वाकई सोना तप कर ही खरा होता है।  पूनम की इस होनहार उपलब्धि पर हम सभी को गर्व है !!

- राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल : www.yadukul.blogspot.com/
https://www.facebook.com/ramshivmurti.yadav





वाकई सोना तप कर ही खरा होता है।  पूनम की इस होनहार उपलब्धि पर हम सभी को गर्व है !!



रविवार, 15 जून 2014

सिविल सर्विसेस में चयनित हुए 24 यादव, इनमें एक-तिहाई लड़कियाँ

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा पिछले दिनों सिविल सर्विसेस में चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई है। इसमें यादव समाज से भी तमाम लोग चयनित हैं।  इन सभी को  हार्दिक बधाईयाँ। इन सभी की रैंक उनके नाम से पहले दी गई है। इन 24 सफल लोगों में से कुल 8 लड़कियां अर्थात एक-तिहाई .... यह वाकई एक शुभ संकेत है।  सभी को उनके उज्जवल भविष्य के लिए अनेकों बधाइयाँ और स्नेहाशीष !!

1 -24 नेहा यादव
2 -123 अनीस यादव
3 -235 प्रीति यादव
4 -291 भोर सिंह यादव
5 -315 चेष्टा यादव
6 -327 पवन यादव
7 -331 राहुल यादव
8 -360 सरिता यादव
9 -368 दिलीप कुमार यादव
10 -407 करण यादव
11 -453 आकांक्षा यादव
12 -470 सुप्रिया यादव
13- 478 पूजा यादव
14 -674 अदिति यादव
15 -712 इन्द्रजीत यादव
16 -719 दीपक यादव
17 -742 आदित्य सिंह यादव
18 -753 मनीष कुमार यादव
19 -768 ऋषि यादव
20- 856 महेश यादव
21 -914 बब्बल यादव
22 -927 गौरव यादव
23 -960 राहुल यादव
24 -1055 विजय कुमार यादव

उपरोक्त के अलावा कुछेक अन्य नाम भी इस सूची में  संभावित हैं।

- राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल 
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सोमवार, 26 मई 2014

राजकुमार राव (यादव) को फिल्म फेयर अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवार्ड

राजकुमार राव (यादव) हिंदी फिल्मों में अपना परचम बखूबी फहरा रहे हैं।  अभी हाल ही में 59वें फिल्म फेयर अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का क्रिटिक्स अवार्ड राजकुमार राव (यादव) को उनकी फिल्म शाहिद के लिये  दिया गया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार पाकर हरियाणा में गुड़गांव के प्रेम नगर की गलियों का यह छोरा अचंभित है। कुछ उसी तरह जैसे उन्हें सिर्फ नाम से जानने वाले अबतक दक्षिण भारतीय समझ रहे थे। अब रिश्ते ढूंढ रहे हैं। यार-दोस्त, नाते-रिश्तेदार, शिक्षक-प्रशिक्षक तो 2008 से ही उम्मीदें लगाए बैठे थे। तब वह माया नगरी में स्ट्रग्लर के रूप में गए थे। 2010 में 'लव सेक्स और धोखा' फिल्म से करियर को शुरुआत मिली तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फ़िलहाल तो वह  'डॉली की डोली' की शूटिंग में व्यस्त हैं।

 सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय फिल्म फेयर अवार्ड जीतने वाले राजकुमार राव (यादव)  को अभी भी गुड़गांव का बचपन और शहर हर समय प्रेरित करता है। उनका मानना है कि मेहनत तो खूब की थी मगर कभी सोचा नहीं था कि राष्ट्रीय पुरस्कार मिलेंगे। अब लोगों की उम्मीदें भी ज्यादा होंगी, इसके लिए और मेहनत करूंगा।यह मेरे जीवन का अबतक का सबसे बड़ा और सुंदर लम्हा है। परिजनों, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री का शुक्रगुजार हूं। सबने ढेर सारा आशीर्वाद और प्यार दिया।

2010 में 'लव सेक्स और धोखा' से करियर की शुरुआत करने वाले   राजकुमार राव  की   सात मार्च, 2014 को फिल्म 'क्वीन' रिलीज हुई है। फिल्म 'शाहिद' के लिए ही 2013 का फिल्म फेयर का क्रिटिक्स अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर मिला था। साथ ही फिल्म 'काई पोचे' में बेस्ट सर्पोटिंग एक्टर का पुरस्कार मिला था। पिछले चार सालों माया नगरी में उन्हें कई सफलताएं मिली हीं। उन्हें अच्छी भूमिकाएं मिलीं तो उनके लिए काफी मेहनत और संघर्ष भी किया।

 फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटयूट पूणे से वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन करने के बाद  राजकुमार राव  मुंबई पहुंचे  था। उनका मानना है कि मैं तो एक बढि़या एक्टर बनने की चाहत रखता हूं। स्टार तो लोग बनाते हैं। एक अच्छा एक्टर हर तरह की भूमिका निभाता है। मैं ऐसे रोल चुनता हूं जिसमें अभिनय निखर कर सामने आए। चार वर्षो में रागिनी एमएमएस, गैंग्स ऑफ वासेपुर भाग दो, तलाश, काई पोचे, डी डे, क्वीन आदि लगभग एक दर्जन फिल्मों में भूमिकाएं निभा चुके राजकुमार राव   चाहनेवालों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए भविष्य में और कठिन परिश्रम करना चाहते हैं।
- राम शिव मूर्ति यादव @ यदुकुल : http://yadukul.blogspot.in/

गुरुवार, 15 मई 2014

'प्रयाग प्रेस क्लब’ एवं 'उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा)' ने किया कृष्ण कुमार यादव का सम्मान

पत्रकार लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ के पहरुए हैं और उनकी सुरक्षा बेहद जरुरी है। यह एक अजीब संयोग है कि जो पत्रकार लोगों की आवाज़ उठाते हैं, अपने ही मामले में शांत रह जाते हैं।  उक्त उद्गार हिंदुस्तानी एकेडमी, इलाहाबाद में 14 मई, 2014 को  'प्रयाग प्रेस क्लब’ एवं 'उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा)' के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं एवं चर्चित साहित्यकार व् सोशल मीडिया एक्टिविस्ट श्री कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किया। श्री यादव ने कहा कि प्रयाग प्रेस क्लब ने जिस कार्य के लिए इस संगठन का गठन किया है, वह बहुत ही सराहनीय कार्य है। आज पत्रकारों की सबसे अहम समस्या आवास की है और पत्रकारों को आवास उपलब्ध कराने का जो बीड़ा प्रयाग प्रेस क्लब ने उठाया है, वह काबिलेतारीफ है। इस अवसर पर 'प्रयाग प्रेस क्लब’ और उपजा की तरफ से  अध्यक्ष श्री पवन कुमार द्विवेदी ने श्री कृष्ण कुमार यादव को प्रशासनिक व्यस्तताओं के मध्य निरंतर रचनाधर्मिता में सक्रियता  और उनकी उपब्धियों हेतु  सम्मान भी किया। कार्यक्रम के दौरान इलाहाबाद परिक्षे़त्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने  शहर के कई वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित किया । 

प्रयाग प्रेस क्लब के अध्यक्ष पवन कुमार द्विवेदी और महामंत्री भूपेश सिंह ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव के अलावा  वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार आनन्द नारायण शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार के सी मौर्या, नचिकेता नारायण, संजय कुमार को माल्यार्पण कर एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार शुक्ला ने कहा कि आज पत्रकारों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है, प्रयाग प्रेस क्लब की ओर से पत्रकारों का जो दुर्घटना बीमा कराया गया है, वह वास्तव में संगठन का सराहनीय कार्य है। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार आनन्द नारायण शुक्ला, के सी मौर्या, नचिकेता नारायण ने कहा कि यह ऐसा पहला पत्रकार संगठन है, जिसने पत्रकारों के हित के बारे में सोचा है। प्रयाग प्रेस कलब के अध्यक्ष, महामंत्री समेत सभी पदाधिकारी इसके लिए धन्यवाद के पात्र हैं। प्रयाग प्रेस क्लब के अध्यक्ष पवन कुमार द्विवेदी ने नवगठित प्रयाग प्रेस क्लब के बारे में बताते हुए आगामी योजनाओं की घोषणा की। 

मुख्य अतिथि इलाहाबाद परिक्षे़त्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने  इस मौके पर तमाम पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्ट्स को बीमा बांड वितरित किया। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के हाथों बीमा बांड ग्रहण करने वालों में वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश मिश्रा, पवन कुमार द्विवेदी, भूपेश सिंह, कुन्दन श्रीवास्तव, संजय कुमार, संदीप कुमार दुबे, सूर्य प्रकाश त्रिपाठी, वरिष्ठ छायाकार विभु गुप्ता, रंजन मिश्रा, नवीन सारस्वत, अनुराग शुक्ला, जितेन्द्र प्रकाश, भीम सिंह यादव, अनूप रावत, सत्यम श्रीवास्तव, दिलीप गुप्ता, विनोद कुमार, पत्रकार नागेन्द्र सिंह, अंजनी श्रीवास्तव, विद्याकांत मिश्रा, मनीष द्विवेदी, अमरदीप चौधरी, संतोष जायसवाल, वीरेन्द्र द्विवेदी, अनुराग तिवारी, गौरव केशरवानी, चन्द्रशेखर सेन, देवेन्द्र त्रिपाठी, संतोष तिवारी, सलीम अहमद, प्रदीप गुप्ता, रोहित शर्मा, अमरजीत सिंह, इरफान खान समेत 151 पत्रकार शामिल हैं। वहीं इस मौके पर अतिथियों को उपजा द्वारा प्रकाशित डायरेक्टरी भी वितरित की गयी। समारोह का संचालन वरिष्ठ पत्रकार मनीष द्विवेदी एवं धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष पवन कुमार द्विवेदी ने किया। 

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शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

जनता को राइट टू रिकॉल का अधिकार

'वोट' जरूर दीजिये और राजनैतिक दलों के लिए अपना भी घोषणा पात्र जारी कीजिये कि आखिर आप उनसे क्या चाहते हैं। 'सिविल सोसाइटी' और 'सिटिज़न जर्नलिस्ट' की अवधारणा भारतीय समाज में तेजी से कदम बढ़ा  रही है और यही कारण है  कि जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है।  मात्र वोट देकर पाँच साल का इंतज़ार क्यों ? लोहिया जी अक्सर कहा करते थे कि, 'जिन्दा कौमें पाँच साल तक इंतज़ार नहीं करतीं।' मतदान लोकतंत्र में जीवंतता का प्रतिक है तो अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल करना और उन्हें कटघरे में खड़ा करना भी जनता का हक़ है !

इस चुनाव में तमाम मुद्दों के अलावा निम्न मुद्दे सभी राजनैतिक दलों की प्राथमिकता में होना चाहिए -

-जनता को राइट टू रिकॉल का अधिकार। 
- भ्रष्टाचारमुक्त शासन हेतु पारदर्शिता और आईटी पर जोर। 
-सभी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छ पानी की गारंटी। 
- किसानों, ग्रामीणों व आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने पर रोक। 
-महँगाई पर नियंत्रण। 
-पर्यावरण संरक्षण पर जोर। 
- चुनाव लड़ने हेतु न्यूनतम स्नातक अहर्ता। 
-नारी उत्पीड़न पर रोक और नारी -सशक्तीकरण को बढ़ावा।


(राम शिव मूर्ति यादव) 
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (से.नि.)
सिविल लाइंस, इलाहाबाद -211001 
******************************
(साभार : दैनिक जागरण, 18 अप्रैल 2014)
http://epaper.jagran.com/epaper/18-apr-2014-79-edition-Allahabad-City-Page-5.html

सोमवार, 14 अप्रैल 2014

डॉ दिनेश्वर यादव को “BEST EDUCATIONIST AWARD 2014” का सम्मान

रामेश्वर लता संस्कृत महाविद्यालय दरभंगा के प्रधानाचार्य डॉ दिनेश्वर यादव को नई दिल्ली की संस्था इन्टरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडुकेशन एंड मेनज़मेंट द्वारा “BEST EDUCATIONIST AWARD 2014” द्वारा 3 अप्रैल 2014 को नई दिल्ली में सम्मानित किया गया। डॉ दिनेश्वर यादव मूल रूप से समस्तीपुर के रहने वाले है। 

दिल्ली की संस्था इन्टरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडुकेशन एंड मेनज़मेंट द्वारा 3 अप्रैल 2014 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश भर से शिक्षा के क्षेत्र मे बेहतर कार्य और योगदान देने वाले को “BEST EDUCATIONIST AWARD 2014” से सम्मानित किया गया। यह संस्था प्रत्येक वर्ष देश भर से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले को सम्मानित करती है। इसकी संस्था की पहचान देश ही नहीं विदेश स्तर पर है। 

इस अवसर पर श्री जोगिंदर सिंह पूर्व सीबीआई निदेशक, डॉ जी वी जी कृष्णमूर्ति पूर्व इलैक्शन कमिश्नर, डॉ भीष्म नारायण सिंह पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री, और पूर्व राज्यपाल श्री ओ पी वर्मा, पूर्व माननीय न्यायाधीश एवं देश के कई महान शिक्षाविद उपस्थित थे। 

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में लोकार्पित हुई कृष्ण कुमार यादव की पुस्तक ’16 आने 16 लोग’


इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं एवं लेखक व साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव की किताब ’’16 आने 16 लोग’’ का विमोचन नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेला में किया गया। किताब का विमोचन करते हुए वरिष्ठ आलोचक एवं कवि ओम निश्चल ने कहा कि साहित्य की संवेदना और प्रशासनिक दायित्व का जीवंत मिश्रण कृष्ण कुमार यादव की लेखनी में बखूबी मिलता है। इस किताब में साहित्य-कला और संस्कृति के क्षेत्र की 16 महान विभूतियों के पुनर्पाठ के बहाने श्री यादव ने उन्हें समकालीन सरोकारों के साथ व्याख्यायित किया है, जो इस किताब को महत्वपूर्ण बनाती है। 

महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय विश्विद्यालय, वर्धा से पधारे बहुवचन के संपादक अशोक मिश्र ने कहा कि इस संग्रह में शामिल सभी लेखक अपने समय के सशक्त स्तम्भ रहे हैं और समय-समय पर कृष्ण कुमार ने विभिन्न स्तम्भों में इन विभूतियों पर प्रकाशित अपने आलेखों को जिस तरह एक पुस्तक में गूँथा है, वह इस पुस्तक को शोधार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण बनाती है। 

वरिष्ठ लेखिका पुष्पिता अवस्थी ने इस बात को उद्धृत किया कि किताब में अमृता प्रीतम और कुर्रतुल ऐन हैदर जैसी लेखिकाओं केे बहाने महिला साहित्यकारों के अवदान को शामिल करके उन मुद्दों को भी उठाया गया है जो आज नारी विमर्श की पडताल करते हैं। 

नेशनल बुक ट्रस्ट में संपादक लालित्य ललित ने कहा कि पुनर्पाठ की परम्परा में पुस्तक में शामिल साहित्यकारों के साथ संवेदनात्मक सहजता व अनुभवीय आत्मीयता जोडते हुए कृष्ण कुमार ने उनका सटीक विश्लेषण किया है। 

इस अवसर पर कृष्ण कुमार यादव ने अपनी सृजनधर्मिता के आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने किताब के बारे मेें बताया कि इसमें रवीन्द्रनाथ टैगोर, नागार्जुन, निराला, प्रेमचंद, राहुल सांकृत्यायन, गणेश शंकर विद्यार्थी, अज्ञेय, कमलेश्वर, मनोहर श्याम जोशी, अहमद फराज, कैफी आजमी, अमृता प्रीतम और कुर्रतुल ऐन हैदर जैसी अमर शख्सियतों के अलावा वर्तमान समय में सक्रिय अब्दुल रहमान राही, कुंवर नारायण, गोपालदास नीरज के अवदानों की भी चर्चा की गयी है। 

इस अवसर पर चर्चित कवि मदन कश्यप, दूसरी परम्परा के संपादक सुशील सिद्धार्थ इत्यादि ने भी विचार व्यक्त किए।  कार्यक्रम का संयोजन हिन्द युग्म के शैलेश भारतवासी द्वारा किया गया।

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

सुर्खियों में क्रिकेटर कुलदीप यादव

उसे देखकर शेन वार्न का धोखा हो जाता है। दोनों का बॉलिंग एक्शन एक ही जैसा है। बस वार्न दाएं हाथ से लेग स्पिन करते हैं और कुलदीप यादव बाएं हाथ से चाइनामैन। वार्न उसके गुरु रहे हैं। अठारह साल के कुलदीप यादव की बॉलिंग के चर्चे क्रिकेट की दुनिया में होने लगे हैं।

शारजाह में चल रहे अंडर-19 एशिया कप में भी वे खेल रहे हैं। अभी तक युवाओं के 18 वनडे इंटरनेशनल मैचों में उसने 34 विकेट लिए हैं। श्रीलंका अंडर-19 के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में 14 विकेट और घरेलू क्रिकेट के इस सीजन में उत्तर प्रदेश की युवा टीम से खेलते हुए 6 मैचों में 53 विकेट।

हाल की आईपीएल नीलामी में कोलकाता नाइटराइडर्स ने उसकी बोली 40 लाख रुपए लगाई। पिछले सीजन में मुंबई इंडियंस ने रिजर्व खिलाडिय़ों में रखा था। लेकिन नेट प्रैक्टिस में उसकी गेंदों के सामने सचिन तेंदुलकर भी चकरा गए थे।

1960 में हैदराबाद से खेलने वाले मुमताज हुसैन देश के पहले चाइनामैन गेंदबाज थे। लेकिन वे केवल फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेले और दो साल बाद वे परंपरागत तरीके से बॉलिंग करने लगे। उसके बाद से कुलदीप पहले चाइनामैन हैं। हाल के सालों में दक्षिण अफ्रीका का पॉल एडम, ऑस्ट्रेलिया के ब्रैड हॉग और साइमन कैटिच ही चाइनामैन बॉलर्स हुए हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के माइकल बीवन और वेस्ट इंडीज़ के गैरी सोबर्स भी चाइनामैन बॉलिंग ही करते थे।

क्या है चाइनामैन 

जिस एक्शन से दाएं हाथ के गेंदबाज लेगस्पिन करते हैं उसी एक्शन से अगर बाएं हाथ का बॉलर करता है तो उसे चाइनामैन कहते हैं। इस तरह के पहले बॉलर वेस्ट इंडीज के एलिस एचांग थे जो दरअसल चीनी मूल के थे। इसीलिए इस बॉल को चाइनामैन डिलीवरी कहा गया।

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ‘चाइनामैन’ गेंदबाज यदा कदा ही नजर आते हैं तो ऐसे में भारतीय स्पिन गेंदबाजी की नयी सनसनी कानपुर के कुलदीप यादव ने इस अनूठी कला से पूरी दुनिया का ध्यान बरबस अपनी तरफ खींच लिया है। क्रिकेट में आफ स्पिनर, लेग स्पिनर और लेफट आर्म स्पिनर तो तमाम देशों में खेलते नजर आते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यदि इतिहास में नजर डाली जाये तो मुश्किल से आठ दस चाइनामैन गेंदबाज ही याद आ पायेंगे। 

दक्षिण अफ्रीका के पाल एडम्स, आस्ट्रेलिया के माइकल बेवन, ब्रैड होग और साइमन कैटिच तथा वेस्टइंडीज के दिग्गज आलराउंडर गैरी सोबर्स कुछ ऐसे गेंदबाज थे जो चाइनामैन शैली की गेंदबाजी किया करते थे। हालांकि सोबर्स नियमित चाइनामैन गेंदबाज नहीं थे, लेकिन वह अपनी गेंदबाजी में ऐसी गेंदों का मिश्रण करते थे। 

भारतीय अंडर-19 टीम के गेंदबाज कुलदीप ने अंडर-19 विश्वकप टूर्नामेंट में स्काटलैंड के खिलाफ हैट्रिक सहित चार विकेट झटके और अपनी चाइनामैन गेंदबाजी के कारण वह एक झटके में ही सुर्खियों में आ गये। वह अंडर-19 विश्वकप में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने। 

कानपुर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे कुलदीप यादव की चाइनामैन शैली ने बरबस ही विशेषज्ञों को इतिहास के पन्ने पलटने और ऐसे गेंदबाजों को ढूंढने पर मजबूर किया है जो इस शैली की गेंदबाजी किया करते थे। 

चाइनामैन गेंदबाजी के लिये माना जाता है कि इसका जन्म 1933 में ओल्ड ट्रेफर्ड में वेस्टइंडीज और इंगलैंड के बीच खेले गये मैच के दौरान हुआ था। चीनी मूल के खिलाड़ी एलिस पस एचोंग लेफट आर्म स्पिनर थे और उस समय वेस्टइंडीज की ओर से खेला करते थे। कहा जाता है कि एचोंग ने अपनी एक गेंद पर दाहिने हाथ के बल्लेबाज वाल्टर राबिन्स को इस कदर चौंकाया था कि वह स्टम्प हो गये थे। पवेलियन लौटते समय राबिन्स ने अंपायर से कहा था कि इस ‘चाइनामैन’ ने उन्हें छका दिया। उसके बाद से ही ऐसी गेंदबाजी को चाइनामैन कहा जाने लगा। दरअसल चाइनामैन गेंदबाजी लेफट आर्म स्पिनर की लेग स्पिन गेंदबाजी है जो टप्पा पड़ने के बाद अंदर की ओर आती है। इसमें गेंदबाज अपनी कलाइयों का इस्तेमाल कर गेंद को स्पिन कराता है जिसके कारण वह लेफट स्पिन गेंदबाज से अलग होता है।



सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान द्वारा कृष्ण कुमार यादव ‘’साहित्य गौरव‘‘ से सम्मानित

विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान ने इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं युवा साहित्यकार और ब्लागर श्री कृष्ण कुमार यादव को हिन्दुस्तानी एकेडमी, इलाहाबाद में 16 फरवरी 2014 को आयोजित 11वें साहित्य मेला सम्मेलन में हिन्दी के संवर्द्धन एवं विशिष्ट साहित्य सेवा हेतु ‘’साहित्य गौरव‘‘ की मानद उपाधि से सम्मानित किया। विभिन्न विधाओं में अब तक कुल 7 पुस्तकें लिख चुके श्री यादव को इससे पूर्व विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु 50 से ज्यादा सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हो चुकीं हैं। 



इस अवसर पर सुश्री बीएस शांताबाई, प्रधान सचिव, कर्नाटक महिला हिन्दी सेवा समिति, प्रोफेसर नित्यानंद पाण्डेय, पूर्व निदेशक, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा, जाने-माने कवि-चित्रकार संदीप राशिनकर, श्री गोकुलेश्वर द्विवेदी, डा राम आसरे गोयल, हितेश पांडेय, नरेश पाण्डेय ’चकोर’ सहित तमाम साहित्यकार, पत्रकार व बुद्धिजीवी उपस्थित थे।

 गौरतलब है कि श्री कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्व उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा ’’अवध सम्मान’’, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लागर दम्पति’’ सम्मान, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डा0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, वैदिक क्रांति परिषद, देहरादून द्वारा ‘’श्रीमती सरस्वती सिंहजी सम्मान‘’, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ”महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान‘‘, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा ’’पं0 बाल कृष्ण पाण्डेय पत्रकारिता सम्मान’’, सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु 50 से ज्यादा सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।   



शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

भारत का पहला चाइनामैन गेंदबाज : कुलदीप यादव

मुंबई इंडियंस की टीम में हरभजन सिंह व प्रज्ञान ओझा जैसे स्थापित स्पिन गेंदबाज हैं, इसलिए एक जूनियर स्पिनर को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मैच में जगह मिलनी कठिन थी। फिर भी प्रैक्टिस मैचों में जूनियर खिलाडिय़ों को अपने हुनर का प्रदर्शन करने व टीम प्रबंधन को प्रभावित करने का अवसर मिल जाता है। ऐसे ही एक प्रैक्टिस मैच में जब बल्लेबाजी के लिए  सचिन तेंदुलकर मैदान में उतरे तो उनके सामने एक अंजान सा नई उम्र का गेंदबाज था। उसने अपनी स्टॉक बॉल फेंकी। गेंद ऑफ  स्टम्प के बाहर पिच हुई और तेजी से अंदर की ओर आयी। सचिन तेंदुलकर हक्के-बक्के रह गए। पहली ही गेंद पर उनका मिडिल स्टम्प उखड़ गया था। इस यादगार गेंद को फेंकने वाले 18 वर्षीय कुलदीप यादव का कहनाथा, ‘सचिन पाजी को मालूम नहीं था कि मैं चाइनामैन गेंदबाज हूं। दरअसल, कोच शॉन पोलक को छोड़कर टीम में किसी को भी मेरे बारे में पता नहीं था। लेकिन मेेरे लिए यह सपने के सच होना जैसा हो गया कि मैंने क्रिकेट इतिहास के  सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज को पहली गेंद पर बोल्ड किया।’

सचिन तेंदुलकर का विकेट इत्तेफाक हो सकता है, लेकिन इसी अनुभव को एक अन्य अच्छे बल्लेबाज के खिलाफ  दोहराना संयोग नहीं हो सकता। यह प्रतिभा व लगन का ही कमाल कहा जा सकता है  कि कुलदीप यादव जब नेशनल क्रिकेट एकेडमी में चितेश्वर पुजारा को गेंद कर रहे थे तो पुजारा ने पहली तीन गेंद तो किसी तरह से अपने विकेट में जाने से रोकीं, लेकिन चौथी गेंद वह भी, डंडे पर खा गए।

दरअसल, इन बेहतरीन बल्लेबाजों का इस तरह से आउट होना इस वजह से भी हो सकता है कि चाइनामैन गेंदबाजों का सामना करने का अवसर मुश्किल से ही मिलता है। जब कोई बाएं हाथ का स्पिनर गेंद को उंगलियों की बजाय कलाई से स्पिन कराता है तो उसे चाइनामैन गेंदबाज कहते हैं। इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि दायं हाथ से कलाई के जरिए लेग स्पिन कराने वाले को लेग स्पिनर कहते हैं, जबकि बायें हाथ से कलाई के जरिए ऑफ  स्पिन कराने वाले को चाइनामैन गेंदबाज कहते  हैं। चाइनामैन गेंदबाज दुर्लभ में भी अति दुर्लभ होते हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल से ही कोई नाम याद आता है, जैसे दक्षिण अफ्रीका के पॉल एडम्स थे।

इस लिहाज से देखा जाए तो कुलदीप यादव दुर्लभ गेंदबाजों में से एक हैं। लेकिन यह प्रतिभावान अंडर-19 की टीम के साथ भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है। इस स्तर पर खेलने वाला वह भारत का पहला चाइनामैन गेंदबाज है। गौरतलब है कि हाल में ऑस्ट्रेलिया में जो त्रिकोणीय एकदिवसीय प्रतियोगिता खेली गई थी, जिसे भारत की अंडर-19 टीम ने जीता, उसमें कुलदीप यादव अपनी टीम की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उन्होंने चार मैचों में 6.44 की औसत से 9 विकेट हासिल किए और उनका इकोनॉमी दर 1.81 रहा, यानी प्रति ओवर उन्होंने 2 रन से भी कम दिए।
एक चाइनामैन गेंदबाज के लिए इतना शानदार औसत व इकोनॉमी दर हासिल करना आसान काम नहीं है। इससे जाहिर हो जाता है कि कुलदीप नायर का गेंद पर जबरदस्त नियंत्रण है। बहरहाल, इस उभरते हुए गेंदबाज का सपना है कि वह भारत का शेन वॉर्न बने।

आश्चर्य की बात यह है कि कुलदीप स्पिन गेंदबाज की बजाय तेज गेंदबाज बनना चाहते थे। जब वह एक स्थानीय एकेडमी में ट्रायल के लिए गए तो उन्हें देखने के बाद कोच कपिल पांडे ने उनसे व उनके पिता से कहा कि कुलदीप की लंबाई एक  तेज गेंदबाज के लायक नहीं बढ़ पाएगी, इसलिए उसे स्पिन गेंदबाजी करनी चाहिए।

कोच ने कुलदीप पर स्पिन गेंद करने का दबाव डाला, जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आया। कुलदीप ने गेंदबाजी की असामान्य शैली अपनाई। बहरहाल, अगर आप पहली बार लेग स्पिन फेंकने का प्रयास करेंगे तो अधिक संभावनाएं इस बात की हैं कि आप गुगली फेकेंगे क्योंकि गेंद को सही से छोड़ा नहीं जाएगा। कुलदीप के मामले में पहली गेंद सटीक चाइनामैन थी। कपिल पांडे को विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने कुलदीप से कहा, ‘अब से तू यही डालेगा।’
चूंकि कपिल पांडे  मूलत: तेज गेंदबाजी के कोच हैं, इसलिए कुलदीप को ट्रेनिंग देने के लिए उन्होंने यूट्यूब का सहारा लिया। यह दोनों शेन वॉर्न के वीडियो देखते और उनकी शैली की समीक्षा करते- एक्शन, गेंद को छोडऩे का बिन्दु आदि। इसके बाद कपिल पांडे की निगरानी में कुलदीप घंटों तक वॉर्न जैसी ही गेंदबाजी करने का प्रयास करते। साथ ही कुलदीप ऑस्ट्रेलिया के असामान्य गेंदबाज ब्रेड हॉज का भी अध्ययन करने लगे, खासकर उनकी उलट दिशा में मुडऩे वाली गेंद का। लेकिन कुलदीप ने अपने आपको वॉर्न पर मॉडल किया है।

इसके वर्षों बाद कुलदीप की राष्ट्रीय क्रिकेट एकेडमी में वॉर्न से मुलाकात हुई और वॉर्न ने कहा, ‘हम दोनों का गेंदबाजी स्टाइल एकसा है।’ वॉर्न ने कुलदीप को सुझाव दिया कि वह अपनी गेंदबाजी में अधिक नियंत्रण व वेरिएशन लाए। यानी अलग-अलग अंदाज से गेंद करना।

चाइनामैन गेंदबाजी के फायदे भी हैं और नुकसान भी। फायदा यह है कि अपने नयेपन व अनोखेपन से सफलता बहुत जल्दी मिलती है, लेकिन जब इसको बल्लेबाज पढऩे लगते हैं तो विकेट मिलना बहुत कठिन होता जाता है। संसार के लगभग सभी असामान्य गेंदबाजों के साथ यही हुआ है, जैसे पॉल एडम्स (दक्षिण अफ्रीका), ब्रेड हॉज (ऑस्ट्रेलिया), अजंता मेंडिस (श्रीलंका), सुहैल तनवीर (पाकिस्तान) आदि। फिलहाल कुलदीप  वार्न के नक्शेकदम पर चलने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

सामाजिक न्याय की राजनीति ठहराव के बिन्दू पर आकर खड़ी हो गयी है - योगेन्द्र यादव

देश के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव पिछले दिनों पटना में थे। एक कार्यक्रम के दौरान इनसे बातचीत करने का अवसर मिला। अपनी बेबाक, गंभीर और सटीक टिप्पणियों के लिए मशहूर श्री यादव ने देश की राजनीति, ओबीसी की दशा दिशा और वर्ष 2014 में देश में राजनीतिक संभावनाओं पर विस्तार से बात की। प्रस्तुत है बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा-

नवल किशोर कुमार– पिछले 4-5 वर्षों में देश की राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आया है। आंकड़े विकास की अलग कहानी कहते हैं, वही उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं। आंकड़ों के विशेषज्ञ होने के नाते आप क्या कहेंगे?

योगेंद्र यादव – देखिए, आंकड़ों से मैंने अपने आपको बहुत दूर कर लिया है। रही बात देश की राजनीति में बदलाव की तो निश्चित तौर पर बदलाव हुआ। देश के लोग गुस्से में हैं। लेकिन यह सकारात्मक गुस्सा है। पहली बार देश का आम आदमी अपनी बात कहने लगा है। निश्चित तौर पर यह बदलाव आने वाले दिनों में रंग दिखलायेगा।

नवल किशोर कुमार – देश में सामाजिक न्याय की लड़ाई कुंद पड़ती जा रही है। आपके हिसाब से इसकी क्या वजहें हो सकती हैं?

योगेन्द्र यादव – सामाजिक न्याय की राजनीति एक ठहराव के बिन्दू पर आकर खड़ी हो गयी है। उसकी वजह यह है कि सामाजिक न्याय की राजनीति का जो पहला दौर था, वह एक तरह से चूक गया है। जो नेताओं के चेहरा बदलने का काम था वह पूरा हो चुका है। अगर सामाजिक न्याय की राजनीति का मतलब यह था कि एक जाति के नेताओं को हटाकर दूसरी जाति के नेताओं को बिठाया जाय तो वह काम मोटे तौर देश के अनेक राज्यों में हो चुका है। लेकिन उसका जो दूसरा गहरा पड़ाव था कि सामान्य लोगों के जीवन में बदलाव लाया जाय। जन्म के संयोग पर जो विसंगतियां हैं, उसे खत्म किया जाय। उस चुनौती को लेने के लिए पहले दौर की राजनीति तैयार नहीं है। फ़िर चाहे वह लालू प्रसाद यादव की राजनीति हो या करूणानिधि की राजनीति। जो अपने आपको सामाजिक न्याय की राजनीति का वाहक कहते हैं, वे लोग इस बुनियादी चुनौती के लिए तैयार नहीं हैं। साथ ही साथ वह राजनीति अपने आप में अंदरूनी ठहराव में भी पहूंच चुकी है। चूंकि पिछड़ों में ओबीसी के अंदर जो बड़ी जातियां थीं, थोड़ा अगड़ी जातियां थीं, थोड़ा सा दबंग जातियां थीं, उन्होंने ओबीसी के नाम पर बाकी सब चीजों पर कब्जा कर लिया। दलित समाज में जो उपरी तबका है उसने अन्य दलितों के अधिकारों पर कब्जा कर लिया है। आदिवासी समाज में भी पूर्वोत्तर के राज्यों में आदिवासी, इसाई आदिवासी और जो थोड़े से समुदाय हैं उसने कब्जा कर लिया है। मुस्लिम समाज में भी जो अति पिछड़ा समाज है उसे कुछ नहीं मिला। तो आज अगर सामाजिक न्याय की राजनीति होगी तो वह अति पिछड़े, पसमांदा और सबसे पिछड़े आदिवासी की राजनीति होगी। आज अगर सामाजिक न्याय की राजनीति होगी तो केवल चेहरा बदलने की राजनीति नहीं होगी। लोगों के जीवन बदलने की राजनीति होगी। इस राजनीति के लिए पुराने सामाजिक न्याय की राजनीति अभी तैयार नहीं है।

नवल किशोर कुमार – कल एक वामपंथी नेता ने विक्ल्प के तौर पर वामपंथ और समाजवादियों को एक मंच पर आने का आहवान किया है। आपकी नजर में यह कितना तर्कसंगत है?

योगेंद्र यादव – इसमें कोई शक नहीं कि देश में बदलाव की तमाम बड़ी ताकतों को एक साथ आना चाहिए। इसमें कोई शक नहीं कि जिसे 20वीं सदी में समाजवाद कहा जाता था और जिसे 20वीं सदी में साम्यवाद कहा जाता था, जिसमें आगे कोई नक्सली था या जो आम्बेडकरवादी ताकतें थीं, इन सबको एक मंच पर आना होगा। लेकिन इन धाराओं के जो बड़े-बड़े दल बने हैं, वे आज इन्हीं धाराओं के बदलाव को लाने में असमर्थ हैं। तो मैं नहीं समझता कि जो देश में बड़ी कम्यूनिस्ट पार्टियां हैं या समाजवाद का नाम लेने वाली कुछ पार्टियां इस देश में जो हैं, वे बड़े बदलाव में सहायक हो सकती हैं। मेरे विचार से तो इस देश में समाजवाद लाने में जो बाधक पार्टियां हैं, वे वो पार्टियां हैं जो समाजवाद के नाम पर चल रही हैं। या सीपीआई-सीपीएम जैसी बड़ी कम्युनिस्ट पार्टियां जो कम्युनिज्म के नाम पर चल रही हैं, वे कम्युनिज्म के सबसे बड़ी बाधक हैं। मैं समझता हूं कि इतिहास का जो प्रवाह है, बदलाव है, वो इन बड़ी पार्टियों को किनारे कर देगा। इनके किनारे होने के बाद समाजवाद, साम्यवाद, नारीवाद और आम्बेडकरवाद आदि विचारधाराओं की जो छोटी-छोटी शक्तियां हैं, वे बदलाव लाने में सक्षम होंगी।

नवल किशोर कुमार – साहित्य के क्षेत्र में बात करें तो एक राजनीतिक कोशिश वहां भी की जा रही है। मेन स्ट्रीम साहित्य और दलित साहित्य के तर्ज पर ओबीसी साहित्य की बात कही जा रही है। इसका कैसा भविष्य आप देख पाते हैं?

योगेंद्र यादव – साहित्य में मेरी बहुत गति नहीं है। और जरूरी नही है कि एक क्षेत्र के बारे में कुछ जानकारी रखने वाला व्यक्ति बाकी क्षेत्रों के बारे में भी साधिकार टिप्पणी करे। मैं बहुत कम जानता हूं। यह संभव है कि और यह जरूरी है कि समाज का जो साहित्य है, समाज में आप कहां से आते हैं, कहीं न कहीं उसे प्रतिबिंबित करता है। फ़णीश्वरनाथ रेणु का साहित्य, जो मेरा प्रिय साहित्य है वो किसी शहरी मध्यम वर्गीय जीवन जीने वाले व्यक्ति का साहित्य नहीं हो सकता था। वो वही से आया, जहां से वह उपजा था। तो इसलिए जरुर है कि साहित्य समाज में जो आपका अस्तित्व है या फ़िर समाज में जो समुदाय है उसे प्रतिबिंबित करेगा। लेकिन यह भी याद रखें कि साहित्य केवल कटघरा नहीं है। साहित्य पूरी दुनिया की आंख खोलता भी है। साहित्य में यह आकांक्षा रहनी चाहिए कि वह जहां भी पैदा हो, वह अनंत से जुड़ सके। वह पूरी दुनिया से जुड़ सके। जो साहित्य यह आकांक्षा छोड़ दे वह साहित्य नहीं हो सकता।

नवल किशोर कुमार – योगेंद्र जी, फ़िर से वापस राजनीति की ओर चलते हैं। आज देश के कई राज्यों में पिछड़े वर्गों के लोगों का शासक है। फ़िर भी देश का पिछड़ा वर्ग उपेक्षित क्यों महसूस करता है?

योगेंद्र यादव – ये जो पिछड़ा वर्ग नामक कैटेगरी बनी है। यह कोई हमारे समाज की बनाई हुई कैटेगरी नहीं है। ओबीसी शब्द शुद्ध रुप से सरकारी कागजों और कमीशनों की बनाई हुई कैटेगरी है। जिसे हम ओबीसी कहते हैं, उसमें कम से कम 4 अलग-अलग किस्म के समुदाय शामिल हैं। एक वो जो कृषक समुदाय है, सम्पन्न है और जो जमींदार किस्म के लोग हैं। ये जातियां सक्षम हैं। अनेक जगहों पर दबंग भी हैं। इनके पास देश के कई इलाकों में जमीन और साधन भी हैं। ये भी अपने-आपको ओबीसी कहलाते हैं। कर्नाटक के लिंगायत हों, महाराष्ट्र के मराठा हों, या कांबा हों आंध्रप्रदेश, या उत्तरप्रदेश और बिहार में यादव एवं कुर्मी या फ़िर हरियाणा के जाट हों, ये अधिकांश इस वर्ग में आते हैं। इसके बाद देश के तमाम सीमांत किसान, छोटे-छोटे किसान जो हैं, वे भी हैं इसमें। लेकिन पहली और दूसरी कोटि के लोगों की कोई तुलना नहीं हो सकती। तीसरी श्रेणी में वे जातियां आती हैं जो कि आर्टिजन यानी शिल्पकार या हाथ का काम करके बनाने वाले लोग हैं। चौथी वे जातियां जिसे समाज में सर्विस कास्ट की संज्ञा दी गयी है। जैसे नाई, धोबी एवं अन्य जातियां। और पांचवी श्रेणी में उन जातियों के लोग आते हैं जिनकी सामाजिक हैसियत भी लगभग एक जैसी ही हैं। लेकिन चूंकि ये ईसाई या फ़िर मुसलमान धर्म की जातियां हैं, इसलिए इन्हें दलित नहीं कहा जाता। ये पांच अलग-अलग किस्म के कैटेगरी हैं। इन सबको एक कैटेगरी में डाल देना और ओबीसी कहना राजनीति के साथ न्याय नहीं है। क्योंकि इनमें जमीन आसमान का अंतर है। इनमें इतना ही अंतर होता है जितना कि दलित और ब्राह्म्ण में होता है। इसलिए इनकी राजनीति को एक साथ लाने के लिए जिस किस्म की रचनात्मकता चाहिए, उसके लिए अभी इसकी राजनीति तैयार नहीं हुई है। क्योंकि राजनीति चंद ऊपरी जातियों के कब्जे में आ गयी है। जब तक ओबीसी की राजनीति को ऊपरी जातियों के चंगुल से छुड़ाया नहीं जायेगा या उसे अति पिछड़े के पास नहीं लाया जाएगा और ओबीसी की राजनीति को उनके दैनन्दिन अनुभवों से जोड़ा नहीं जाएगा तब तक ओबीसी की राजनीति आगे नहीं बढ सकती। और इस मायने में उत्तर भारत में ओबीसी राजनीति की स्थिति बहुत ही दयनीय है। दक्षिण भारत की ओबीसी राजनीति ने इन सबकों को सीखा है और इससे वहां के लोगों की जिंदगी में कुछ न कुछ बदलाव आया है। ये जो करूणानिधि हैं, वे अनेक्सर वन से आते हैं। दक्षिण भारत की ओबीसी राजनीति अति पिछड़े की राजनीति बनी। जबकि उत्तर भारत की ओबीसी राजनीति में कम दृष्टि रखने वाले लोग आये। जिसके चलते बहुत बुनियादी राजनीति नहीं हो पायी।

नवल किशोर कुमार – योगेंद्र जी आखिरी सवाल। वर्ष 2014 में कैसा परिवर्तन देख रहे हैं आप?

योगेंद्र यादव – निर्भर करता है कि परिवर्तन से आपका आशय क्या है। अगर परिवर्तन का मतलब यह कि जो पार्टी सत्ता में है उसके बुरे दिन आयेंगे तो ये बताने के लिए आपको किसी विशेषज्ञ की आवश्यकता नहीं है। आप आंख घुमाकर देख लिजिए। देश में चारों तरफ़ कांग्रेस की हालत त्रस्त है। चारों तरफ़ हार रहे हैं। बंगाल में प्रणव मुखर्जी के बेटे बमुश्किल से जीत पाते हैं। वही उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के बेटे चुनाव हार गये। यह सब संकेत है। जाहिर है देश में कांग्रेस की हालत पस्त है। इसमें कोई नई बात नहीं है। जो नई बात है वह यह कि मुख्य विपक्षी दल की हालत भी उतनी ही खराब है या फ़िर यह कहना अतिश्योक्ति नहीं कि उससे भी ज्यादा खराब है। और यह देश में अलग परिस्थिति पैदा करती है जहां सत्तारुढ दल डूब रहा है। विपक्षी स्थिति लेने की स्थिति में नहीं हैं। इस प्रकार देश में एक नई राजनीतिक संभावना पैदा होती है। अभी से इस संभावना के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

(नवल किशोर कुमार अपनाबिहार.आर्ग के संपादक हैं)
साभार : विस्फोट. काम 

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

पूर्व न्यायमूर्ति सखाराम सिंह यादव भाजपा में शामिल

लोकसभा चुनाव से पहले हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज सखाराम यादव के भाजपा में शामिल होने के साथ ही कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है। चर्चा है कि श्री यादव भदोही लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी हो सकते हैं। साफ-सुथरी छवि के सखाराम यादव का जन्म 25 जुलाई 1940 को हंडिया के जगदीशपुर गांव में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई गांव से करने के बाद सीएवी इंटर कॉलेज से 12वीं तक की पढ़ाई की।

उसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पिता रूप नाथ सिंह यादव के जूनियर के रूप में हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। 24 जनवरी 1991 को हाईकोर्ट के जज बने और जुलाई 2002 में रिटायर हुए। हाईकोर्ट के जज रहते हुए श्री यादव ने समाज के कमजोर वर्ग के विकास से जुड़े मुद्दों पर अहम फैसले दिए। हाईकोर्ट से रिटायर होने के बाद वे सेंट्रल एड़ािनिस्टट्रवि ट्रबि्यूनल (कैट) इलाहाबाद और बंगलुरु में भी काम किया।

2006 में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनके पिता रूपनाथ सिंह यादव हंडिया से दो बार विधायक रहे और 1977 में जनता दल के टिकट पर प्रतापगढ़ से लोकसभा के लिए चुने गए। रूप नाथ सिंह यादव ने 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली थी। सखाराम के बेटे अजय सिंह यादव हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।


शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

हरियाणा के मुख्यमंत्री बन सकते हैं 'आप' के योगेन्द्र यादव

दिल्ली में सरकार बनने के बाद अब आम आदमी पार्टी योगेन्द्र यादव पर दांव खेलना चाहती है। सूत्रों की मानें तो उन्हें हरियाणा के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

हरियाणा में इस साल चुनाव होने है। ऐसे में नई पॉलिसी के तहत योगेन्द्र यादव अभी से वहां अपनी पैठ बनाने में जुट गए हैं। पार्टी ने हरियाणा में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी शुरु कर दी है और योगेन्द्र खुद इसपर नजर बनाए हुए हैं। पार्टी को उम्मीद है कि दिल्ली की तरह हरियाणा की जनता भी उन्हें एक मौका जरूर देगी।


शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

सांप के जहर को बेअसर कर देगी गोरखपुर के प्रोफेसर डा. उमेश यादव की दवा

अभी केवल सांप के जहर के असर को कम करने की दवा मिलती है, लेकिन आने वाले दिनों में रसेल वाइपर, गेहुंअन, करैत जैसे जहरीले साँपों  के जहर को बेअसर किया जा सकेगा। यह दावा है गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रवक्ता डा. उमेश यादव का।

डा. यादव ने ऐसा रासायनिक मिश्रण तैयार किया है, जो ’रसेल वाइपर’ के जहर को बेअसर करने में कारगर साबित हुआ है। इसे परीक्षण के लिए सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरई) लखनऊ भेजा गया है। यदि सीडीआरई की लैब में यह रासायनिक मिश्रण खरा उतरा तो जहर को बेअसर करने की दवा सस्ती हो सकती है। साथ ही सांप के डंसने से होने वाली मौत पर नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

डा. यादव बताते हैं कि सांप के डंसने के बाद मिचली, उल्टी और घबराहट होने लगती है। साथ ही ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, डंसने के स्थान पर सूजन आ जाती है और खून के थक्का बनने की प्रक्रिया थम जाती है। हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लक्षण विष के एंजाइम ’फास्को लिपेस ए-2’ के चलते सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि दो वर्षों के दौरान प्रयोगों से पता चला है कि ’पायराजोलो (3, 4-डी) पिरीमिडीन’ नाम रसायन सर्प दंश से होने वाली जलन को कम करने और खून का थक्का बनाने में कारगर है। डा. यादव ने बताया कि दो पायरोजोलो 3, 4-डी पिरीमिडीन को ट्राई मेथिलीन लिंकर से मिलाया गया तो पता चला कि यह मिश्रण साँप  के जहर को फैलने से रोक देता है। बायोफिजिक्स के वैज्ञानिक ने बताया कि ’रसेल वाइपर’ के बाद अब गेहुंअन और करैत पर भी यह मिश्रण प्रयोग चला रहा है। गौरतलब है कि अब तक सांप के विष को बेअसर करने की दवा नहीं बनी है।

- राम शिव मूर्ति यादव (Ram Shiv Murti Yadav) : यदुकुल 
https://www.facebook.com/ramshivmurti.yadav


मंगलवार, 28 जनवरी 2014

गणतंत्र दिवस पर ''आप'' नेता योगेन्द्र यादव ने गूगल हैंगआउट से जुटाये 18 लाख रुपये

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता योगेन्द्र यादव ने देश के 65वें गणतंत्र दिवस के मौके पर गूगल हैंगआउट के माध्यम से दुनिया भर में पार्टी के समर्थकों से 18 लाख रुपये जुटाए. गूगल हैंगआउट ऑनलाइन मैसेजिंग एवं वीडियो द्वारा बातचीत की सेवा देता है. गूगल कंपनी की इसका विकास किया है.

यादव ने गूगल हैंगआउट के माध्यम से लंदन, एम्सटर्डम, तोक्यो, बोस्टन, वाशिंगटन डीसी, शिकागो और फिलाडेल्फिया समेत दुनिया भर के 17 शहरों में अपने समर्थकों के सवालों का सीधे-सीधे जवाब दिया.

पार्टी ने कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली से कल एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि हैंगआउट सत्र से कुल 18 लाख रुपये की राशि जुटायी गयी. विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल की शुरुआत से एक दिन में जुटायी गयी यह दूसरी सबसे बड़ी राशि है. नए साल के पहले दिन पार्टी ने 40 लाख रुपये जुटाए थे.

यादव ने कहा, अपने वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया देखना शानदार था. स्पष्ट रुप से आप से बहुत उम्मीदे हैं. उन्होंने कहा, भारतीय राजनीति के इतिहास में सत्ता में आने के बाद किसी भी सरकार ने इतना कुछ हासिल नहीं किया. असल में निष्पक्ष पर्यवेक्षक सलाह दे रहे हैं कि हम अपनी गति धीमी कर दें.

हैंगआउट में शामिल हुए न्यूजर्सी निवासी हिमांशु शर्मा ने कहा, योगेन्द्र यादव को सुनना बहुत प्रेरणादायक था. आप को भारत में मिल रहे जोरदार समर्थन को देखते हुए आम आदमी पार्टी को भारत के लोगों की उम्मीदों पर खड़ा उतरना चाहिए और उन्हें 2014 के लोकसभा चुनावों में एक वैकल्पिक राजनीति उपलब्ध करानी चाहिए.

शनिवार, 25 जनवरी 2014

परमवीर चक्र विजेता योगेन्द्र यादव देंगे सलामी

परमवीर चक्र विजेता योगेन्द्र सिंह यादव रविवार, 26 जनवरी 2014  को दिल्ली के राजपथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड की अगुवाई करेंगे। साथ ही वह राष्ट्रपति को सलामी भी देंगे।

भारतीय सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से नवाजे गए नायब सूबेदार योगेन्द्र सिंह यादव ने कारगिल युद्ध के दौरान क्षेत्र ही नहीं बल्कि देश का गौरव बढ़ाया था। अब इसके बाद इस वर्ष की गणतंत्र दिवस की परेड की अगुवाई करने का उन्हें गौरव मिला है। योगेन्द्र यादव ने बताया कि उनके अलावा परमवीर चक्र हासिल करने वाले हिमाचल निवासी कैप्टन संजय कुमार व आनरेरी कैप्टन बन्ना सिंह साथ रहेंगे। तीनों वीर सपूत दिल्ली राजपथ में होने वाली परेड के दौरान खुली जीप में राष्ट्रपति को सलामी देते नजर आएंगे।

मंगलवार, 14 जनवरी 2014

अरुण यादव बने मध्यप्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष

पूर्व केंद्रीय मंत्री व खंडवा से सांसद अरुण यादव मध्यप्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष नियुक्त हुए हैं। कांग्रेस हाईकमान के निर्णय के बाद पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने इसकी जानकारी दी।

चार राज्यों में विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद संगठनात्मक फेरबदल की कसरत जारी है। युवाओं के भरोसे आम चुनाव की नैया पार लगाने की मंशा से सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और मौजूदा राष्ट्रीय सचिव अरुण यादव को मध्य प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष मनोनीत किया। वह कांतिलाल भूरिया की जगह लेंगे। अरुण यादव पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व मंत्री सुभाष यादव के पुत्र हैं। 

कांग्रेस ने चला ओबीसी कार्ड

कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सांसद अरुण यादव पर भरोसा जताकर एक तरफ तो ओबीसी कार्ड चला है, दूसरी ओर पार्टी कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश भी की है कि प्रदेश के क्षत्रपों की अब ज्यादा नहीं चलेगी। प्रदेश में पिछड़े वर्ग की संख्या 50' से भी अधिक है।

भाजपा ने दस साल के शासन में तीन मुख्यमंत्री उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान दिए जो ओबीसी से आते हैं। यादव के बहाने कांग्रेस इसी वोट बैंक में जनाधार बढ़ाने का प्रयास करेगी। करीबियों की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यादव लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे और संगठन की मजबूती के लिए काम करेंगे।

माना जा रहा है कि इस पद के लिए कांग्रेस आलाकमान को किसी निर्विवाद चेहरे की तलाश थी। अरुण के रूप में कांग्रेस को युवा के साथ यह चेहरा भी मिल गया। यादव जल्द ही निवृतमान पीसीसी चीफ कांतिलाल भूरिया का स्थान लेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद भूरिया ने हाईकमान को इस्तीफा भेज दिया था। इस्तीफा स्वीकार करने की बजाए हाईकमान ने भूरिया को कहा कि वे पद पर बने रहें।

इसके बाद पार्टी केंद्रीय राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह जिम्मेदारी देने का मन बना रही थी। कमलनाथ समर्थक पूर्व मंत्री बाला बच्चन के नाम पर भी विचार किया गया था। बहरहाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर सत्यदेव कटारे की नियुक्ति और अब यादव को बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी ने नए नेतृत्व को आगे करने का प्रयास किया है।


रविवार, 22 दिसंबर 2013

भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने कृष्ण कुमार यादव यादव क़ो किया सम्मानित


भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं युवा साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव को दिल्ली में 12-13 दिसम्बर, 2013 को आयोजित 29वें राष्ट्रीय दलित साहित्यकार सम्मेलन में सामाजिक समरसता सम्बन्धी लेखन, विशिष्ट कृतित्व एवं समृद्ध साहित्य-साधना और सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान हेतु ‘’भगवान बुद्ध राष्ट्रीय फेलोशिप सम्मान-2013‘‘ से सम्मानित किया। इससे पूर्व श्री यादव को विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु 50 से ज्यादा सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं। 

सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य, लेखन, ब्लागिंग व सोशल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय 36 वर्षीय श्री कृष्ण कुमार यादव की अब तक कुल 6 पुस्तकें- ”अभिलाषा” (काव्य संग्रह), ”अभिव्यक्तियों के बहाने” व ”अनुभूतियाँ और विमर्श” (निबंध संग्रह), इण्डिया पोस्ट: 150 ग्लोरियस ईयर्ज (2006) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” (2007), ”जंगल में क्रिकेट” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित हैं। इनकी रचनाधर्मिता को देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं, इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर देखा-पढा जा सकता हैं। 


शनिवार, 21 दिसंबर 2013

आकांक्षा यादव क़ो मिला भारतीय दलित साहित्य अकादमी का पुरस्कार

भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने युवा कवयित्री, साहित्यकार एवं अग्रणी महिला  ब्लागर आकांक्षा यादव को दिल्ली में 12-13 दिसम्बर, 2013 को आयोजित 29वें राष्ट्रीय दलित साहित्यकार सम्मेलन में सामाजिक समरसता सम्बन्धी लेखन, विशिष्ट कृतित्व एवं समृद्ध साहित्य-साधना और सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान हेतु ‘’भगवान बुद्ध राष्ट्रीय फेलोशिप सम्मान-2013‘‘ से सम्मानित किया। आकांक्षा यादव को इससे पूर्व विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु दर्जनाधिक  सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं। 

गौरतलब है कि नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रूचि रखने वाली आकांक्षा यादव साहित्य, लेखन, ब्लागिंग व सोशल मीडिया के क्षेत्र में एक लम्बे समय से सक्रिय हैं। देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर आकांक्षा यादव की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ निरंतर प्रकाशित होती रहती है। आकांक्षा यादव की 2 कृतियाँ ”चाँद पर पानी” (बालगीत संग्रह) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” प्रकाशित हैं।

भारतीय दलित साहित्य अकादमी की स्थापनावर्ष 1984 में बाबू जगजीवन राम द्वारा दलित साहित्य के संवर्धन  और प्रोत्साहन हेतु  की गयी थी। 

रविवार, 3 नवंबर 2013

दीपावली आई ...



दीपावली पर्व पर आप सभी को शुभकामनाएँ।

इस पावन अवसर पर ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह, वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, आदर्श, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ आपका जीवन आरोग्य और समृद्धि से सम्पन्न हो। 

बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव का जाना

हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव का सोमवार, 28 अक्तूबर 2013 को  निधन हो गया । वह 84 वर्ष के थे।

उनका जन्म 28 अगस्त 1929 को उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले में हुआ था. उनकी शिक्षा-दीक्षा भी आगरा में ही हुई.उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से 1951 में हिंदी विषय से प्रथम श्रेणी में एमए की डिग्री हासिल की थी. उन्होंने विश्वविद्यालय में पहला स्थान हासिल किया था.

अपने लेखन में समाज के वंचित तबके और महिलाओं के अधिकारों की पैरवी करने वाले राजेंद्र यादव प्रसिद्ध कथाकार मुंशी प्रेमचंद की ओर से शुरू की गई साहित्यिक पत्रिका  हंस का 1986 से संपादन कर रहे थे.अक्षर प्रकाशन के बैनर तले उन्होंने इसका पुर्नप्रकाशन प्रेमचंद की जयंती 31 जुलाई 1986 से शुरू किया था.

प्रेत बोलते हैं (सारा आकाश), उखड़े हुए लोग, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), अनदेखे अनजान पुल, शह और मात, मंत्रा विद्ध और कुल्टा उनके प्रमुख उपन्यास हैं.

इसके अलावा उनके कई कहानी संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं. इनमें देवताओं की मृत्यु, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक और वहाँ पहुँचने की दौड़ प्रमुख हैं. इसके अलावा उन्होंने निबंध और समीक्षाएं भी लिखीं.

'आवाज़ तेरी' के नाम से राजेंद्र यादव का 1960 में एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हुआ था. चेखव के साथ-साथ उन्होंने कई अन्य विदेशी साहित्यकारों की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद भी किया था.

उनकी रचना सारा आकाश पर इसी नाम से एक फ़िल्म भी बनी थी.

राजेंद्र यादव ने कमलेश्वर और मोहन राकेश के साथ मिलकर हिंदी साहित्य में नई कहानी की शुरुआत की थी.

लेखिका मन्नू भंडारी के साथ राजेंद्र यादव का विवाह हुआ था. उनकी एक बेटी हैं. उनका वैवाहिक जीवन बहुत लंबा नहीं रहा और बाद में उन्होंने अलग-अलग रहने का फ़ैसला किया था.

यादव 1999 से 2001 तक प्रसार भारती बोर्ड के नामांकित सदस्य भी रहे ।

साभार : BBC 
'यदुकुल'  की तरफ से हार्दिक श्रद्धांजलि !!

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2013

नवोदय विद्यालय समिति द्वारा डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव का सम्मान

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन नवोदय विद्यालय समिति, लखनऊ संभाग द्वारा इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव को पुरा छात्र के रूप में उनके बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कुशल प्रशासक व साहित्य सेवाओं हेतु सम्मानित किया गया। उक्त सम्मान लखनऊ में गोमती नगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के प्रेक्षागार में नवोदय विद्यालय समिति, लखनऊ सम्भाग द्वारा आयोजित ”प्रज्ञानम-2013” में दिया गया। सम्मान प्रदान करते हुए नवोदय विद्यालय समिति, लखनऊ सम्भाग के उपायुक्त श्री अशोक कुमार शुक्ला ने कहा कि बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न कृष्ण कुमार यादव जवाहर नवोदय विद्यालय से सिविल सेवाओं में सफल होने वाले प्रथम व्यक्ति हैं, वहीं प्रशासन के साथ-साथ अपनी साहित्यिक व लेखन अभिरुचियों के चलते भी उन्होंने कई उपलब्धियाँ अपने खाते में दर्ज की हैं । उन्होंने श्री यादव को तमाम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बताया और इस बात पर हर्ष जताया कि मुख्य अतिथि के रूप में नवोदय के ही एक पूर्व विद्यार्थी को पाकर हम सब अभिभूत हैं । 

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर जहाँ नवोदय में बिताए गए दिनों को लोगों के साथ साझा किया, वहीं जीवन में प्रगति के लिए विद्यार्थियों को तमाम टिप्स भी दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा साहित्य, कला और संस्कृति किसी भी राष्ट्र को अग्रगामी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। ऐसे में जरुरत है कि युवा पीढ़ी इनसे अपने को जोड़े और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान स्थापित करे। श्री यादव ने कहा कि किताबी शिक्षा को व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ना बहुत जरूरी है और इसके लिए जरूरी है अभिरुचियाँ विकसित की जाये।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के तमाम नवोदय विद्यालयों के प्रधानाचार्य, अध्यापकगण, शिक्षाविद, विद्यार्थी इत्यादि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन जवाहर नवोदय विद्यालय, फिरोजाबाद की प्रधानाचार्या श्रीमती सुमनलता द्विवेदी ने किया। 

बुधवार, 16 अक्टूबर 2013

यादवों का इतिहास ...


यादव वर्ग कई संबद्ध जाति है जो एक साथ भारत की कुल जनसंख्या का 20% के बारे में नेपाल की 20% आबादी और ग्रह पृथ्वी के बारे में 3% आबादी का गठन शामिल है. यादव भारत, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, रूस, मध्य पूर्व में पाया जाति है और प्राचीन राजा यदु, आर्य पाँच पांचजन्य के रूप में ऋग्वेद में उल्लेख किया कुलों के नाम से वंश "जिसका अर्थ है पांच लोगों का दावा है "पांच सबसे प्राचीन वैदिक क्षत्रिय कुलों को दिया आम नाम है. यादव जाति आम तौर पर वैष्णव परंपराओं, और शेयर वैष्णव dharmic धार्मिक विश्वासों इस प्रकार है. वे भगवान कृष्ण या भगवान विष्णु के उपासक हैं. यादव हिंदू धर्म में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत वर्गीकृत कर रहे हैं और 1200-1300AD तक मुस्लिम आक्रमणकारियों के आने से पहले भारत और नेपाल में सत्ता में बने रहे.

दो बातें इन आत्मीय जातियों के लिए आम हैं. सबसे पहले, वे जो भगवान कृष्ण हैं यदु राजवंश (यादव) की सन्तान होने का दावा. दूसरे, इस श्रेणी में कई जातियों दौर पशु केंद्रित व्यवसायों का एक सेट है. कृष्णा pastimes के देहाती पशुओं के लिए संबंधित व्यवसायों के लिए वैधता की तरह उधार देता है, और इन व्यवसायों के बाद जाति के रूप में भारत के लगभग सभी भागों में पाया जा रहे हैं, यादव श्रेणी संबंधित जाति की एक पूरी श्रृंखला शामिल है.

वैदिक साहित्य के अनुसार, Yaduvanshis या यादव यदु, राजा Yayati के ज्येष्ठ पुत्र के वंशज हैं. उसकी लाइन से मधु, जो Madhuvana से शासन के तट पर स्थित यमुना नदी, जो Saurastra और Anarta (गुजरात) तक बढ़ाया पैदा हुआ था. उनकी बेटी मधुमती Harinasva Ikshvaku दौड़ की, जिनमें से यदु फिर से पैदा हुआ था इस समय यादवों के पूर्वज होने से शादी कर ली. नंदा, कृष्ण के पालक पिता, मधु के उत्तराधिकार की लाइन में पैदा हुआ था और यमुना का एक ही पक्ष से खारिज कर दिया. Jarasandh, Kansa ससुर, और मगध के राजा पर हमला यादवों Kansa मौत का बदला लेने. यादवों मथुरा (केंद्रीय Aryavart) से सिंधु पर अपनी राजधानी द्वारका बदलाव (Aryavart के पश्चिमी तट पर) था. यदु एक प्रसिद्ध हिंदू राजा था, भगवान श्री कृष्ण है, जो इस कारण के लिए भी यादव के रूप में संदर्भित किया जाता है की एक पूर्वज माना जा रहा है. आनुवंशिक रूप से, वे भारत Caucasoid परिवार में हैं. भारत के पूर्व में एक अध्ययन से पता चलता है उनके जीन संरचना में कायस्थ ब्राह्मण, राजपूत और एक ही क्षेत्र के रहने के लिए समान है.

कुछ इतिहासकारों का यह भी यादवों और यहूदियों के बीच एक कनेक्शन चाहते हैं. उनके सिद्धांत के अनुसार, यूनानी, Judeos या जह deos या यादवों के रूप में यहूदियों के लिए भेजा जाता था, जिसका अर्थ है हां के लोगों.

रूस में, कई रूसी उपनाम यादवों है.

जेम्स टॉड का प्रदर्शन है कि Ahirs राजस्थान के 36 शाही दौड़ की सूची में शामिल थे (टॉड, 1829, Vol1, p69 द्वितीय, p358) Ahirs के संबंध = Abhira = निडर

Ahirs समानार्थी शब्द यादव और राव साहब हैं. राव साहब ही Ahirwal दिल्ली, दक्षिणी हरियाणा और अलवर जिले (राजस्थान) Behrod क्षेत्र के कुछ गांवों के प्रदेशों से मिलकर क्षेत्र में प्रयोग किया जाता है. ऐतिहासिक, अहीर अहीर बाटक शहर की नींव रखी जो बाद में AD108 में Ahrora और झांसी जिले में अहिरवार कहा है. Rudramurti अहीर सेना के प्रमुख बने और बाद में, राजा. Madhuriputa Ishwarsen, और Shivdatta के वंश से राजाओं जो यादव राजपूतों, Sainis, जो अब पंजाब में केवल और पड़ोसी राज्यों हरियाणा, जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में अपने मूल नाम से पाया के साथ घुलमिल जाने जाते थे. वे Yaduvanshi राजपूतों से Yaduvanshi Surasena वंश के वंश का दावा है, से होने वाले यादव राजा Shoorsen, जो दोनों कृष्णा और प्रसिद्ध पांडवों योद्धाओं के दादा था. Sainis मथुरा और आस - पास के क्षेत्रों से समय के विभिन्न अवधियों में पंजाब के लिए जगह बदली.

यदु वंश से सभी यादव उप जाति वंश, उत्तर और पश्चिम भारत में इन Ahirs शामिल हैं, घोष या "Goalas" और "Sadgopa" या बंगाल और उड़ीसा में Gauda, महाराष्ट्र में Dhangar, यादव और आंध्र प्रदेश में Kurubas और कर्नाटक और तमिलनाडु में Dayan और कोनार. वहाँ भी कर रहे मध्य प्रदेश में hetwar और रावत, और बिहार में Mahakul (ग्रेट परिवारों) के रूप में कई उप - क्षेत्रीय नाम. इन जातियों के सबसे पारंपरिक व्यवसाय पशुओं के लिए संबंधित है. Ahirs, Abhira या अभीर के रूप में भी जाना जाता है, भी कृष्णा के माध्यम से यदु से वंश का दावा है, और यादव के साथ की पहचान कर रहे हैं. ब्रिटिश साम्राज्य के 1881 जनगणना रिकॉर्ड में, यादव Ahirs के रूप में पहचाने जाते हैं. लिखित मूल के अलावा, ऐतिहासिक साक्ष्य यादव साथ Ahirs की पहचान करने के लिए मौजूद है. यह तर्क दिया जाता है कि शब्द अहीर (Behandarkar, 1911, 16) Abhira से आता है, जो जहां एक बार भारत के विभिन्न भागों, और जो राजनीतिक शक्ति ताकतें कई स्थानों में पाया. प्राचीन संस्कृत क्लासिक, Amarkosa, gwal गोपा, और बल्लभ Abhira का पर्याय हो कहता है. एक राजकुमार स्टाइल Grahripu Chudasama और सत्तारूढ़ जूनागढ़ के पास Vanthali में हेमचंद्र की Dyashraya काव्य में वर्णित है, उसे दोनों एक Abhira और एक यादव के रूप में वर्णन किया गया है. इसके अलावा, के रूप में के रूप में अच्छी तरह से लोकप्रिय कहानियों Chudasmas में उनके bardic परंपरा में अभी भी अहीर Ranas कहा जाता है [एक बार फिर, खानदेश (Abhiras के ऐतिहासिक गढ़) के कई अवशेष लोकप्रिय गवली राज, जो archaeologically Devgiri की Yadvas के लिए है की माना जाता है. इसलिए, यह निष्कर्ष निकाला है कि Devgiri की Yadvas वास्तव थे Abhiras के. इसके अलावा, वहाँ यादव भीतर गुटों की पर्याप्त संख्या है, जो गौर से यदु और भगवान कृष्ण, महाभारत में, जिनमें से कुछ यादव कुलों के रूप में उल्लेख कर रहे हैं की तरह उनके वंश ट्रेस Krishnauth आदि कर रहे हैं

Abhiras भी वर्तमान दिन भारत की भौगोलिक सीमाओं से परे नेपाल के पहाड़ी इलाके के राजा के रूप में शासन किया,. पहली यादव वंश की आठ राजाओं नेपाल, पहली बार जा रहा Bhuktaman और पिछले यक्ष गुप्ता ने फैसला सुनाया. देहाती विवादों के कारण, इस वंश तो एक और यादव वंश के द्वारा बदल दिया गया था. यह दूसरा यादव वंश के तीन राजाओं के उत्तराधिकार था, वे Badasimha, Jaymati सिंह और Bhuban सिंह थे और उनके शासन समाप्त जब Kirati आक्रमणकारियों Bhuban सिंह, नेपाल के अंतिम राजा यादव को हराया.

यह तर्क दिया है कि अवधि के अहीर Abhira जो एक बार भारत के विभिन्न भागों, और जो राजनीतिक शक्ति ताकतें कई स्थानों में पाया गया से आता है. Abhiras Ahirs Gopas, और Gollas के साथ बराबर हैं, और उनमें से सभी यादवों माना जाता है.

Abhira "निडर" का अर्थ है और सबसे प्राचीन ऐतिहासिक सरस्वती घाटी Abhira राज्य, जो बौद्ध अवधि तक Abhiri के बात करने के लिए वापस डेटिंग संदर्भ में दिखाई देते हैं. Abhira राज्य राज्य के हिंदू लिखित संदर्भ का विश्लेषण कुछ विद्वानों का नेतृत्व किया गया है निष्कर्ष है कि यह महज एक पवित्र यादव राज्यों के लिए शब्द का इस्तेमाल किया था. भागवत में गुप्ता राजवंश अभीर बुलाया गया है.

यह भी कहा गया है कि समुद्रगुप्त के इलाहाबाद लौह स्तंभ शिलालेख (चौथी शताब्दी ई.) एक पश्चिम और दक्षिण पश्चिम भारत के राज्यों के रूप में Abhiras का उल्लेख है. एक चौथी शताब्दी नासिक में पाया शिलालेख एक Abhira राजा के बोलता है और वहाँ सबूत है कि चौथी शताब्दी के मध्य में Abhiras पूर्वी राजपूताना और मालवा में बसे थे. इसी प्रकार, जब Kathis आठवीं शताब्दी में गुजरात में आए, वे Ahirs के कब्जे में देश का बड़ा हिस्सा मिला. संयुक्त प्रांत के मिर्जापुर जिले एक Ahraura के रूप में जाना जाता है पथ, अहीर और झाँसी के पास देश का दूसरा टुकड़ा के बाद किया गया था अहिरवार बुलाया नाम है. Ahirs भी ईसाई युग की शुरुआत में नेपाल के राजा थे. खानदेश और तपती घाटी के अन्य क्षेत्रों में थे जहां वे राजा थे. Gavlis छिंदवाड़ा मध्य प्रांतों में पठार पर देवगढ़ में राजनीतिक सत्ता के लिए गुलाब. Saugar परंपराओं Gavli सर्वोच्चता के नीचे एक बहुत बाद की तारीख का पता लगाया है, Etawa और Khurai के हिस्से के रूप में सत्रहवाँ सदी के करीब तक सरदारों द्वारा नियंत्रित किया गया है कहा जाता है.

रॉबर्ट सेवेल जैसे विद्वानों का मानना है कि विजयनगर साम्राज्य के शासकों Kurubas (भी यादवों के रूप में जाना जाता है). कुछ जल्दी शिलालेख, 1078 और 1090 दिनांकित, निहित है कि मैसूर के होयसाल भी होयसाल vamsa के रूप में यादव vamsa (कबीले) की चर्चा करते हुए मूल यादव वंश, की सन्तान थे. वोड़ेयार राजवंश, विजया, के संस्थापक भी यदु से वंश का दावा किया है और यदु - राया नाम पर ले लिया.

भारत की कई सत्तारूढ़ राजपूत कुलों Yaduvanshi वंश, चंद्रवंशी क्षत्रिय की एक प्रमुख शाखा को उनके मूल का पता लगाया. Banaphars और Jadejas शामिल हैं. देवगिरी Seuna यादवों भी भगवान कृष्ण के वंश से वंश का दावा किया.

संगम क्लासिक्स में से चरवाहे कृष्णा और उसके नृत्य के साथ cowherdesses के महापुरूष का उल्लेख कर रहे हैं. अवधि Ayarpati (चरवाहे निपटान) में पाया जाता है Cilappatikaram . यह तर्क दिया है कि अवधि Ayar प्राचीन तमिल साहित्य में Abhiras के लिए इस्तेमाल किया गया है, और वी. Kanakasabha पिल्लई (1904) तमिल शब्द से Abhira निकला Ayir जो भी गाय का मतलब है. वह Abhiras साथ Ayars equates, और विद्वानों ने पहली शताब्दी ई. में दक्षिण Abhiras के प्रवास के सबूत के रूप में इसे दर्ज भी किया है।